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शुक्रवार, 23 जून 2017

जनउला

जनउला

होवत बिहना झुमरथे,अँगना घर अउ खोर।
चिक्कन चाँदन देखले,हाथ परत गा जोर।

बाहरी(झाड़ू )

शुक्रवार, 19 मई 2017

जनऊला

*जनऊला*

*(१)*

*आघू कटे नस बने,पाछू कटे बने मुड़ी...*
*बीच कटे सगा बने,बताबे मिलही पुड़ी...*

*(२)*

*आघू हटे झुंड बने,पाछू हटे त पाछू...*
*बीच हटे चुँदी बने,बताबे उत्तर धाँसू...*

*(३)*

*आघू निकले जंगल बने,पाछू निकले बने हाँ ...*
*बीच निकले मार बने,खोजो उत्तर यहाँ वहाँ...*

*(४)*

*आघू बरगे होगे हरा, पाछू बरगे  चाह भरा...*
*बीच बरगे सावन सुरता,उत्तर देदे तेहा जरा...*

*उत्तर.१.सरग.२.बादल.३.हवन.४.मोहरा.*

// *तोषण कुमार चुरेन्द्र*//

राम नाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...