जनउला
होवत बिहना झुमरथे,अँगना घर अउ खोर।
चिक्कन चाँदन देखले,हाथ परत गा जोर।
बाहरी(झाड़ू )
*जनऊला*
*(१)*
*आघू कटे नस बने,पाछू कटे बने मुड़ी...*
*बीच कटे सगा बने,बताबे मिलही पुड़ी...*
*(२)*
*आघू हटे झुंड बने,पाछू हटे त पाछू...*
*बीच हटे चुँदी बने,बताबे उत्तर धाँसू...*
*(३)*
*आघू निकले जंगल बने,पाछू निकले बने हाँ ...*
*बीच निकले मार बने,खोजो उत्तर यहाँ वहाँ...*
*(४)*
*आघू बरगे होगे हरा, पाछू बरगे चाह भरा...*
*बीच बरगे सावन सुरता,उत्तर देदे तेहा जरा...*
*उत्तर.१.सरग.२.बादल.३.हवन.४.मोहरा.*
// *तोषण कुमार चुरेन्द्र*//
राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...