शुक्रवार, 23 फ़रवरी 2018

सेवा के मेवा

हाइकु
सुत्र ५/७/५

सेवा के मेवा
   मिलही  एकदिन
      धीरज  धर.....

मोर  करम
   हवय  बईमान
      देवय  धोखा

ददा  के  हाथ
   किरपा  बरसय
      सकेलो  सब...

पइसा  ऱुख
   पनपे  भष्टाचार
      मुड़  के  पीरा...

पानी  लावय
   बंगाला  के  चटनी
        बड़  सुहाय...

बिदा  बेटी  के
  ददा  बड़  रोवय
      दाई  सुसके

मोर  मोहना
   जाबे  कहाँ  बाँचके
       रँगहूँ  तोला...

सुग्घर गोठ
   छत्तीसगढ़िहा के
      लगथे मीठ...

रंग बे मोला
   नेवता देवत हों
      आजबे तैहा...

मिलके दुनों
   रचाबो रंग रास
      होरी तिहार...

अपन गोठ
    बढ़िहा जमत हे
        जोड़ी हमर...

कब होही दरसन

*कब होही तोर दरसन*

कब होही तोर दरसन
होबे कब तैहा परसन
मया ल तोरले पायबर
होवत हे मोला अड़चन

होही कब मोर आस पूरा
जिनगी तोर बिन हे अधूरा
मर जहूँ तइसे लगथे मोला
धकले करथे मोर जीवरा

कब मनाबो जी हम होरी
बँधाही कब मया के डोरी
रस्दा ल तोर देखत रहिथों
चंदा ल देखय जस चकोरी

तै मोर राधा बनवारी मैं
बिन रंग के पिचरारी मैं
हावस चंदा कस दूरिहा
हँव जस अँधियारी मैं

सपनाथंव तोला रात कून
दया नइ लागय थोरकून
काबर तै कलपावत हस
बात मान लेतेस मोर सून

तडपत हँव तोर मया बर
लेवस नइ तैह मोर खबर
का अइसन बात होगे हे
अब नइ धर सकंव सबर

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद छत्तीसगढ़
९६१७५८९६६७
९८२६७००३१९

बुधवार, 21 फ़रवरी 2018

धरती वंदना

धरती दाई तोर अबोध लइका कइसे करँव मँय बखान ओ
तोर कोरा म जनम धरिन तुलसी कबीर रसखान ओ

भारत माता के दुलौरिन बेटी छत्तीसगढ़ तँय कहावय
अरपा पैरी महानदी के धार ह सुग्घर बोहावय

तोर अछरा के छंइहा म दाई लहरावय धान ओ

तोर कोरा म जनम धरिन तुलसी कबीर रसखान ओ...

बीर नरायन गैंदसिह नायक तोरेच सेवा बजाइन हे

मान तोर राखेबर दाई अपने प्रान गँवाइन हे

ए भुंइया कोन्हा कोन्हा लागय सोनहा खान ओ

तोर कोरा म जनम धरिन तुलसी कबीर रसखान ओ...

शबरी के जूठा बोईर ल खाइस राम ह जिहा आके

धन्य होगे हमर भुंइया नवधा भगति ल पाके

गंगा मंइया तेलीन सत्ती सबके महिमा गान ओ

तोर कोरा म जनम धरिन तुलसी कबीर रसखान ओ...

तोर कोरा लागे हमर बर संऊहत तीरथ धाम असन
तोर मान रखेबर दाई करबोन जुरमिल के जतन

आही बेरा पाछू नइ घूंचन छोंड़ देबो हम प्रान ओ...

तोर कोरा म जनम धरिन तुलसी कबीर रसखान ओ...

तोषण कुमार चुरेन्द्र

मंगलवार, 20 फ़रवरी 2018

धूल मिट्टी पत्थर

*💐🙏🏻~ हाइकु मञ्जूषा ~🙏🏻💐*
                   *(क्र. - 10)*
          *दिनांक 21/02/2018*
                 *दिन - बुधवार*   
          *हाइकु सृजन का विषय*

                       *धूल*
                       *मिट्टी*
                      *पत्थर*

        *विषय संदर्भित हाइकु सृजन काल प्रातः 08.00 से रात्रि 08.00 बजे तक ।*

*संचालक - प्रदीप कुमार दाश "दीपक"*
💐💐💐💐💐💐💐💐💐

धूल

गोधूली बेला
गाय का आगमन
उड़ते धूल ...

मिट्टी

महके मिट्टी
बरसती बूंदो से
अंकुर बीज...

पत्थर

पूजे जहान
पत्थर की मूरत
आस्था प्रतीक....

तोषण कुमार चुरेन्द्र

रविवार, 18 फ़रवरी 2018

समझदारी

*💐🙏🏻~ हाइकु मञ्जूषा ~🙏🏻💐*
                   *(क्र. - 09)*
          *दिनांक 19/02/2018*
                 *दिन - सोमवार*   
          *हाइकु सृजन का विषय*

                       *कली*
                       *पुष्प*
                      *भ्रमर*
                      *बसन्त*

        *विषय संदर्भित हाइकु सृजन काल प्रातः 08.00 से रात्रि 08.00 बजे तक ।*

*विषय प्रदाता - आ. किरण मिश्रा जी*
*संचालक - प्रदीप कुमार दाश "दीपक"*
💐💐💐💐💐💐💐💐💐

समझदारी
खिलने दे कली को
जग महके....

विकल पुष्प
काँटो के दायरें में
मन द्रवित....

भ्रमर लक्ष
मंडराते करीब
सुता परेशाँ...

बसंत राग
कोयल गाती कैसे?
बनके कैदी....

तोषण कुमार चुरेन्द्र

बुधवार, 14 फ़रवरी 2018

शिव स्तुति

पहिने बाघंबर साला गलेयन में मुंड के माला...
आसन लगाए तँय पहाड़ मा
तोर तीर आएंव भोला सुनले गोहार ला..

मांथे मा चंदा सोहे गंगा मइया साथ मा
एक हाथ तिरशुल सोहे डमरु धरे हाथ मा
नंदी के तैहा चढ़इया भृंगी हे सेवा बजइया...
परबतिया हे तोर साथ मा
तोर तीर आएंव भोला सुनले गोहार ला...

अवघढ़िया तोला कहिथे,बम भंगिया तोला कहिथे
साँप डेढ़ू बिचछी कुच्छी सब संग मा तोर रहिथे
महादेव तैहा कहैया किरपा तै सब पे करइया
करदे तै किरपा के बौछार ला

तोर तीर आएंव भोला सुनले ले होबार ला

तोषण कुमार चुरेन्द्र
arhkepagakalagi.blogspot.com

शुक्रवार, 9 फ़रवरी 2018

चली बयार

*" हाइकु मंच छत्तीसगढ़ "*
💐💐💐💐💐💐💐

*09 फरवरी आज के हाइकु का विषय :-*
       *बसंत*
       *बयार*
       *रंग*
       *सरसों*
       *गुलाब*

    *चयनित हाइकु*

*01. गुलाब रोया*
*शहीद से लिपट*
*सुपुत्र खोया ।*

*✍🏻स्नेहलता वर्मा*

*02. परसा फूले*
*फागुन रंग खिले*
*वन झाड़ में ।*

*✍🏻नरेश कुमार जगत*

*03.चली बयार*
*लिये फागुन राग*
*जग रंगोली ।*

*✍🏻तोषण कुमार चुरेन्द्र*

*अतिरिक्त : ----*

*01.रंग-बिरंगे*
*प्रसूनों से सज के*
*प्रकृति झूमे ।*

*✍🏻सविता बरई*

💐💐💐💐💐

*विषय प्रदत्त : आ. अनिता मंदिलवार "सपना" जी*
*समीक्षिका : आ. अनिता मंदिलवार "सपना" जी*
*हाइकु चयनकर्ता : आ. देवेन्द्र नारायण दास जी*
*संचालक : प्रदीप कुमार दाश "दीपक"*
💐💐💐💐💐💐💐

गुरुवार, 8 फ़रवरी 2018

तन्हाइयों में

तन्हाइयों में दर्द-ए -मोहब्बत का एहसास होता है. मिट जाते हैं सारे गम जब वो दिल के पास होता है. नजरों का यूँ रह रहकर मिलना मिलके झुक जाना, खुशनुमा वो हसीन पल जो हरपल खास होता है तोषण कुमार चुरेन्द्र

सात घंटे

सात घंटे

वो  तेरे सात घंटों का साथ
पल - पल  हर पल है खास
दूरी है मुझसे गम नही कोई
रहती तू सदा  दिल के पास

रहता  है  तेरी बातों में नशा
भा  जाती  है  तेरी हर अदा
अकेले में  रहती  है साथ तू
रोम -रोम में है तेरा एहसास
दूरी है मुझसे गम नही कोई
रहती तू सदा  दिल के पास

तुम मुझसे रुठती मैं तुझसे
दोनों  का यूं मानना मनाना
कभी होंगे न जिंदगी में हम
कभी  भी  कहीं  भी उदास
दूरी है मुझसे गम नही कोई
रहती तू सदा  दिल के पास

हमारा रिश्ता  बरसो पुराना
भूला न  पाएगा  ये जमाना
बारहमासी  प्रेम   है अपनी
बनी रहेगी ये सदा मधुमास
दूरी है मुझसे गम नही कोई
रहती तू सदा  दिल के पास

मर  भी जाऊंगा जो मैं अगर
इश्क मेरा रहेगा हमेशा अमर
तुझको पाने को मेरा ये दिल
जन्म जनम लेता रहेगा साँस
दूरी  है  मुझसे गम नही कोई
रहती  तू सदा  दिल के पास

तोषण कुमार चुरेन्द्र

तेरे दर पे

*तेरे  दर  पे  आकर  फरियाद  करता  हूँ.*
*हर  घड़ी  हर  पल  तुझे  याद  करता हूँ.*
*सुनना या ना सुनना  मेरी  मर्जी  है  तेरी,*
*आसरा से जिंदगी खुद आबाद करता हूँ.*

*तोषण कुमार चुरेन्द्र ९६१७५८९६६७*

माँ की सुरत

माँ की सूरत
आईना बेटियों की
नेक नियत...

तेरी ही छवि
दे माँ नव जीवन
बनूँगी रवि...

बनूँ तूफान
मुश्किलों से मैं लड़ूँ
हारे चट्टान...

बिटिया प्यारी
सीता सावित्री मनु
राज दुलारी...

शिवा की माता
जिंदादिली जीजा की
भाग्य निर्माता...

चलूँ उड़ते
स्वच्छंद अंबर पे
मन झूमते...

तोषण कुमार चुरेन्द्र

ज्ञान प्रदाता

ताँका

ज्ञान प्रदाता
संवारता जीवन
राष्ट्र निर्माता
जगमगाता जग
सुदृढ़ पग - पग

🚶🚶🚶🚶

ताँका

मेरा  जीवन
उलझाता  समय
है  आजीवन
मंगल  की  तलाश
है  जगत  उदास

हाइकु

बरसे आग
क्रोधित दिनकर
अजब राग

बहे सरिता
करने उपकार
धरा पुनिता....

सींचती धरा
आलोकित चमन
हो हरा भरा...

हो अग्रसर
चरैवेति कामना
झरना झर...

मिटाती प्यास
अंतरात्मा संतुष्ट
सबकी आस...

भूमि पावन
जन गण हर्षित
मनभावन

जगमगाया
दीप राजिम कुंभ
मन लुभाया...

श्रद्धालु झुमे
पुलकित हृदय
करते जय...

तोषण कुमार चुरेन्द्र

बसंत बयार

" हाइकु मंच छत्तीसगढ़ "
      09/02/2018
आज के हाइकु का विषय
          💐💐💐

फरवरी माह को ध्यान में रखते हुए ये विषय :-

बसंत//बयार
//रंग//सरसों //गुलाब

विषय प्रदत्त : आ. अनिता मंदिलवार "सपना" जी

समीक्षिका : आ. अनिता मंदिलवार "सपना" जी

हाइकु चयनकर्ता : आ. देवेन्द्र नारायण दास जी

संचालक : प्रदीप कुमार दाश "दीपक"

को सादर संप्रेषित....

*बसंत*

खिले  पलाश
मदमाती  बसंत
आम्र  मञ्जरी...

*बयार*

चली  बयारें
लिये  फाल्गुन  राग
जग  रंगीली...

*रंग*

रंग  परब
छटा  इंद्रधनुषी
उड़े  गुलाल...

*सरसों*

पीली  सरसों
हरीतिमा  धरा
घानी  चुनरी...

*गुलाब*

सुर्ख  गुलाब
प्रेम  परिचायक
जगाते  ख्वाब...

राम नाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...