बुधवार, 27 नवंबर 2019

जहरीली धुआँ


दिनांक :-२७/११/१९
विषय :-प्रदत्त चित्र आधारित रचना
विधा :-कुण्डलियाँ

निकले जहरीली धुआँ,व्याकुल है संसार।
चारो दिक में चिमनियाँ,करते हाहाकार।।
करते हाहाकार, व्योम में बनकर दानव।
मुश्किल में है प्राण,पेड़ के हो चाहे मानव।।
कह तोषन कविराज, राह है बड़ी कटीली।
घटे परत ओजोन,धुआँ निकले जहरीली।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा

चिमनी

दिनांक २७/११/१९
चित्र आधारित रचना
विधा कुण्डलिनी

उगले चिमनी है धुआँ,फैले चारो ओर।
नील गगन में लालिमा,मिले नहीं अब शोर।
मिले नहीं अब शोर,कालिमा जब है छाया।
कब होगी ये भोर,जान पे बन ये आया।
कह तोषन कविराज, तनिक तो बाता सुनले।
बन्द करो सरकार, धुआँ है चिमनी उगले।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा

मंगलवार, 26 नवंबर 2019

राजनीति

राजनीति के फेर में,चलही बहुते दाँव।
जनता चुनही जान के ,लड़हूँ महूँ चुनाव।।
लड़हूँ महूँ चुनाव,शौक मोरो जागत हे।
मिलही मोला जीत,देख के अइसे लागत हे।।
माँगे तोषन वोट,मिले आशीष ढेर में।
बाँटव कभू न नोट, राजनीति के फेर में।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा

नदी

समीक्षार्थ
दिनांक:-26/11/19
विषय :-नदी का संरक्षण
विधा :-कुण्डलिनी

नदियाँ गन्दी हो रही,हम है जिम्मेदार।
खुद ही में जब दोष है,करते क्या सरकार।।
करते क्या सरकार,नदी है अब आफत में।
रक्षण की है बात,योजना की लागत में।
कह तोषन कविराज, भूलकर अपनी कमियाँ।
सरिता माता मान,सभी सिरजाओ नदियाँ।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा

रविवार, 24 नवंबर 2019

बाल श्रम

घर मे हैं कुछ नही,पढ़ने की सुध नहीं,
भोर से है निकले जो,रोटी की जुगाड़ में।

होटल हो चाहे बासा,रोजी की है इक आशा,
इत उत डिब्बा बीने,बेचें है कबाड़ में।

मारे है गरीबी जिन्हें,बोलो भला कैसे जिये,
पाठशाला जाते नहीं, झाँके है किवाड़ में।

तोषन है गरीब मेरे,फूटे है नसीब तेरे,
बाल होके काज करे,दिल्ली क्या मेवाड़ में।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा

गौ रक्षा


गौ रक्षा

गौ रक्षा की बात पे,बन जा साथी ढाल।
माता अपनी कह रही,जागो मेरे लाल।।
जागो मेरे लाल,समय है ऐसा आया।
करती गायें आह,कहर है कैसा छाया।।
कह तोषन कविराज, नया हो भारत नक्शा।
साथी आओ आज,करें मिल गौ  की रक्षा।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा

गौरक्षा

दिनांक:-24/11/19
विषय:- गौरक्षा
विधा :-कुण्डलिनी

कब होगी साकार ये,गौ रक्षा की बात।
दाँव पेच में रह गयी,मिले कहाँ सौगात।।
मिले कहाँ सौगात,आस में लटकी सपने।
कितनी मिलती गाय,देख लो सब घर अपने।।
कह तोषन कविराज,गाय गुण गाते जोगी।
चिन्ता का है विषय,गाय कब रक्षित होगी।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा

मंहगाई

दिनांक:-24/11/19
विषय:-मंहगाई
विधा:-कुण्डलिनी

देख मंहगाई यहाँ,मचा रही है लूट।
हाय हाय जनता करे,सबके छक्के छूट।।
सबके छक्के छूट,रहे मन को मार यहाँ।
दुखी रहे इन्सान,कहे हैं अब जिये कहाँ।
कह तोषन कविराज,प्रभो मेरे  कन्हाई।
मचती हाहाकार,यहाँ देख मंहगाई।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा

शुक्रवार, 22 नवंबर 2019

अंडा


अंडा

अंडा सोया मिल रहा,बच्चे नाचे झूम।
सरकारी आदेश है,मचा रही है धूम।।
मचा रही है धूम,आस्तिक मन कतरावे।
कहाँ फँसे है आन,जरा भी रास न आवे।।
कह तोषन कविराज,फाँस ये कैसा फंडा।
आधे मन को मार,आध है खाये अंडा।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा

शिक्षक

शिक्षक

शिक्षक

बनकर  शिक्षक  आज  जो , बाँट  रहे  है ज्ञान।
महिमा  इनकी  है  बड़ी , गाते  सन्त  सुजान ।।
गाते  सन्त  सुजान , दोष सब  दूर  हटाते ।
गुरुवर  है  भगवान ,  ब्रह्म  भी  शिव भी  गाते ।।
कह  तोषन  कविराज , वृक्ष  है सीधा  तनकर ।
धन्य  धन्य  यह  प्राण ,खड़े  है शिक्षक  बनकर।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा

सबके घर दीया बरे,



तोषण के कुण्डलिनी

सबके घर दीया बरे,जगमग हे संसार।
कमलापति के संगिनी,देवय खुशी अपार।।
देवय खुशी अपार,साथ में झूमव नाचव ।
राग द्वेष सब टार,मया के गाना गावव।।
सुन तोषण के बात,गोठ हे जब्बर कबके।
राखव मीठ जबान,मिले हे ममता सबके।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा,डौंडी लोहारा

९६१७५८९६६७

गुरुवार, 21 नवंबर 2019

स्वच्छता अभियान

दिनांक:-२१/११/१९
विधा :- चौपाई
विषय :-स्वच्छता अभियान

है आन चढ़ा परवान बड़ा।
सारे लेकर अभियान खड़ा।
हर घर साफ सफाई होगी।
नहीं  दिखेगा  कोई  रोगी।



स्वच्छ रहेगा  भारत अपना।
बापू का था बस यह सपना।
सभी  निरोगी  रहे   सयाना।
स्वच्छ  रहे  भारत ने ठाना।



हाथ  सफाई  करलो भाई।
भौजी   भैया   बापू  माई।
घर आँगन जब स्वच्छ रहेगा।
मच्छर  हमसे  विदा  कहेगा।

अपना भारत सबसे प्यारा।
जग मे अच्छा लगता न्यारा।
आओ मिलकर हाथ बढ़ायें।
अपना भारत स्वच्छ बनायें।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा,डौंडी लोहारा

पालीथीन


देखो पॉलीथीन के , बढ़ी निराली बात।
दुष्प्रभाव से जान लो  , खानी पड़ती मात।।
खानी पड़ती मात , जान कर चुप्पी साधा.
तड़पे पर्यावरण , धरा जो पनपी बाधा।
कह तोषन कविराज,देख के लाखों लेखों।
त्यागो पालीथीन,बन्द अब करके देखो।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा

मोबाइल

मोबाइल

मोबाइल जो हाथ में ,आते खूब विचार।
फँसते अंतरजाल जो,मिले अलग संसार।।
मिले अलग संसार, भरे है सार खजाना।
सदुपयोग लो जान,दिशा है देती नाना।
कह तोषन कविराज,चेहरे आती स्माइल।
छोट बड़े मत जान,हाथ में है मोबाइल।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा

पॉलीथीन

*पॉलीथीन*

पॉलीथीन    नहीं    उपयोगी।
कहते   फिरते   लाखों योगी।
काम  कभी  ये साथ न लावें।
धरती को   खुशहाल  बनावें।

कागद    जानी   गायें   खाती।
अल्प समय ही वह मर जाती।
चिन्ता व्यापक सब जग जाना।
करे जतन अब बहु विधि नाना।

बन्जर  अपनी  धरती  होती।
पर्यावरण   की  आँखें  रोती।
तकलीफे  ये  लाखों  सहती।
बन्द करे  अब धरती कहती।

पॉलीथीन नही है छड़ती।
ढेरों  पहाड़  टापू  बनती।
करे जरा विचार ये आयें।
पॉलीथीन  मुक्त हो जायें।

भारत  होगा  सुन्दर  अपना।
हो हम सबका अब ये सपना। 
मिलकर आओ कदम बढ़ाये।
प्रदुषण को  अब दूर भगाये।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा
९६१७५८९६६७

नशा



  नशा 
*******
सुनो नशे की लत बुरी , गंदी आदत छोड़ ।
लुट जाता परिवार है , करलो इसका तोड़ ।। 
करलो इसका तोड़ , खाक में सब मिल जाता ।
मान रहे ना प्यार , नहीं जग कोई भाता ।।
सबकी लगती हाय , इसे मन में आज गुनो।
कहना सबकी मान,सदा हिय की बात सुनो ।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा
९६१७५८९६६७

बुधवार, 20 नवंबर 2019

सूरज बाँटे रौशनी

सुधारोपरांत

सूरज बाँटे रौशनी , जगमग है संसार।
चलना जिसका काम है , करे सदा उपकार।।
करे सदा उपकार , वही है खुशियाँ  पाता।
मिलकर रहना सार , यही है निर्मल नाता।।
बढ़ते रहना राह , फूल हो चाहे काँटे।
प्रेम दया सद्भाव , नित्य ही खुशियाँ बाँटे।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा

माटी ले बने हँव



माटी ले  बने हँव  संगी, माटी मा जड़े हँव।
कभू किसान त कभू, जवान बन खड़े हँव।
छल कपट ले तारे बर,सत के दिया बारे बर,
बन के लेखनी लड़े बर तोषण तीर अड़े हँव।।
तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा

सोमवार, 18 नवंबर 2019

खोपा के गजरा

समीक्षा कर देतेव एक प्रयास हे

सरसी छंद

खोपा के गजरा मन भावय,पवन करत हे सोर।
नदिया नरवा देवय ताना,झूमय नाचय मोर।।1।।

बेनी झूलय कनिहा डोलय,महके गजरा फूल।
कर डारे हे बइहा पगला,लहरे अचरा तोर।।2।।

दिन रतिहा सूरतिया झूलय,आँखी आँखी कोर।
मर जाहूँ किरिया हे तोला,बाँधे मयारु डोर।।3।।

मुच-मुच हाँसी मोला मोहे,कोयल जइसन गोठ।
भाथे तोला देखे- देखे,लेवय हियन हिलोर।।4।।

करले जोरा अब तँय गोरी,ले के आहूँ कार।
ले जाहूँ भँवरा के तोला,सजले धजले थोर।।5।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा

शनिवार, 16 नवंबर 2019

बिलासपुर यात्रा

जय श्री राम
बिलासपुर का है सफर,मित्रों का है साथ।
सदा रहे रघुनाथ के,मुझ तोषण पर हाथ।।

जय श्री राम

शनिवार, 9 नवंबर 2019

राम राज


_//धनगंइहा के दोहे सप्तक//_

राम राज की कल्पना, आज हुई साकार।
न्याय चक्र के साथ में,नमन करे सरकार।।1।।

मेरे रघुवर राम की,बनेगी सुंदर ठाँव।
दर्शन करने आइये, मिलकर पूरा गाँव।।2।।

हुआ विजय आज जो,हर्षित है संसार।
दिपावली लौटी फिर से,करें राम जयकार।।3।।

दीप जले उजियार घर,भारत वर्ष महान।
होगा नव निर्माण अब,कहते संत सुजान।।4।।

राम राज की बात सुन,हुए नर नार।
जय जय सीताराम के,गुंजे जय जयकार।।5।।

मोदी के सरकार में,कारज हुए अनेक।
शिखर सफलता पग चुमें,चाह एक से एक।।6।।

हिन्दू मुस्लिम एक हो,तोषण का संदेश।
होकर सब एक जुट,सकल मिटाएँ क्लेश।।7।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा
९६१७५८९६६७

All rights reserved@writter Toshan Kumar Churendra 

शुक्रवार, 8 नवंबर 2019

मधुर साहित्य

_*मधुर साहित्य*_

मधुर  _मधुर साहित्य_ अपनी,
मधुर साहित्य  अपनी मधुर।
बढ़ने और बढ़ाने के खातिर,
भरलें अब रग-रग में सरूर।

_आकाश_ की छाया के नीचे,
लोहारा बना जो सुंदर ठाँव।
साहित्यकार हैं जुड़े अनेक,
कितनें शहर व कितनें गाँव।

रखते सबको जो एक समान,
मुखिया _कन्हैया_ की अगुवाई।
_अरूणाभ_ करते हैं आवभगत,
_धनगंइहा_ जी की जोर लगाई।

कोष मधुर  को  देखे _पीताम्बर_,
अंकुर फूटा हुआ जो नव _उदय_।
खिला _गुलाब_ है अब अपने मग,
नित प्रतिदिन होता रहा सूर्योदय।

_एक्य होकर सब साथ चलें हम,_
_मधुर मधुर परिवार बनें अपना।_
_नीलगगन पर चमके सूर्य बनकर,_
_हम सबका हो अब एक सपना।_

★ _रचना_  ★
_तोषण कुमार चुरेन्द्र_
_धनगंइहा, डौंडी लोहारा_
_9617589667_

तोर पैरी के रूनझून

गोरी रे तोर पइरी ह रूनझून बाजे ना
मया म रानी दिल झूमझूम नाचे ना
मोर दिल म समाये,मोला दिवाना बनाये
सोये निंदिया म तैह बही सपना देखाये
गोरी तोर पइरी ह...

चढ़ती जवानी तोर उमर सोला साल हे
होंठ गुलाबी तोर गोरी गोरी गाल हे
चंदा बरन हे चेहरा लागत कमाल हे
हांसी ले फूल झरथे हिरनी कस चाल हे
तोर आंखी के काजर घुमरे करिया बादर
गिरथे पानी बूंद बूंद ले बन जाथे रे सागर
गोरी तोर पइरी ह...

आजा मोर बंइहा म तोला मैंह प्यार देहूं
अपन बनाके तोला जिनगी संवार देहूं
पीरीत के छंइहा रही जइसे घर दुवार देहूं
बनके रहिबो राजा रानी अइसे संसार देहूं
गाबो मया के गीत ल बांधे मया पीरीत ल
सुख दुख ल सहिबो संगे दुनिया के रीत ल
गोरी तोर पइरी ह...

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा
9617589667

सबके घर दीया बरे



तोषण के कुण्डलिनी

सबके घर दीया बरे,जगमग हे संसार।
कमलापति के संगिनी,देवय खुशी अपार।।
देवय खुशी अपार,साथ में झूमव नाचव ।
राग द्वेष सब टार,मया के गाना गावव।।
सुन तोषण के बात,गोठ हे जब्बर कबके।
राखव मीठ जबान,मिले हे ममता सबके।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा,डौंडी लोहारा

९६१७५८९६६७

बुधवार, 6 नवंबर 2019

खोपा के गजरा

समीक्षार्थ

सरसी छंद

खोपा के गजरा मन भावय,पवन करत हे सोर।
नदिया नरवा देवय ताना,झूमय नाचय मोर।।1।।

बेनी झूलय कनिहा डोलय,महके गजरा फूल।
कर डारे हे बइहा पगला,लहरे अचरा तोर।।2।।

झूलत रहिथे तोरे चेहरा,आँखी आँखी तीर।
मर जाहूँ किरिया हे तोला,बाँधे पीरित डोर।।3।।

मुच मुच हाँसी मोला मोहे,कोयल जइसन गोठ।
भाथे तोला देखे- देखे,मारे हिय हिलोर।।4।।

करले जोरा अब तै गोरी,ले के आहूँ कार।
ले जाहूँ भँवरा के तोला,कर लेबे सिंगार चोर।।5।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा

गीत राम के गावव


समीक्षार्थ

सार छंद

गीत राम के गावव संगी,पियो राम के प्याला।
उठत राम के सुरता आथे,मोर राम रखवाला।।
राम बताही सबला रद्दा,चरन माँथ टेकावव।
बिना राम जिनगी हे बिरथा,नेति नेति गुन गावव।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा,डौंडी लोहारा


सोमवार, 4 नवंबर 2019

करमा गीत

समीक्षार्थ
करमा गीत
*मुखड़ा*
‪#‎लडका‬
करमा नचाहूं तोला ओ आना मादर के थाप मा
‪#‎लड़की‬
करमा नचादे मोला गा आना मादर के थाप मा
*अंतरा 1*
‪#‎लड़का‬
धान लुए हंसिया  गजब उड़ाय कंशी
सुध मा तोर खोके मन बजावय बंशी
करमा नचाहूं तोला ओ आना मादर के थाप मा
#लड़की
करमा नचादे मोला गा आना मादर के थाप मा
*अंतरा 2*
#लड़की
आए ला सावन रिमझिम परे फोहार
बन बन किजरौं मैं पारत हँव गोहार
करमा नचादे मोला गा आना मादर के थाप मा
#लड़का
करमा नचाहूं तोला ओ आना मादर के थाप मा
*अंतरा 3*
#लडका
सुघ्घर लागे रानी हांसी तोर ठिठोली
कजरेली नैना ले मारे मया गोली
करमा नचाहूं तोला ओ आना मादर के थाप मा
#लड़की
करमा नचादे मोला गा आना मादर के थाप मा
*अंतरा 4*
#लड़की
धिक धिनिंधा मादर बाजे करमा के ताल
तोर मया म होगेंव बही हाल हे बेहाल
करमा नचादे मोला गा आना मादर के थाप मा
#लड़का
करमा नचाहूं तोला ओ आना मादर के थाप मा
*संघरा*
‪#‎लड़का_लड़की‬
करमा नचाहूं तोला ओ आना मादर के थाप मा
करमा नचादे मोला गा आना मादर के थाप मा
गीत ‪
तोषण‬ कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा
डौंडीलोहारा
बालोद छत्तीसगढ़ ९६१७५८९६६७


राम नाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...