दोषी हूँ दुनिया का सम्हल ना सका
मिट्टी हूँ दीपक बनकर जल ना सका
चाहत अंधेरे से हटने की मुझे
डर था इस दिल में तोषण चल ना सका
तोषण कुमार चुरेन्द्र
मुक्तक लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
मुक्तक लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
शनिवार, 27 मई 2017
सका...
मंगलवार, 23 मई 2017
सीखा
धरती से उठकर चलना सीखा
तनहाई में खुद ढलना सीखा
आये ना कोई साथी अपने
बदहालों में भी पलना सीखा
तोषण कुमार चुरेन्द्र
९६१७५८९६६७
रविवार, 21 मई 2017
जलन
किसी ने कहा हमसे तोषण क्यों हरकत ऐसी करते हो
कहा हमने सच ही तो बोला है भला तुम क्यो जलते हो
तोषण कुमार चुरेन्द्र
रविवार, 18 दिसंबर 2016
मया दुलार हो
लाली लाली चुनरिया दाई साजे सोला सिंगार हो
आस पुरो सब भकतन के रख लेबे लाज हमार हो
आके गोहरावंव मन के दुख पीरा दाई दुवार तोर
बरसावत रहिबो मोर बर अछरा भर मया दुलार हो
आस पुरो सब भकतन के रख लेबे लाज हमार हो
आके गोहरावंव मन के दुख पीरा दाई दुवार तोर
बरसावत रहिबो मोर बर अछरा भर मया दुलार हो
एक पाव
आज काल के दिन म अइसने चलत हे
तेला चार लैन म तुंहर आगू समरपित
जाथों ददा सन टूरी खोजे गांव ले ओ गांव
तेला चार लैन म तुंहर आगू समरपित
जाथों ददा सन टूरी खोजे गांव ले ओ गांव
होथे सांझ मोर ददा जमा देथे एक पांव
टुरी खोजय म गोड हाथ पिरागे कथे ग
एक पाव पीये बिन घर म नंइ जांव
© ®
आचार्य तोषण कुमार चुरेन्द्र
टुरी खोजय म गोड हाथ पिरागे कथे ग
एक पाव पीये बिन घर म नंइ जांव
© ®
आचार्य तोषण कुमार चुरेन्द्र
क्यूँ
क्यूँ
इंसानियत को मारकर मर रहा है क्यूँहोकर इंसान इंसान से डर रहा है क्यूँ
जगा अपनी ईमान खड़े हो अपने पैरों में
बिना पिये शराब यहाँ बहक रहा है क्यूँ
वंदन है
वंदन है उन गुरू चरणों में कृपा जिनकी हम पर है
नमन है माता-पिता को जीवन जिनके दम पर है
राह दिखायें जीवन पर्यन्त मिलता रहा प्रेम सदा
मरके भी उऋणी न होंगे ऐसा ऋण हम सब पर है
© ®
आचार्य तोषण कुमार चुरेन्द्र
नमन है माता-पिता को जीवन जिनके दम पर है
राह दिखायें जीवन पर्यन्त मिलता रहा प्रेम सदा
मरके भी उऋणी न होंगे ऐसा ऋण हम सब पर है
© ®
आचार्य तोषण कुमार चुरेन्द्र
औकात में
किसी ने कहा हमसे औकात में तो रहिये...
हमने भी कहा उनसे जनाब अपनी तो कहिये....
छांव मे रहकर कहते तगड़ी बड़ी धूप है ...
हमारी तरह भरी दुपहरी तो सहिये
हमने भी कहा उनसे जनाब अपनी तो कहिये....
छांव मे रहकर कहते तगड़ी बड़ी धूप है ...
हमारी तरह भरी दुपहरी तो सहिये
तोषण कुमार चुरेन्द्र
चाहता हूँ...
चाहता हूँ...
बनकर फूल गुलाब का महकना चाहता हूँ।
बनकर तारा व्योम में चमकना चाहता हूँ।।
बनकर रग रग में लहू दौड़ता दिनरात मैं,
आंधी हो तूफान हो दहकना चाहता हूँ।।
© ®
तोषण कुमार चुरेन्द्र
बनकर फूल गुलाब का महकना चाहता हूँ।
बनकर तारा व्योम में चमकना चाहता हूँ।।
बनकर रग रग में लहू दौड़ता दिनरात मैं,
आंधी हो तूफान हो दहकना चाहता हूँ।।
© ®
तोषण कुमार चुरेन्द्र
सुप्रभातम्
सुप्रभातम्
गुनाहों के दलदल में छोड़ देती है जिंदगी
गर साथ जीना चाहो रुख मोड़ लेती है जिंदगी
अब तो खुद की परछाई से लगता है डर
शीशा हसीन सपनों का तोड़ देती है जिंदगी
गुनाहों के दलदल में छोड़ देती है जिंदगी
गर साथ जीना चाहो रुख मोड़ लेती है जिंदगी
अब तो खुद की परछाई से लगता है डर
शीशा हसीन सपनों का तोड़ देती है जिंदगी
तोषण कुमार चुरेन्द्र
सुप्रभातम्
सुप्रभातम्
जहान में आजकल चलता कहां कायदा
झूठी होती है कसमें होता झूठा है वायदा
आदमी दिन रात काम करता वहीं "तोषण"
जहां नुकसान हो कम ज्यादा हो फायदा
जहान में आजकल चलता कहां कायदा
झूठी होती है कसमें होता झूठा है वायदा
आदमी दिन रात काम करता वहीं "तोषण"
जहां नुकसान हो कम ज्यादा हो फायदा
तोषण कुमार चुरेन्द्र
सुभ बिहान हो
सुभ बिहान हो
भजत रहब दिन रात हम
प्यारे मोहन का नाम ।
ऊँखरे से होत बिंहना
होत ऊँखरे शाम।
का रखल भला इहाँ
जिनगानी में ऊँखरे शिवा,
जपत रहब रात अउ दिन
हरे कृष्णा हरे राम।।
भजत रहब दिन रात हम
प्यारे मोहन का नाम ।
ऊँखरे से होत बिंहना
होत ऊँखरे शाम।
का रखल भला इहाँ
जिनगानी में ऊँखरे शिवा,
जपत रहब रात अउ दिन
हरे कृष्णा हरे राम।।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
ना तड़पना हमें यूँ
ना तड़पना
हमें यूँ
तड़पाने वाले
झूमकर
कहर हमपे
बरपाने वाले
हमें यूँ
तड़पाने वाले
झूमकर
कहर हमपे
बरपाने वाले
बनकर घटा
ढहाती
सितमग़र तू है
हक तेरा
नहीं हमपे
छड़जाने वाले
© ®
तोषण कुमार चुरेन्द्र
ढहाती
सितमग़र तू है
हक तेरा
नहीं हमपे
छड़जाने वाले
© ®
तोषण कुमार चुरेन्द्र
रविवार, 20 नवंबर 2016
गुरुवार, 6 अक्टूबर 2016
एक परयास
कोन कोती भुलागे दांवना तैह जाके.
टूँहूं देखाए मोला मोंगरा तैह लाके.
आ संझौती जलाबो दीयना पीरियाके,
मोर बांधे मया डोरी छुरी तैह फांके.
ग्राम धनगांव गौशाला चौक स्कूल पारा
$खरखरा नहर बोहवय देखव संगी मोर गांव$
$लगर लगर नहावय मनखे एक जगा एक छांव$
$नहर तीर बिराजे शंखर मंदिर महाजन बबा के$
$मन भरके सब आशीष पाथे औघडिया के ठांव$
~~~~~~~~~~~~~~●~~~~~~~~~~~~~~
$इसकूल पारा गौठान बिराजे नंदी सोभा बढावत$
$पांव पलेगी मनावय कतको शरणे आवत जावत$
$बापूजी के बने इसतंभ पंचइत बढावत शान जिंहा$
$अटल जी चौंक सुघ्घर पीपरी तरी सोभा पावत$
÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷●÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷
आचार्य तोषण ,धनगांव डौंडीलोहारा बालोद
छत्तीसगढ़ ४९१७७१,mo,९६१७५८९६६७
गुरू होकर जिसे
गुरू होकर जिसे अपनी गुरूता का भान न हो
यही कहते सभी मिलकर उनका सम्मान न हो
झुका जिसके कदमों पहले पाया अरदास वहाँ
गुरू चरणन प्रणवंव कभी कहीं अपमान न हो
---------------------------------------------
आचार्य तोषण धनगांव डौंडीलोहारा बालोद
यही कहते सभी मिलकर उनका सम्मान न हो
झुका जिसके कदमों पहले पाया अरदास वहाँ
गुरू चरणन प्रणवंव कभी कहीं अपमान न हो
---------------------------------------------
आचार्य तोषण धनगांव डौंडीलोहारा बालोद
सदस्यता लें
संदेश (Atom)
राम नाम
राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...
-
"पाँच बातें " पाठ - 14 "पाँच बातें " कक्षा - 4 1- हर एक काम इमानदारी से करो ! 2- जो भी तुम्हारा भला करे, उसका कह...
-
हरा भरा खलिहान,संस्कृति की पहचान, परब हरियाली का,बड़ा ही निराला है!! महीना है सावन का,जय हो भोलेनाथ की, छोड़छाड़ अमृत को,पिए विष हाला है!...
-
लोहारा के तीर मा,सुग्घर साँई ठाँव. किरपा करथे हाथ ले,लेवव जुरमिल नाँव. पानी ले दीया जरे,महिमा अपरम्पार. जय हो साँई नाथ के,करल...










