सोमवार, 18 दिसंबर 2017

सतरा बारा सतरा

जब ये सतरा बारा सतरा आया
वही एहसास फिर दिल में लाया
आरजू थी जमाने से मिलन की
खुशनुमा वो पल जो साथ पाया

आई जब करीब वो मेरे दिल के
तारे चमकने लगी खिल खिल के
बेकाबू होकर लरजते रहे ये लब
नज़रे हमें सताने लगी मिल मिल के

थी सांसे इक दुजे में समाने लगी
हसरत बरसों की क्यूं जगाने लगी
भूल जाना चाहता था सारी बंदिशे
एक वो ही थी बहाने बनाने लगी

तकलीफ़ हुई दिल को उसकी जुदाई पर
हंसती रही रातें ओर चांद मेरी तन्हाई पर
मजबूरी थी उसकी और बेबसी मेरी भी
रास न आया रब को  बंदे की दुहाई पर

उस पल का मुझे हमेशा इंतजार रहेगा
बातों पर उसकी हमेशा ऐतबार रहेगा
कहेगी वो कभी आजा करले पुरी हसरत
सच होंगे सपने या दिले राजदार रहेगा

तोषण कुमार चुरेन्द्र
९६१७५८९६६७

सतरा बारा सतरा

जब ये सतरा बारा सतरा आया
वही एहसास फिर दिल में लाया
आरजू थी जमाने से मिलन की
खुशनुमा वो पल जो साथ पाया

आई जब करीब वो मेरे दिल के
तारे चमकने लगी खिल खिल के
बेकाबू होकर लरजते रहे ये लब
नज़रे हमें सताने लगी मिल मिल के

थी सांसे इक दुजे में समाने लगी
हसरत बरसों की क्यूं जगाने लगी
भूल जाना चाहता था सारी बंदिशे
एक वो ही थी बहाने बनाने लगी

तकलीफ़ हुई दिल को उसकी जुदाई पर
हंसती रही रातें ओर चांद मेरी तन्हाई पर
मजबूरी थी उसकी और बेबसी मेरी भी
रास न आया रब को  बंदे की दुहाई पर

उस पल का मुझे हमेशा इंतजार रहेगा
बातों पर उसकी हमेशा ऐतबार रहेगा
कहेगी वो कभी आजा करले पुरी हसरत
सच होंगे सपने या दिले राजदार रहेगा

तोषण कुमार चुरेन्द्र
९६१७५८९६६७

रविवार, 17 दिसंबर 2017

जब जब तोर मया के सुरता

जब जब तोर मया के सुरता
आथे गोरी मोला सावन मा
आँखी ले झर झर आँसू झरथे
मोर हिरदे के आँगन मा....

बइहा बनके किंजरत रहिथों
बइरी डोंगरी पहाड़ मा
सुध बुध मोर कही राहय नहीं
सजनी रे तोर प्यार मा
कोन जनी रा रोग हमाँगे
हरिहर हरिहर यौवन मा
आँखी ले झर झर............१

संगी जहुरिया मारे ताना
रोयली करे ठिठोली
झन तरसाना उढ़ाके आजा
सुन लेतेंव तोर बोली
तन हा भुंजाके राखर होगे
तोर मया के दावन मा
आँखी ले झर झर.......... २

मोर मया ल समझस नहीं
मोला गजब सताथस तँय
मुच मुच मुच मुच हाँसके मोला
सापू रतिहा रोवाथस तँय
तोषण ल बिसार के पगली
मन लगाए खिलावन मा
आँखी ले झर झर.........३

तोषण कुमार चुरेन्द्र
९६१७५८९६६७

राम नाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...