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रविवार, 16 मई 2021

मोर बेटा राज दुलारा

*
मोर बेटा राज दुलारा*

चंदा बरन तै चमकत रहिबे
बनके आँखी के तारा।
तोर रद्दा मा फूल बगरय 
मोर बेटा राज दुलारा।

1
धरती दाई बेटा बनके 
रात दिन सेवा बजाबे
कोरा मा लहराही सोना
गीत मया के गाबे
करजा तँय छुट लेबे बेटा 
होही तभे चुकारा
तोर रद्दा मा फूल बगरय 
मोर बेटा राज दुलारा।

2
पढ़ लिखके हुँशियार होबे
जग मा अलख जगाबे
छोट बड़े ला एके जानबे
सुमता दिया जलाबे
तोर हँसई मा झूमे पूरवइय्या
नाचय जग ये सारा।
तोर रद्दा मा फूल बगरय 
मोर बेटा राज दुलारा।

3
दाई ददा के जतन करबे
सरग मा जग बनाबे
सरवन जइसे नाँव बगरही
मान गजब तँय पाबे
कोनों ला झन दुख पहुँचाबे
रहिबे सबके सहारा।
तोर रद्दा मा फूल बगरय 
मोर बेटा राज दुलारा।

कृति:-
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगांव डौ.लोहारा
बालोद छत्तीसगढ़

गुरुवार, 6 मई 2021

मैं मजदूर हँव

*मँय मजदूर हँव*

सर्दी गर्मी बरसात ला सहिथँव।
  खोंदरा बनाके गाँव मा रहिथँव।
      तन ले बड़ पसीना टपकाथँव,
        मजदूर हँव दुनिया ले दूर हँव।

माटी ला सोना बनाथँव।
  पखरा मा पानी ओगराथँव।
    खेत लहराथँव सोनहा बाली,
      गीत मया के मँयहर गाथँव।

छोटे बड़े काम मँय आथँव।
  बासी चटनी गोंदली खाथँव।
     हाथ गोड़ मोर थकय नहीं गा
       सबला खवाके मँय सुरताथँव।


कुकरा बासत नींद खुलथे।
  रूख राई मा चिरई झुलथे।
    सूरज नरायण करे अंजोर
      मोंगरा फूल दसमूर फूलथे।


हमरो करलव सोर भइय्या।
  धरती दाई के हम सेवा बजइय्या।
     उवत बुड़त तोर संगी सजन गा
        कइसे गा हमर देश ला चलइय्या।

मजदूर दिवस के बधाई अउ शुभकामनाएं....

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगांव डौंडी लोहारा

वैक्सीन लगाबो

राशन देवत सरकार हा
साग कहाँ ले लाबो...
बिना तेल नून मिरी बिना
भात ला कइसे खाबो...

काम धाम चौपट होगे
पइसा घलो सिरागे
कोरोना बइरी के मारे
दिन कइसन हे आगे

धान झरगे बरफ के मारे
तरवा कहाँ ठठाबो
बिना तेल नून मिरी बिना
भात ला कइसे खाबो...

बंद दुकान हे जंउहर भइगे
मनखे होगे हलकान
लाकडाऊन ह कब रहही
गउकीन सिरतो ईमान

अपन पीरा ल काकर कर
अब जाके गोहराबो
बिना तेल नून मिरी बिना
भात ला कइसे खाबो...

तउवा तउवा मनखे होगे
दिन हा कइसे पहाही
अच्छा आही कहिथे सब
कोन जनी कब आही

घुना खावत ये चोला ला
जिनगी कइसे पहाबो
बिना तेल नून मिरी बिना
भात ला कइसे खाबो...

बर बिहाव हा सिट्ठा परगे
लाडू के मीठ भगागे
नियम कानून देख देखके
दूल्हा के मति हरागे

कहिथे दस झन मनखे 
संग दुल्हिन ला लाबो
बिना तेल नून मिरी बिना
भात ला कइसे खाबो...

मास्क लगाले हाथ धोले
डरना निही डराना निही
बिन मतलब तैहर भैया
घर ले बाहरी जाना निही 

काहत हावय तोषण हा
कोविड वैक्सीन लगाबो
बिना तेल नून मिरी बिना
भात ला कइसे खाबो...


तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगांव डौंडी लोहारा
बालोद छ.ग.

मंहगाई

http://dinkarkikalamse.blogspot.com/
खवइय्या के नंइहे कमती 
मंहगा सामान बेचावत हे।
मंहगाई मा देखना समारू
इतरा इतरा के खावत हे।

सागपान घलो मंहगा होगे
तेल फूल के होगे हे रोना।
यहा कइसन दिन हा आगे
सबला होगे हे पदोना।

मंजन होगे पंदरा रुपिया
घुटका हर सात होगे।
बिडी माचीस रुपिया बीस
फूँक फूँक पियय लोगे।

दार नून ह नंगते मंहगा
काला खाना बचाना।
काम धाम के दऊहा निही
बंद होगे आना जाना।

दिनो दिन लाकडाऊन हा
कोलिहा ठगे कस बाढ़त हे।
टीका मास्क लगावत तभो 
कोरोना रोग नंइ माढ़त हे।

हाल कमइय्या हाल खवइय्या
करम ल अपन ठठावत हे।
का करबे समय अलकरहा
ढकेल जिनगी पहावत हे।

बैंक ले पइसा निकलत निही
कइसे करही किसान हा।
बेरा कुबेरा पानी गिरत हे
करा म पिटागे गा धान हा।

अर्जी हे भगवान ले मोरो
अच्छा दिन तँय लादे।
सुख मा चले सबके जिनगी 
नवा अंजोर बगरादे।

तोषण चुरेन्द्र
धनगांव

कोरोना स्लोगन

कोरोना स्लोगन दीवाल लिखने के लिए

संगी सबो  मास्क लगावव ।
कोरोना ला दूरिहा भगावव।

साबुन ले तुम धोवव हाथ।
सेनेटाइजर ल राखव साथ।

घर ले निकलव बाहिर झन।
बने राखव जी तन अउ मन।

गरम पानी के पान करव।
गाँठ बांध के बात धरव।

दू गज दूरी सब अपनावव।
कोरोना ला दुरिहा भगावव।

बहकावा झन तुम आवव।
कोविड वैक्सीन लगावव।

मन में राखव एके बात।
दुरी बनाके हो मुलाकात।

रोग राई के करव ईलाज।
अस्पताल मा तुरते आज।

🖋️तोषण चुरेन्द्र धनगांव
डौंडी लोहारा बालोद छ.ग

रविवार, 24 जनवरी 2021

नेता जी

*नेता जी*

जब जब अत्याचार बढ़ा।
तब तब नव उन्वान चढ़ा।
बनकर ढाल जो सुभाष ने,
अरि के  आगे  रौद्र खड़ा।

आजादी की खातिर जिसने,
खून देने का आह्वान किया।
लेकर एक सेना की टुकड़ी,
सीना को बढ़कर तान दिया।

नेता जी नाम अमर हो गया,
नवभारत के नव इतिहास में।
ऋणी रहेगा सदा देश अपना,
ऋतु  तीनों  मधु मधुमास में।

दिनकर  यश गाता मिलकर,
ले तिरंगा देश का स्व हाथ में।
आओ जयकार करे देश की,
हिल मिल कर एक साथ में।

तोषण चुरेन्द्र दिनकर
धनगाँव डौं.लोहारा

रविवार, 3 जनवरी 2021

छत्तीसगढ़िहा युवा

विषय-छत्तीसगढ़ी युवा
======================

छत्तीसगढ़ के युवा जागव।
सुग्घर भुंइया सिरजावव।।1 

खांध  मा  नांगर धरलव।
धान के कटोरा भरलव।।2

छत्तीसगढ़ के बेटा रतन।
करले एखर बने जतन।।3

जोर  युवा  के  हाथ मा।
सरकार हे तोर साथ मा।।4

जम्मो युवा छत्तीसगढ़ के।
हाथ बढ़ावव  बढ़-बढ़ के।।5

छत्तीसगढ़ के युवा किसान।
जुरमिल करव करम महान।।6

छत्तीसगढ़ी  युवा के जोर हे।
जग मा जेकर करम शोर हे।।7

बेटा छत्तीसगढ़ महातारी के।
फूलवा जइसे  फूलवारी के।।8

शेर जइसे युवा के दहाड़ हे।
कांपे डोंगरी अऊ पहाड़ हे।।9

छत्तीसगढ़िहा युवा तलवार हे।
थरथरावय  जग  संसार हे।।10

दिनकर जइसे युवा दमके।
रात मा चंदा कस चमके।।11


तोषण कुमार चुरेन्द्र " दिनकर"
धनगाँव ,डौंडी लोहारा
जिला बालोद छ.ग.
पिन:-491771
 मो:-9617589667

गुरुवार, 19 नवंबर 2020

हाय रे कोरोना चेकप


हाय रे कोरोना चेकप

आए रेहेन लोहारा संगी,सर्दी चेक कराय।
खँस्सी के चक्कर मा,बालोद रद्दा नपाय।

भरे मातर तिहार मा,आगेन कोविड सेंटर।
लागय अइसन का पड़ीस,हमला कोरोना हेंटर।

साग भात हा बने मिले,रोटी भाजी अचार।
साफ सफाई मा ढंग निही,सुख सुविधा बेकार।

भरे लिफाफा दिस थेमा,डाक्टर देखे नंइ भाय।
छत्तीसगढ़ सरकार के,कइसन बेवस्था आय।

चेक वेक करे निही ,परछी माढ़े हे मशीन।
आय जाय न हमला कहीं,चपकन काला कतीन।

लाके खोली म धान देहे,यहू का के हे काम।
मरे मरइय्या जान दे,अइसने चलही काम।

आनी बानी गोठ करथे,हमर छत्तीसगढ़ सरकार।
बिन नाहक जियत मरत हे,बने जनता लाचार।

गोठ करबे त गोठ हे,कतिक ला अब गोठियाँव।
सबे ला झिन कोरोना निकालव,अतरी मैं गोहराँव।

दू गज के दूरी अउ,मास्क हावय जरूरी कहिथे।
सुख-दुख घमनी-छँइहा,गरीब किसनहा सहिथे


तोषण चुरेन्द्र दिनकर
सरपंच(साहित्यकार)
धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद छत्तीसगढ़

मंगलवार, 17 नवंबर 2020

हाय रे कोरोना चेकप

हाय रे कोरोना चेकप

आए रेहेन लोहारा संगी,
सर्दी चेक कराय।
खँस्सी के चक्कर मा,
बालोद रद्दा नपाय।

भरे मातर तिहार मा,
आगेन कोविड सेंटर।
लागय अइसन का पड़ीस,
हमला कोरोना हेंटर।

साग भात हा बने मिले,
रोटी भाजी अचार।
साफ सफाई मा ढंग निही,
सुख सुविधा बेकार।

भरे लिफाफा दिस थेमा,
डाक्टर देखे नंइ भाय।
छत्तीसगढ़ सरकार के,
कइसन बेवस्था आय।

चेक वेक करे निही ,
परछी माढ़े हे मशीन।
आय जाय न हमला कहीं,
चपकन काला कतीन।

लाके खोली म धान देहे,
यहू का के हे काम।
मरे मरइय्या जान दे,
अइसने चलही काम।

आनी बानी के गोठ करथे,
हमर छत्तीसगढ़ सरकार।
बिन नाहक जियत मरत हे,
बने जनता लाचार।

गोठ करबे त गोठ हे,
कतिक ला अब गोठियावँव।
सबे ला झिन कोरोना निकालव,
अतरी मैं गोहरावँव।


जय श्री राम
तोषण चुरेन्द्र दिनकर
सरपंच(साहित्यकार)
धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद छत्तीसगढ़

शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2020

शरद की अमृत धार

शरद पूर्णिमा की हार्दिक बधाई व शुभकामनाओं के एक रचना....

*शरद की अमृत धार*

चाँदनी रात में आज चाँद खिलखिलाया है।
लगता है जैसे अंबर धरती से मिलने आया है।

शरद की रातें जुगनू की तरह चाँदनी चमकती है।
बूँदे  ओस की धरा पर फैली कोहिनूर दमकती है।
देख - देख नजारा गगन से दिनकर भी शर्माया है।
लगता है जैसे अंबर धरती से मिलने आया है।1।

शरद की सर्द  रातें शीतलता बरसाती मन भीतर।
बगिया मुस्कुराती फूलों की खुश्बू बिखराती ईतर।
नवरसों में मदमाता भँवरा चहूँ दिक में मंडराया है।
लगता है जैसे अंबर धरती से मिलने आया है।2।

मधुबन बहकने लगी आज श्याम दर्श जो होना है।
प्रेम बहार सोलह श्रृंगार लिये एक दूजे में खोना है।
राधेकृष्ण की रासलीला स्वयं शिव देखने आया है।
लगता है जैसे अंबर धरती से मिलने आया है।3।

सप्त सुरों का राग लिए सतरंगी फाग महीना है।
इंद्रधनुषी रंगों की जैसी दुनिया और कहीं ना है।
शरद की अमृत धार से "दिनकर" आज नहाया है।
लगता है जैसे अंबर धरती से मिलने आया है।4।

©®
तोषण चुरेन्द्र दिनकर
धनगांव, डौ.लोहारा
बालोद,छत्तीसगढ़
30/10/20

शनिवार, 25 अप्रैल 2020

बेटी


॥बेटी॥
****************************
बेटी बनके जनम धरेंव, दाई ओ तोर कोरा मा।
दिन कटै हे दाई तोर, एकठन बेटा के अगोरा मा।

मोर छठ्ठी मा रुखा सुखा,सगा सोदर नइ मानेस ।
का बनगेंव बैरी दुसमन, अपन लइका नइ जानेस।

तहूं बेटी रेहे अपन दाई के,महूं तोरे छंइहा आवंव।
रहूं तोर संग आघू पाछू, छोड़ तोला कहां जावंव।

का बेटा हा सबरदिन,अपन पुरखा कुल तारत हे।
बेटी घलो कम नइहे, मइके ससुरार ल उबारत हे।

तइहा के बात बइहा लेगे,नवा जमाना आवत हे।
आज बेटी बेटा संन,कदम ले कदम मिलावत हे।

बेटी जागिस जीजा बाई, कोरा मा शिवा खेलाय।
गरजिस हाबे लछमी बाई, अंगरेज दूरिहा भागय।

महूं ल थोरकून पढन दे,जिनगी ल अपन गढन दे।
नांव होवय मोर संग तुहर,अइसन करम करन दे।

मरहूं  देश बर जीहूं देश बर ,देश के सेवा बजाहूं।
चहूंओर ए दुनिया मा ,भारत के तिरंगा लहराहूं।
*****************************
                         
 तोषण कुमार चुरेन्द्र "दिनकर"

बुधवार, 8 अप्रैल 2020

बासी चटनी खाले ठनके

त्वरित कविता

बाई जी कथे मोला जी 
का बतावँव तोला जी
आठ बजत ले सुते रहिथस
बारा बजत ले जागत रहिथस

रात दिन मोबाइल के ध्यान रथे
रहिथे कहीं सुरता जेन कोनों कथे
मोर बार ल मानस निही
आगू पाछु ल जानस निही

कथे मोरो तीर ध्यान लगाय कर 
मछरी कोतरी  भूंजी लाय कर 
तभे तो तोला खवाहू जी
संग संग महूँ खाहूँ जी

महूँ ह कहेंव डुमेश के दाई
जादा झन कर ना करलाई
करोना वायरस फइले हवय
सब झन देखले घइले हवय

बासी चटनी खाले जमके
रही तन हा सबके ठनके
दारभात ल खावव संगी
जय श्री राम गावव संगी।।

तोषण धनगंइहा

मंगलवार, 10 मार्च 2020

एसो होरी तिहार मा

होरी तिहार मा...

एसो के होरी तिहार मा
नंगतेहे उधम मचाबो
डोकरा बबा डोकरी दाई
सबला गुलाल लगाबो।।

नई छोड़न भइय्या भउजाई
बड़का बबा अउ बड़की दाई
कका काकी दाई ददा संन
सुघर फगुवा गाबो।
एसो होरी तिहार मा
नंगतेहे उधम मचाबो।

माते सरसो के फुलवारी 
सियान मितान संग संगवारी
धरे गुलाल अबीर हाथ मा
पिचका अजब चलाबो।
एसो होरी तिहार मा
नंगतेहे उधम मचाबो।

रंग पानी के होरी तिहार
बिन पानी हे सब बेकार
जल जीवन हे ए अनमोल
पानी हमन बचाबो।
एसो होरी तिहार मा
नंगतेहे उधम मचाबो।

तोषण धनगंइहा

मंगलवार, 21 जनवरी 2020

चुनाव माहोल

माहोल चुनाव बड़ छाए हे।
सबो समिति आगू आए हे।
मांग अड़बड़ हवय तिरपटहा,
प्रत्याशी के मति छरियाए हे।


जेन मिलथे सब काहत हे,
तुहीच ल देबोन वोट हम।
तोला रहिबोन सब चिनके,
फेर झिन करबे नोट कम।
जनता मन के चारो कोती,
हाथ दुनों अभी हरियाए हे।
मांग अड़बड़ हवय तिरपटहा,
प्रत्याशी के मति छरियाए हे।

आथे जब गाँव मा प्रत्याशी,
जनता ल गजब रिझाए बर।
देखा के अपन चुनाव चिनहा,
लगथे गा सुग्घर बताए बर।
बिना नोट के वोट नंइ मिले,
भीड़ लोगन नेता ल चेताए हे।
मांग अड़बड़ हवय तिरपटहा,
मति प्रत्याशी के छरियाए हे।

रीत हे देखव याहा कइसे ,
दानी ह लालची होवत हे।
अपन मत के दान करेबर,
ये पइसा खातिर रोवत हे।
गाँव समाज ल छोड़ सब,
अपनेच सुवारथ सधाए हे।
मांग अड़बड़ हे तिरपटहा,
मति प्रत्याशी के छरियाए हे।

गाँव के बढ़िहा विकास करय,
अइसन मुखिया बनावव जी।
मिलजुल के मोर संगी साथी,
गाँव ल सरग सजावव जी।
सच्चा ल चुनव अच्छा चुनव,
अतरी 'धनगंइहा' सोरियाए हे।
मांग अड़बड़ हे तिरपटहा,
मति प्रत्याशी के छरियाए हे।
माहोल चुनाव बड़ छाए हे।
सबो समिति आगू आए हे।
मांग अड़बड़ हवय तिरपटहा,
प्रत्याशी के मति छरियाए हे।


तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
उपाध्यक्ष, मधुर साहित्य परिषद
डौंडी लोहारा बालोद छ.ग.
२०/०१/२०२०
९५७५०७०६८९

गुरुवार, 9 जनवरी 2020

उम्मीदवार के ब्यथा

*उम्मीदवार के ब्यथा*

सऊँख मोरो जी चर्राय राहय
जाके फारम फटले भरदेंव।
लड़हूँ महूँ चुनाव अब कहिके 
गाँव भर मा ढिंढोरा करदेंव।।

बनेबर बर तो मैं बनगे हावँव
सरपंच पद उम्मीदवार मँय।
आगू पाछू मोर कोनों नंइ घूमय
कइसे के करिहँव परचार मँय।।

बीजा छीतेहँव धनहा डोली मा
पानी ला घलोक देवइय्या नंइहे।
लेना जी लेना सबोझन कहिथे
संग में रेंगइय्या कोनो नंइहे।।

देख के कहिथँव ये दूनियादारी
एक बात तो अब समझ आथे।
चलथे जी ओकर आगू पीछू मा
जेन हर पाँवपूट चेपटी पियाथे।।

मँय हर रहिगेंव सिधवा सादा
दाँव पेंच मोला आवय नहीं।
सुनेंव वो मनखे कभू नंइ जीते
जेन कभू पियाय खवावय नहीं।।


मुड़ी ह फिजगेहे पानी मा तब
सुरा ला का अब  डरराना हे।
होही जइसन राम जी राखय
पाँव नंइ चिटको हटाना हे।।

कहिथे तोषन सुनगा भैय्या
डर के आघू मा ही जीत हे।
नहीं काहत हे बहिरी ले जेन
भीतरे भीतर ले तोर मीत हे।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
डौंडी लोहारा बालोद छ.ग.
9575070689

बुधवार, 11 दिसंबर 2019

माथ नँवाऊँ

माँ तेरे चरणों में शीश झुकाऊँ
करूँ वंदना मैं तुझको मनाऊँ

तुम्ही जीवन मेरा सारा जहाँ
तेरी कृपा से माँ सरगम गाऊँ।

ध्येय पथ मेरा रुकने न पायें
सत्यपथ पर बलि बलि जाऊँ।

दुख पहाड़ हो या लाख बाधा
दुआ से कभी पग न डिगाऊँ।

तेरा लाल दाती माता सबकी
मंदमति मैय्या तुमको रिझाऊँ।

आस तोषन को तेरे दरश की
लक्ष्य पथ अपने साथ पाऊँ।

हल्बा समाज सारे तुझे ध्याये
संग मिलकर ध्वज लहराऊँ।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा
बालोद, छत्तीसगढ़
11/12/19

मकडज़ाल

बालमन की कविता का प्रयास
मकड़ी और जाल

मकड़ी रानी मकड़ी रानी।
अजब गजब तेरी कहानी।
कभी पेड़ में कभी घरों में,
काटती रहती जिन्दगानी।।१।।


लालच में आते कीट पतंग।
भिन्न भिन्न और रंग विरंग।
भोजन थाल स्वयं सजाती,
बड़ी निराली है तेरी प्रसंग।।२।।


काल  को नहीं हो जानती।
करती रहती हो जो ठानती।
सीख देती दुनिया को सारी,
हार कभी नहीं तुम मानती।।३।।


नित योजना स्वयँ गुनती।
कहाँ किसी की हो सुनती।
मारे कोई या सताये कोई,
जाला प्रतिदिन हो बुनती।।४।।


जीवन बड़ी तेरी न्यारी है।
फिर भी बनी तू बेचारी है।
महाराणा है तुझसे सीखा,
फिर करी  सेना तैयारी है।।५।।


तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा डौंडी लोहारा
बालोद छत्तीसगढ़

शुक्रवार, 8 नवंबर 2019

मधुर साहित्य

_*मधुर साहित्य*_

मधुर  _मधुर साहित्य_ अपनी,
मधुर साहित्य  अपनी मधुर।
बढ़ने और बढ़ाने के खातिर,
भरलें अब रग-रग में सरूर।

_आकाश_ की छाया के नीचे,
लोहारा बना जो सुंदर ठाँव।
साहित्यकार हैं जुड़े अनेक,
कितनें शहर व कितनें गाँव।

रखते सबको जो एक समान,
मुखिया _कन्हैया_ की अगुवाई।
_अरूणाभ_ करते हैं आवभगत,
_धनगंइहा_ जी की जोर लगाई।

कोष मधुर  को  देखे _पीताम्बर_,
अंकुर फूटा हुआ जो नव _उदय_।
खिला _गुलाब_ है अब अपने मग,
नित प्रतिदिन होता रहा सूर्योदय।

_एक्य होकर सब साथ चलें हम,_
_मधुर मधुर परिवार बनें अपना।_
_नीलगगन पर चमके सूर्य बनकर,_
_हम सबका हो अब एक सपना।_

★ _रचना_  ★
_तोषण कुमार चुरेन्द्र_
_धनगंइहा, डौंडी लोहारा_
_9617589667_

रविवार, 20 अक्टूबर 2019

मिट्टी का दीपक

मिट्टी का है स्वरूप मेरा, मिट्टी में ही मिल जाऊँगा।
बनकर दीपक बाती संग मैं,तम को भी जीत जाऊँगा।

मुझसे ही आदि जगत की, और अंत भी मुझसे ही।
     जब तक जलता रहूँगा जग में, ज्योति मिलेगी मुझसे ही।
            है जितनें संसार में प्राणी सबमें एक ही ज्योति,
                  होता जीवन सब प्रकाशित और अंधेरा मुझसे ही।
                       साथ मिले जो सबका मुझको,मैं भी साथ निभाऊँगा।
                           बनकर दीपक बाती संग मैं,तम को भी जीत जाऊँगा।


 मिट्टी का दीप जान न मुझको,जीवन अपनी मिट्टी की।
      दीपक लेकर करले पूजा,मातृभूमि सबकी मिट्टी की।
             बन जाए अनमोल ये जीवन,हो जाये जग नाम अमर,
                   दीपदान कर अपने वतन पे,कर्ज चुका दे इस मिट्टी की।
                         बनकर ऊर्जा तेरे भाल पर,मिट्टी से तिलक लगाऊँगा।
                              बनकर दीपक बाती संग मैं,तम को भी जीत जाऊँगा।


हर घर हर चौराहे पे दिखता,हर गली बाजार पे बिकता।
    मेरे बिन हर आँगन सूना,रौशन हर द्वारे मिलता।
         मेरी महत्ता मान लो सब,अपना वजूद जान लो सब,
              मुझसे ही होता अरूणोदय,और मुझसे है पुष्प खिलता।
                    मुझको सब स्वीकार करलो,नित नया सवेरा लाऊँगा।
                          बनकर दीपक बाती संग मैं,तम को भी जीत जाऊँगा।

रचना
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा
डौंडी लोहारा
९६१७५८९६६७



मंगलवार, 10 सितंबर 2019

हवाई जहाज बनाऊँगा मैं।

छोटी सी बालमन की कविता

हवाई जहाज बनाऊँगा मैं।
नीले अम्बर में जाऊँगा मैं।
नभ मंडल की सैर करूँगा,
फिर घर वापस आऊँगा मैं।


सूरज चाचा से बातें होंगी।
चंदा मामा संग रातें होंगी।
सभी ग्रहों से दोस्ती करके,
तारों संग मुलाकातें होंगी।


धुएँ कारखानें वहाँ न होगी।
निर्मल शुद्ध हवाएँ होगी।
पान करूँगा हरपल हरदिन, 
रहेगा हमेशा तन ये निरोगी।


मोटर गाड़ी बहुत है चलते।
कितनों राही हैं जीते मरते।
इन सबसे मुझे मुक्ति मिलेगी,
लोग रहेंगे सदा ही तकते।


होगी अब ऊपर मेरी उड़ान।
बनेगा जब ये मेरा वायुयान।
चुन्नु,मुन्नु,पोषण,तोषण,
घुमेंगे नभ में सब सीना तान।


तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"


राम नाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...