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शनिवार, 2 मई 2020

वंदना प्रभु राम को

चंडिका छंद
१३/१३
१३/१३

मिरचा भजिया राँधके,
चटनी तगड़ा भाँजके।
खाले जी अरुणाभ तँय,
भेजत हँव गा पोठ मँय।

नरवा तीर कछार मा,
आबे सोज करार मा।
ठाड़े रहिहँव खेत मा,
देखत रहिहँव नेट मा।।

उल्लाला छंद

८'५/८'५
८'५/८'५

वंदना है प्रभु राम को,
दर्शन की है कामना।
मिल जाए आशीष जो,
चाहूँ कोई धाम ना।।

आए हैं दरबार में,
भर दो झोली आज ये।
तरसे है दीदार को,
मेरे तख्तो ताज ये।।

रखवाला है साथ जो,
गम है किस बात का।
दिल को है विश्वास तो,
डर क्यों काली रात का।।

दिनकर का दिन ढले,
छाई रजनी चाँदनी।
वंदना होती साँझ में,
मचले  है गजगामिनी।

-@तोषण दिनकर

शुक्रवार, 10 अप्रैल 2020

जन चेतना

छंद :-उल्लाला/चंद्रमणि 
विषय :-कोरोना
दिनाँक:-१०/४/२०
मात्रा १३/१३ 
प्रत्येक चरण अंत लगु 
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कोरोना के डर नहीं, मन के अपने चाल हे।
आय चीन ले घूम के,बनके सँउहत काल हे।

सरदी खँस्सी भेद हे,बात यहू तै जान ले।
दुरिहा दुरिहा बइठके,मुखिया भाखा मान ले।

गरगस्सा सब चानके,ठुकठुक लूके लेगही।
खुसरे राहव भीतरी,लउठी वाला देखही।

नीति नियम ला ध्यान दव,पालन करिहव संघरा।
अभी थोरकन माढ़ लव,पाछू नाचू भंगरा।

बात मान दिनकर कथे,सूझ बूझ ले काम लव।
कोरोना तै भाग जा,मिलके सबझन इहि कहव।

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-तोषण दिनकर

राम नाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...