शुक्रवार, 14 मई 2021
आवव मोर गाँव मा
गुरुवार, 18 फ़रवरी 2021
नेंग जोग
शनिवार, 11 अप्रैल 2020
परिचय
छत्तीसगढ़ में बिहाव के परंपरा*
सोमवार, 29 जुलाई 2019
आचार्य जी
आचार्य जी....
कितना सम्मानजनक शब्द है,किंतु शब्दार्थ अथाह ।जिसे समझ पाना हर किसी के लिए संभव नही है। जिन्हे इनकी समझ है वह स्वयं ब्रह्म से कम नही है। कोई भी व्यक्ति आचार्य तभी हो सकता है जब वह सही और गलत का अंतर स्पष्ट करते हुए भैय्या बहनों के अंतकरण में अपनी अमिट छाप छोड़ सके। जो अपने कर्मो के द्वारा अपने पूर्वजों ,महापुरूषों से प्रेरणा पाकर अपने अनुशरणकर्ताओं का पथप्रदर्शक बनकर संबल व प्रोत्साहित करे। आचार्य को मन ,शरीर,बुद्धि ,नैतिक व आध्यत्म दृष्टि से परिपक्व होने की आवाश्यकता है जो राष्ट्र के निर्माण में सहयोगी बन सके।जिस प्रकार कुम्हार मिट्टी से घड़ा बनाने के लिए अनेक कठिनाईयों का सामना करते हुए उसका निर्माण करता है ठीक वैसे ही आचार्य भी अपने भैय्या बहनों के सर्वागिण विकास के लिए विभिन्न प्रकार के प्रयोग नवाचार आदि प्रतिपादित करता है। श्री रामचरित्र मानस के रचयिता गोस्वामी तुलसी दास जी ने अपनी धर्मपत्नी से प्रेरित होकर महान ग्रंथ की रचना की।जो आज हम सबके लिए प्रेरणादायी है।अगर हम अपने आने वाली पीढ़ी, समाज, राष्ट्र और विश्व व भैय्या बहनों का कल्याण करना चाहते हैं प्रेरणा बनना चाहते हैं तो हमें अपने दुर्गुणो का त्यागकर एक अच्छे आचरण करने वाला आचार्य बनना होगा।
रविवार, 18 दिसंबर 2016
परोपकार कभी व्यर्थ नहीं जाता
परोपकार कभी व्यर्थ नहीं जाता
एक गरीब लड़का है सोनू । जो अपने पिता जी के होटल मे दिन रात काम करता है। उसके मन मे पढने की तीव्र इच्छा थी। लेकिनस परिवार की स्थिति को देखकर अपनी इच्छा अपने मन के अंदर ही दबाकर रखा रहता। क्या करता बेचारा पिताजी एक पैर से अपाहिज होटल का गल्ला सम्हालता । माताजी और छोटी बहन सोनिया होटल के काम मे हाथ बटाती। इस तरह उसका जीवन चल रहा था।एक दिन एक गुरूजी होटल मे चाय पीने आए ।चाय का आर्डर देते हुए पेपर पढने लगा । सोनू चाय लाकर गुरूजी को देकर वहीं खडा हो देखने लगा । जिस पर लिखा था " तेरह वर्ष का बालक पढाई स्तर पर जिला में अव्वल आया है।"इसे देखकर सोनू दुखी हो गया । सोनू को दुखी देखकर गुरूजी कहने लगा -अरे सोनू आज दुखी क्यों है ?इतना उदास क्यों है? तब सोनू कहता है-"काश !वो अव्वल आने वाला बालक मैं होता। इस बात को गुरूजी सुनकर चौंक जाता है और सोनू से पूछता है । भला तू ऐसा क्यों कह रहा है? तब सोनू अपनी सारी व्यथा गुरूजी के सामने रख देता है। सारी सच्चाई जानने के बाद गुरूजी सोनू के माता पिता को समझाईश देते हुए कहते है-"अपने बच्चे सोनू और सोनिया को पढने के लिए स्कूल जाने दो ।पढेंगे लिखेंगे तुम दोनो का नाम रौशन करेंगे। इस तरह होटल मे काम करने से इनका जीवन यहीं सीमित हो जाएगा। मैं इन दोनों की पढाई का जिम्मा लेता हूं। इनके बदले मजदूर लगाकर अपना होटल सम्हलना । गुरूजी का उपकार मानते हुए अगले दिन सोनू और सोनिया को स्कूल भेजने लगे।
सोनू और सोनिया की पढाई रंग लाने लगी ।हमेशा अव्वल आने लगे। माता पिता और गुरूजी भी खुश होने लगे।
गांव की पढाई खत्म होने के बाद सोनू और सोनिया को शहर के अच्छे कालेज मे दाखिला मिल गया ।दोनों भाई बहन मन लगाकर पढने लगे। समय ने ऐसा रंग लाया दोनो एक बार फिर अव्वरल दर्जे से पास हो गये। दोनो भाई बहन बहुत खुश होने लगे ।इस खुशी को मनाने वे दोनो अपने गांव गाव आना चाह रहे थे। फिर क्या था ।एक दोनो भाई बहन अपने गांव आये और सीधा अपने माता पिता के पास होटल में पहुंचकर चरण स्पर्श किए और सीधा एक ही सवाल सोनू ने पूछा-"क्या ?वह गुरूजी आज भी हमारे होटल में चाय पीने आते है । सोनू के इस सवाल को सुनकर बीती बातों को सोंचते हुए माता पिता की आँखों में आँसू आ जाता है ।उसे पोछते हुए बड़े सरल भाव से अपने बच्चों से कहते है -"हां बेटा !
उसी समय वह गुरूजी होटल में आकर चाय का आर्डर देते हुए पेपर पढने लग जाता है तब सोनू अपने हाथ से गुरूजी को चाय सौंपकर प्रणाम करता है । तब गुरुजी पूछने लगता है -"अरे भाई तुम कौन हो ?और मेरा पैर क्यो छू रहे हो? तब सोनू अपनी पूरी कहानी बताता है और धन्यवाद देता है-"आज अगर हम यहाँ पर इतनी पढाई लिखाई किये है तो सिर्फ आपकी ही वजह से किये । गुरूजी उन बच्चों को आशीर्वाद देते हुए अपने घर की ओर चल पडते है
आचार्य तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगांव डौंडीलोहारा
रविवार, 20 नवंबर 2016
सूरोती के दीया
कातिक अमावस के रात दाई लछमी के पूजा करे के साथ साथ हम छत्तीसगढ़िहा मन देवारी ल सूरोती के परब के रूप म मनाथन।गोंड भाई मन स मिल के गौरा गौरी ल घलक मनाथन । नवा चंऊर के पिसान के फरा रोटी अऊ दीया जलाथन फेर आज हमन चकाचौंध के दुनिया म भुलाके अपन संस्कृति धरोहर अऊ पुरखा मन के गोठ बात ल बिसरत जात हन येहा हमर मन बर बड़ा दुख के बात आय । मैं तो ठेठ जंगलिहा धनगांव के रहवासी हंव ।हमर कोती नंवा पिसान के दीया बनाके अपन आरा पारा के देव धामी के जगा कोठार खलिहान आदि म दीपदान करके अंजोर करे के प्रयास करथन।। आप सबो संगी संगवारी मन ले बिनती हे माटी के दीया के संग संग नवा पिसान के दीया के दीपदान करव।
आप ल पुनः धनतेरस नरकचौदस लछमी पूजा गोवरधनपूजा अऊ भाईदूज के खालाखूझर बधई अउ शुभकामना
धनगांव डौंडीलोहारा
बालोद छत्तीसगढ़
गुरुवार, 6 अक्टूबर 2016
एक गांव
आपके विचार से क्या लगता है ?
गलती किसकी है ?
बुधवार, 13 जुलाई 2016
दाई के हांथ के भात
गलती किसकी ????
गुरुवार, 7 जुलाई 2016
सबले बड़े चोर...
एक घांव एक झन राजा के सभा लगे रिहिसे। राजा हूरहा एक ठन सवाल पूछ दिस-"सबले बड़े चोर कोन आए ? कोई ह धरम के चोर ल सबले बड़े चोर कहे ,त कोई ह स्त्री चोरइय्या ल ,कोई ह लईका चोरइय्या ल। सब झन अपन अपन हिसाब ले बतइस आखरी में एक झन सियनहा अउ अनभव करइय्या सियान ल पूछिस त बतइस कि एमन तो अईसने नान्हे चोर हरे, एमन ल तो परेम से अउ सजा देके सुधारे जा सकत हे, उंखर अपराध ह तो इसपस्ट होथे। कामचोर ह अइसे चोर ए जेकर अपराध ह इसपस्ट नइ होय, लेकिन एहा घुना कीरा कस समाज के बेवस्था अउ खुद वो मनखे ल पोंडा कर देथे । एखर सेती काम ले जी चोरइय्या ह सबले बड़े चोर हे।।
कई झन मन एखरो ले बड़े कमचोरहा हे । इंखर असूल रथे-
अजगर करे नी नौकरी, चिरई करै नही काम।
दासमलूका कहे गईस, सबके दाता राम।।
सअभार:जीओ तो ऐसे जीओ की "हाथ की सच्चाई" से छत्तीसगढ़ी रूपांरतन।
अनुवादक :-आचार्य तोषण
राम नाम
राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...
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"पाँच बातें " पाठ - 14 "पाँच बातें " कक्षा - 4 1- हर एक काम इमानदारी से करो ! 2- जो भी तुम्हारा भला करे, उसका कह...
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हरा भरा खलिहान,संस्कृति की पहचान, परब हरियाली का,बड़ा ही निराला है!! महीना है सावन का,जय हो भोलेनाथ की, छोड़छाड़ अमृत को,पिए विष हाला है!...
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लोहारा के तीर मा,सुग्घर साँई ठाँव. किरपा करथे हाथ ले,लेवव जुरमिल नाँव. पानी ले दीया जरे,महिमा अपरम्पार. जय हो साँई नाथ के,करल...
