गुरुवार, 6 मई 2021
बेटी की बेटी हूँ
शनिवार, 13 मार्च 2021
लोग
सोमवार, 22 जून 2020
जिद तो अपनी भी थी...
रविवार, 31 मई 2020
दिनकर का प्यार
रविवार, 7 जुलाई 2019
रूख़सत
रूख़सत पे दोनों की अपनी देखो जमाना खड़ा था।
डोली दर पे उसकी खड़ी थी मेरा ज़नाजा पड़ा था।
वो गैरों की बाँह में हम कब्रगाह में जानें लगे हैं।
देखो कैसे कैसे फर्ज़ अपने हम.. निभाने लगे हैं।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
9617589667
गुरुवार, 30 मई 2019
जवाब नंइहे
ये मोर संगवारी तोर जवाब नंइ हे।
रहिबो संग मिलके कोन्हों खाब नंइहे।
दिही मिसाल सब हमर मितानी के,
कखरो हमर जइसे रूआब नंइहे।
जिथन हमन एक दुसर ल देख के,
राखय कोन जेकर हिसाब नंइहे।
पढ़ही ज़माना अब दुनों के कहानी,
हमर मितानी कस किताब नंइहे।
रहिथन संग दुनों सुख अउ दुख म,
टोर दिही संग कोन्हों शबाब नंइहे।
बुधवार, 12 जुलाई 2017
मुझे
*मुझे...*
उनसे मोहब्बत करने का...दिया सिला अज़ीब मुझे,
चाहतें रह गयी अधूरी मेरी.अधूरा मिला नसीब मुझे।
गुनाह बस इतना हुआ कि...इश़्क कर बैठे बेपनाह,
जिंदा रहूँ बदौलत किसकी...ज़हर पिला ऱकीब मुझे।
काटने को दौड़ते है हरपल..तन्हाइयो के मंज़र यहाँ,
चाहता न आना जो पास मेरे अपने बुला करीब मुझे।
कर दो रहमत इस इश़्के दीवानों पर..मेरे परवरदीगार,
दरिया ए मोहब्बत की एक बूंद जान दिला गरीब मुझे।
तेरी करामात से वाकिफ है....सारी कायनात ऐ तोषण,
जिंदा रहकर भी जिंदा लाश हूँ कफ़न दिला हबीब़ मुझे।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
१०/०७/१७
२:३४
रविवार, 9 जुलाई 2017
मुझे...
समीक्षा हेतु सादर समर्पित
*मुझे...*
उनसे मोहब्बत करने का...दिया सिला अज़ीब मुझे,
चाहतें रह गयी अधूरी मेरी.अधूरा मिला नसीब मुझे।
गुनाह बस इतना हुआ कि...इश़्क कर बैठे बेपनाह,
जिंदा रहूँ बदौलत किसकी...ज़हर पिला ऱकीब मुझे।
काटने को दौड़ते है हरपल..तन्हाइयो के मंज़र यहाँ,
चाहता न आना जो पास मेरे अपने बुला करीब मुझे।
कर दो रहमत इस इश़्के दीवानों पर..मेरे परवरदीगार,
दरिया ए मोहब्बत की एक बूंद जान दिला गरीब मुझे।
तेरी करामात से वाकिफ है....सारी कायनात ऐ तोषण,
जिंदा रहकर भी जिंदा लाश हूँ कफ़न दिला हबीब़ मुझे।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
१०/०७/१७
२:३४
शुक्रवार, 23 जून 2017
सावन आगे
तोर मया मोर अंतस भीतरी बदरा बरोबर छागे
आजा अब तो मोर मयारु देखना सावन आगे
पपीहा बोलय कुहके कोयली गावै गीत मल्हार
करत निहोरा बइठ सारी रतिहा चंदा चँदैनी जागे
होवत बिहनिया तोर गोरी आथे अड़बड़ सुरता
दिख जातिस कहूँ तोर चेहरा तन के सुस्ती भागे
काबर हावस नराज मोर ले बोली मया के बोल
मरम जिया के खोल तैंहर का दुख जेमा हमागे
रविवार, 26 मार्च 2017
साधु
साधु बन जही नेता कभू
मोला नंइ ममहात हे
भट्ठी चलाय बर इंहा देख
अपने गोड जमात हे.
फरक का परही नेता ला
ऊंकर दुहानु गाय दुहात हे
घर में जावय पीके मंदहा
सुवारी लइका ल ठठात हे.
तोषण कुमार चुरेन्द्र
राम नाम
राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...
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"पाँच बातें " पाठ - 14 "पाँच बातें " कक्षा - 4 1- हर एक काम इमानदारी से करो ! 2- जो भी तुम्हारा भला करे, उसका कह...
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हरा भरा खलिहान,संस्कृति की पहचान, परब हरियाली का,बड़ा ही निराला है!! महीना है सावन का,जय हो भोलेनाथ की, छोड़छाड़ अमृत को,पिए विष हाला है!...
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लोहारा के तीर मा,सुग्घर साँई ठाँव. किरपा करथे हाथ ले,लेवव जुरमिल नाँव. पानी ले दीया जरे,महिमा अपरम्पार. जय हो साँई नाथ के,करल...