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गुरुवार, 6 मई 2021

बेटी की बेटी हूँ

एक बेटी का एक माँ के लिए अल्फाज
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कहते हैं लोग तेरी परछाई हूँ मैं।
मेरी माँ तू पहले फिर आई हूँ मैं।
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तन का लहू तेरे मुझमें बह रही,
हाथों से  सेकी  रोटी खाई हूँ मैं।
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चलना सिखाया अंगुली पकड़े,
लगादो  मरहम  चोट लाई हूँ मैं।
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ढाल  बनकर  साथ रही हमेशा,
जब  खुद  को  तन्हा पाई हूँ मैं।
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सीना गर्व से  फूल जाता है माँ,
लगता है स्वयं लक्ष्मी बाई हूँ मैं।
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महिषा रक्तबीज हजारों यहां है,
संघारिणी दुर्गा काली माई हूँ मैं।
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बेटी की बेटी हूँ जहान में आके,
हर घर की खुशी पहुनाई हूँ मैं।
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देखो थके नही अब ये "तोषण"
कलम की उसकी रानाई हूँ मैं।
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तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगांव डौंडी लोहारा
बालोद छ.ग.

शनिवार, 13 मार्च 2021

लोग

★ *लोग* ★
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दीपक बनके न सही जलते हैं लोग।
आस्तीं के सांप जैसे डसते हैं लोग।
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मुस्कान अधरों पर रखकर यूँ झूठी,
बेदर्द जहाँ में अपने छलते हैं लोग।
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देख-देख हँसती खिलती दुनिया मेरी,
फाँसने को मुझे जाल बुनते हैं लोग।
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रहता हूँ घिरा जमाने के रंजो गम से,
राहों पे सदा काँटे बनकर रहते है लोग।
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एक था एक ही रहेगा जहाँ में "तोषण,"
मिलकर मेरे ही गाँव में कहते हैं लोग
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तोषण चुरेन्द्र धनगाँव
डौंडी लोहारा बालोद
छ.ग.

सोमवार, 22 जून 2020

जिद तो अपनी भी थी...

मुक्त गजल 

जिद तो अपनी भी थी इस जमाने मे।
गुजर  जाए  जिंन्दगी तुझे भुलाने में ।

ढूँढती रही नजर मंजर-ए-तन्हाई पे,
गुम हो गई कहां,कौन से कैदखाने में ।

रूखसत हो गई गुलिस्ताँ-ए-इश्क  से,
चुभाना पड़ा हाथ बागबाँ सजाने में।

अर्ज है न गुजरो राह कभी इश़्क के,
आएगा "दिनकर" जहाँ के निशाने में।

तोषण कुमार चुरेन्द्र दिनकर
डौंडी लोहारा बालोद छ.ग.

रविवार, 31 मई 2020

दिनकर का प्यार

तुझसे मिलने को दिल आज भी बेकरार है।
बरसो से था जिसका आज भी इंतजार है।

मुझसे रूठ गयी नाराजगी किस बात की,
समझ न पाया आखिर ये कैसा टकरार है।

रखा था मैने तुम्हें सर आँखों पे बिठाकर,
जानूँ न मेरी कौन सी बातों से इनकार है।

महकती रहेगी हमेशा गुल बनकर तेरी यादें,
तेरी हर एक एहसास से जिंदगी गुलजार है।

भूलादे तुम्हें रूह से अपने कभी मानना नही,
लगता तुने जाना नहीं ये दिनकर का प्यार है।

तोषण कुमार चुरेन्द्र "दिनकर"
धनगांव, डौंडी लोहारा, बालोद
छत्तीसगढ़,9575070689

रविवार, 7 जुलाई 2019

रूख़सत

रूख़सत पे दोनों की अपनी देखो जमाना खड़ा था।
डोली दर पे उसकी खड़ी थी मेरा ज़नाजा पड़ा था।

वो  गैरों की  बाँह में  हम कब्रगाह में  जानें लगे हैं।
देखो  कैसे कैसे  फर्ज़ अपने  हम..  निभाने लगे हैं।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
9617589667

गुरुवार, 30 मई 2019

जवाब नंइहे

ये मोर संगवारी तोर जवाब नंइ हे।
रहिबो संग मिलके कोन्हों खाब नंइहे।

दिही मिसाल सब हमर मितानी के,
कखरो हमर जइसे रूआब नंइहे।

जिथन हमन एक दुसर ल देख के,
राखय कोन जेकर हिसाब नंइहे।

पढ़ही ज़माना अब दुनों के कहानी,
हमर मितानी कस किताब नंइहे।

रहिथन संग दुनों सुख अउ दुख म,
टोर दिही संग कोन्हों शबाब नंइहे।

बुधवार, 12 जुलाई 2017

मुझे

*मुझे...*

उनसे मोहब्बत करने का...दिया सिला अज़ीब मुझे,
चाहतें रह गयी अधूरी मेरी.अधूरा मिला नसीब मुझे।

गुनाह  बस इतना हुआ कि...इश़्क कर बैठे बेपनाह,
जिंदा रहूँ बदौलत किसकी...ज़हर पिला ऱकीब मुझे।

काटने को दौड़ते है हरपल..तन्हाइयो के मंज़र यहाँ,
चाहता न आना जो पास मेरे अपने बुला करीब मुझे।

कर दो रहमत इस इश़्के दीवानों पर..मेरे परवरदीगार,
दरिया ए मोहब्बत की एक बूंद जान दिला गरीब मुझे।

तेरी करामात से वाकिफ है....सारी कायनात ऐ तोषण,
जिंदा रहकर भी जिंदा लाश हूँ कफ़न दिला हबीब़ मुझे।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
१०/०७/१७
२:३४

रविवार, 9 जुलाई 2017

मुझे...

समीक्षा हेतु सादर समर्पित

*मुझे...*

उनसे मोहब्बत करने का...दिया सिला अज़ीब मुझे,
चाहतें रह गयी अधूरी मेरी.अधूरा मिला नसीब मुझे।

गुनाह  बस इतना हुआ कि...इश़्क कर बैठे बेपनाह,
जिंदा रहूँ बदौलत किसकी...ज़हर पिला ऱकीब मुझे।

काटने को दौड़ते है हरपल..तन्हाइयो के मंज़र यहाँ,
चाहता न आना जो पास मेरे अपने बुला करीब मुझे।

कर दो रहमत इस इश़्के दीवानों पर..मेरे परवरदीगार,
दरिया ए मोहब्बत की एक बूंद जान दिला गरीब मुझे।

तेरी करामात से वाकिफ है....सारी कायनात ऐ तोषण,
जिंदा रहकर भी जिंदा लाश हूँ कफ़न दिला हबीब़ मुझे।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
१०/०७/१७
२:३४

शुक्रवार, 23 जून 2017

सावन आगे

तोर मया मोर अंतस भीतरी बदरा बरोबर छागे
आजा अब तो मोर मयारु देखना सावन आगे

पपीहा बोलय कुहके कोयली गावै गीत मल्हार
करत  निहोरा बइठ सारी रतिहा चंदा चँदैनी जागे

होवत बिहनिया तोर गोरी आथे अड़बड़ सुरता
दिख जातिस कहूँ तोर चेहरा तन के सुस्ती भागे

काबर हावस नराज मोर ले बोली मया के बोल
मरम जिया के खोल तैंहर का दुख जेमा हमागे

रविवार, 26 मार्च 2017

साधु

साधु बन जही नेता कभू
मोला नंइ ममहात हे

भट्ठी चलाय बर इंहा देख
अपने गोड जमात हे.

फरक का परही नेता ला
ऊंकर दुहानु गाय दुहात हे

घर में जावय पीके मंदहा
सुवारी लइका ल ठठात हे.

तोषण कुमार चुरेन्द्र

राम नाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...