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शनिवार, 24 जुलाई 2021

गुरु पूर्णिमा

*समस्त गुरुजनों को नमन करते हुए आप सभी को बहुत बहुत बधाई व शुभकामनाएं....*


गुरुपूर्णिमा विशेष

पूर्णिमा गुरु व्यास की,कोटि नवाऊँ माथ।
रहे कृपा तेरी सदा,हरपल मेरे साथ।।

सदा रहे गुरुदेव की ,मेरे सर पर हाथ। 
चलूँ डगर मैं यूँ सदा,लेकर सबको साथ।।

मात पिता के नेह से,बढ़ता निशदिन मान।
कर्म धर्म से ही मिले,दुनिया में पहचान।।

चरण नमन गुरुदेव की,सदा करें दिन रात।
अंग अंग है जब भीगता,करे ज्ञान बरसात।।

गुरु के सुमरन से सदा,बनते बिगड़े काम।
जिनकी करुणा से मिले,नटवर सीताराम।।

मान गुरु आदेश को,दे अंगूठा दान।
एकलव्य तुम धन्य है,जग में हुए महान।।

शिष्य वही ही है भला,माने गुरु की बात।
अंतर्मन में भी सदा,दे दर्शन दिन रात।।

हे मेरे गुरुदेव जी,तुम ही हो करतार।
नमन सदा स्वीकार हो,अर्जी बारम्बार।।

दोहाकार-
तोषण कुमार चुरेन्द्र 
सरपंच
ग्रा.पंचा.धनगाँव, डौंडी लोहारा
बालोद छत्तीसगढ़

सोमवार, 22 जून 2020

जय जवान (तोषण चुरेन्द्र दिनकर)


दिनाँक:-22/06/2020
दिन:-सोमवार
विधा :-दोहा
विषय :-जय जवान

सर्द गर्म बरसात हो,चलते सीना तान।
करे निरंतर चौकसी,मेरे वीर जवान।।1।।

बनकर जो फौलाद ये,लड़ते हैं पुरजोर।
खड़े रहे हिमशिखर पर,हिम आलय की छोर।।2।।

भारत माँ के लाल हैं,करते सिंह दहाड़।
शत्रु पसीनेंं पोछते,खाते लाख पछाड़।।3।।

खड़ा रहे दिन रात जो,रखने भारत शान।
हँसते हँसते ये सभी,त्यज देते है जान।।4।।

माता ऐसी धन्य है,दिये लाल बलिदान।
भारत मेरा देश ये,है जवान की खान।।5।।

जय जवान कहते चलें,रक्षित जिनसे देश।
शिक्षक और किसान भी,थामे है परिवेश।।6।।


सुन लो हे सरकार ये,सुखी रहे परिवार।
दिनकर भी अब साथ है,माने जग संसार।।7।।

तोषण चुरेन्द्र दिनकर
डौंडी लोहारा बालोद
छत्तीसगढ़

सोमवार, 8 जून 2020

हम तुम

हम तुम दोनों साथियाँ,एक बाग के फूल।
कभी नहीं होगी कहो, इक दूजे से भूल।।1

मिलकर हम तुम साथ हो,पथ हो चाहे शूल।
एक रहेंगे नेक हम,बनकर प्रेमी फूल।।2

हम तुम तुम हम एक हैं,जानें है संसार।
कभी रूक पाये नहीं, हम दोनों का प्यार।।3

बनकर हम तुम सारथी,रथ हाँके दिन रैन।
निहारती हो जग सदा, इक दूजे के नैन।।4


दिनकर बाँटे रोशनी, हम तुम पालें आभ।
भोर किरण देती हमें,लाख टका का लाभ।।

तोषण चुरेन्द्र दिनकर
डौंडी लोहारा बालोद
छत्तीसगढ़

शनिवार, 25 अप्रैल 2020

छंद के छ स्थापना

छंद के छ परिवार के स्थापना दिवस म संस्थापक गुरुदेव अरुण कुमार जी निगम के संग सबो छंदकार मन ला बधाई...

गुरू ज्ञान के कोठरी,बाँटे नित्य सज्ञान।
बिन माँगे आशीष दे,कारज करे महान।।१।।

अपनी चिन्ता छोड़कर,सदा बाँटते ज्ञान।
देकर के आशीष सब,गढ़ते शिष्य  सुजान।।२।।


गुरू चरण मे शीश दो,लेलो भरभर ज्ञान।
मिले ज्ञान को बाँट लो,कारज यही महान।।३।।

बिना गुरू के ज्ञान कब,पोथी पढ़ो पुरान।
लेने शिक्षा स्वयं गये,राम कृष्ण भगवान।।४।।

दर्श किये भगवान का,बालक ध्रुव प्रहलाद।
नारद जैसे गुरु मिले,जनम हुआ आबाद।।५।।

अरुण निगम गुरुदेव जी,मिले सदा आशीष।
छंद के छ परिवार ये,चमके लाख बरीष।।६।।

-तोषण दिनकर

दोहा विधान

गढ़लव दोहा छंद सब,रखलव थोरिक ध्यान।
तेरा ग्यारा के नियम,चार चरण के मान।
चार चरण के मान,अंत में गुरु लघु बाँधव।
पहिली राखव झिन जगण,छंद ला बढ़िहा छाँदव।
दिनकर के हे बात,गाँठ ले कनिहा  कसलव।
जल्दी मिलही भान,छंद दोहा सब गढ़लव।

तोषण कुमार चुरेन्द्र "दिनकर"

शनिवार, 11 अप्रैल 2020

प्रकाश के दोहे

🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷

माँझी मैं पतवार तू, तू जीवन का सार।
पूरे ही संसार का , है तू पालनहार।।

प्रेम गली अति साँकरी, गुरु निंदा बेकार।
सत-मार्ग पहचान लें, मिथ्या है संसार।।

पर नारी ना प्रेम कर, जो माने विद्वान।
हुआ नाश है लंक का, जाने सकल जहान।।

ये जग ठगनी है बड़ी, जानो चतुर सुजान।
दो दिन की है जिंदगी,बिरथा करे गुमान।।

लगी लगन है श्याम से ,तके नयन दिन रात ।
सब के जीवन में कर दे, खुशियों की बरसात।।

राम नाम ही सार है, मानो मेरी बात।
चार दिनों की चाँदनी, फिर अंधेरी रात ।।

राम वही रहमान वही , वही ईश भगवान।
मत फिर अंतर ढूंढता, वही पुराण कुरान।।

ज्ञान गुरूवर दे मुझे, सीखू छंद विधान।
शरण पड़ा तेरे रहूंँ ,कभी न हो अभिमान।।

- परमानंद "प्रकाश"
गुरूर बालोद छ.ग.
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷

बुधवार, 8 अप्रैल 2020

राम नाम जाप

*दोहा गजल*

राग द्वेष सब छोड़कर, जाप करो श्री राम।
आशा पूरन नित करे,बनते बिगड़े काम।

पूरा करते काज को,सदा करे कल्याण,
भगत हुये हनुमान जी, करे भजन निष्काम।1।

राम राम तुलसी जपे,रचा नया इतिहास,
अंतिम अवसर में मिला, प्रभु चरण सुखधाम।2।

हे मानव अब जाग जा,गहरी निद्रा त्याग,
ध्यान करो श्री राम को,अद्भुत मिले विश्राम।3।

धनुष बाण करतल सजे,मुख पर है मुस्कान,
हाथ जोड़ 'दिनकर' खड़ा,शत शत करे प्रणाम।4।

-तोषण दिनकर

सोमवार, 6 अप्रैल 2020

जीवन है अनमोल

कलम की सुगंध छंदशाला मंच को सादर नमन

विधा:- दोहा
विषय:-जीवन है अनमोल
दिनाँक:-6/4/20202
दिन:-सोमवार

परमारथ को साथ रख,मीठी वाणी बोल।
रख मन में सदभावना, तब जीवन अनमोल।।1।।

जीवन ये अनमोल है,गाते संत सुजान।
बिन विवेक इंसान ज्यों,लगता ढोर समान।।2।।

जीवन दीपक नित जले,देता चले प्रकाश।
दिनकर दे नव चेतना,चमके नित आकाश।।3।।

धर्म कर्म बिन साधना,बिरथा बाजा ढोल।
परहित मन में है नहीं, क्या जीवन का मोल।।4।।

तोषण हिय में धारणा,बोली तौले बोल।
सुख दुख में सब साथ हो,जीवन है अनमोल।।5।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
डौंडी लोहारा बालोद छ.ग.

सोमवार, 16 दिसंबर 2019

माथ पकड़ रोता रहा


*-:तोषन के दोहे पंच:-*


माथ पकड़ रोता रहा, बदरा देख किसान।

हुई मिजाई है नहीं, पड़ा धान खलिहान।।१।।


टिपटिप करती ही रही, देखो आधी रात।

बिन दुल्हा जस है लगे, बिन मौसम बरसात।।२।।


ध्यान नहीं दिन रात की , घड़ी घड़ी आँसू धार।

मन आया तो हँस लिये, ये मेघा कचनार।।३।।


पड़े समय की मार जब, मरते जात किसान।

बिन मौसम बरसात ये, कैसा ये दिनमान।।४।।


मिट्टी में है मिल गई, देखे सपने सार।

जीना मरना क्या कहें, है किसान लाचार।।५।।



तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा

डौंडी लोहारा बालोद छत्तीसगढ़

रविवार, 15 दिसंबर 2019

समय


*सुधारोपरांत सादर समीक्षार्थ*

विधा दोहा
विषय समय
दिनांक १६/१२/१९
दिन सोमवार
★★★★★★★★★★★★★★
समय कभी रुकता नहीं,नहीं कहीं है ठौर।
गाती कोयल जान कर,झूमे अमिया बौर।।१।।

समय देख कर ही रखें ,एक एक पग फूँक।
आएगा यमराज जब,हो जाएगा मूक।।२।।

समय बड़ा बलवान है, करें समय में काम।
समय चाल को जान कर ,मत कर तू आराम।।३।।

समय एक सा है नहीं,सबको नाच नचाय।
राजा दानी कर्ण भी,इसका पार न पाय।।४।।

नहीं समय पर बस यहाँ, गर्व न कर इंसान।
मिट जानी है जिन्दगी, चलना है शमशान।।५।।
★★★★★★★★★★★★★★
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा डौंडी लोहारा
बालोद छत्तीसगढ़

शनिवार, 14 दिसंबर 2019

अंत्याक्षरी

समीक्षार्थ 
एक प्रयास प्रदत्त शब्दांतक्षरी पर

[13/12, 8:49 pm] Toshan:

 भूल नहीं इतिहास को,मिलती जिनसे राह।
मिलती जिससे प्रेरणा,सागर भरे अथाह।।

[13/12, 8:53 pm] Toshan:

 उपासना श्री राम की,कर लेता दिन  रैन।
कट जाता शुभ शाम ये,चित को मिलता चैन।।

[13/12, 9:03 pm] Toshan:

 बनकर दानव मत करो,रावण जस अट्हास।
हो सकता है दिन कभी,अपना भी परिहास।।

[13/12, 9:06 pm] Toshan:

 आकर इस संसार में,भटक गया इंसान।
भूला बैठा नेक को,मन रखकर अभिमान।।

[13/12, 9:08 pm] Toshan:

 रोज नई किरणों संग,लेकर आता धूप।
वंदन बारम्बार है, हे दिनपति सुरभूप।।

[13/12, 9:10 pm] Toshan:

 समय बड़ा बलवान है,बदले सबकी चाल।
पल में हँसता आदमी,पल में रोता हाल।।

[13/12, 9:14 pm] Toshan:

 सच्चा रखलो आचरण,बनकर मानव मीत।
देना लेना नित प्रीत को,यही जगत की रीत।।

शुक्रवार, 13 दिसंबर 2019

धनगंइहा के दोहे



दीपक मिट्टी से बना,जलता भानु समान।
तम हरता है रात में,खोकर निज पहचान।।

 भूल नहीं इतिहास को,मिलती जिनसे राह।
मिलती जिससे प्रेरणा,सागर भरे अथाह।।

 उपासना श्री राम की,कर लेता दिन  रैन।
कट जाता शुभ शाम ये,चित को मिलता चैन।

 बनकर दानव मत करो,रावण जस अट्हास।
हो सकता है दिन कभी,अपना भी परिहास।।

 आकर इस संसार में,भटक गया इंसान।
भूला बैठा नेक को,मन रखकर अभिमान।।

 रोज नई किरणों संग,लेकर आता धूप।
वंदन बारम्बार है, हे दिनपति सुरभूप।।

 समय बड़ा बलवान है,बदले सबकी चाल।
पल में हँसता आदमी,पल में रोता हाल।।

 सच्चा रखलो आचरण,बनकर मानव मीत।
देना लेना नित प्रीत को,यही जगत की रीत।।

बुधवार, 11 दिसंबर 2019

मेरा देश

*मेरा देश*
*दोहा*
*9/12/19*
भारत मेरा देश है,सकल गुणों की खान।
ऋषि मुनि के वेश में,करते लाख बखान।।

रंगीला मेरा देश ये,सतरंगी है फाग।
समता ममता है भरा,बहे प्रेम अनुराग।।

राम कृष्ण की ये धरा,बहती गंगा धार।
मर्यादा का पाठ है,गीता की बौछार।।

राजगुरू सुखदेव ने,माना अपनी जान।
त्यागे अपने प्राण को,सदा बढ़ाया मान।।

तेरे मेरे के फेर में,बँटे नहीं इन्सान।
अपना जाने देश को,होगा तभी महान।। 


तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा

शनिवार, 16 नवंबर 2019

बिलासपुर यात्रा

जय श्री राम
बिलासपुर का है सफर,मित्रों का है साथ।
सदा रहे रघुनाथ के,मुझ तोषण पर हाथ।।

जय श्री राम

शनिवार, 9 नवंबर 2019

राम राज


_//धनगंइहा के दोहे सप्तक//_

राम राज की कल्पना, आज हुई साकार।
न्याय चक्र के साथ में,नमन करे सरकार।।1।।

मेरे रघुवर राम की,बनेगी सुंदर ठाँव।
दर्शन करने आइये, मिलकर पूरा गाँव।।2।।

हुआ विजय आज जो,हर्षित है संसार।
दिपावली लौटी फिर से,करें राम जयकार।।3।।

दीप जले उजियार घर,भारत वर्ष महान।
होगा नव निर्माण अब,कहते संत सुजान।।4।।

राम राज की बात सुन,हुए नर नार।
जय जय सीताराम के,गुंजे जय जयकार।।5।।

मोदी के सरकार में,कारज हुए अनेक।
शिखर सफलता पग चुमें,चाह एक से एक।।6।।

हिन्दू मुस्लिम एक हो,तोषण का संदेश।
होकर सब एक जुट,सकल मिटाएँ क्लेश।।7।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा
९६१७५८९६६७

All rights reserved@writter Toshan Kumar Churendra 

बुधवार, 4 सितंबर 2019

राम

दोहा

मेरे रघुवर राम की,बड़ी निराली बात।
कृपा करे श्री राम जी,मिले अजब सौगात।।

हनुमत जिनके भक्त है,धरे हृदय में ध्यान।
बनके निशदिन दास जो,रखते प्रभु का मान।।

दशरथ नंदन हो प्रभु,करूँ सदा गुणगान।
सीता के हे प्राण पति,सदा करो कल्याण।।

कैकेयी के लाडले,कौशिल्या के लाल।
बसते शंकर के हृदय, जपे काल के काल।।

माया के संसार में,रहे हमेशा साथ।
तोषण माँगे वर सदा,चरण झुके बस माथ।।


तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"


गुरुवार, 29 अगस्त 2019

ईश वंदना

माखन खाता नन्द घर,मधुबन करता रास।
कब आओगे मोहना,बसी नयन में आस।।
हाथ पसारे द्वार तिहारो।
मेरो मन करता जयकारो।
मुरलीधर तुम नाग नँथायो।
राधे रानी के मन  भायो।
गोपाला केशव बहुते नामा।
आना माधव अपनो ग्रामा।
मीत सुदामा तोहे प्यारा।
जानत हर कोई जग सारा।
दे दीजै प्रभु यह वरदाना ।
सकल जगत हो आप समाना।
आओ नटवर धीर बँधाओ।
फिर एक बार गीता गाओ।
तेरे दरशन की आस में,रोवत हैं बृज धाम।
आजा गिरधर लौट के,फिर राधा के ग्राम।।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"

ईश वंदना



माखन खाता नन्द घर,मधुबन करता रास।
कब आओगे मोहना,बसी नयन में आस।।


हाथ पसारे द्वार तिहारो।
मेरो मन करता जयकारो।

मुरलीधर तुम नाग नँथायो।
राधे रानी के मन  भायो।

गोपाला केशव बहुते नामा।
आना माधव अपनो ग्रामा।

मीत सुदामा तोहे प्यारा।
जानत हर कोई जग सारा।

दे दीजै प्रभु यह वरदाना ।
सकल जगत हो आप समाना।

आओ नटवर धीर बँधाओ।
फिर एक बार गीता गाओ।


तेरे दरशन की आस में,रोवत हैं बृज धाम।
आजा गिरधर लौट के,फिर राधा के ग्राम।।



तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"

बुधवार, 28 अगस्त 2019

अंत्याक्षरी



अभ्यास की दृष्टि से सादर ....मंच पर

अवहेलना,

मत करना अवहेलना,कभी बड़ों की बात।
दुआ कभी मिलता नहीं,हो दिन चाहे रात।।


विवेचना,

करिए कर्म विवेचना,रखिए सदा ये ध्यान।
धन दौलत जब पास हो,ना रख कभी गुमान।।


व्याप्त,

गुण अवगुण सब व्याप्त है,यही जगत की रीत।
मीठी वाणी बोल के,सकल विश्व लो जीत।


आकंठ,

भरा हुआ आकंठ तक,सदा पतित में दंभ।
झुकना कभी न जानते,तने रहे बन खंभ।


ममता,

माँ की ममता को भला,आँक सके न कोय।
भरकर सुत के पेट को,खुद ही भूखी सोय।।


प्रलाप,

सुख दुख के इस खेल में,करते नहीं प्रलाप।
धैर्य मन में धारिए,मिट जाए संताप।।


लालसा,

त्यागें मन की लालसा,करें ईश का ध्यान।
धन दौलत साथी नहीं,रखिए इसका ज्ञान।।


वन्दना,

मातु पिता की वन्दना,करलें आठों याम।
जिनके पुण्य प्रताप से,बनते बिगड़े काम।।


चापलूस,

चापलूस के काम का,रहता जग में शोर।
बड़े-बड़े ठग जात हैं,क्या ठाकुर क्या चोर।।


झंझावत

आते झंझावत शाम जो,हिय में उठती आह।
पिया गये परदेश को,घर से तकती राह।।


तोषण कुमार चुरेन्द्र "धनगंइहा"

दोहालरी


मुखिया अपने गाँव में,
      आन बसे है तीन।
अपनी ही बस हाँकते,
       लाख बजा लो बीन।

कारज कितना भी भला,
       सही मिले ना दाम।
रखते ऐसी चाहतें,
       अच्छा हो परिणाम।।

खाना ही दोगे नही,
       कैसे लोगे काम।
समझो ना अब तुम यहाँ,
       अपने को गुलफ़ाम।।

राजा अपने दास को,
       समझे कोल्हू बैल।
तन मन धन शोषण करे,
       पेर निकाले तैल।।

आने का है भान सब,
       जाने का ना लेख।
अपना भी परिवार है,
       घर पर जाकर देख।।

मीठा मीठा बोलके,
        मन को लेते फाँस।
रखलें अपनी बात तो,
        टाल देत है हाँस।

अपनी टोली में सभी,
        रखते मुँह को बंद।
सुनके ही रह जात हैं,
        करके नाड़ी मंद।।

खून पसीने सींचते,
        देते विद्या दान।
समझें इनकी भावना,
        दें नव वेतन मान।।

पेट अगर होगा भरा,
        मुख से निकले वाह।
लात पड़े जो पेट में,
        निकले दिल से आह।।

धन तो है मिलता नहीं,
        मिलता केवल मान।
भूखा रहके हम मरें,
        नहीं किसी को भान।।

लक्ष्य गर मिलता नहीं,
        बदलें अपनी राह।
पा जाओगे साथियों,
        जो है मन में चाह।

राम नाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...