शनिवार, 24 जुलाई 2021
गुरु पूर्णिमा
सोमवार, 22 जून 2020
जय जवान (तोषण चुरेन्द्र दिनकर)
सोमवार, 8 जून 2020
हम तुम
शनिवार, 25 अप्रैल 2020
छंद के छ स्थापना
दोहा विधान
शनिवार, 11 अप्रैल 2020
प्रकाश के दोहे
बुधवार, 8 अप्रैल 2020
राम नाम जाप
सोमवार, 6 अप्रैल 2020
जीवन है अनमोल
सोमवार, 16 दिसंबर 2019
माथ पकड़ रोता रहा
*-:तोषन के दोहे पंच:-*
माथ पकड़ रोता रहा, बदरा देख किसान।
हुई मिजाई है नहीं, पड़ा धान खलिहान।।१।।
टिपटिप करती ही रही, देखो आधी रात।
बिन दुल्हा जस है लगे, बिन मौसम बरसात।।२।।
ध्यान नहीं दिन रात की , घड़ी घड़ी आँसू धार।
मन आया तो हँस लिये, ये मेघा कचनार।।३।।
पड़े समय की मार जब, मरते जात किसान।
बिन मौसम बरसात ये, कैसा ये दिनमान।।४।।
मिट्टी में है मिल गई, देखे सपने सार।
जीना मरना क्या कहें, है किसान लाचार।।५।।
तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
डौंडी लोहारा बालोद छत्तीसगढ़
रविवार, 15 दिसंबर 2019
समय
शनिवार, 14 दिसंबर 2019
अंत्याक्षरी
शुक्रवार, 13 दिसंबर 2019
धनगंइहा के दोहे
बुधवार, 11 दिसंबर 2019
मेरा देश
शनिवार, 16 नवंबर 2019
शनिवार, 9 नवंबर 2019
राम राज
_//धनगंइहा के दोहे सप्तक//_
राम राज की कल्पना, आज हुई साकार।
न्याय चक्र के साथ में,नमन करे सरकार।।1।।
मेरे रघुवर राम की,बनेगी सुंदर ठाँव।
दर्शन करने आइये, मिलकर पूरा गाँव।।2।।
हुआ विजय आज जो,हर्षित है संसार।
दिपावली लौटी फिर से,करें राम जयकार।।3।।
दीप जले उजियार घर,भारत वर्ष महान।
होगा नव निर्माण अब,कहते संत सुजान।।4।।
राम राज की बात सुन,हुए नर नार।
जय जय सीताराम के,गुंजे जय जयकार।।5।।
मोदी के सरकार में,कारज हुए अनेक।
शिखर सफलता पग चुमें,चाह एक से एक।।6।।
हिन्दू मुस्लिम एक हो,तोषण का संदेश।
होकर सब एक जुट,सकल मिटाएँ क्लेश।।7।।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा
९६१७५८९६६७
All rights reserved@writter Toshan Kumar Churendra
बुधवार, 4 सितंबर 2019
राम
कृपा करे श्री राम जी,मिले अजब सौगात।।
बनके निशदिन दास जो,रखते प्रभु का मान।।
सीता के हे प्राण पति,सदा करो कल्याण।।
बसते शंकर के हृदय, जपे काल के काल।।
तोषण माँगे वर सदा,चरण झुके बस माथ।।
"धनगंइहा"
गुरुवार, 29 अगस्त 2019
ईश वंदना
कब आओगे मोहना,बसी नयन में आस।।
मेरो मन करता जयकारो।
मुरलीधर तुम नाग नँथायो।
राधे रानी के मन भायो।
गोपाला केशव बहुते नामा।
आना माधव अपनो ग्रामा।
मीत सुदामा तोहे प्यारा।
जानत हर कोई जग सारा।
दे दीजै प्रभु यह वरदाना ।
सकल जगत हो आप समाना।
आओ नटवर धीर बँधाओ।
फिर एक बार गीता गाओ।
आजा गिरधर लौट के,फिर राधा के ग्राम।।
"धनगंइहा"
ईश वंदना
बुधवार, 28 अगस्त 2019
अंत्याक्षरी
दोहालरी
मुखिया अपने गाँव में,
आन बसे है तीन।
अपनी ही बस हाँकते,
लाख बजा लो बीन।
कारज कितना भी भला,
सही मिले ना दाम।
रखते ऐसी चाहतें,
अच्छा हो परिणाम।।
खाना ही दोगे नही,
कैसे लोगे काम।
समझो ना अब तुम यहाँ,
अपने को गुलफ़ाम।।
राजा अपने दास को,
समझे कोल्हू बैल।
तन मन धन शोषण करे,
पेर निकाले तैल।।
आने का है भान सब,
जाने का ना लेख।
अपना भी परिवार है,
घर पर जाकर देख।।
मीठा मीठा बोलके,
मन को लेते फाँस।
रखलें अपनी बात तो,
टाल देत है हाँस।
अपनी टोली में सभी,
रखते मुँह को बंद।
सुनके ही रह जात हैं,
करके नाड़ी मंद।।
खून पसीने सींचते,
देते विद्या दान।
समझें इनकी भावना,
दें नव वेतन मान।।
पेट अगर होगा भरा,
मुख से निकले वाह।
लात पड़े जो पेट में,
निकले दिल से आह।।
धन तो है मिलता नहीं,
मिलता केवल मान।
भूखा रहके हम मरें,
नहीं किसी को भान।।
लक्ष्य गर मिलता नहीं,
बदलें अपनी राह।
पा जाओगे साथियों,
जो है मन में चाह।
राम नाम
राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...
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"पाँच बातें " पाठ - 14 "पाँच बातें " कक्षा - 4 1- हर एक काम इमानदारी से करो ! 2- जो भी तुम्हारा भला करे, उसका कह...
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हरा भरा खलिहान,संस्कृति की पहचान, परब हरियाली का,बड़ा ही निराला है!! महीना है सावन का,जय हो भोलेनाथ की, छोड़छाड़ अमृत को,पिए विष हाला है!...
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लोहारा के तीर मा,सुग्घर साँई ठाँव. किरपा करथे हाथ ले,लेवव जुरमिल नाँव. पानी ले दीया जरे,महिमा अपरम्पार. जय हो साँई नाथ के,करल...


