लोहारा के तीर मा,सुग्घर साँई ठाँव.
किरपा करथे हाथ ले,लेवव जुरमिल नाँव.
पानी ले दीया जरे,महिमा अपरम्पार.
जय हो साँई नाथ के,करलव जी जयकार.
सबके मालिक एक हे,सबझन ला समझाय.
सरधा सबुरी हाँथ में,गठरी लेहु बँधाय..
लइका जायसवाल के,साँई धाम बनाय.
मिलके सब परिवार हा,झूमके परब मनाय.
संगी तोषण आज जी,मन मन हे हरसाय.
मोर जनम अब धन्य हे,साँई दरसन पाय.
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद छ. ग.