सोमवार, 18 दिसंबर 2017

सतरा बारा सतरा

जब ये सतरा बारा सतरा आया
वही एहसास फिर दिल में लाया
आरजू थी जमाने से मिलन की
खुशनुमा वो पल जो साथ पाया

आई जब करीब वो मेरे दिल के
तारे चमकने लगी खिल खिल के
बेकाबू होकर लरजते रहे ये लब
नज़रे हमें सताने लगी मिल मिल के

थी सांसे इक दुजे में समाने लगी
हसरत बरसों की क्यूं जगाने लगी
भूल जाना चाहता था सारी बंदिशे
एक वो ही थी बहाने बनाने लगी

तकलीफ़ हुई दिल को उसकी जुदाई पर
हंसती रही रातें ओर चांद मेरी तन्हाई पर
मजबूरी थी उसकी और बेबसी मेरी भी
रास न आया रब को  बंदे की दुहाई पर

उस पल का मुझे हमेशा इंतजार रहेगा
बातों पर उसकी हमेशा ऐतबार रहेगा
कहेगी वो कभी आजा करले पुरी हसरत
सच होंगे सपने या दिले राजदार रहेगा

तोषण कुमार चुरेन्द्र
९६१७५८९६६७

सतरा बारा सतरा

जब ये सतरा बारा सतरा आया
वही एहसास फिर दिल में लाया
आरजू थी जमाने से मिलन की
खुशनुमा वो पल जो साथ पाया

आई जब करीब वो मेरे दिल के
तारे चमकने लगी खिल खिल के
बेकाबू होकर लरजते रहे ये लब
नज़रे हमें सताने लगी मिल मिल के

थी सांसे इक दुजे में समाने लगी
हसरत बरसों की क्यूं जगाने लगी
भूल जाना चाहता था सारी बंदिशे
एक वो ही थी बहाने बनाने लगी

तकलीफ़ हुई दिल को उसकी जुदाई पर
हंसती रही रातें ओर चांद मेरी तन्हाई पर
मजबूरी थी उसकी और बेबसी मेरी भी
रास न आया रब को  बंदे की दुहाई पर

उस पल का मुझे हमेशा इंतजार रहेगा
बातों पर उसकी हमेशा ऐतबार रहेगा
कहेगी वो कभी आजा करले पुरी हसरत
सच होंगे सपने या दिले राजदार रहेगा

तोषण कुमार चुरेन्द्र
९६१७५८९६६७

रविवार, 17 दिसंबर 2017

जब जब तोर मया के सुरता

जब जब तोर मया के सुरता
आथे गोरी मोला सावन मा
आँखी ले झर झर आँसू झरथे
मोर हिरदे के आँगन मा....

बइहा बनके किंजरत रहिथों
बइरी डोंगरी पहाड़ मा
सुध बुध मोर कही राहय नहीं
सजनी रे तोर प्यार मा
कोन जनी रा रोग हमाँगे
हरिहर हरिहर यौवन मा
आँखी ले झर झर............१

संगी जहुरिया मारे ताना
रोयली करे ठिठोली
झन तरसाना उढ़ाके आजा
सुन लेतेंव तोर बोली
तन हा भुंजाके राखर होगे
तोर मया के दावन मा
आँखी ले झर झर.......... २

मोर मया ल समझस नहीं
मोला गजब सताथस तँय
मुच मुच मुच मुच हाँसके मोला
सापू रतिहा रोवाथस तँय
तोषण ल बिसार के पगली
मन लगाए खिलावन मा
आँखी ले झर झर.........३

तोषण कुमार चुरेन्द्र
९६१७५८९६६७

सोमवार, 20 नवंबर 2017

दिन ढलते

आँसू कहते
कब आओगे तुम
दिन ढलते.....

निहारुँ राह
है मन आनंदित
प्रेम की चाह...

हो आगमन
चकवा निहारती
स्वाती की बूँद....

तोषण कुमार चुरेन्द्र

शभकामना

एकता शक्ति
पूरे हो अरमान
शुभकामना

ओस की बूँदे
टिमटिमाते तारे
धरा अम्बर...

कर्म है तेरा
न हो इच्छा फल की
कृपा ईश की...

खेलते बच्चे
धरना में शिक्षक
तम भविष्य

माँ की डाँट
नसीब में भी नही
रुठी किस्मत.. .

माँ की यादें
है अंतरात्मा बसी
भीगी पलकें

तोषण कुमार चुरेन्द्र

रविवार, 19 नवंबर 2017

अपना गाँव

तरु की छाँव
खेलता बचपन
अपना गाँव

मिट्टी चंदन
निखरित मस्तिष्क
कोटि वंदन

बहे सरिता
है धरा पल्लवित
मग पुनिता

कुँजती पिक
लगे मनभावन
देती सीख

कृषक झुमे
लहलहाते धान
माथा चुमे

पुष्प पलाश
देती नव चैतन्य
पूरी तलाश

तोषण कुमार चुरेन्द्र

शुक्रवार, 17 नवंबर 2017

पिया मिलन

पिया मिलन
     निहारती पलकें
             प्रेम अगन

तोषण कुमार चुरेन्द्र

दिले अरमान को...

बताएँ क्या हम अपनी दिल की दास्तान को
प्यासी धरती देखे  जैसे ऊपर आसमान को
आरजू है बस  उनसे आखिरी मुलाकात की
लगे न नजर किसी की मेरे दिले अरमान को....

तोषण कुमार चुरेन्द्र

बनें महान


संकल त्रय
   सप्तविंशति पुष्प
         मंगलमय

दर बदर
है चहल - पहल
       चार पहर

करें सम्मान
होकर आगाहित
       बनें महान

तोषण कुमार चुरेन्द्र

मंगलवार, 31 अक्टूबर 2017

दाई के कोरा

दाई के कोरा
हे धान के कटोरा
तिहार पोरा...

सोहय धान
छत्तीसगढ़हीन
बेटा किसान...

कौशल राज
ननिहाल राम के
नाचव आज...

नवा अंजोर
जगमगात गढ़
माते हिलोर...

होके मगन
जुरमिल नाचव
झुमे गगन...

•तोषण कुमार चुरेन्द्र•

तोषण कुमार

छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस

१ नवंबर २०००
छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस
पर हाइकु

छत्तीसगढ़
है स्थापना दिवस
सतत बढ़...

तरक्की करे
खुशहाल प्रदेश
उमंग भरे...

मनोकामना
मेरा छत्तीसगढ़
करे साधना...

सुवा करमा
करे गौरवान्वित
तेरी महिमा...

माथ नवाएँ
मंगलाचार करें
महिमा गाएँ...

पावन धाम
है दक्षिण कौशल
निर्मल ग्राम...

श्रृंगी आश्रम
बड़ा मनभावन
शबरी धाम...

•तोषण कुमार चुरेन्द्र •

गुरुवार, 7 सितंबर 2017

लोटा

पीतल-काँसा छोड़ के,
                        ताँबा लोटा भाय।
अमरित कस पानी लगय,
                  तन-मन सब हरियाय।।

बिना धुरी लोटा असन,
                     झन बनिहव इंसान।
येती-ओती झन घुमर,
                  नइ मिलही  पहिचान।।

मत बन रहव गिलास सब,
                        लोटा बने रहाव।
प्यास बुझावव चार के,
                 जिनगी सुफल बनाव।।

बुधवार, 6 सितंबर 2017

चल चला चल

मन में हो विश्वास अगर।
मुश्किल नहीं कोई  डगर।
चल चला चल आगे चल,
खड़ा लक्ष्य तेरे पथ पर।।

लोटा


लोटा भर पानी धरव,चलव शिवा के धाम।

माथ नवावव आज सब,लेवव शंभू नाम।।


 लोटा मा पानी धरव,सगा कभू घर आय।

कुरसी मा बइठारके,पूछव पानी चाय।।


चोर मोर लोटा धरय,भागय पल्ला छोड़।

आ जावय जब हाथ मा,देहँव मुड़ ला फोड़।।

गुरुवार, 31 अगस्त 2017

अंताक्षरी

मन के करबे काम तै,होही पश्चाताप।
सोचव समझव जी बने,सबले पहिली आप।

दोहा दोहा सब कहय, दोहा लिखय न कोय।
दोहा बर दोहा लिखय,सब झन छंदी होय।।

घूमत घामत आज मँय ,जाहूँ बेटी गाँव।
गाँव बीच पिपरी जगे,बड़ दुरिहा ले छाँव।।

गुरतुर तोर जुबान हे , मनमोहागे मोर।
बही अपन बस ते करे, मन हा होगे तोर।

लाल-लाल के फूल हे,लाली पटा तुँहार।
लाली ककनी अउ चुरी,गजमोती सिंगार।।

करबो खेती जोर के,सबला लेके संग।
हरिहर होही भुंइया,लाही नवा तरंग।।

लाल लहू ला देख के, भारत माता रोय।
झगरा लड़ई छोड़ के,एक रहव सब कोय।।

ढेर करे हन आज हम,घर घर कचरा देख।
साफ करन घर बार ला,भारत स्वच्छ सरेख।।

आके डेहरी तोर मँय,पारत हँव गोहार।
बिनती हे गणराज जी,सुनले बोल हमार।।

काम करव बड़ नेक के,मिलही जग में मान।
चलही सबके नाँव जी,जइसे भगत महान।।

अपन अपन में सब मगन,भला करय अब कोन।
सच्चा मनखे हे विही,भला करय सिरतोन।।

नाम राम के सार हे,जपलव सब हरिनाम।
बिना भजन के भाग में,आवय कभू न राम।।

हार जीत के बात में,होवय रेलम पेल।
आनी बानी खेल हे,जुरमिल खेलव खेल।।

काम काज संवार ले,होवत बिहना बेर।
चल चल संगी खेत में,होवय झन गा देर।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र

मंगलवार, 22 अगस्त 2017

देश प्रेम

१.
जी लव संगी देश बर,जब तक तन में जान।
सदा रही हमरो अमर,भारत माँ के आन।

२.
इही देश के आन बर,होइन सब कुर्बान।
आजादी के गोठ हे,जानव संत सुजान।।

३.
राज भगत सुखदेव के,देखव गजब मिसाल।
लाल बाल अउ पाल के,करनी घलक कमाल।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र

दही लूट

१.
दही लूट बर हे मचे,अड़बड़ धूम धड़ाम।
ग्वाल बाल सब संग में,आगू हे घनश्याम।।

२.
दही लूट के बात सुन,मुँह में पानी आय।
चलव-चलव हम आज सब,चलन दही चोराय।।

३.
चोरावय मक्खन दही,वासु देवकी लाल।
गोप ग्वाल के संग में,लीला करय कमाल।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र

देश प्रेम

१.
जीलव संगी देश बर,जब तक तन में जान।
सदा रही हमरो अमर,भारत माँ के आन।

२.
इही देश के आन बर,होइन सब कुर्बान।
आजादी के गोठ हे,जानव संत सुजान।।

३.
राज भगत सुखदेव के,देखव गजब मिसाल।
लाल बाल अउ पाल के,करनी घलक कमाल।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र

शुक्रवार, 18 अगस्त 2017

आओ करें हम मिलके नमन...

आओ करें हम मिलके नमन,
   भारत माता की आराधना.
ले के तिरंगा साथ बढ़ेंगे,
   बलिदानों की उपासना.

🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳

राजगुरु सुखदेव भगत सिंह,
   कितनों वीर महान हुए.
हंसते हंसते हो गए न्योछावर,
   देश खातिर कुर्बान हुए.
भारत माँ की आन बचाने,
   कर्म साहसिक साधना..... ..

👨‍👦‍👦👨‍👦‍👦👨‍👦‍👦👨‍👦‍👦👨‍👦‍👦👨‍👦‍👦👨‍👦‍👦👨‍👦‍👦👨‍👦‍👦

वीर शिवा आजाद राणा और,
   झांसी की लक्ष्मी बाई.
बापू गांधी चाचा नेहरु,
   भारत की महिमा गाई.
आजादी के रंग में सभी ने,
   रखे जन्म सिद्ध भावना.........

👨‍🏫👨🏻‍🎤👩🏻‍🎤👨🏻‍🏭👨‍🔧👩‍🔧👨‍🎨👨‍🔬👳‍♀

गुणियों मुनियों की संतो का तप,
   हमारी अनुपम थाती है.
बलिदानी वीरों की गाथा,
   रग अपने लहराती है.
दहाड़ लेंगे बनकर सिंघम,
   त्यागे राग आलापना.......

🦁🦁🦁🦁🦁🦁🦁🦁

कृति
तोषण कुमार चुरेन्द्र
९६१७५८९६६७
१९/८/१७
🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳

आओ करें हम मिलके नमन...

आओ करें हम मिलके नमन,
   भारत माता की आराधना.
ले के तिरंगा साथ बढ़ेंगे,
   बलिदानों की उपासना.

🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳

राजगुरु सुखदेव भगत सिंह,
   कितनों वीर महान हुए.
हंसते हंसते हो गए न्योछावर,
   देश खातिर कुर्बान हुए.
भारत माँ की आन बचाने,
   कर्म साहसिक साधना..... ..

👨‍👦‍👦👨‍👦‍👦👨‍👦‍👦👨‍👦‍👦👨‍👦‍👦👨‍👦‍👦👨‍👦‍👦👨‍👦‍👦👨‍👦‍👦

वीर शिवा आजाद राणा और,
   झांसी की लक्ष्मी बाई.
बापू गांधी चाचा नेहरु,
   भारत की महिमा गाई.
आजादी के रंग में सभी ने,
   रखे जन्म सिद्ध भावना.........

👨‍🏫👨🏻‍🎤👩🏻‍🎤👨🏻‍🏭👨‍🔧👩‍🔧👨‍🎨👨‍🔬👳‍♀

गुणियों मुनियों की संतो का तप,
   हमारी अनुपम थाती है.
बलिदानी वीरों की गाथा,
   रग अपने लहराती है.
दहाड़ लेंगे बनकर सिंघम,
   त्यागे राग आलापना.......

🦁🦁🦁🦁🦁🦁🦁🦁

कृति
तोषण कुमार चुरेन्द्र
९६१७५८९६६७
१९/८/१७
🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳

शनिवार, 22 जुलाई 2017

किसान

पानी बादर गिरत नइहे,
मरना होगे किसान के.
कइसे मनाही बने हरेली,
चिंता होगे बिहान के.

धरती के बेटा हमला कइथे.
सबके भरे पोसइया कइथे.
पेट हमरे बड़ भूखन मरथे,
लइका हमर बड़ दुख सहिथे.
पढ़तिस लिखतिस मोरो लइका,
जरुवत हवे गियान के...१

खेत म धान छिताय परेहे.
पानी बर एकठन आस धरेहे.
सुरुज कका बिहान ले साँझे,
नटेर के आँखी ल खड़ेहे.
लोंदी खवाबोन हम कइसे
रोना हे गँहू पिसान के....२

करजा के चद्दर ओढ़त हन.
गदहा बने सब ढोवत हन.
नइ छुटावय करजा कोनों,
नरी म डोरी अँरोवत हन.
का थोरको सुध नइ लामे,
हमर देश के सियान के....३

कब तक अइसने मर-मर जीबो.
शंखर नोहन जेन जहर ल पीबो.
हलधर हम किसान हरन गा
अपन हक ल लेके ही रहिबो.
दाम अनाज के बने मिले,
रखले बात फरमान के.....४

तोषण कुमार चुरेन्द्र

सुरता

विरह गीत

सुरता हा तोर जब जब आथे मोला गजब सताथे वो
नैना ले झर झर आँसू झरथे जीव ला मोर जलाथे वो

बइहा बरन मैं किंजरत रहिथौं तरिया नरवा मेंड़ पार मा
सुध नइ राहय मोला रे पगली खोजँव डोंगरी पहाड़ मा
रहि रहि के तोर भोली सुरतिया आँखी के आगू म आथे वो
नैना ले झर झर आँसू झरथे जीव ला मोर जलाथे वो....१

कोयली मोला मारै ताना पूरवइया बिजरावत हे
चंदा रानी मुँहु लुकाथे सूरुज ह आँखी देखावत हे
आजा लहुट के तै मोर संगी मया ह मोर बलाथे वो.
नैना ले झर झर आँसू झरथे जीव ला मोर जलाथे वो....२

मर जाहूँ मैं तोर बिन रानी नइहे मोर ठिकाना
का करिहँव सुन कहाँ जाहूँ बैरी मोला बताना
तिही बताना मया के गोठ ल कइसे सब बिसराथे वो.
नैना ले झर झर आँसू झरथे जीव ला मोर जलाथे वो...३

तोषण कुमार चुरेन्द्र
२१/७/१७

गुरुवार, 20 जुलाई 2017

सुरता

विरह गीत

सुरता हा तोर जब जब आथे मोला गजब सताथे वो
नैना ले झर झर आँसू झरथे जीव ला मोर जलाथे वो

बइहा बरन मैं किंजरत रहिथौं तरिया नरवा मेंड़ पार मा
सुध नइ राहय मोला रे पगली खोजँव डोंगरी पहाड़ मा
रहि रहि के तोर भोली सुरतिया आँखी के आगू म आथे वो
नैना ले झर झर आँसू झरथे जीव ला मोर जलाथे वो....१

कोयली मोला मारै ताना पूरवइया बिजरावत हे
चंदा रानी मुँहु लुकाथे सूरुज ह आँखी देखावत हे
आजा लहुट के तै मोर संगी मया ह मोर बलाथे वो.
नैना ले झर झर आँसू झरथे जीव ला मोर जलाथे वो....२

मर जाहूँ मैं तोर बिन रानी नइहे मोर ठिकाना
का करिहँव सुन कहाँ जाहूँ बैरी मोला बताना
तिही बताना मया के गोठ ल कइसे सब बिसराथे वो.
नैना ले झर झर आँसू झरथे जीव ला मोर जलाथे वो...३

तोषण कुमार चुरेन्द्र
२१/७/१७

शनिवार, 15 जुलाई 2017

आरजू

आरजू कब से थी मेरी,

.आज वो हो गयी पूरी.

मिले जो मित्र बालक,

तोषण दर्शन मानिकपुरी.


हुई कुछ साहित्यिक चर्चाएँ, 

अपनी क्या मैं बताऊँ.

होकर प्रफुल्लित मैं तो,

मनभँवरा बन हर्षाऊँ.


साहित्य की सीढ़ी हमको, 

प्रतिपल चढ़ते जाना है.

राह में हो कोई भी मुश्किल, 

बढ़कर शिखर को  पाना है.


मिलकर अपने मित्रों से, 

अपने भाग्य जगा लिए.

जीवन का अभिन्न अवसर, 

हमने रब से पा लिए.


बालक दर्शन तोषण की,

सलामत रहे मितानी.

बसे रहें सबकी जुबाँ पे,

तीनों मित्र की कहानी.


तोषण कुमार चुरेन्द्र


https://arhkepagakalagi.blogspot.in/?_e_pi_=7%2CPAGE_ID10%2C1582631584

बुधवार, 12 जुलाई 2017

मुझे

*मुझे...*

उनसे मोहब्बत करने का...दिया सिला अज़ीब मुझे,
चाहतें रह गयी अधूरी मेरी.अधूरा मिला नसीब मुझे।

गुनाह  बस इतना हुआ कि...इश़्क कर बैठे बेपनाह,
जिंदा रहूँ बदौलत किसकी...ज़हर पिला ऱकीब मुझे।

काटने को दौड़ते है हरपल..तन्हाइयो के मंज़र यहाँ,
चाहता न आना जो पास मेरे अपने बुला करीब मुझे।

कर दो रहमत इस इश़्के दीवानों पर..मेरे परवरदीगार,
दरिया ए मोहब्बत की एक बूंद जान दिला गरीब मुझे।

तेरी करामात से वाकिफ है....सारी कायनात ऐ तोषण,
जिंदा रहकर भी जिंदा लाश हूँ कफ़न दिला हबीब़ मुझे।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
१०/०७/१७
२:३४

आती नहीं

आती नही नींद रातों में मोबाइल एक सहारा है.
नहीं बिना इसके यहाँ किसी का होता गुजारा है.

चिंतन करता समाज का जो वह कभी भी सोता नहीं.
हँसती  रहती है  दुनिया सभी पर कभी वह रोता नहीं.

जगने से तेरे ऐ मालिक यहाँ हर कोई चैन से सोता है.
तुझसे दिन तुझसे ही रात औ तुझसे ही सुबह होता है.

जब तक राम का साथ है मुझको कहीं आराम नहीं.
हनुमत जैसे चलते रहना रुकने का न हो नाम कहीं.

इक दिन ऐसा आएगा मेरा नील गगन पर छा जाऊँगा.
याद करेंगी दुनिया मुझको वही काम नया कर जाऊँगा.

तोषण कुमार चुरेन्द्र

मोर सही मयारु

मोर सही मयारु तँयहर,
दुनिया मा खोज के देख ले.
कोन तोला देवय लान के,
मोंगरा फूल रोज के देख ले.

करथँव तोला अब्बड़ मया,
बइरी थोरको देखस नहीं.
काबर पीरा देथस मोला,
जीवरा मया सरेखस नहीं.

ननपन म संग खेलेन कुदेन,
आनी बानी बाँटी भँवरा.
ओलकी कोलकी आरा पारा,
अउ घर बन तीर के चँवरा.

झन मोला तँय दगा देबे,
मरजाहूँ गोरी तोर सुरता म.
तोर मोर नत्ता अइसे हावय,
जइसे बटन कस कुरता म.

तोषण कुमार चुरेन्द्र

गुरु महिमा

गुरु की है महिमा बड़ी,
                  कथनी अपरम्पार।
करलो सेवा गुरु चरण,
                  मेवा का भण्डार।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र

सावन

*सुधार*

मन मँजूर बन नाचथे,सावन बरसय जोर।
पिया मिलन के आस में,तरसय मन बड़ मोर।।१।।

टिपिर-टिपिर पानी गिरय,सुग्घर सावन मास।
सँइया बिन सुन्ना लगय,मनवा रहय उदास।।२।।

करिया बादर देख के,पवन करत हे शोर।
आही सावन बन पिया, आरो लेवत तोर।।३।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र

रविवार, 9 जुलाई 2017

पुन्नी

पुन्नी मास अषाढ़ के,पुन्नी व्यास कहाय।
गढ़य वेद संसार बर,सबके मनला भाय।।१।।

हूम धूप  करलव हवन,दीया करलव दान।
कातिक पुन्नी खास हे,करलव गंगा स्नान।।२।।

पुन्नी  सावन  मास  के,करलव  वैदिक साज।
उपा करम कर वेद के,बनथय बिगड़त काज।।३।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र

कविता

आती नही नींद रातों में मोबाइल एक सहारा है.
नहीं बिना इसके यहाँ किसी का होता गुजारा है.

चिंतन करता समाज का जो वह कभी भी सोता नहीं.
हँसती  रहती है  दुनिया सभी पर कभी वह रोता नहीं.

जगने से तेरे ऐ मालिक यहाँ हर कोई चैन से सोता है.
तुझसे दिन तुझसे ही रात औ तुझसे ही सुबह होता है.

जब तक राम का साथ है मुझको कहीं आराम नहीं.
हनुमत जैसे चलते रहना रुकने का न हो नाम कहीं.

इक दिन ऐसा आएगा मेरा नील गगन पर छा जाऊँगा.
याद करेंगी दुनिया मुझको वही काम नया कर जाऊँगा.

तोषण कुमार चुरेन्द्र

मुझे...

समीक्षा हेतु सादर समर्पित

*मुझे...*

उनसे मोहब्बत करने का...दिया सिला अज़ीब मुझे,
चाहतें रह गयी अधूरी मेरी.अधूरा मिला नसीब मुझे।

गुनाह  बस इतना हुआ कि...इश़्क कर बैठे बेपनाह,
जिंदा रहूँ बदौलत किसकी...ज़हर पिला ऱकीब मुझे।

काटने को दौड़ते है हरपल..तन्हाइयो के मंज़र यहाँ,
चाहता न आना जो पास मेरे अपने बुला करीब मुझे।

कर दो रहमत इस इश़्के दीवानों पर..मेरे परवरदीगार,
दरिया ए मोहब्बत की एक बूंद जान दिला गरीब मुझे।

तेरी करामात से वाकिफ है....सारी कायनात ऐ तोषण,
जिंदा रहकर भी जिंदा लाश हूँ कफ़न दिला हबीब़ मुझे।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
१०/०७/१७
२:३४

शनिवार, 8 जुलाई 2017

दोहालरी

*गुरु पुन्नी बिशेष*

*दोहालरी*

जस कुम्हार  के  हाथ हे, चकिया मटका संग।
अइसन गुरु किरपा मिले,खिल जाए सब अंग।।१।।

परव  पाँव  गुरु गोड़ के, देव दरस दिखलाय।
सही गलत के पाठ ला,सब झन ला समझाय।।२।।

पावन गुरु पुन्नी परब,ध्यान करव कर जोर।
गुरु ले  रिश्ता  जोड़ ले,बाँधय  जइसे डोर।।३।।

पहिली गुरु दाई ददा, जग में होत महान।
दुसरा गुरु गुढ़ ज्ञान दे,जग मा पावय मान।।४।।

बरसय  गंगा  ज्ञान  के, गुरु  चरनन  के तीर।
आवव सब गुरु के शरण,मिटय भरम के पीर।।५।।

आवय गुरु के तीर मा,कतको दरसन पाय।
बेटा जोहर लाल के, तोषण माँथ नवाय।।६।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र

गुरुवार, 6 जुलाई 2017

मया के गोठ

मन फाँसले
जीवरा जरत हे
बने हाँसले

कोयली बोली
करेजा बेधे बान
हाँँसी ठिठोली

सुरता तोर
आँसू धार बोहाय
मया कठोर

मोला भुलागे
छोड़ दिए मोला
कहाँ लुकागे

मया के गोठ
जग अमर रही
गुड़हा सोठ

तोषण कुमार चुरेन्द्र

बजार

आवव  हमरो  गाँव मा, बजार हे बुधवार।
आके जिहाँ बेचात हे,आनी बानी तरकार।।१।।

आके तँयहर छाँट ले,बढ़िहा गोभी फूल।
मुनगा  भांँटा  खेखसा,बरबट्टी झन भूल।।२।।

लइका मनबर ले चना,मिरचा भजिया तात।
खाँही  बढ़िहा चाव ले,एक - दुसर बिजरात।।३।।

टिकली  फुंँदरी  पावडर, लेलव  रुपिया हार।
देखव जोड़ी के मया, किसम-किसम सिंगार।।४।।

देखव  आज पताल  के, मुड़ी  चढ़त हे दाम।
किलो एक चालीस के,ले बिन चलय न काम।।५।।

करके आखिर हाट तँय,खाले बीरो पान।
हवय  बजरहा के इही,एके ठन पहिचान।।६।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र

मंगलवार, 4 जुलाई 2017

जयतु जय

*सुप्रभातम्*
एक प्रयास
*हाइकु*

जयतु जय
श्री गणेशाय नम:
सदा विजय---१

रामचंद्राय
रघुकुल तिलक
नमो नमाय---२

पवनसुत
रघुवीर सेवक
जय: मारुत---३

गंगाधराय
जगत संघारक
नम:शिवाय---४

कमला पति
जग पालनकर्ता
चरण रति---५

सृष्टि लेखक
जगत पिता ब्रह्मा
दिक सूचक---६

देवकी लाल
गीता उपदेशक
जय गोपाल---७

अपराजिता
महिष संघारिणी
विश्व वंदिता---८

माँ सरस्वती
ज्ञानदायिनी जय
संँवरे मति---९

शंकर प्रिया
हिमाचल तनया
वर अभया---१०

राम की सीता
हे! जनक दुलारी
रावण जीता---११

सती सावित्री
निर्जीव सत्यवान
बचाए प्राण---१२

कृष्ण दीवानी
कालकूट प्रसाद
मीरा सयानी---१३

नवधा भक्ति
आशीर्वाद राम का
शबरी मुक्ति---१४

मुष्ठि प्रहार
हो सत्संग का ज्ञान
लंकिनी पार---१५

*तोषण कुमार चुरेन्द्र*

रविवार, 2 जुलाई 2017

तोषण के दोहा

पढ़े  लिखे  आवय नहीं,थोरिक नइहे ग्यान।
का तोला समझाँव मँय,लइका हवँव नदान।।१।।

जिनगी  मोर  उदास  हे, काला मँयह बताँव।
मनवा कहीं सुझय नही,कोन डगर मँय जाँव।।२।।

पइसा कउड़ी हे नहीं, रुके रुके हे साँस।
बहिनी के शादी बचे,पड़गे टोटा फाँस।।३।।

पानी झन बिरथा करव,पानी अमरित जान।
पानी ले जिनगी बचय,बोलय सन्त सुजान।।४।।

मुखिया बढ़िहा हे जिहाँ, राखय सबके ध्यान।
मान करय सब छोट के,पावय सबके मान।।५।।

मानँव बात सियान के,करथे सबला पोठ।
राखय सबला संघेर के,कंचन जस हे गोठ।।६।।

माटी के  काया  बने,पानी  मिल घुर जाय।
सुमरन कर हरिनाम के,जाबे नाम कमाय।।७।।

बड़  भागी  मानुस जनम, जपले तँय हरिनाम।
मोर-मोर तँय झन समझ,आवय नइ कछु काम।।८।।

सजे  राम  दरबार हे, सिया  राम  हनुमान।
लखन चँवर डोलात हे,लगे सरग सम जान।।९।।

माया  हे  ठगनी बड़े, सबला नाच नचाय।
का छोटे अउ का बड़े,कोनों बाँच न पाय।।१०।।

गुरुजी घसियादास के,चेला हम सब आँन।
जेकर चरनन तीर मा, पावँन सबहा ग्यान।।११।।

फूलबगिया के फूल कस,सबला रखे सकेल।
गुरुजी अइसन ताय जी,हमरो विजय पटेल।।१२।।

बाबा तुलसी दास के,कहनी सबला भाय।
रामचरित मानस लिखे,भव ले पार लगाय।।१३।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र

मोर परिचय

*परिचय*
लोहारा के तीर मा,बसे हवय धनगाँव।
बोहावत हे खरखरा, बर पीपर के छाँव।।१।।

बेटा जोहर लाल के,तोषण हावय नाँव।
जुरमिल सब आशीष दव,परथँव सबके पाँव।।२।।

तोषण मँय तो लेड़गा,हावँव बड़ मतिमंद।
किरपा बरसय राम के,सुग्घर गढ़िहँव छंद।।३।।

शाला जाथँव रोज मँय,करँव ग्यान के दान।
का छोटे अउ का बड़े,पाथँव सबके मान।।४।।

भाई बहिनी चार हम,सबले बड़का आँव।
नइहे दाई संग में,जोहर ददा मनाँव।।५।।

चितरेखा हे संगिनी,बेटा मोर डुमेश।
हँसी खुशी दिन हा चले,नइहे कोनों क्लेश।।६।।

भूल चूक ला दव क्षमा,माँगत हँव कर जोर।
हावँव गा मतिमंद मँय,धीरज नइहे थोर।।७।।

"तोषण कुमार चुरेन्द्र "

बेवफा प्यार का...

वार्णिक मुक्तक

*तुझको  ही  चाहा  मैनें, तुमसे  ही प्यार किया।*
*छोड़  सब   कुछ   सजनी   तुमपे   वार दिया।*
*यूँ  जाना  ही  था  जो मुझको छोडकर पगली,*
*बेवफा  प्यार  का  क्यूँ  मुझसे  इकरार किया।।*
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तोषण कुमार चुरेन्द्र

शनिवार, 1 जुलाई 2017

सम्हल कर

चलना जरा सम्हल कर *तोषण*, रपट न जाना राह में,
लोग कहेंगे बारिश का मजा है ,या मयकदे का नशा है।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र

बरसात

बरसत पानी देखके, भुँइया खुशी मनाय।
सुवा परेवा कोयली,सुग्घर गीत सुनाय।।

आगे दिन बरसात के,होगे मगन किसान।
नाँगर बइला फाँदके, बोही  अब गा धान।।
👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻

आफत

*आँधी* आवय।
घर बन उजड़े।
दु:ख छावय।

हावा भड़के।
*रेतीली आँधी* लाय।
काल बनके।

*तूफान* आवै।
बुध पतरावय।
सुध भलावै।

गिरय पानी।
लावै कँसके *बाढ़* ।
हे हलाकानी।

*भूकम्प* आथे।
भुँइया डगमगाय।
डर हमाँथे।

परे *अकाल* ।
बड़ मरे किसान।
होगे बेहाल।

तोषण कुमार चुरेन्द्र

गुरुवार, 29 जून 2017

सोच

किसी को जरा हमारी अच्छाई देखी नहीं गई

लग गये यारों हमारी बुराई ढूँढने को जहाँ में

*सोच बड़ा कर लेने से मात्र से काम बड़ा नहीं होता....*

*काम बड़ा करने के लिए सोच बड़ा करना पड़ता है....*

*तोषण कुमार चुरेन्द्र*

दुनिया

*होता ना जो चार कदम आगे दुनिया से "तोषण"*
*दुनिया जो है मुझे आठ कदम पीछे धकेल देती**

*जाग उठा शैतान अब गहरी रात के अँधेरों में*
*बचना है तो ढुँढ लो मेरे दुश्मनों का दर कहीं**

तोषण कुमार चुरेन्द्र

जन्मदिवस

*जन्मदिवस पर आज जो,मिला मुझे आशीष।*
*दुआ सभी का साथ हो, जीलूँ लाख बरीस।*

बुधवार, 28 जून 2017

झुमर झुमर के

झुमर झुमर के बरसय पानी,मन मोर अड़बड़ नाचत हे।
घुमर घुमर  के आवय बदरा,संग पवन झकोरा मारत हे।

अधिया गेहे अषाढ़ महिना,पानी के अभी फुहार पड़े।
करिस अगोरा सब किसान मन,करे किसानी बर जोरा करे।
नाँगर बइला कमरा खुमरी,लउठी तुतारी सँवारत हे।
घुमर घुमर के.........१

होवत बिहनिया भुँइया के बेटा,दाई के सेवा बजावय।
हरिहर हरिहर धनहा डोली, लहर लहर लहरावय।
सावन महिना पाख अमावस,तिहार हरेली मनावत हे।
घुमर घुमर के..........२

भोले बाबा ल जाके मनावय,सोला सावन सम्मार के।
धथुरा पाना फूल फर संग,बेल पतिया ल वार के।
काँवरिया मन काँवर काँवर,गंगा जल ल चढ़ावत हे।
घुमर घुमर के..........३

तोषण कुमार चुरेन्द्र

बेटा किसान

बेटा किसान।
भाग के जगइय्या।
हावै महान।

करे तैयारी।
निहारत बदरा।
खेती हे पारी।

कुकरा बासे।
उठना गा भइय्या।
बेरा उगासे।

होत बिहान।
हे बइला नाँगर।
चले किसान।

चटनी बासी।
होवत मंझनिया।
मिटे थकासी।

कथे सियान।
तन मन बलवान।
जय किसान।

तोषण कुमार चुरेन्द्र

रविवार, 25 जून 2017

बरसात

झिमिर-झिमिर पानी गिरय,मोर गाँव के खार।
तरिया-नरवा बड़ भरय,बुड़य खेत अउ पार।।

शनिवार, 24 जून 2017

प्राकृतिक आपदाएं

*हाइकु मञ्जुषा ४९*
*विषय :-प्राकृतिक आपदाएं*

*१.आंधी*

आंधी प्रकृति।
अरियों का दमन।
मिटे विकृति।

*२.रेतीली आंधी*

क्रोधित वात।
लाई रेतीली आंधी।
बन सवालात।

*३.तूफान*

आया तूफान।
सहमें थलचर।
मन हैरान।

*४.बाढ़*

बाढ़ ग्रसित।
था उत्तराखंड।
मन द्रवित।

*५.भूकंप*

आता भूकंप
धरणी विचलित।
लो हड़कंप।

*६.अकाल*

वारि अकाल।
घनघोर बारिश।
हे!महाकाल।

*७.सुनामी*

उठी लहर।
बनकर सुनामी।
ढाया कहर।

*८.भूस्खलन*

सदियों बाद।
केदार भूस्खलन।
फिर आबाद।

*९.ज्वालामुखी*

घोर वलय।
भड़के ज्वालामुखी।
महाप्रलय।

*१०.प्रलय*

न हो प्रलय।
रक्ष पर्यावरण।
करें प्रणय।

*तोषण कुमार चुरेन्द्र*

राम नाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...