रविवार, 31 मई 2020

दिनकर का प्यार

तुझसे मिलने को दिल आज भी बेकरार है।
बरसो से था जिसका आज भी इंतजार है।

मुझसे रूठ गयी नाराजगी किस बात की,
समझ न पाया आखिर ये कैसा टकरार है।

रखा था मैने तुम्हें सर आँखों पे बिठाकर,
जानूँ न मेरी कौन सी बातों से इनकार है।

महकती रहेगी हमेशा गुल बनकर तेरी यादें,
तेरी हर एक एहसास से जिंदगी गुलजार है।

भूलादे तुम्हें रूह से अपने कभी मानना नही,
लगता तुने जाना नहीं ये दिनकर का प्यार है।

तोषण कुमार चुरेन्द्र "दिनकर"
धनगांव, डौंडी लोहारा, बालोद
छत्तीसगढ़,9575070689

शनिवार, 9 मई 2020

लाकडाऊन

*आज दिनांक 9/5/20 व 10/5/20 के लोकडाउन करने में सरकार के दोहरे मत को देखते हुए एक छोटी सी रचना*

*कुण्डलिनी*

देख लाकडाऊन असर,रोजगार भरमार।
कृषक जगत के काम को,बंद करे सरकार।
बंद करे सरकार,काम की कैसा माया।
आधे मरते भूख,आध को काम दिलाया।


*कुण्डलियाँ*

कहते सबसे गाँव में,मुखिया अपनी बात।
धरे कभी ना कान में,बड़ी अजब सौगात।
बड़ी अजब सौगात,खरी खोटी दे गाली।
फिर भी मुखिया आज,करे सबकी रखवाली।
मिले आध को काम,आध हैं भूखे रहते।
कृषक हुये नाराज,देख के बतिया कहते।


तोषण कुमार चुरेन्द्र "दिनकर"
युवा सरपंच व साहित्यकार
ग्राम पंचायत धनगांव

शनिवार, 2 मई 2020

वंदना प्रभु राम को

चंडिका छंद
१३/१३
१३/१३

मिरचा भजिया राँधके,
चटनी तगड़ा भाँजके।
खाले जी अरुणाभ तँय,
भेजत हँव गा पोठ मँय।

नरवा तीर कछार मा,
आबे सोज करार मा।
ठाड़े रहिहँव खेत मा,
देखत रहिहँव नेट मा।।

उल्लाला छंद

८'५/८'५
८'५/८'५

वंदना है प्रभु राम को,
दर्शन की है कामना।
मिल जाए आशीष जो,
चाहूँ कोई धाम ना।।

आए हैं दरबार में,
भर दो झोली आज ये।
तरसे है दीदार को,
मेरे तख्तो ताज ये।।

रखवाला है साथ जो,
गम है किस बात का।
दिल को है विश्वास तो,
डर क्यों काली रात का।।

दिनकर का दिन ढले,
छाई रजनी चाँदनी।
वंदना होती साँझ में,
मचले  है गजगामिनी।

-@तोषण दिनकर

राम नाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...