तुझसे मिलने को दिल आज भी बेकरार है।
बरसो से था जिसका आज भी इंतजार है।
मुझसे रूठ गयी नाराजगी किस बात की,
समझ न पाया आखिर ये कैसा टकरार है।
रखा था मैने तुम्हें सर आँखों पे बिठाकर,
जानूँ न मेरी कौन सी बातों से इनकार है।
महकती रहेगी हमेशा गुल बनकर तेरी यादें,
तेरी हर एक एहसास से जिंदगी गुलजार है।
भूलादे तुम्हें रूह से अपने कभी मानना नही,
लगता तुने जाना नहीं ये दिनकर का प्यार है।
तोषण कुमार चुरेन्द्र "दिनकर"
धनगांव, डौंडी लोहारा, बालोद
छत्तीसगढ़,9575070689