🌿🌿🌿🌿
शीतल नीर
तृप्ति मिले मन को
मन में धीर
🌿🌿🌿🌿
सूना है जग
आ जाओ लौटकर
देखूँ मैं मग
🌿🌿🌿🌿
दीदार तेरा
आरजू में हो तुम
लो खत मेरा
🌿🌿🌿🌿
*तोषण कुमार चुरेन्द्र*
बुधवार, 31 मई 2017
हाइकु
हाइकु
एक प्रयास
*हाइकु*
🌿🌿🌿
कंचन थाल
श्रद्धा के दीप जले
सुमन माल।।
💐💐💐
दर्शन होगा
इंतजार है प्रभु
कहीं तो होगा।।
💐💐💐
दर पें आया
जाऊँ ना खाली हाथ
सबने पाया।।
💐💐💐
दीप जले हैं
खुशियाँ है मन में
भक्त मिले हैं।।
🌿🌿🌿
प्रसाद पाया
हर्षित हुआ मन
तेरी ही माया।।
🌿🌿🌿
*तोषण कुमार चुरेन्द्र*
सियान
*सुनले गोठ सियान के,धरले तैहा कान।*
*हर दिन हर क्षण देखले, मिलही तोला ग्यान।।*
*तोषण कुमार चुरेन्द्र*
कुम्हार
*माटी सान कुम्हार तय, दीया अजब बनाय।*
*रहिके तय अँधियार मा,जग अँजोर पहुँचाय।।*
*हवय गुरु कुम्हार कस,चेला बड़ सिधयाय।*
*कोनों गिनहा झन रहय,सब बर ध्यान लगाय।।*
*माटी सान कुम्हार तैं, दीया अजब बनाय।*
*रहिके तैं अँधियार मा,जग अँजोर पहुँचाय।।*
*तोषण कुमार चुरेन्द्र*
मन का फेरा
राज मोदी का
अच्छा दिन हमारा
ताल जोगी का।
तेरा ना मेरा
लड़ते है क्यूँ लोग
मन का फेरा।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
बेवफाई
विरह की आग बड़ी होती दुखदाई है.
हजारों की भीड़ हो लगती तनहाई है.
कहूँ भला क्या जमानें को तू ही बता,
मेरे कुदरत ने ही मुझसे की बेवफाई है.
तोषण कुमार चुरेन्द्र
मंगलवार, 30 मई 2017
पानी तै पियादे
पानी तैं पियादे मोला सुन भइय्या मोर.
मिटा जाही बने बाबू पियास तइहा मोर...
बड़ धुर ले आवत हावंवमोर बेटी के गाँव ले
सुरता लेतेंव बरतरीबइठ थोरिक छाँव में
जीवरा मोर जुड़ा जातिस माढ़े मनमोर
मिटा जाही बने बाबू पियास तइहा मोर..
हावय बड़धुरिहा संगी मोर गाँव धनगाँव
कोयली जिंहा गावय गाना कंऊवा करे काँव
खरखरा के तीर परथे लेले थोरिक शोर
मिटा जाही बने बाबू पियास तइहा मोर....
सेवा करले पुन कमाले जिनगी के सार हे
जिनगी के नंइहे ठिकाना सार उपकार हे
काहत हावय तोषण ह बात मान मोर
मिटा जाही बने बाबू पियास तइहा मोर.....
तोषण कुमार चुरेन्द्र
इंटरनेट
महिमा इंटरनेट के,बिन एकर का होत।
का छोटे अउ का बड़े,बोझा सबके ढोत।।
ढमाया इंटरनेट के,सबला नाच नचाय।
दुनिया सब मोहाय हे,कोनों बच नइ पाय।।
सोमवार, 29 मई 2017
किसान
करजा करके खेत बर, लाने खातु किसान।
जेन जमा नँइ कर सके,फंदा गला बिहान।।
सेवा करइया तै हरस,भुंँइया के भगवान।
भरथस सबके पेट ला,हावस तही किसान।
पानी बादर देख के,खेती करय किसान ।
आँकर सेवर जोत के, बोंथे वोहा धान।।
शनिवार, 27 मई 2017
सका...
दोषी हूँ दुनिया का सम्हल ना सका
मिट्टी हूँ दीपक बनकर जल ना सका
चाहत अंधेरे से हटने की मुझे
डर था इस दिल में तोषण चल ना सका
तोषण कुमार चुरेन्द्र
मंगलवार, 23 मई 2017
सिक्का दस के
*सिक्का दस के*
सबला देवत हे दनादन चोट
जबले आए दु हजार के नोट
चिल्हर के बड़ किल्लत देखौ
दस के सिक्का होवय खोट
जाबे बजार दु हजार धरके
नंइ दे कोनों चिल्हर करके
नोट भंजाय के चक्कर में
मांगेल पड़थे पंइय्या परके
दिखय नहीं दस के सिक्का
खोजे न मिले इक्का दुक्का
दंग खा जथव बजार जाके
लहुट आथंव बनके मुक्का
बात ल कोन फयलाय हे
सबके जी सकपकाय हे
कतको फेंकय बहिरी म
धरके कतको लुकाय हे
बात लबारी मोला लागथे
सब अपने अपन हाँकथे
सही बात जाने नहीं अउ
दुसर के मोहाटी झाँकथे
रहेर दार हमर गलत हे
दस के सिक्का चलत हे
गुल्फी खाथे लइका मन
धंधा ह फूलत फलत हे
🖋 *तोषण कुमार चुरेन्द्र*🖋
मजदूर
*मजदूर*
===================
मैं भी तो एक मजदूर हूँ
आदत से भी मजबूर हूँ
काम के पीछे लेता दाम
इसीलिए तो मगरूर हूँ
===================
पंछी जो छोड़े अपना डेरा
वैसा ही होता मेरा सवेरा
खूब लगन से काम करूँ
तर हो जाता तन ये मेरा
===================
थका हारा घर को आता
रूखा सुखा खाना खाता
लोरी सुनाती ठंडी हवाएँ
निंदिया रानी मुझे सुलाता
===================
मेरी रोज की यही कहानी
भरता चलूँ मौजो में रवानी
सुनी होगी दादी के मुख से
सुन वही तोषण की जुबानी
===================
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद छत्तीसगढ
सीखा
धरती से उठकर चलना सीखा
तनहाई में खुद ढलना सीखा
आये ना कोई साथी अपने
बदहालों में भी पलना सीखा
तोषण कुमार चुरेन्द्र
९६१७५८९६६७
सोमवार, 22 मई 2017
तोषण के दोहे
(१)
*प्रेम...बोल तू बोल रे , राह रही हूँ ताक।*
*बिना प्रेम के जीवरा, देह होय रे खाक।।*
(२)
*आय जगत तै कंगला , ढेर दौलत कमाय।*
*जीयत भरके तोर जी, जुच्छा जमपुर जाय।।*
(३)
*ददा कहे बेटा मनी, बात मान ले मोर।*
*खेत खार चेतार ले, हाथ चला ते जोर।।*
(४)
*गाँव खार के खेत के , का करथस जी गोठ।*
*बोय जिहाँ कोदो तिली , बने रहे गा पोठ।।*
(५)
*धनिया भाटा खेखसी , लागे नदिया तीर।*
*मिरचा नुनछुर डार के , केकड़ी धरके चीर ।।*
(६)
*आवत कुल्फी देखके , लइका लागे रोय।*
*पइसा रुपिया माँगके , आसा अपन पुरोय।।*
*तोषण कुमार चुरेन्द्र*
रविवार, 21 मई 2017
ससुर
धनी मनी मोर कका ससुर
कार्तिक राम हे सही ससुर
अपन बेटी मोला बिहा के
होगे जनम भर वो बेकसुर
तोषण कुमार चुरेन्द्र
तलब
इल्तिजा थी मेरे रब से
इंतजार है मुझे तब से
ख़्वाइश थी इंसान की
चला बसा मैं तलब से
तोषण कुमार चुरेन्द्र
पेंड़
पेंड़
बीजा के कहनी हावै अनंत
कहै सुुनै गुनै सब साधु संत
बोंवै बीजा जो खेत किसान
सेवय प्रतिदिन सांझ बिहान
चीर धरणी जे बीजा निकले
मनवा सबै खुसीया दिखले
पानी खाद संग करे सिंचाई
खरपतवार के है करे निंदाई
जतन कर कर पौधा बनाई
नाना भांति दवाई खिलाई
पेंड़ बन गया जब धीरे धीरे
तो बैठे छाँव उनके राहगीरे
सावन में जब पानी बुलावै
मेघ सो मिल झूम नाचेे गावै
लगने लगा जब उसमें फूल
लगे झूलै भँवरे झूलम झूल
फूल से फर न होवत देरी
चिरइ चिरगुन खावय हेरी
पाकल फर के पाकल बीजा
पावै अपन फेर मूल नतीजा
पेंड़ करता है सबकी भलाई
बात समझलो तुन सब भाई
ना हमसे कुछ वो बदले लेता
छाँव फल फूल सब हमें देता
उपकार बहुत वो हमपे करता
कट जाए पर आह न भरता
कर जोड़ सबसे मेरी प्रार्थना
पेंड़ कभी लगाके न काटना
एकेक पेंड़ हम सभी लगाएं
अपना भविष्य स्वयं बचाएं
🌴तोषण कुमार चुरेन्द्र🌴
चाटुकार
साधे बर अपन काम लबर लबर गोठियात देखेहंव
जगा खुद बनाय बर पाछू पाछू पूछी हलात देखेहंव
कथे सियान सिरतो जी ऊपर राम तरी कसई कस
पाके मउका पीठ पाछू कटारी जोर घुंसात देखेहंव
तोषण कुमार चुरेन्द्र ९६१७५८९६६७
पेंड़
पेंड़
बीजा के कहनी हावै अनंत
कहै सुुनै गुनै सब साधु संत
बोंवै बीजा जो खेत किसान
सेवय प्रतिदिन सांझ बिहान
चीर धरणी जे बीजा निकले
मनवा सबै खुसीया दिखले
पानी खाद संग करे सिंचाई
खरपतवार के है करे निंदाई
जतन कर कर पौधा बनाई
नाना भांति दवाई खिलाई
पेंड़ बन गया जब धीरे धीरे
तो बैठे छाँव उनके राहगीरे
सावन में जब पानी बुलावै
मेघ सो मिल झूम नाचेे गावै
लगने लगा जब उसमें फूल
लगे झूलै भँवरे झूलम झूल
फूल से फर न होवत देरी
चिरइ चिरगुन खावय हेरी
पाकल फर के पाकल बीजा
पावै अपन फेर मूल नतीजा
पेंड़ करता है सबकी भलाई
बात समझलो तुन सब भाई
ना हमसे कुछ वो बदले लेता
छाँव फल फूल सब हमें देता
उपकार बहुत वो हमपे करता
कट जाए पर आह न भरता
कर जोड़ सबसे मेरी प्रार्थना
पेंड़ कभी लगाके न काटना
एकेक पेंड़ हम सभी लगाएं
अपना भविष्य स्वयं बचाएं
🌴तोषण कुमार चुरेन्द्र🌴
भारतीय
अहं है मुझे भारतीय होने का
भारत के लिये तन खोने का
तुम क्या जानो जीना क्या है
मर कर धरती पर सोने का
तोषण कुमार चुरेन्द्र
जलन
किसी ने कहा हमसे तोषण क्यों हरकत ऐसी करते हो
कहा हमने सच ही तो बोला है भला तुम क्यो जलते हो
तोषण कुमार चुरेन्द्र
मयखाना
सुप्रभातम्
शुरुवात
सुरा के साथ
*गर शराब मिटाता दिल के सारे गम*
*तो मेरी दुनिया इतनी गमगीन न होती*
त़ोषण कुमार चुरेन्द्र:
आबाद होता देखा नहीं हमने किसी को जमाने में
सवेरे से जाकर जो डुबे रहते हम हैं बुरे मयखाने में
हंसऊला
गरमी के दिन रहय
संगवारी घर मंझनिया बइठे बर गेंव
संगवारी ह अपन टुरा रामु ल कथे जा बेटा
*कोको* लाबे
मेह अलकरहाच खुस होगेंव आज संगवारी घर *कोको* खाय बर मिलही
रामु *कोको* धरके अइस
मेह सन्न खाके पटवा म गिर गेंव
मेह समझत रेहेंव दुसरा *कोको*
ले अइस दुसरा *कोको*
का समझे........
*कोको* मतलब
*कोका*
*कोला*
🤣🤣🤣🤣🤣😜🤓😅😆😁
शनिवार, 20 मई 2017
लगा
खुद पर खुद का,नहीं पहरा सा लगा
अब यादों का, जख़म गहरा सा लगा
कैसे? तुम्हे भुलाऊं ओ रांझणा
मंजरे गम की , यहीं ठहरा सा लगा
तोषण कुमार चुरेन्द्र
शुक्रवार, 19 मई 2017
हसऊला
क्या जमाना हैं
मुद्दतों बाद खुदा ने हमसे पूछा-बेटा !
जमीं पे आके कर क्या रहे हो ?
हमने कहा -या खुदाया ! जो आप
करते हैं ऊपर से .....
वही कर रहे हैं हम नीचे से ...
भला क्या?खुदा ने हमसे पूछा।
हमने कहा- जहाँ के लोगों को देखने का........
तोषण कुमार चुरेन्द्र
जनऊला
*जनऊला*
*(१)*
*आघू कटे नस बने,पाछू कटे बने मुड़ी...*
*बीच कटे सगा बने,बताबे मिलही पुड़ी...*
*(२)*
*आघू हटे झुंड बने,पाछू हटे त पाछू...*
*बीच हटे चुँदी बने,बताबे उत्तर धाँसू...*
*(३)*
*आघू निकले जंगल बने,पाछू निकले बने हाँ ...*
*बीच निकले मार बने,खोजो उत्तर यहाँ वहाँ...*
*(४)*
*आघू बरगे होगे हरा, पाछू बरगे चाह भरा...*
*बीच बरगे सावन सुरता,उत्तर देदे तेहा जरा...*
*उत्तर.१.सरग.२.बादल.३.हवन.४.मोहरा.*
// *तोषण कुमार चुरेन्द्र*//
बोर..
सब रहते हैं मदमस्त अपने में
किसी की यहाँ कोई शोर नहीं
जा रहा हूँ...सब छोड़ के यारों
हो न जाऊँ भीड़ मे बोर कहीं
तोषण कुमार चुरेन्द्र
नवा जमाना
*नवा जमाना*
कुकरा के जगा आज देखले
चरबज्जी अलारम बाजथे
सील बाहरी अब घलो नंदागे
प्लास्टिक बाहरीम बुहारथे
पींवरी सुही मा घर चमके जी
आगे चिक्कन पंढ़री चुना देख
भाजी पहिली डबका खावन
जेला तेल संन भुंजथे बघारथे
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धरम करम
करम करत उमर पहागे करिया चुँदी होगे सफेद
धरम करत जीवन बीते बदरा गोठ ओती खेद
देखाय खाय के दांत ल एक्के बरोबर तै जतन
पुन के गघरी तभे भरही जब पेंदी नंइ रही छेद
मया
तोर मोर बंधना मया के छुटे ना संसार म
झन होय कभू कमी जोही तोर मोर प्यार म
हवय गजब अगोरा मोर हिरदे के भीतरी
बइठे गुनंव तोला नदिया नरवा कछार म
// *तोषण कुमार चुरेन्द्र* //९६१७५८९६६७//
गुरुवार, 18 मई 2017
राजा
🦁🦁🦁🦁🦁🦁🦁🦁🦁🦁🦁
हूँ राजा मैं इस जंगल का कोई मुझे ना छेड़ना
😎😎😎😎😎😎😎😎😎😎😎
देता नहीं दिखाई कुछ भी आँखे नहीं तरेरना...
💪💪💪💪💪💪💪💪💪💪💪
आ जाते औकात पे जब अपनी भी नहीं सुनते..
🏑🏑🏑🏑🏑🏑🏑🏑🏑🏑🏑
कच्चे नहीं खिलाड़ी हम सोच समझ के खेलना...
🖌🖌🖌🖌🖌🖌🖌🖌🖌🖌🖌
तोषण कुमार चुरेन्द्र
कविता
कलम के सियाही कभू सिराय नहीं...
हमर मनवा के कविता नंदाय नहीं...
खुसी खुसी शुभकामना भेजत हवन
कतको बांधव मैंहा पार बंधाय नहीं
तोषण कुमार चुरेन्द्र
माँ
देखता जब तस्वीर आपकी
आँसू...आँख से आ जाती है
हाथ..थाम संग चलना सीखा
ओ *माँ*...बहुत याद आती है
___🖋तोषण कुमार चुरेन्द्र
देस के खातिर जीबो...
*देस के खातिर जीबो*
===================
कहिथे मन संगवारी मोरो
देस के खातिर जीबो...
अवघड़िया शंखर जइसन
हलहल जहर पीबो...
===================
दाई ह राखे नव महीना ले
कोख म अपन पोटार के
जनम से लेके मरनी तक
धरती ह रखे हे सँवार के
छाती ले बोहे बनके गोरस
अमरित पानी पीबो....
कहिथे मन संगवारी मोरो
देस के खातिर जीबो...
अवघड़िया शंखर जइसन
हलहल जहर पीबो...१
===================
खेले जिंहाँ राणा शिवा
हमुला आथे मरेबर इंहाँ
लछमी तात्या के रनांगन
पांडव जीते युद्ध जिंहाँ
भगत अजाद सुखदेव सही
हमुहा मरके जीबो...
कहिथे मन संगवारी मोरो
देस के खातिर जीबो...
अवघड़िया शंखर जइसन
हलहल जहर पीबो...२
===================
कसम लाल बाल पाल के
अब बैरी ल धुर्रा चटाइंगे
आगुम आही बैरी दुसमन
राखर म ओला मिलाइंगे
भरके बोरा धरके सुंतरी
सुजा म जमके सीबो....
कहिथे मन संगवारी मोरो
देस के खातिर जीबो...
अवघड़िया शंखर जइसन
हलहल जहर पीबो...३
===================
आतंकी नक्सली के कारन
लाख बिपत ल सहत हवन
कब जागही भाग हमर जी
गोठ अतरी भर कहत हवन
बरा चुरोय म कहीं नी होवय
नास बर एकर भीड़बो...
कहिथे मन संगवारी मोरो
देस के खातिर जीबो...
अवघड़िया शंखर जइसन
हलहल जहर पीबो...४
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*तोषण कुमार चुरेन्द्र*
*धनगाँव डौंडी लोहारा*
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arhkepagakalagi.blogspot.com
बेटी
*बेटी*
*बेटी हंव छत्तीसगढ के*
*जग म अलख जगाहूँ*
*दाई ददा के देखे सपना*
*एक दिन मैं सिरजाहूँ*
*गरब करही मोर देस जब*
*स्व देस खातिर मर जाहूँ*
*आगु आही जेन बैरी मोर*
*मैं सोजहे पताल पहुचाहूँ*
*रोथे जेन हर बेटी जनम म*
*ओ दाई ददा ल धिक्कार हे*
*बेटा बरोबर राखव महूँ ला*
*जीए के मोरो अधिकार हे*
*बेटा बनाथे ददा ल भिखारी*
*बेटी ह बनाथे महादानी गा*
*बात अगर ते समज जबे त*
*कहिलाबे मुनि तै ग्यानी गा*
*बेटी मैं तारौं दुठन कुल ला*
*बगिया कस घर संसार गा*
*ददा दाई के बड़ मया पाथों*
*ससुर सास के दुलार गा*
*मैं बेटी अंव रुप अब्बड़ हे*
*दाई भौजी देरानी काकी*
*मोसी फुफु दीदी कस मैंहा*
*बहिनी बनके बाँधव राखी*
*बेटा बेटी हे एक समान गा*
*झन पालव गा मन में भरम*
*बेटी बचाना हे बेटी पढ़ाना*
*सबके बने इही धरम करम*
©®
*तोषण कुमार चुरेन्द्र*
सोमवार, 8 मई 2017
मानवता
मानवता के मन मन्दिर में
ज्योति जला दिव्य ग्यान की
आन पड़ी है आज जरूरत
मानवता की पहचान की
आडम्बर के पहने चोले सब
भ्रमण कर रहें हैं लोग यहाँ
गुंजन होनी चाहिए भूमि पर
श्री कृष्ण के गीता बखान की
तोषण कुमार चुरेन्द्र
सीख
💐💐💐💐💐💐💐
बढ़िहा बढ़िहा सीख हे ,देवत सबला ग्यान .
💐💐💐💐💐💐💐
आवव सबला सीख के ,करबो एखर मान...
💐💐💐💐💐💐💐
दारू
बिगड़े ल सुधारत नंइहे बने दिन के गोठ करथे
बेंचत हे खुदे दारू खिसा अपन पोठ करथे
बेचइय्या ल काय चिंता काकर घर के फिक्कर
पियइय्या के संगे तोषण लइका सुवारी मरथे
तोषण कुमार चुरेन्द्र
रविवार, 7 मई 2017
फना
फऩा होने चला हूँ आज फिर माँ के कदमों तले
होगी रहमत खुदा की फिर आऊंगा माँ की गोद में
तोषण कुमार चुरेन्द्र
रूख़सत...
हो जाऊँ जो रूखसत तेरी दुनियाँ से "तोषण"
गुजारिश़ है समेट लेना अपनी यादों के पन्नों में
तोषण कुमार चुरेन्द्र
चल पड़ा हूँ...
चल पड़ा हूँ उस राह मैं जहाँ किसी के पैर के निशाँ नहीं है
ढुँढ रहा हाथों मे चिराग लिये खबर मुझे है वो यहीं कहीं है
रहे धरती या आकाश में या खुशबूओं में छिपे फूलों की,
जेहन में बसी है उसकी यादें मुझको राह दिखाती सही है..
तोषण कुमार चुरेन्द्र ९६१७५८९६६७
बुधवार, 3 मई 2017
हरदी के रंग
दुलहिन के अंग-अंग रंगत हे कांचा हरदी के रंग
भंवरा के जाही पिया घर छोंड़ सब सखी के संग
सपना...सजावत आँखी म पुलकावत हे तन-मन
दाई ददा ल...छोंड़े के दुख पिया मिलन के उमंग
तोषण कुमार चुरेन्द्र
राम नाम
राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...
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"पाँच बातें " पाठ - 14 "पाँच बातें " कक्षा - 4 1- हर एक काम इमानदारी से करो ! 2- जो भी तुम्हारा भला करे, उसका कह...
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एक सिपाही सीमा मे डटे हे ।अइसन देवारी तिहार म । त मन म का बिचारत हे। का काहत हे आवव देखन ।कविता के चार लाइन हमर देस के जवान मन बर सादर समर...
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चंडिका में लघु प्रयत्न मात्रा भार १३-१३ ^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^ भारत मेरा देश है, अलग यहाँ का वेश है। ऋषि मुनियों की ये धरा...