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रविवार, 21 मई 2017

हंसऊला

गरमी के दिन रहय
संगवारी घर मंझनिया बइठे बर गेंव

संगवारी ह अपन टुरा रामु ल कथे जा बेटा
*कोको* लाबे

मेह अलकरहाच खुस होगेंव आज संगवारी घर *कोको* खाय बर मिलही

रामु *कोको* धरके अइस

मेह सन्न खाके पटवा म गिर गेंव

मेह समझत रेहेंव दुसरा *कोको*
ले अइस दुसरा *कोको*



का समझे........ 


*कोको* मतलब

*कोका*
*कोला*
🤣🤣🤣🤣🤣😜🤓😅😆😁

शुक्रवार, 19 मई 2017

हसऊला

क्या जमाना हैं

मुद्दतों बाद खुदा ने हमसे पूछा-बेटा !

जमीं पे आके कर क्या रहे हो ?

हमने कहा -या खुदाया ! जो आप

करते हैं ऊपर से .....

वही कर रहे हैं हम नीचे से ...

भला क्या?खुदा ने हमसे पूछा।

हमने कहा- जहाँ के लोगों को देखने का........

तोषण कुमार चुरेन्द्र

राम नाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...