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सोमवार, 8 जून 2020

उगा भास्कर

हाइकु 575 का वार्णिक काव्य है जिसमें कट मार्क का विशेष महत्व है।उससे दो बिम्ब की झलक मिलती है। कट मार्क से कारण और फल प्रदर्शित होता है।


उगा भास्कर-
सरोवर में तैरता 
हंस का जोड़ा।1।

पराग कण-
मंडराता भँवरा
पुष्प बाग मे।2।

अमा की रात-
टिमटिमाते जुग्नू
धरती पर।3।

नदी बहती-
पावस प्रदेश में
हिरण झूंड।4।

बरखा आई-
लहराता सागर
अम्बर तले।5।


तोषण चुरेन्द्र दिनकर

बुधवार, 8 अप्रैल 2020

होली विशेष

रंगों का महापर्व होली की
हार्दिक बधाई व शुभाशया

होली विशेष
हाइकु पंच समीक्षार्थ

होलिका दाह~
श्रीफल चढ़ातें है
गाँव के लोग।1।

होली परब~
रंगों से है खेलती
नन्हीं बालाएँ।2।

नील बरन~
धरती को रँगती
फागून रंग।3।

होली की धूम~
नगाड़ा थाप पर
नाचते बाल।4।

फागुवा राग~
बसंत में झूमती
आम्र मंजरी।5।

तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
डौंंडी लोहारा बालोद छ.ग.

मंगलवार, 10 मार्च 2020

होरी हे

रंगों का महापर्व होली की
हार्दिक बधाई व शुभाशया
होली विशेष
हाइकु पंच समीक्षार्थ

होलिका दाह~
श्रीफल चढ़ातें है
गाँव के लोग।1।

होली परब~
रंगों से है खेलती
नन्हीं बालाएँ।2।

नील बरन~
धरती को रँगती
फागून रंग।3।

होली की धूम~
नगाड़ा थाप पर
नाचते बाल।4।

फागुवा राग~
बसंत में झूमती
आम्र मंजरी।5।

तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
डौंंडी लोहारा बालोद छ.ग.

बुधवार, 11 दिसंबर 2019

मकड़जाल

चित्र चिंतन
11/12/19
=========
1.
मकड़ी जाल
तरूवर शाख पे--
बच्चे झूलते।
=========
2.
अंतर जाल
दुनिया में बिखरे--
सूर्य किरणें।
=========
3.
जाल फैलाये
मकड़ी निहारती--
कीट पतंगा।
==========
4.
उलझी मक्खी
मकड़ी के जाल में--
ओस की बुँदे।
==========
5.
मकड़जाल
बुनते न थकती--
सीखें सबक।
==========
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा
बालोद, छत्तीसगढ़

बुधवार, 25 अप्रैल 2018

औषधालय

*औषधालय*

कानन आज
बना औषधालय
मिलती दवा.

मिटे जीवन
बिन औषधालय
गाँव वीरान.

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद छ. ग.

मंगलवार, 27 मार्च 2018

काँटें

काँटे

है सुरक्षित
महकता गुलाब
काँटों के मध्य...

कैसे बढ़ता
काँटोें भरी राह पे
अड़चन है...

जग वीरान
काँटों भरा जीवन
सुमन नहीं...

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगाँव

शनिवार, 24 मार्च 2018

दरार

मिटे दरार--
बँधे एक्य सूत्र से
नवरात्रि में.

हुए दरार--
भाई भाई के मध्य
बढ़ती दूरी.

बँटता जग
दरारों के दरम्याँ
समेटो कोई---

कैसे खिलता
गुलाब सीमा पर
बाधा दरार---

रहें मिलके--
भर दें दरार को
प्रेम रेत से.

तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगाँव

बुधवार, 21 मार्च 2018

नवरात्रि

नवरात्रि विशेष

मातृ पूजन
नवजोत जलायें
नवरात्रि में....

जय माता की
जयकारा लगायें
शेरावाली की....

तोषण कुमार चुरेन्द्र

शुक्रवार, 23 फ़रवरी 2018

सेवा के मेवा

हाइकु
सुत्र ५/७/५

सेवा के मेवा
   मिलही  एकदिन
      धीरज  धर.....

मोर  करम
   हवय  बईमान
      देवय  धोखा

ददा  के  हाथ
   किरपा  बरसय
      सकेलो  सब...

पइसा  ऱुख
   पनपे  भष्टाचार
      मुड़  के  पीरा...

पानी  लावय
   बंगाला  के  चटनी
        बड़  सुहाय...

बिदा  बेटी  के
  ददा  बड़  रोवय
      दाई  सुसके

मोर  मोहना
   जाबे  कहाँ  बाँचके
       रँगहूँ  तोला...

सुग्घर गोठ
   छत्तीसगढ़िहा के
      लगथे मीठ...

रंग बे मोला
   नेवता देवत हों
      आजबे तैहा...

मिलके दुनों
   रचाबो रंग रास
      होरी तिहार...

अपन गोठ
    बढ़िहा जमत हे
        जोड़ी हमर...

मंगलवार, 20 फ़रवरी 2018

धूल मिट्टी पत्थर

*💐🙏🏻~ हाइकु मञ्जूषा ~🙏🏻💐*
                   *(क्र. - 10)*
          *दिनांक 21/02/2018*
                 *दिन - बुधवार*   
          *हाइकु सृजन का विषय*

                       *धूल*
                       *मिट्टी*
                      *पत्थर*

        *विषय संदर्भित हाइकु सृजन काल प्रातः 08.00 से रात्रि 08.00 बजे तक ।*

*संचालक - प्रदीप कुमार दाश "दीपक"*
💐💐💐💐💐💐💐💐💐

धूल

गोधूली बेला
गाय का आगमन
उड़ते धूल ...

मिट्टी

महके मिट्टी
बरसती बूंदो से
अंकुर बीज...

पत्थर

पूजे जहान
पत्थर की मूरत
आस्था प्रतीक....

तोषण कुमार चुरेन्द्र

रविवार, 18 फ़रवरी 2018

समझदारी

*💐🙏🏻~ हाइकु मञ्जूषा ~🙏🏻💐*
                   *(क्र. - 09)*
          *दिनांक 19/02/2018*
                 *दिन - सोमवार*   
          *हाइकु सृजन का विषय*

                       *कली*
                       *पुष्प*
                      *भ्रमर*
                      *बसन्त*

        *विषय संदर्भित हाइकु सृजन काल प्रातः 08.00 से रात्रि 08.00 बजे तक ।*

*विषय प्रदाता - आ. किरण मिश्रा जी*
*संचालक - प्रदीप कुमार दाश "दीपक"*
💐💐💐💐💐💐💐💐💐

समझदारी
खिलने दे कली को
जग महके....

विकल पुष्प
काँटो के दायरें में
मन द्रवित....

भ्रमर लक्ष
मंडराते करीब
सुता परेशाँ...

बसंत राग
कोयल गाती कैसे?
बनके कैदी....

तोषण कुमार चुरेन्द्र

शुक्रवार, 9 फ़रवरी 2018

चली बयार

*" हाइकु मंच छत्तीसगढ़ "*
💐💐💐💐💐💐💐

*09 फरवरी आज के हाइकु का विषय :-*
       *बसंत*
       *बयार*
       *रंग*
       *सरसों*
       *गुलाब*

    *चयनित हाइकु*

*01. गुलाब रोया*
*शहीद से लिपट*
*सुपुत्र खोया ।*

*✍🏻स्नेहलता वर्मा*

*02. परसा फूले*
*फागुन रंग खिले*
*वन झाड़ में ।*

*✍🏻नरेश कुमार जगत*

*03.चली बयार*
*लिये फागुन राग*
*जग रंगोली ।*

*✍🏻तोषण कुमार चुरेन्द्र*

*अतिरिक्त : ----*

*01.रंग-बिरंगे*
*प्रसूनों से सज के*
*प्रकृति झूमे ।*

*✍🏻सविता बरई*

💐💐💐💐💐

*विषय प्रदत्त : आ. अनिता मंदिलवार "सपना" जी*
*समीक्षिका : आ. अनिता मंदिलवार "सपना" जी*
*हाइकु चयनकर्ता : आ. देवेन्द्र नारायण दास जी*
*संचालक : प्रदीप कुमार दाश "दीपक"*
💐💐💐💐💐💐💐

गुरुवार, 8 फ़रवरी 2018

माँ की सुरत

माँ की सूरत
आईना बेटियों की
नेक नियत...

तेरी ही छवि
दे माँ नव जीवन
बनूँगी रवि...

बनूँ तूफान
मुश्किलों से मैं लड़ूँ
हारे चट्टान...

बिटिया प्यारी
सीता सावित्री मनु
राज दुलारी...

शिवा की माता
जिंदादिली जीजा की
भाग्य निर्माता...

चलूँ उड़ते
स्वच्छंद अंबर पे
मन झूमते...

तोषण कुमार चुरेन्द्र

ज्ञान प्रदाता

ताँका

ज्ञान प्रदाता
संवारता जीवन
राष्ट्र निर्माता
जगमगाता जग
सुदृढ़ पग - पग

🚶🚶🚶🚶

ताँका

मेरा  जीवन
उलझाता  समय
है  आजीवन
मंगल  की  तलाश
है  जगत  उदास

हाइकु

बरसे आग
क्रोधित दिनकर
अजब राग

बहे सरिता
करने उपकार
धरा पुनिता....

सींचती धरा
आलोकित चमन
हो हरा भरा...

हो अग्रसर
चरैवेति कामना
झरना झर...

मिटाती प्यास
अंतरात्मा संतुष्ट
सबकी आस...

भूमि पावन
जन गण हर्षित
मनभावन

जगमगाया
दीप राजिम कुंभ
मन लुभाया...

श्रद्धालु झुमे
पुलकित हृदय
करते जय...

तोषण कुमार चुरेन्द्र

बसंत बयार

" हाइकु मंच छत्तीसगढ़ "
      09/02/2018
आज के हाइकु का विषय
          💐💐💐

फरवरी माह को ध्यान में रखते हुए ये विषय :-

बसंत//बयार
//रंग//सरसों //गुलाब

विषय प्रदत्त : आ. अनिता मंदिलवार "सपना" जी

समीक्षिका : आ. अनिता मंदिलवार "सपना" जी

हाइकु चयनकर्ता : आ. देवेन्द्र नारायण दास जी

संचालक : प्रदीप कुमार दाश "दीपक"

को सादर संप्रेषित....

*बसंत*

खिले  पलाश
मदमाती  बसंत
आम्र  मञ्जरी...

*बयार*

चली  बयारें
लिये  फाल्गुन  राग
जग  रंगीली...

*रंग*

रंग  परब
छटा  इंद्रधनुषी
उड़े  गुलाल...

*सरसों*

पीली  सरसों
हरीतिमा  धरा
घानी  चुनरी...

*गुलाब*

सुर्ख  गुलाब
प्रेम  परिचायक
जगाते  ख्वाब...

बुधवार, 17 जनवरी 2018

तरु है दादा

१७-१-१७
का हाइकु

तरु  है  दादा
परिवार  का  मूल
नेक  इरादा

जीवन  मेरा
पिता  का  आशीर्वाद
छाँव  का  घेरा

मूरत  माँ  की
ममता  का  आँचल
तीरथ  झाँकी

भातृ  का  स्नेह
दुलार  भउजी  की
कंचन  मेह

बहन  की  राखी
स्नेह  भरी  रसरी
उड़ती  पाखी

तोषण कुमार चुरेन्द्र
https://arhkepagakalagi.blogspot.in/?_e_pi_=7%2CPAGE_ID10%2C1582631584

सोमवार, 20 नवंबर 2017

दिन ढलते

आँसू कहते
कब आओगे तुम
दिन ढलते.....

निहारुँ राह
है मन आनंदित
प्रेम की चाह...

हो आगमन
चकवा निहारती
स्वाती की बूँद....

तोषण कुमार चुरेन्द्र

शभकामना

एकता शक्ति
पूरे हो अरमान
शुभकामना

ओस की बूँदे
टिमटिमाते तारे
धरा अम्बर...

कर्म है तेरा
न हो इच्छा फल की
कृपा ईश की...

खेलते बच्चे
धरना में शिक्षक
तम भविष्य

माँ की डाँट
नसीब में भी नही
रुठी किस्मत.. .

माँ की यादें
है अंतरात्मा बसी
भीगी पलकें

तोषण कुमार चुरेन्द्र

रविवार, 19 नवंबर 2017

अपना गाँव

तरु की छाँव
खेलता बचपन
अपना गाँव

मिट्टी चंदन
निखरित मस्तिष्क
कोटि वंदन

बहे सरिता
है धरा पल्लवित
मग पुनिता

कुँजती पिक
लगे मनभावन
देती सीख

कृषक झुमे
लहलहाते धान
माथा चुमे

पुष्प पलाश
देती नव चैतन्य
पूरी तलाश

तोषण कुमार चुरेन्द्र

शुक्रवार, 17 नवंबर 2017

राम नाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...