बुधवार, 26 अप्रैल 2017

मरना होगा

जिंदा गर रहना है साहब तो मरना होगा"
याद करें दुनिया ऐसा कुछ करना होगा"
महान होता नहीं कोई यूँ ही जहान में"
महानता पाने काज महान करना होगा"
तोषण कुमार तोषण कुमार चुरेन्द्र

फना...

फना... होने चले हम....उनके प्यार पर
मजाक...ना उड़ाना कभी..इस हार पर
दो साहिलों को...जोड़ा है. हमने तोषण
दूर जो रहे जमाने से कभी मझधार पर
तोषण कुमार चुरेन्द्र

कविता

निकल  धरिणी के गर्भ से  बन सरिता वो बहती है ।
कलकल छलछल करती हुई वअग्रसर वो रहती है ।
गहन तिमिर से मुझे निकालो दुनियाँ के गुलजार में ,
अंतर्निहित दबी  प्रतिभा मेरी  कविता वो कहती है ।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र  ९६१७५८९६६७

तड़प रही है

तड़प रही है कब से देखो मेरी हाथ तलवार लिये
छोड़ूं ना अब नक्सलियों को तीव्र ललकार लिये
बहुत हो चुका अत्याचार अब नामुराद दरिंदों का
छत्तीसगढ का मै लाल बरसूँगा बस फुंकार लिये
तोषण कुमार चुरेन्द्र

करले जोरा

कोसिस कर गढ़ना गढ़़ हमु मनला बढ़ा तंहूँ बढ़
########################
करले  जोरा  जाय के, भजले तैहा राम।
काया माया सब रही, पाले तै विसराम।।
@@@@@@@@@@@@@@@@@
ध्येय सबन के एक हो, पावव सबले ग्यान।
ग्यान बटत हे रोज के,आवव करलव पान ।।
#########################
तोषण कुमार चुरेन्द्र

नहीं जानते

नहीं जानते दुनिया वाले हमें कसूर हमारा नहीं है
नही है कोई गम जो नाम सूची मे हमारा नहीं है
दिया है जीवन हमे रब ने बड़े नसीबों से तोषण
देश पे मिटना भला किसको जहाँ में प्यारा नहीं है
तोषण कुमार चुरेन्द्र

मंगलवार, 25 अप्रैल 2017

महतारी के पतिया

छत्तीसगढ के जम्मो लइका सियान
जवान ल
*छत्तीसगढ महतारी के पतिया*
💐💐💐💐💐💐
कका रचना मोरो पढ़ लेतेव
बिचार थोरिकिन  कर लेतेव
👏👏👏👏👏👏
दाई के गोदी म बेटा मरत हे
कलहर  के  गोहार  करत हे
😭😭😭😭😭😭
सुन छत्तीसगढिहा बेटा मोर
करव  नही गा  काबर  शोर
😳😳😳😳😳😳
देखत रहू कब तक अइसने
पहिली ले वइसनेके वइसने
🤺🤺🤺🤺🤺🤺
नक्सली ल जो धुर्रा चटावव
मोर दुध के करजा चुकावव
🏋‍♀🏋‍♀🏋‍♀🏋‍♀🏋‍♀🏋‍♀
जेन असल हे मोर औलाद रे
बनके बरस तै जा फौलाद रे
🤺🤺🤺🤺🤺🤺
लेना हे सबके इंतकाम तोला
दे बैरी के मुड़ी काटके मोला
⚔⚔⚔⚔⚔⚔
मरना हे तोला सौ ल मार के
छत्तीसगढ ला बने संवार के
🖋🖋🖋🖋🖋🖋
तोषण कुमार चुरेन्द्र
९६१७५८९६६७

रविवार, 23 अप्रैल 2017

बेटी

एक दिन मोर अंगना म किलकारी मारत ,चिरइ सही चहकत ,कोयली बरोबर कुहुकत,मोर बेटी ह खुशी के पेटारा धरके अइस ,जेकर गोड़ के माड़त मोर घर म दुख दरिदरी बिपत्ति जतिक रिहिस सब ह हवा के बड़ोड़ा सही उड़ागे,काबर सियान मन कथे बेटी ह साकछात माता लछमी के सरुप हरे ओकर घर म आय से घर के आव भाव बदल जथे वइसने मोरो बदल गे। तितली बरोबर एती ले ओती घर के चारो कोती गिंजरे ।हंसी ठिठोली करत अपन तोतरी भाखा म मोला जब ददा कहे। त मोर अंतस ल अजब सकुन मिले करेजा ल ठंडक मिले।जेन बेटी ह पेट के बल घसलत माड़ी के सहारा मड़ीयात ठुमुक ठुमुक रेगत कइसे बड़े होगे ,दिन कइसे निकलिस पताच निचलिस ।आज मोला बड़ दुख होवत जेन बेटी ल ननपन ले पालत पोसत बड़े करेंव आज उही अपन करेजा के टुकड़ा ल अपन तन ले अलग करके ओला अपन लेे कोस दुरिहा दुसर के डेहरी म बिदा करत हंव। अब कोन मोला चाय पानी बासी पेज बर हांक पार ही---

"आ ददा एदे चाय ,एदे पानी ,एदे बासी।"

तोषण कुमार चुरेन्द्र

बुधवार, 19 अप्रैल 2017

गंगा मंइय्या

तोर मया के बरसा दाई झुमर झुमर के बरसय।
आस पूरो सबके माता झन कोन्हो ह तरसय।।
जल भीतरी ले जनम धरे गंगा मंइया कहाय।
नर नारी सब भक्तन मन के आस ल तै पुराय।।

सोमवार, 17 अप्रैल 2017

मया के चिनहा

तोर मया के चिनहा ल
राखे रहूं सजाके।
मोर हिरदे के कुरिया म
ठोहूं तारा लगाके।

अगोरा म तोर बइठे हावंव
रद्दा म नैना गड़ाके।
कतिक दिन ले देखहूं मैंहा
लहूं चूरी पहिराके।।

मोर मया के कुरिया ल
कब तै अंजोर करबे।
बिन रंग मोर दुनिया ल
कब सतरंगी रंग भरबे।।

मोरो सुध तै लेले पगली
बइहा बरन मोर हाल हे।
बिन तोर जिनगी बिताना
मोर जी के जंजाल हे।

मया के चिनहा देके तैहा
जादा काबर तड़पात हस।
अंगना मोर आहूं कहिके
काबर टुंहू देखात हस।।

मर जहूं तोर सुधरई मा
जादा झन बेकरार कर।
कर मोर संग बिहाव पगली
जिनगी के मोर उद्धार कर।।

शनिवार, 15 अप्रैल 2017

तलबगार

टुटे दिल का कोई खरीद दार नहीं होता

आँखों में नमी ,इश़्के  गुलज़ार नही होता

होती है तन्हाई का मंजर और यादों का समंदर

चाह रह जाती अधूरी कोई तलबगार नहीं होता

गुरुवार, 13 अप्रैल 2017

किसको

दिल के हालात कहो सुनाऊं किसको
विरह की वेदना दिखाऊं किसको
ये जो शहर हैं वो मुर्दों का "तोषण"
दिन के उजालो में भला जगाऊं किसको..

तन्हाई

मेरी तन्हाई को देखकर हंस रही थी वो इस कदर

आँसू पोछने भी नहीं आई कमबख़्त अकेला जानकर....

दिल

पी लेता हूँ शराब
जाकर मयखाने में

उनकी यादों को
दिल से मिटाने को

कमबख़्त है उनकी यादें
मिटी नहीं इस दिल से

याद मिटाते इक दिन ये
कमज़र्फ दिल ही मिट गया....

बिहाव

का बतांव साहब

बर बिहाव के सिजन चलत हे
बाजा घलक नंगतेहे ददकत हे
इंकर बाजा गाजा चक्कर मजी
का बताव नींद घलो नंइ परत हे

फना

लग गई नजर किसकी,बसंत बहार पर/
गुल नहीं कंटक खिलती,अब गुलजार पर/
बंद करें युद्ध लड़ना,अमन रहे जमीं
कर फना जनम अपना,पुनित संसार  पर

तोषण कुमार चुरेन्द्र

दिल

भूले तो जाते उसे है जो दिमाग में रहते है
आप तो वो शख़्स है हमारे दिल में रहते है

पैमाने में

जिंदगी बीत गई मयखानें में
कोई बदलाव न आया जमाने में
बची है ही नहीं अब जिस्मो जान में
रोज पीते हे लहू पर लहू को पैमाने मे

शनिवार, 8 अप्रैल 2017

लेने के देने की

#लेने के #देने की

खा-खाकर ठोकरें बड़ा हुआ हूँ

आदत नही मेरी ठोकर देने की,

फूल बरसा ,काँटें बिछा राहों पर

नसीब समझ आदत है लेने की,

मिलेगा यहीं कहीं जाएगा नहीं

करदे भले देरी रब मुझे देने की,,

बाज़ न आऊँ आदत से अपनी

चाहे पड़ जाए लेने के देने की,,

तोषण कुमार चुरेन्द्र
arhkepagakalagi.blogspot.com

सोमवार, 3 अप्रैल 2017

बाटल अदधी अउ चपटी म

घुमेबर चलदेंव मेंह एकदिन गउ दारु भट्ठी म
का मोहनी डराय रथे बाटल अदधी अउ चपटी म

देखेव जाके जब अनर बनर
पियत बइठे सब जतर कतर
चांटत रहे नुन पीये के हे धुन
चाबवत चना ल कटर कटर

चलायके नंइहे सकति फेर चड़के जावै फटफट्टी म
का मोहनी डराय रथे बाटल अदधी अउ चपटी म

सुआरी लइका के मोह नंइहे
दानापानी के थोर संसो नंइहे
लगेहे लत इंहां पियकड़ु के
कोनों चाहे अब कहीं कइहे

पीयेबर पइसा निही त पइसा भिड़ाय चोरकट्टी म
का मोहनी डराय रथे बाटल अदधी अउ चपटी म

हर पियकड़ु जेब म अधार धरथे
पइसा नी रही जोगड़ कोनो करथे
संगवारी खोजथे पियकड़ु अपन
जीते जीयत पीही पीते पीयत मरथे

अलप समय पियइया ल जात देखेव मरघट्टी म
का मोहनी डराय रथे बाटल अदधी चपटी म

तोषण कुमार चुरेन्द्र
९६१७५८९६६७
कापी arhkepagakalagi.blogspot.com पर सुरक्षित हैं
मूल रुप में साझा करें!

राम नाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...