गुरुवार, 6 अक्टूबर 2016

करमा


#लडका
करमा नचाहूं तोला ओ आना मादर के थाप मा
#लड़की
करमा नचादे मोला गा आना मादर के थाप मा

#लड़का
धान लुए हंसिया बही गजब उड़ावय कंशी ओ
सुध मा तोर होके दीवाना मन बजावय बंशी ओ
करमा नचाहूं तोला ओ आना मादर के थाप मा
#लड़की
करमा नचादे मोला गा आना मादर के थाप मा
#लड़की
आए सावन गरजे बादर रिमझिम परे फोहार गा
किजरौं मैहा जंगल झारी पारत हांक गोहार गा
करमा नचादे मोला गा आना मादर के थाप मा
#लड़का
करमा नचाहूं तोला ओ आना मादर के थाप मा
#लडका
सुघ्घर लागे मोला रानी हांसी तोर ठिठोली ओ
नांक के नथनी कान बाली मया के मारे गोली ओ
करमा नचाहूं तोला ओ आना मादर के थाप मा
#लड़की
करमा नचादे मोला गा आना मादर के थाप मा
#लड़की
धिक धिनिंधा मादर बाजे करमा के ताल गा
तोर मया म होगेंव बही हाल हे बेहाल गा
करमा नचाहूं मोला गा आना मादर के थाप मा
#लड़का
करमा नचाहूं तोला ओ आना मादर के थाप मा
#लड़का_लड़की
करमा नचाहूं तोला ओ आना मादर के थाप मा
करमा नचादे मोला गा आना मादर के थाप मा
गीत #आचार्य_तोषण धनगांव डौंडीलोहारा
बालोद छत्तीसगढ़ ९६१७५८९६६७

मन मलीनता धोए नहीं,पावडर रहे पोताय।

मन मलीनता धोए नहीं,पावडर रहे पोताय।
दुनिया के चकाचौंध मा, सबझन लगे मोहाय।
आज देखव जमाना ला,कोन डहर मा हे जात।
आतंकवाद नक्सलवाद मा, होवत हे रक्तपात।
दारू पियय दरूहा संगी,तिरिया लइका ह रोय।
हरताल सब दिन करय,फेर भट्ठी बंद कब होय।
नान्हे बड़े के मुंह ले ,निकलत गुंगवा के फूंक।
पाऊच खाए कचर कचर, जतर कतर दे थूक।
#आचार्य_तोषण

राखी ल...

राखी ल...
चिट्ठी पतरी के नंइहे जमाना
कइसे भेजंव भइय्या राखी ल
जारे परेवना तोर आसा हे
लहरावत जाबे दुनों पाखी ल

दाई ददा के दुलारा बेटा
भइय्या मोर तै हीरा असन
पेट गुजारा करेके सुध म
बसगे जाके अब दूसर वतन
बइठके दाई के कोरा म
कोन खही अब बासी ल
चिट्ठी पतरी के नंइहे जमाना
कइसे भेजंव भइय्या राखी ल
जारे परेवना तोर आसा हे
लहरावत जाबे दुनों पाखी ल
आजा लहुट सुन मोर भाई
ए भुइंया हर तोला बलावय
कइसे भुलागे दाई के सुरता
तोला रोज जे खेल खेलावय
तोर बिना इंहा कोन करही
खेती डोली के बियासी ल
चिट्ठी पतरी के नंइहे जमाना
कइसे भेजंव भइय्या राखी ल
जारे परेवना तोर आसा हे
लहरावत जाबे दुनों पाखी ल
दाई ददा के सेवा जतन म
मिलथे जनम जनम के पून
मोर कहिनी ल मान ले तैह
बने हकन के बात ल गुन
आके घर छोड़ादे "तोषण"
दाई ददा के धरे बैसाखी ल
चिट्ठी पतरी के नंइहे जमाना
कइसे भेजंव भइय्या राखी ल
जारे परेवना तोर आसा हे
लहरावत जाबे दुनों पाखी ल
-आचार्य तोषण
सुर लय ताल म गलती होय
होही तेकर बर छमा याचना

क्यों नहीं..

क्यों नहीं..
मेरी लिखी हुई वो दर्द की
बात कोई गुनता क्यों नही
निकले दिल से आह बनकर
ये अल्फाज सुनता क्यों नही

बहुत हो चुकी अब चांद को
जर्रो जमीं पर लाने की बात
जमीं को चांद पर ले जाने का
सपना कोई बुनता क्यों नही


हर किसी की चाहत है यहां
तख्ते ताज पर जाके बैठना
शिवाय मेहनत के बागबां पे
युंही गुल खिलता क्यों नहीं
-आचार्य तोषण

हैप्पी राखी

_झंउहा_झंउहा

बरसे सावन.....

बरसे सावन.....
लोक असर साप्ताहिक पत्रिका बालोद प्रकाशन
मा इही रचना ह बारह अगस्त दो हजार सोलह के छपे हे
 एखर बर संपादक श्री दरवेश आनंद जी अऊ फीचर
संपादक श्री पुष्कर सिंह राज जी ल सादर अभार अऊ धन्यवाद हे

जिनगी में कभू घमंड झन करबे "तोषण" माटी के बने हस माटी म मिलबे।
arhkepagakalagi.blogspot.com|आचार्य तोषण चुरेन्द्र द्वारा

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काबर रिसाए...

काबर रिसाए...
काबर रिसाए मैना मोर । तडपत हबे चोला मोर
पीरीत के बोली बोल ।
 मया के केवडिया खोल
मुसकइ चेहरा झूले झूल ।
मोर हिरदे फूले फूल
रेंगना देख चंदा लजाए । लाज मरे बेर मर जाए
हिरनी सही आंखी तोर ।
 लुगरा भावे सांखी तोर
बइहा बन किंजरों खोर ।
 सुधबुध घलो नंइहे थोर
झिन दिखाबे मोला आंट । मया के दुख पीरा बांट
सुरता ह आथे दिन रात ।
कतक काहंव मनके बात
बता मोला तैहर आज ।
काबर हस तैहर नराज
झनले अब तोषण के जान । झन रिसा अब बात ल मान
आचार्य तोषण

अच्छी नही लगती

हुनर मेरी किसी को अच्छी नही लगती
जवानी कलम की बच्ची नही लगती
आजमा कर देख लो जमाने वालों मुझे
उम्र कलम की कभी कच्ची नही लगती
पहुँचना चाहता हूँ हर नुक्कड़ ओ गली
पर लायक मेरे कोई बस्ती नहीं लगती
झूठ ही झूठ देखें हमनें इस मयखाने में
हर किसी की बात सच्ची नहीं लगती
दुध से जले है दही की चाहत मे 'तोषण'
हर दुध से बनी चीज लस्सी नही लगती
आचार्य तोषण ,धनगांव (डौंडीलोहारा)

रवानी में

गुंजाइश नहीं कोई शक की तेरी कहानी में
तू तो एक चिंगारी है आग लगा दे जवानी में
बदलकर रखदे जो अतीत सारे कायनात की
भरदे उमंग उन नदियों की उफनती रवानी में
आचार्य तोषण

कृष्ण_जन्माष्टमी


करिया मोहन ...
बंसुरी बजइय्या माखन चोरइय्या 
करिया मोहन नांग नथइय्या
मधुबन म तै किंजर किंजर के
सुरहिन गइय्या चरइय्या
बंसुरी बजइय्या माखन चोरइय्या
करिया मोहन नांग नथइय्या
बाला पन म लीला देखाए
पुतना रानी के बुता बनाए
बामन रूप बचन तै देके
पुतना ल मुक्ति देवइय्या
बंसुरी बजइय्या माखन चोरइय्या
करिया मोहन नांग नथइय्या
भुइंया के माटी गोंटी ल खाए
दसोदा ल मुंह म दुनिया देखाए
सरी दुनिया हे तोर मुट्ठी म
भव ले पार लगइय्या
बंसुरी बजइय्या माखन चोरइय्या
करिया मोहन नांग नथइय्या
बिंदाबन म रास रचाए
शंखर भोला ल नांच नचाए
संग म दूनों झुमर के नांचे
जग के नांच नंचइय्या
बंसुरी बजइय्या माखन चोरइय्या
करिया मोहन नांग नथइय्या
गोबरधन ल तैह उठाए
गिरधर कान्हा तैह कहाए
गोकुलवासी के मन ल भाए
सबके प्रान बचइय्या
बंसुरी बजइय्या माखन चोरइय्या
करिया मोहन नांग नथइय्या
धरम करम के पाठे पढाए
मइय्या दसोदा के मान बढाए
कुरुक्षेत्र के समरभूमि म
अर्जुन ल गीता सुनइय्या
बंसुरी बजइय्या माखन चोरइय्या
करिया मोहन नांग नथइय्या
हावे कहनी तोर अगम अपार
हम अढ़हा कहां पाबो तोर पार
हाथ लमाके मांथ नंवाके
"तोषण'' परत हावे पंइय्या
बंसुरी बजइय्या माखन चोरइय्या
करिया मोहन नांग नथइय्या

रचना :-आचार्य तोषण
धनगांव डौंडीलोहारा बालोद
छत्तीसगढ़ ९६१७५८६६७

बादर

छाए घनघोर करिया बादर
बरसे पानी सुख के आगर
मन हरियावय सावन मा
तरिया लागय जइसे सागर
आचार्य तोषण

एक परयास



कोन कोती भुलागे दांवना तैह जाके.
टूँहूं देखाए मोला मोंगरा तैह लाके.
आ संझौती जलाबो दीयना पीरियाके,
मोर बांधे मया डोरी छुरी तैह फांके.

सम्मान

आता नहीं मुझे कुछ फिर भी प्रयास करता हूं
परिणाम जो भी हो कर्म अनायास करता हूं।

त्रिदेव गणेशोत्सव समिति द्वारा सम्मान प्राप्त करते हुए

तीजा तिहार








तीजा तिहार
भइय्या हर मोर आवत होही
रोटी पीठा धरके लावत होही
करत निहोरा महतारी मोर
मन मनमा सोरियावत होही
आगे तीज तिहार ओ बहिनी
सब बहिनी के इही हे कहिनी
जाबो मानेबर दाई घर तीजा
सकलाबो बहिनी संन बहिनी
सुख दुख के गोठ गोठियाबो
दाई ददा के आसीस पाबो
लइका गोसंइय्या खुश रहे
शंखर भोला ल सबे मनाबो
तीजा के बिहान करबो फरहार
होही ए दिन लुगरा के बउछार
हंसी खुसी मनाबो भइया तीजा
एसो दाई घर के तीजा तिहार
नंइहे आस हमला लुगरा के बने रहय गा मया दुलार ।
आवत जावत रहिबो तोषण इही हबय सच्चा बेवहार।।
आचार्य तोषण
धनगांव डौंडीलोहारा
बालोद छत्तीसगढ़
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मेरी जिंदगी बड़ी उदास है

मेरी जिंदगी बड़ी उदास है
हूँ दरिया फिर भी प्यास है

कसक है मुझे तु साथ नहीं
लगता है लेकिन तु पास है

देखता हर गुल को बगानो में
मेरे लिए बस गुलाब खास है

बावरा मन झुमे तेरे खातिर
जैसे कान्हा करता रास है

हल्की सी होती आहट कहीं
तेरे होने का होता एहसास है

लौट आओ तुम ओ साजन
बन बैठा " तोषण "अब दास है

भादो महिना तिहार के कोठी


नंदिया बइला पोरा के तिहार आवत हे दीदी भइय्या मोर
भादो महिना के का कहना तीजा गणेश के हावय सोर
नंदिया ल सम्हराके भइय्या
खारे खार दौड़ाबोन हो
अउव्वल जेन हर आही संगी
जुरमिल खुशी मनाबोन हो
बहिनी मनके पोरा जांता दरर दरर दरदराही गा
झुमर के नांचही संगी साथी सबके मन हरसाही गा
धरके पोरा के रोटी पीठा
बहिनी ल लाए बर जाबो
भादो महिना तीज के दिन
सब तीजा तिहार मनाबो
चउथ के आही गणपति बप्पा सूघर आसन पाही जी
मूसवा हावय जेखर सवारी लाडू के भोग लगाही जी
भादो महिना तिहार के कोठी
सबके मन ला भावत हे
बिधुन होके झुमे नर नारी
मिलके खुसी मनावत हे
आनी बानी के तिहार बार छत्तीसगढ़ के हे पहिचान
आवौ बढाबो जुरमिल के अपन सोनहा भुइंया के मान
आचार्य तोषण
धनगांव डौंडीलोहारा

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एक गांव

एक गांव जहाँ एक मुखिया रहता था जो सर्व गुण संपन्न था सभी उनका आदर सम्मान करते थे। हर जगह उनकी पूछ परख थी । लेकिन खुद मुखिया के घर मे हमेशा कलह परेशानियों का बाज़ार लगा हुआ था। दुनिया के लिए वह बहुत ही अच्छा इंसान साबित हुआ लेकिन अपने घर के लिए ढोल के भीतर पोल वाली कहावत को साबित करता । लोगों के समक्ष बड़ी बड़ी बात रखना लेकिन जब खुद के घर की बारी आती तो पांच कदम पीछे। मुखिया से सारा घर परेशान था। उनसे कोई भी खुश न था। और अंत मे वह मुखिया अपने पूरे परिवार के बिखरने का कारन बना गया । कोई भी उसके कार्य करने के तरीके से खुश नही थे क्यों कि वह मुखिया हर जगह अपनी ही मनमानी चलाता था । परिवार के सब सदस्य उनसे दुखी थे। लेकिन कर भी क्या सकते थे उसके खिलाफ जाने की किसी भी सदस्य में हिम्मत भी न थी । एक था जो मुखिया जी को झकझोर देता लेकिन घर के बाकी सदस्य उनकों रोक देते थे। अब क्या था गाड़ी जैसे तैसे चल रही है।
आपके विचार से क्या लगता है ?
गलती किसकी है ?

(यह वर्तमान मे संचालित संस्था की सत्य घटना है जोआज घटित हो रही है जिसे मैने भूत काल मे परिवर्तित करके लिखा है)

IMAGE

संपादक आदरणीय दरवेश आनंद जी अऊ फीचर संपादक
 आदरणीय पुष्कर सिंह 'राज' जी महोदय ल
 सादर अभार अउ धन्यवाद

●गणेश●


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गउरी के गणराज गणेश
सुमरंव तोला आज गणेश
करथस पूरा काज अशेष
सबझन करथन नाज गणेश
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आचार्य तोषण

हे गणराज...


हे गणराज तोर आरती गाऊँ
आरती गाऊँ देवा तुमला मनाऊँ
हे गणराज....
सरधा के के थारी भगति के बांती
जगमग जगमग जले दिन राती
असरु सुमन प्रभु तुमला चढ़ाऊँ
हे गणराज....
दीन दुखियन के लाज बचइय्या
बाधा बिघन के दूर करइय्या
तन मन मनधन सब तोला लुटाऊँ
हे गणराज...
ज्ञान भक्ति बल बुद्धि देवइय्या
संतन के प्रभु मान रखइय्या
तोर चरनन में बलि बलि जाऊँ
हे गणराज....
गीत :-आचार्य तोषण
धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद छत्तीसगढ़

ग्राम धनगांव गौशाला चौक स्कूल पारा


$खरखरा नहर बोहवय देखव संगी मोर गांव$
$लगर लगर नहावय मनखे एक जगा एक छांव$
$नहर तीर बिराजे शंखर मंदिर महाजन बबा के$
$मन भरके सब आशीष पाथे औघडिया के ठांव$
~~~~~~~~~~~~~~●~~~~~~~~~~~~~~
$इसकूल पारा गौठान बिराजे नंदी सोभा बढावत$
$पांव पलेगी मनावय कतको शरणे आवत जावत$
$बापूजी के बने इसतंभ पंचइत बढावत शान जिंहा$
$अटल जी चौंक सुघ्घर पीपरी तरी सोभा पावत$
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आचार्य तोषण ,धनगांव डौंडीलोहारा बालोद
छत्तीसगढ़ ४९१७७१,mo,९६१७५८९६६७

राम बनवास कथा जसगीत

राम बनवास कथा जसगीत

होगे अवधपुर सुन्ना हो मोर राजाराम बिना
मोर राजा राम बिना हो मोर सियाराम बिना
होगे अवधपुर...


कौशल्या के दुलरवा बेटा निकले जंगल झारी
दुख म रोवय राजमहल ह रोवत हे नर नारी
झरर झरर जब रोवे पुरवाई अवधपुर ह राम बिना
होगे अवधपुर...
राजा दशरथ के बात ल माने जंगल रस्दा बनाए
दाई केकई के बचन खातिर भरत ल राजा बनाए
राजा रोवय नइ जी पाहूं मोर ललनवा राम बिना
होगे अवधपुर...
भाई लखन संग राम जानकी रथम बइठ के जाए
अंसुवन धार बोहावत सुमंत घोड़ा ल हांक लगाए
रथ फंदाए घोड़ा कहिथे नइ रही पाहूँ राम बिना
होगे अवधपुर...
चलो लहुटबो कहिके सुमन राम करा गोहराए
बात बचन हे हावे कहिके राम ह लगे समझाए
सुमंत सोचे कइसे लहुटव राज दुलारा राम बिना
होगे अवधपुर...


रोवत रोवत सुमंत लहुटे मन मन सोचन लागे
काला बताहूं जाके राजा ल आंसू पोछन लागे
राजा पूछही आगेस सुमंत खाली तैहर राम बिना
होगे अवधपुर...


राम जानकी भाई लखन ह गंगा के तीर म आए
पार नहकादे हमला केंवट राम ह लगे गोहराए
नइ नहकावंव रामा तोला पांव तोर मै धोए बिना
होगे अवधपुर....


चरन पखारे भइय्या केंवट पुरखा ल अपन तारे
ढोंगा बइठारे राम लखन स महिमा ल पार उतारे
कहां पाबो सुख जिनगी म इहां के सुखधाम बिना
होगे अवधपुर...


रचनाकार :-आचार्य तोषण
धनगांव डौंडीलोहारा
बालोद छत्तीसगढ़

गुरू होकर जिसे

गुरू होकर जिसे अपनी गुरूता का भान न हो
यही कहते सभी मिलकर उनका सम्मान न हो
झुका जिसके कदमों पहले पाया अरदास वहाँ
गुरू चरणन प्रणवंव कभी कहीं अपमान न हो
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आचार्य तोषण धनगांव डौंडीलोहारा बालोद

जब तक रही जिनगी तन म,

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जब तक रही जिनगी तन म,
आवत रही कविता मन म ।
निशदिन पढ़व गढ़ना गढ़व,
पसरत रहय रचना जन म।।
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बुधवार, 5 अक्टूबर 2016

हिन्दी बर चार लाईन

हिन्दवासी मन ल हिन्दी दिवस के हार्दिक बधाई
के संग छत्तीसगढ़ी म हिन्दी बर चार लाईन के
 कविता सादर समर्पित

*******
मोर भारत माता के
कइसे करंव बखान
जनम धरे जिंहा रिषी
मुनि राम भगवान
संस्कृत महतारी के
लइका हिन्दी संगी
बोलय बतियाय हिन्दी
जम्मों हिन्दुस्तान
******
हिन्दी पढो हिन्दी लिखो
जेन भारत माँ के बिन्दी
अंगरेजियत ल छोडव
झनकरव चिन्दी चिन्दी
पान करव हिन्दी के
राखव एखर भान
हिन्द म रहिके हिन्दू बनव
गुनव सुनव सब हिन्दी
*******
-आचार्य तोषण

साजे छत्तीसगढ़ी सिंगार

साजे छत्तीसगढ़ी सिंगार
मन ला सबके भावत हे
आनी बानी के सुआ ददरिया
करमा पंथी सुनावत हे
मान बढाय तै छत्तीसगढ़ के
गुरतुर बोली सुहावत हे
भारत मां के दुलौरिन बेटी 'लक्ष्मी'
छत्तीसगढ़ के मान बढावत हे

-आचार्य तोषण

राम नाम के चर्चा

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राम नाम के चर्चा होवत हावै मोर गांव म
आमा अमरइया बरगद पीपर लीम छांव म
गंगा जमुना बरोबर धार बोहावय कलकल
गणराज बिराजे देखव सुघ्घर ठांव-ठांव म
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-आचार्य तोषण, धनगांव बालोद छत्तीसगढ़

लहर लहर लहरावय कोरा छत्तीसगढ़ महतारी के


लहर लहर लहरावय कोरा छत्तीसगढ़ महतारी के
महर महर ममहावय डोली राजा संगी संगवारी के
झुमर झुमर मन नाचय गावय गाना छेड़ै कुहूकी कोयल हो ,
हंसी खुशी झूमय नाचय जागै भाग जी नर नारी के।
आचार्य तोषण
धनगांव डौंडीलोहारा
बालोद छत्तीसगढ़

लोक असर के 16/09/2016 के अंक में प्रकाशित मेरी कविता

लोक असर के 16/09/2016 के अंक में प्रकाशित मेरी कविता
संपादक महोदय पुष्कर सिंह राज जी को हार्दिक आभार

उरी के शहीदों को अश्रु पुरित नमन....

सोंच मेरी बड़ी थी

 सोंच मेरी बड़ी थी
लक्ष्य आगे खड़ी थी
रूक गया जब देखा जख्मी
मेरी ही राहों में पडी थी

दूसरों के दर्द के आगे
जो भूल जाए अपना गम
दूर हो जाते रब की नेमत से
उनके सारे गिले शिकवे सितम

छोटा हूँ लेकिन काम का
आदी हूँ स्नेह जाम का
आता जाता मुझे कुछ नहीं
'आचार्य तोषण' हूँ बस नाम का

"रखनी है हमें अपनी सोंच बड़ी .
सुना है ,बड़ा सोचने से बहुत बड़ा मिलता है।"

पितर


~~~~~~~~~~~~~~~~~
भादो महिना अंधियारी पाख
लगे हावय देखव पितर शाख
पानी देवत दुनो अजुरी जोड़
पुरखउती परमपरा बात राख
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होवत बिहनिया अंगना लिपे
सुघ्घर चकचंदन चउंक पुराय
तोरई पाना फूल नीक लगे बेला
पिडहा माढे लोटा दतवन चाय
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पाना तोरई के भाग संहरावय
बरबट्टी करिया मेछरावत हो
फर तोरई संग साग बनावय
बड जोरदरहा रंग जमावत हो
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तीन-तीन घांव तिलांजलि देवय
दाई ददा अऊ पुरखा सोरियाके
भोग लगाथे आके करिया कागा
घूमत घामत सबझन सकलाके
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कथे सियानन पंदरा दिन बर
पुरवज मन परिवार तीर आथे
जनम जनम के भटकत जीवरा
लइका बर आशीष छोड़ जाथे
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-आचार्य तोषण
धनगांव डौंडीलोहारा
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काँव काँव कँउवा करे

काँव काँव कँउवा करे
फेर एखर कोन धरे
चले चल अपन चाल

कोलिहा के हुंके ले
कुकुर के भूंके ले
शेर उखड़े न बाल


खाए बर चंउर नीही
रेहे बर ठऊर नीही
चूंदी रंगाय हे लाल

घुमत हे बइठे होंडा
चाल देखले पोंडा
कहीं नंइहे हाल

-आचार्य तोषण

तोहमत

कर रहा कौन बर्बाद यहाँ देखिए हुजूर
तोहमत यूहीं किसी पर लगाया न करें

मूसवा बरोबर

काली रिहिस कोलिहा बरोबर
चिल्लात हे आज बघवा बरोबर
पहिरे हे तन म शेर के खड़री
रेंगत हावय देख मूसवा बरोबर

मंदू मन बर

मंदू मन बर
आवत हे नव रातरी चंदा रसीद बनावत हे
पइसा सकलाये जाने भट्ठी डहर जमावत हे
खाए नी मिले नवरात म कुकरा ल घटकावत हे
कुकरा खाए बिहान के दुरगा दाई ल मढावत हे
देखेहव नवरात म सब मंदहा पिये बर छोड देथे
नवरात उरकथे जइसने मुड़ी सुध जाके बोर देथे
गुनत रहिथो मेहा तोषण असनो का नवरात मनइ
ऊप्पर मा हे राम राम तन भीतरी हे बन कसइ
छोडना हे सबर दिन बर छोडव नवदिन बर काबर
तहूं सुधरबे घरो सुधरही सकलाही सुख के गागर

-आचार्य तोषण

पानी के फूटगे धार

पानी के फूटगे धार
बोहावय नदिया अपार
डबडब होगे खेत खार
टूटत हावे मेंड पार

अलकर हावे समय जान
कइसे होही एसो धान
सुमरत हाबों माथ तान
झन दे पानी ते भगवान

आचार्य तोषण

करलेवव जी उपचार -आचार्य तोषण

तरिया खाले खेत खार ऊप्पर डोंगरी पहाड़
हूंर्रा कोलिहा चितवा बघवा शेर मारत दहाड़
जंगल झारी दिखत हरिहर मंहुवा कर्रा रूख राई
जेखर कोरा उपजे सबरदिन आनी बानी दवाई
आंवरा हर्रा बेहरा फर मीठ मीठ लागे तेंदू चार
फर पीपरा मुलेठी मुसली भोईलीम करूवा झार
काबर भुलाए घर तीर दवा करले तैहा चिनहार
करथे असर जड़ मुड़ ले करलेवव जी उपचार
-आचार्य तोषण

#मोर_आँखी_के_पुतरी_तै

अतिक्रमण ( बेजाकब्जा )

अतिक्रमण ( बेजाकब्जा )
अतिक्रमण ही अतिक्रमण बढ़ा रहा पाक आज
खाल पहने हुए धूर्त लोमड़ी की बढ़ा रहा परवाज
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बनकर दिमक जो चांट रहा भरत भूमि मे आकर
आज वही जो आंख दिखाता हमसे रोशनी पाकर
याद दिलादो फिर कारगिल बिसर रहा जो आज
खाल पहने हुए धूर्त लोमड़ी की बढा रहा परवाज
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भारत की इस माटी पर कब्जा जो बेजा बढाएगा
कसम है भारत माता की धड से सर उड जाएगा
वीर सपूत इस धरती माँ की नाद कर रहा आज
खाल पहने हुए धूर्त लोमड़ी की बढा रहा परवाज
×××××××××××××××××××××××××××××
छुपकर वार करने वाले सुनले तेरी अब खैर नहीं
बहुत हो चुका लुका छिपी मन कोई अब धैर नहीं
कहता "तोषण" मिलके साथी जोर लगा आवाज़
खाल पहने हुए धूर्त लोमड़ी की बढ़ा रहा परवाज
*****************************
आचार्य तोषण
धनगांव डौंडीलोहारा
बालोद छत्तीसगढ़
४९१७७१

सोला सिंगार हो

लाली लाली चुनरिया दाई साजे सोला सिंगार हो
आस पुरो सब भकतन के रख लेबे लाज हमार हो
आके गोहरावंव मन के दुख पीरा दाई दुवार तोर
बरसावत रहिबो मोर बर अछरा भर मया दुलार हो

॥जंवारा॥

दुरगा दाई के नवरात म सब संगी संगवारी मन ल गाड़ी गाड़ी बधाई
दाई दुरगा के चरन म काव्य सुमन सादर समर्पित करत हंव ।
सबझन मोला आशीष देहू अमर के पांव तुंहर परत हंव।।
🕉🕉॥जंवारा॥🕉🕉
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मन हमरो झुमय नाचय मिलके करव जयकारा।
आगे तिहार नवरात के रिग बिग जोत जंवारा।।
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आगे नवरात दाई केचलना दीया जलाबो।
चइत महीना दाई ल नरिहर धरके मनाबो।
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पबरित मांटी लान केसुघर फुलवरिया बनाबो।
पोक्खा गंहू छान के दाई बर बिरही भिंगाबो।।
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एक्कम ले शुरू होवय दुरगा दाई के नवरात।
अंधियारा मन दूर करय जोत जलय दिनरात।।
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गऊ माता के गोबर लानय खुंट धर अंगना लिपाय।
अगरी चंऊर बगरी पिसान सुगहर चंऊक पुराय।।
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सोनेन सोन कलसा साजे आमा पान संहराय।
दीया जलय रिगबिग चंहू दिश अंजोर बगराय।।
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पंडा लानय करसा पानी रहे फुलवरिया सिंचाय।
दुरगा दाई के बाढ़य जंवारा लहर लहर लहराय।।
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मांदर ढोल नंगारा बाजय सब देंवता ह नाचत हे।
देखै दाई अपन फूलवरिया मुच मुचले हांसत हे।।
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पंडा नाचय बइगा नांचय नांचय गांव अउ पारा।
नयना भरगे खुसी हंमागे देख देख जोत जंवारा।।
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अईस पंचमी धरिन नरिहर दाई दुवरिया तीर आगे।
सेऊक भक्तन हांथ जोंड मन के मनउती सब मांगे।।
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हरियागे माता के जंवारा छप्पन कोटि देंवता आगे।
हवन पूजन होय आठे मा हुंम धूप ल सब पागे।।
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नवम दिन बिदागरी केझूमय नाचय सब संसारा।
बिसरजन बर जावय सुघर मोर दुरगा दाई के जंवारा।।
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आचार्य तोषण
गांव -धनगांव ,डौंडीलोहारा जिला-बालोद, छत्तीसगढ़
टीप ;- इही कविता म मोला "छत्तीसगढ़ साहित्य मंच" ले छत्तीसगढ़ के पागा कलगी ७ म सम्मान करे गेहे ।

राम नाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...