समीक्षार्थ
ताँका
उड़ती फिरूँ
उन्मुक्त गगन में
बनके पंछी
चले मन पुरवाई
करता अगुवाई..
तोषण कुमार चुरेन्द्र
समीक्षार्थ
ताँका
उड़ती फिरूँ
उन्मुक्त गगन में
बनके पंछी
चले मन पुरवाई
करता अगुवाई..
तोषण कुमार चुरेन्द्र
समीक्षार्थ
ताँका
उड़ती फिरूँ
उमुक्त गगन में
बनके पंछी
चले मन पुरवाई
करता अगुवाई..
तोषण कुमार चुरेन्द्र
राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...