तोषण कुमार चुरेन्द्र@

जिनगी में कभू घमंड झन करबे "तोषण" माटी के बने हस माटी म मिलबे।

गुरुवार, 30 जून 2016

जब तक है जान.....


29 जून 2016 10:37 अपराह्न
आचार्य तोषण चुरेन्द्र की फ़ोटो.
इस बात पे हैरान हूं
कि मेरे लोग मुझसे परेशान है
मैं तो मैं मेरी जिन्दगी मुझसे हलाकान है।
अंतरात्मा मेरी पूछती मुझझे
क्यों तू ऐसा करता है?
दूसरों के दुख के खातिर
अपनों से तू लड़ता है।
क्या मिलता है तुझे
लोगों के काम में हाथ बटाकर
अपना बेशक़ीमती समय फालतू में गंवाकर
समय मेरा बेशकीमती कहता हूं सबसे
काम आऊं सबके सदा कहता हूं रब से
मेरे इतने कहने से रब पड़ गया हैरान में
कहने लगा तुझसा तोषण नहीं कोई जहान में
तेरी इसी दरियादिली के हम तो हुए कायल
लोगों के दुख उठाते तुम कभी न होगे घायल
रब की नेमत मुझपर हुई मेरा यह नसीब है
उस परवरदिगार के आगे अमीर कौन गरीब है
समझाया उस रब ने मुझको करना नेक काम
याद सदा करेंगे तुझको लब पे रखेंगे नाम
रब के आगे मेरी क्या चलती
माननी पड़ी उनकी हर बात
छोटे बड़े अपने पराए सबसे करता मीठी बात
उसने मुझे सिखाया है
उपकार का पाठ पढाया है
गिर रहा था पर्वत पर चढ़ कर
मुझ गिरते को उठाया है
करता रहूंगा सदा मैं रब की गान
इस तन में जब तक है जान.....
-आचार्य तोषण
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॥गणपति महाराज॥


29 जून 2016 10:56 अपराह्न

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
गणपति महाराज के गा,महिमा गजब भारी।
पूजाए जग मा पहली, सुमरे सब नर नारी।
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
कवन पूजाही आघू, जंग छिडय दुन भई म।
करे तैयारी सुघर मिल, बाहन के संमरई म।।
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
मंजूर धर कातिक निकले,जगत घुमेबर जावय।
मूसवा देख गणेश बइठे, जुगति अपन सुझावय।।
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
दाई ददा ल करे नमन, चककर सात लगाय।
आशीष दे शंखर गौरा, बुद्धि अजब तै पाय।।
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
देवतन के आशीष मिलै, दे जग ल प्रभु बताय।
पहली पूजाही गणेश, सुन सबे खुशी मनाय।।
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
रिद्धि सिद्धि के दाता तै, शुभ लाभ बेटा तोर।
चरन म ध्यान लगावंव,आस पुरोदे बप्पा मोर।।
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
तोर चरन आहे तोषण, जग बर सुख मांगत हे।
हाथ जोड़ बिनती करके, तोर भजन गावत हे।।
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
आचार्य तोषण, धनगांव, डौंडीलोहारा
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मंगलवार, 28 जून 2016

दवात मेरी है

मेरा संवरना बालम बिन अधुरी है
तमन्ना दिल की तुझसे ही पूरी है।
 नजर ना आए तू मुझको साजन
फिकी लगे हर मौसम सिन्दूरी है।
  न जाना कभी मुझसे बिछड़कर
 इल्तिजा बस यही तुझसे मेरी है
 महकाते रहना यूं बनकर खुशबू
 गुल भी तेरी गुलज़ार भी तेरी है
कह ना पाए कभी दो लब्जों में
 दास्तां-ए-इश्क ये तेरी मेरी है
 लिख नाम अपनी जान ऐ'तोषण'
 कलम गर तेरा तो दवात मेरी है
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सम्मान

लोग मुझे हमेशा अच्छा कहते ,मेरी हर बात मानते ,हर कोई मुझसे मिलने को आतुर ,मुझसे बात करना ,मुलाकात करना , मेरे संग खाना चाय पीना बैठना उठना हर गतिविधियों मे मेरे संग शामिल होना पता नहीं और क्या क्या ? इन सबके पीछे कारण था विश्वास ,मेरी अच्छाई ,मेरी दिलेरी ,मेरी परोपकारिता, समाज में मेरा उठना बैठना।सभी सम्मान देते। आदर करते। एक दिन अचानक मेरी सायकल खराब।स्कूल जाने को परेशान ।एक ही आस थी कोई तो लिफ्ट देने वाला मिल जाए ताकि मैं अपने कर्तव्य स्थल तक पहुंच सकूं। आशा पूरा भी हुआ वो भी इस तरह एक शराबी के साथ। उन्होंने लिफ्ट तो दी लेकिन शायद उनकी रोज की आदत थी शराब पीने की।चौराहे पर गाड़ी रोक एक होटल में मेरे लिए चाय बोलकर एक मिनट में आया कहकनिकल गया ।जब वह वापस आया तो मैंने पूछा भी नहीं कि गया कहां था? क्योंकि उसका जवाब उनके मुंह से आने वाली गंध बता रही थी। मैंने बस इतना कहा जहां तुम गए थे वहां मुझे भी लेके जा सकते थे पर लेके क्यों नही गए? उनका जवाब सुनकर मैं स्तब्ध ।उन्होंने बड़े आदरपूर्वक कहा 'मैं ठहरा शराबी बदनाम लेकिन मैने कही सुना है कि गुरू का सम्मान ,आदर और महिमा भगवान से भी बढ़कर है मैं भला उसे कैसे धूमिल करता।कोई देख लेता तो निहायत आपके लिए तरह तरह की बातें करता इसलिए आपको वहाँ संग लेकर नहीं गया। हे गुरूजी !आगे कोई दूसरा लिफ्ट लेकर चले जाइये ।ऐसा कहकहर वह चला गया और मैं सोचता रह गया कि संसार मे ऐसे लोग भी हैं जो दूसरों की मान मर्यादा का ध्यान रखते है। शिक्षा;- खुद कीचड में रहकर भी कमल की जड़ कमल को दुनिया में प्रभावी बनाकर रखती है। आचार्य तोषण
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हे मातृ भूमि

 हे मातृ भूमि जिनगी भर
 तोरेच गुन ला गावंव
तभो ले तोरे पार कहां ले पावंव
 सबले ऊंचहा माथा ह तोरे
सागर खड़े हे हांथ ल जोरे
दसों दिशा संग संझा बिहनिया तोला माथ नवावंव.....
खडे हिमालय तनके रकछक
 बैरी मन बर बनके भकछक
हरिहर रूख कस बन मैं अचरा छंइहा सुघर बगरावंव....
 तोर सेवा म मरमिट जाहूं
 तन मन सबला तोला लुटाहूं
धरके तिरंगा हांथ म दाई लहर लहर लहरावंव...
 तोर कथनी हे अगम अपारा
गावय जेला सब संसारा
घेरी बेरी चरन म दाई मैहर माथ नवावंव....
                             -आचार्य तोषण
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जनमदिन

जनमदिन मा आज मोर
[28_06_1984]
  ~~~~~~~~~~~~~~
बत्तीस आज पूरोवत हंव
मनहर मोर हरियावत हे
लइका जवान सियान ले
शुभकामना बधइय्या आवत हे
आनंद छावय मनमंदिर मा
 सबझन लेवय बलइंय्या
बड़े बडका आशीष देवय
परे छोटे मन पंइंय्या
जनम दिवस म आज मोर
देवय सबझन उपहार
नान्हे बड़े सबो डहर ले
होवत हेवै खुशी बौछार
करम लिखईय्या जनम देवइय्या
 दाई ददा ल परनाम हे
जेखर आशीष हवय सदा
चारो पहर आठो याम हे
मया के मूरती दया के सुरती
 सदा तूंहर आशीर्वाद रहय
तुंहरे पुण्य प्रताप ले भगवन
 जिनगी सदा अबाद रहय
 अतका मोर बर किरपा करबे
 करते रहंव मैं पुण्य के काम
मोर संगे संग दुनिया मा
अमर रहय दाई ददा के नाम
 छोटे बड़े मीत मयारू सबझन ला धन्यवाद हे
 तूंहरे दुआ अउ आशीष ले जिनगी सदा अबाद हे
 ~~~~~~~~~~~~~~~
                          आचार्य तोषण
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शनिवार, 25 जून 2016

मुलाकात।।

तोर नांव के माला फेरत रहिथंव दिन रात।
आश लगाए बइठे हंव कब होही मुलाकात।।
आचार्य तोषण

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हिसाब नंइहे

गोरी तोर प्यांर के कहीं हिसाब नंइहे
लिखलेतेंव फेर अइसन किताब नंइहे।
बखान नि सकंव तोर अंतस के बात
समझाएबर तोला फूल गुलाब नंइहे ।
‪#‎आचार्यतोषण‬
आचार्य तोषण चुरेन्द्र की फ़ोटो.
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अकती तिहार

आगे अकती तिहार पुतरा पुतरी के बिहाव।
पुरवज ल मिलायबर करे सियान हियाव।।
कुश दुबी संग पानी देके पुरवज ल मिलाबोन।
अकती भांवर पहरी पुतरी पुतरा ल सजाबोन।
आचार्य तोषण 9617589667
आचार्य तोषण चुरेन्द्र की फ़ोटो.
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सुनले ओ दिलदारा।

ना हीरा ना मोती चाहूं ना चंदा और सितारा।
बस अपनी झलक दिखादे सुनले ओ दिलदारा।
आचार्य तोषण
आचार्य तोषण चुरेन्द्र की फ़ोटो.
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युं न ऐसे देखो

युं न ऐसे देखो कान्हा ,मन बावरी हो जाती है।
धुन सुन तेरी बसुरिया की,सुध बुध खो जाती है।
लोकलाज छोडकर, प्रीत चुनरिया तेरी ओढकर
सांवरा तेरे रंग लगाकर, तन सांवरी हो जाती है।।
-आचार्य तोषण
आचार्य तोषण चुरेन्द्र की फ़ोटो.
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कलम एक दिन मेरी भी रंग लाएगी

कलम एक दिन मेरी भी रंग लाएगी
आचार्य तोषण चुरेन्द्र की फ़ोटो.
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॥दाई॥

महतारी मनला
चरण छुके परणाम
*******************
॥दाई॥
**************
दाई तोर पांव के धुर्रा
मोर माथ के चंदन ।
जनम देवइय्या दाई
करथंव तोला वंदन।।

नव महिना कोख म राखे
घाम पियास ल सहिके।
बने गुणी मोर ललना
पढे कथा कहानी कहिके।।
जनम धरेंव खेलेंव कुदेंव
धरती दाई के कोरा मा।
दाई तैहा बइठे डेढोली
सांझे बिहाने अगोरा मा।।
नान्हेपन ले बड़े करे
कोदई बासी खवाके।
बनेबने हमला राखे
सरदी बरसा ले बचाके।।
आशीष देदे तैहा दाई
दुध के करजा चुकाहूं।
पूरा नी होही ए दारी त
फेर नवा जनम धर आहूं।।
हीरा मोती सोना चांदी
हे सब जीनिस के मोल।
जग मा जेकर थाह नीहि
दाई के मया हे अनमोल।।
दाई जइसन दुनिया मा
अऊ दुसर जहान नहीं।
बन जा कतको महान
दाई ले कोई महान नहीं।।
दाई बर जतका लिखहूं
ओतकी दाई बर कम हे।
नीहस दाई आज मोर करा
जादा सबले मोला गम हे।।
मुड़ मा हांथ रखिबे दाई
बने रही मोर धरम करम।
हावा आए आए गरेल
आंधी म झन रूके कदम।।
सदा आशीष बरसाबे दाई
नित नवागोठ सिखते राहंव।
लइका सियान जवान मितान
दाई दीदी बर लिखते राहंव।।
*******************
एक घांव अउ जम्मो महतारी
मनला चरण छुके परणाम
*******************
-आचार्य तोषण
गांव-धनगांव ,डौंडीलोहारा
जिला-बालोद, छत्तीसगढ़
आचार्य तोषण चुरेन्द्र की फ़ोटो.
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कुमार डुमेश मेरा बेटा

कुमार डुमेश
मेरा बेटा
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तस्वीर

तस्वीर जिंदगी की हर रोज बदलती है।
निकलता बनके सूरज शाम को ढलती है।
बरकरार रखना अपनी जिंदगी ऐ तोषण
जिंदगी से तेरी किसी की जिंदगी संवरती है।
-आचार्य तोषण
आचार्य तोषण चुरेन्द्र की फ़ोटो.
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मंहगाई

अच्छाई का जमाना रहा कहां हिन्दुस्तान में
राजनीति की आड़ में जहाँ भ्रष्टाचार पनपती है।
अच्छे दिन आएंगे कब आएंगे अच्छा कब पाएंगे
आसरा लिए जनता हर पल हर दिन तरसती है।
मार रही मंहगाई दिनोंदिन हर गरीब इंसानो को।
बना चाय राजनेता पीगए हम सबके अरमानों को।
सुध ले लो हम गरीब परिवार वालों की कुछ तो
ना करना पड़े आत्महत्या हम जैसे किसानों को।
मंहगाई की मार ने इतना हमें मजबूर कर दिया है।
अच्छे भले किसान आज हमें मजदूर कर दिया है।
कोसते हैं आज हम समझदारी और अपने आपको
मतदान पा हमें मक्खी जैसे दूध से दूर कर दिया है।
आचार्य तोषण धनगांव डौंडीलोहारा बालोद (छ.ग)
आचार्य तोषण चुरेन्द्र की फ़ोटो.
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चार

चार पेड़ में चार फर मित बधे मिल चार।
पथरा मारे चार गिरे बांटमिल खाईन चार।
जिअन को जिंदगी करन को दुइ काम।
देवन को दान भला लेवन को हरिनाम।
आचार्य तोषण चुरेन्द्र की फ़ोटो.
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बनके जोक्कड मंच म

बनके जोक्कड मंच म जिनगी भर तो नांचत हंव।
छिन भर मा रोवंव संगी छिन भर मा हांसत हंव।
जिनगी के नइहे ठिकाना आज हंव काली नही,
बने रहय मुसकान सबके इही संदेशा बांटत हंव।
‪#‎आचार्यतोषण‬
आचार्य तोषण चुरेन्द्र की फ़ोटो.
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रही जही मोर कविता।

जाहू मै छोड़ जग ला संगी, रही जही मोर कविता।
गंगा जमना कस बोहत रही,बनके अमर सरिता।
****************************
जिंदगी में कभी गुमां न करना "तोषण"
मिट्टी से बना है मिट्टी में जा मिलेगा।
****************************
‪#‎आचार्यतोषण‬
आचार्य तोषण चुरेन्द्र की फ़ोटो.
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toshan

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#‎शुभ_बिहान‬

#‎शुभ_बिहान‬
सुरूज नरायेन आंखी खोले भाग मनखे के जागे
धरती दाई के कोरा म नवा अंजोर आके बगरागे।
धरव रापा अऊ गैंती कुदारी खेत खार चतराबो
चलव भइय्या चलव दीदी कमइ के दिन ह आगे।
#शुभ_बिहान
****************************
‪#‎आचार्य_तोषण‬

आचार्य तोषण चुरेन्द्र की फ़ोटो.
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maa

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सबला हंसाना हे

कोनटा तीर जाके खुद रोले तै "तोषण"
सबला हंसाना हे तोला ए दुनिया मा।
आचार्य तोषण चुरेन्द्र की फ़ोटो.
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कश्ती

किनारे से कश्ती का मिलना युं ही गंवारा नही
चाहत हो दिल में तो दूरियाँ नजदीक हो जाती है।
आचार्य तोषण चुरेन्द्र की फ़ोटो.
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झन निकलव घुमेबर बादर असन करिया जहू
हमर असन ढेलहा के जिनगी कटत हे घाम म।
आचार्य तोषण चुरेन्द्र की फ़ोटो.
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कभू जादा कभू कम।।

अपन हाथ म हे खुसी, हाथ अपन हे गम।
एकसस्सी झन मिले ,कभू जादा कभू कम।।
आचार्य तोषण चुरेन्द्र की फ़ोटो.
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हिरदे भीतरी

निक लगे तोर गुरतूर बोली
परेम भाव जेमा समाय हे।
सुनके कानले हिरदे भीतरी
अब्बड़ सुघ्घर जगह बनाय हे।
आचार्य तोषण चुरेन्द्र की फ़ोटो.
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बड़प्पन

सहृदय कोटिशः सपुष्प
आपको हार्दिक नमन
समझ गए भाव आप
सादर वंदन अभिनंदन
रहेंगे आभारी आपके सदा
जब तक है तन में प्राण
बांधी स्नेह डोर आपने
भाए आपका यही बड़प्पन
आचार्य तोषण चुरेन्द्र की फ़ोटो.
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अनमोल

लेख जो मेरे जिसका कोई मोल नही "तोषण"
अनमोल तो वो हैं जो इसे पसंद करता है।।
आचार्य तोषण चुरेन्द्र की फ़ोटो.
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जीवन चक्र

जीवन चक्र
तकदीर तो कभी हमने देखी नही "तोषण"
देखें है मंजर में बदलते दुनिया की तस्वीर
आचार्य तोषण चुरेन्द्र की फ़ोटो.
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जूस्तजू जो तेरी है


जूस्तजू जो तेरी है
वही आरजू मेरी है।
मिलकर चले साथी
किस बात की मजबूरी है
चलती है चाकू छूरी
मै और तुम के बीच
अहम को मिटाने "तोषण"
हम का आना जरूरी है।
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कमल

कमल कीचड़ म खिलै जानत हे सब कोय।
देख सुंदरता "तोषण"के रिझ गए मन तोय।।
अच्छा-अच्छा सब कहे अच्छाई करे न कोय।
अच्छाई करे के पारी में बुरा कहे सब कोय।।
आचार्य_तोषण
आचार्य तोषण चुरेन्द्र की फ़ोटो.
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मया पीरीत के गोठ



करिया रहे चाहे गोरिया,हावय दिल के रानी ।
कोयली सही झरथे मुंह ले,सुघर गुरतुर बानी।।
सकल सूरत मा का राखे हे,बोली रहे गा सुघ्घर।
मया पीरीत भरे रहय,सदा रहय मन सुघ उज्जर।।
मया नइ देखय नता गोता,पीरीत अपन निभाय।
मया पीरीत के छंइहा मा, सुघर जिनगी बिताय ।।
जगा बनाले सबके दिल,करे सुरता तोर सबझन।
मया पीरीत के बात गुने, हरसय सबो के तनमन।
मया बढ़ाले मया कमाले,जिनगी हवय दिन चार।
कहत तोषण सुनले संगी,मन छावय खुशी अपार।।
‪#‎आचार्य_तोषण‬
- जून 25, 2016 कोई टिप्पणी नहीं:
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रहम

रहम तो हम गरीबो के दिल मे होती है "तोषण"
देखकर अनदेखा कर दे ऐसे लोगों की बस्ती है।
सुपरभात
- जून 25, 2016 कोई टिप्पणी नहीं:
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आज देखव

मन मलीनता धोए नहीं,पावडर रहे पोताय।
दुनिया के चकाचौंध मा, सबझन लगे मोहाय।
आज देखव जमाना ला,कोन डहर मा हे जात।
आतंकवाद नक्सलवाद मा, होवत हे रक्तपात।
दारू पियय दरूहा संगी,तिरिया लइका ह रोय।
हरताल सब दिन करय,फेर भट्ठी बंद कब होय।
नान्हे बड़े के मुंह ले ,निकलत गुंगवा के फूंक।
पाऊच खाए कचर कचर, जतर कतर दे थूक।
‪#‎आचार्य_तोषण‬
- जून 25, 2016 कोई टिप्पणी नहीं:
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दर से तेरे ऐ खुदा

दर से तेरे ऐ खुदा खाली हाथ न जाऊंगा
यकीं मुझे है तुझपे मन की मुरादें पाऊंगा
बरसाते रहना रहमोकरम मुझ पर अपनी
हर इक दफ़ा तेरा ही गजल गुनगुनाऊंगा।
मुझको प्यार भी तुझसे है और ऐतबार भी
इनकार भी है मौला तुझसे और इजहार भी
रश्मियाँ बिखेरेंगे आफताब जब तलक जहान में
आता रहेगा नाम तेरा ईश्वर या परवरदिगार भी
आचार्य तोषण
- जून 25, 2016 कोई टिप्पणी नहीं:
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रूबरू

रूबरू करादो हमें भी जमाने से ऐ "तोषण"
भटक रहें है अकेले इतने बड़े हिन्दुस्थान में...
‪#‎आचार्य_तोषण‬
सरस्वती शिशु मंदिर डौंडीलोहारा
 
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आचार्य तोषण के रचना

सुप्रभातम् मित्रों
आज आप सभी का दिन मंगल मय हो...
[9:32am, 18/06/2016]
✍🏻आचार्य तोषण✍🏻:
रूबरू करादो हमें भी जमाने से ऐ "तोषण"
भटक रहें है अकेले इतने बड़े हिन्दुस्थान में...
‪#‎आचार्य_तोषण‬
सरस्वती शिशु मंदिर डौंडीलोहारा
[9:35am, 18/06/2016]
✍🏻आचार्य तोषण✍🏻:
दिन गुजर जाते है नाम बनाने में "तोषण"
क्यों तुले हो यारो इसे कीचड़ से मिलाने में...
[9:37am, 18/06/2016]
✍🏻आचार्य तोषण✍🏻:
नाम यूंही न पड़ा आचार्य का जमाने में "तोषण"
देते है जो प्रेरणा अपने आचरण से...
आचार्य तोषण चुरेन्द्र की फ़ोटो.
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आंसू


आंसू हमारी आंखों की कैद में थीं "रश्मि"
बस तेरी याद आई और जमानत मिल गई...
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हमर गुरू -चेला परंपरा


हमर गुरू -चेला परंपरा
____________________
अपन पुरखौती के पन्ना ल लहुटाके अगर देखथन त वहू में गुरू के महिमा के बखान करे गेहे -
"गुरूर्बह्मा गुरूर्विष्णुः गुरूर्देवो महेश्वरः।
गुरू:साक्षात्परब्रह्म तस्मै श्री गुरूवे नम:॥
हमर समाज के संरचना में गुरू चेला के बड़ महत्व हे। गुरू के किरपा ले हमर भीतरी छिपे अंधियारा ल दूरिहा भगाथे। सोज रद्दा म रेंगाथे।गुरू ह भगवान ल पाए के रद्दा बताथे। तभे तो कबीर दास ह घलक केहे हे
"गुरू गोविन्द दोऊ खड़े काके लागू पाय।
बलिहारी गुरू आपकी गोविन्द दियो बताय।।"
पहिली जमाना म गुरूकुल के चलन रहय जिंहा राजा घर के लइका अउ गरीब घर के लइका सबझन गुरू के आसरम में रहिके ही दाई ददा के मया अउ जिनगी जिए शिकछा मिले। गुरू के आसरम म रहिके चेला ह समरसता ,आज्ञाकारिता, मितवयता,अउ नाना परकार के सदगुन ल गरहन करथे। राम चरित्र मानस म बाबा तुलसीदास जी ह घलक केहे हे-
"अनुज सखा संग भोजन करहिं।
मातु पिता आज्ञा अनुसरहिं।"
गुरू ह समझ जाय कि कोन चेला मा का गुन हे । तेकर हिसाब लेके ओला ओखर रद्दा म आघू बढाय के उदीम करथे।
सफल गुरू विही ल माने गेहे जेन हा अपन चेला ल आघू बढे बर प्रेरित करथे अऊ समय समय म रद्दा घलक बताथे।
भगवान ले ऊपर गुरू के आसन हे।सबले जादा मान सम्मान हे। एखर गरिमा ल हम सब गुरूजन अउ शिक्षक मन ला गुरु चेला के परंपरा बरकरार रखना चाही।
आचार्य तोषण
सरस्वती शिशु मंदिर
उच्च माध्यमिक विद्यालय
डौंडीलोहारा बालोद(छ. ग.)
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योग

आपा धापी की इस जिंदगी में भाग रहे हैं लोग
जिंदगी के मैदान में खुद खेल खेल रहे हैं लोग
आधुनिकता की जिंदगी जीए जा रहे है लोग
पूर्वजों की अमानत योग को भूले जा रहे है लोग
तौर तरीके खान पान से सेहत खराब हो रहा है
लिए मोटापा कुली जैसे अपने आपको ढो रहा है
परवाह नहीं जरा सेहत की घोड़ा बेच सो रहा है
बढ़ी दौरा बारी बारी दिल पकड़ अब रो रहा है
स्वस्थ अगर रहना है जग में मान तोषण की बात
हर रोज सबेरे सबेरे लगाओ चक्कर छह सात
तन सदैव रहेगा सुंदर करते रहो  दिन रात
हर रोज एक नई जिंदगी से होगी अब मुलाकात
‪#‎आचार्य_तोषण‬
Sent: 07:20, 20 Jun
आचार्य तोषण चुरेन्द्र की फ़ोटो.


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आचार्य तोषण के रचना

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चिट्ठी पतरी

नंदागे अब चिट्ठी पतरी भेजंव कइसे संदेश
कहां लुकागे तै पिरोहिल जाके कोन सा देश
आचार्य तोषण चुरेन्द्र की फ़ोटो.
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जिद तो अपनी भी थी इस जमाने मे

जिद तो अपनी भी थी इस जमाने मे
गुजर जाए जिंन्दगी तुम्हें भुलाने में
ढूढती रहती नजर तन्हाई -ए -मंजर पे
गुम हो गई कहां तू कौन से कैदखाने में
रूखसत हो गई ऐ इश्क ए गुलिस्तान से
उलझाना पड़ा हाथ बागबान सजाने में
हिदायत है न गुजरना राह कभी इश्क के
आ जाएगा "तोषण"खुद दुनिया के निशाने में
‪#‎आचार्य_तोषण‬
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छत्तीसगढ़ी स्वर वर्णमाला

छत्तीसगढ़ीहा आचार्य तोषण
के छत्तीसगढ़ी स्वर वर्णमाला
‪#‎अनपढ‬ गंवंइहा किसान,पढे लिखय नइ जानंव।
‪#‎आवय‬ जावय कछु निही,कतिक ल मैहा तानंव।
‪#‎इही‬ भुंइया के सेवा बजावत,जिनगी मोर गुजरय
‪#‎ईमानदारी‬ ले करम करंव,अतकी धरम ल मानंव।।

‪#‎उवत‬ सुरूज बासी धरके,खेतखार कोती जाथंव।
‪#‎ऊरपेट्टा‬ मंझनिया बेरा, बासी चटनी नून खाथंव।
‪#‎एडी‬ के जात बोहाय झरे, पसीना झरझर तन ले
‪#‎ऐंठय‬ घाम सोजहा मुड़ी, छंइहा म जा सुरताथंव।।
‪#‎ओगरथे‬ भुंइया ले पानी,दिन रात इंहा कमई मा।
‪#‎औंटाथन‬ अपन तन ला, घाम पियास झंवई मा।
‪#‎अंगूर‬ के दाना बरोबर,सपड़थे हमनला खवई मा
‪#‎अ‬: नइ निकले मुंह ले, भुंइया के सेवा बजई मा।।
॥छत्तीसगढ़ महतारी की जय॥
॥आचार्य तोषण॥
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प्यार

प्यार इश्क मोहब्बत जाने हैं कितने नाम
लोग चक्कर में घुमते हो करके बदनाम
आचार्य तोषण चुरेन्द्र की फ़ोटो.
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काम अइसन करले

चोरई म कभू कखरो,पेट नइ तो भरय गा।
सरस्वती लछमी दुरगा के,संग नइ परय गा।।
दूसर के जीनिस चोराबे,मान कहां ले पाबे।
करनी झन कर अइसे, पाछू फेर पछताबे।।
चोरहा के जिनगी ल,सबझन ह दुतकारथे।
बने करम करइय्या ल,सबझन ह पुचकारथे।।
खाबे पान दूसर मुंह ,खुद के मुह कहां रंगही।
रूख ले जर ला कांटबे ,कतेकरा फेर जंमही।।
काम अइसन करले,नाम होवय "तोषण" तोर।
न धनगांव न लोहारा म,संसार म होवय शोर।।
॥आचार्य तोषण॥
॥धनगांव डौंडीलोहारा॥
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॥चिरई के दरद दुख॥.

छत्तीसगढ़ के पागा कलगी
क्र.१२ बर चित्र अधारित
मोर प्रयास से रचना

छत्तीसगढ़ के पागा कलगी
क्र.१२ बर चित्र अधारित
मोर प्रयास से रचना
॥चिरई के दरद दुख॥
------------------------
चिरई कहिथे मनखे ला
झन काटव गा रूख ला
का तुंहर ले देखे नी जाय
हमर मन के दरद दुख ला
--------------------------
सुवारथ बर अपन तैहर
जंगल ला उजारत हस
रूख राई म बसे चिरई
जिते जियत तै माराथस
देवतहस हमला दुख त
कहां ले पाबे तै सुख ला
का तुंहर ले देखे नी जाय
हमर मन के दरद दुख ला
--------------------------
तहूं जीव तइसने हमूं जीव
सबला गढ़य भगवान गा
नइ बन सकस इंसान त
झन बन तै शैतान गा
पाप करेबर छोड़ दे तै
यमराज देखही तोर मुख ला
का तुंहर ले देखे नी जाय
हमर मन के दरद दुख ला
--------------------------
चिरई कहिथे सुनरे मनखे
जिए के हमला अधिकार हे
जंगल झाड़ी के दाना पानी
इही मा हमर संसार हे
सच्चा मनखे विही हरे
समझे सबके सुख दुख ला
का तुंहर ले देखे नी जाय
हमर मन के दरद दुख ला
--------------------------
आचार्य तोषण
धनगांव डौंडीलोहारा
बालोद छत्तीसगढ़
आचार्य तोषण चुरेन्द्र की फ़ोटो.

------------------------
चिरई कहिथे मनखे ला
झन काटव गा रूख ला
का तुंहर ले देखे नी जाय
हमर मन के दरद दुख ला
--------------------------
सुवारथ बर अपन तैहर
जंगल ला उजारत हस
रूख राई म बसे चिरई
जिते जियत तै माराथस
देवतहस हमला दुख त
कहां ले पाबे तै सुख ला
का तुंहर ले देखे नी जाय
हमर मन के दरद दुख ला
--------------------------
तहूं जीव तइसने हमूं जीव
सबला गढ़य भगवान गा
नइ बन सकस इंसान त
झन बन तै शैतान गा
पाप करेबर छोड़ दे तै
यमराज देखही तोर मुख ला
का तुंहर ले देखे नी जाय
हमर मन के दरद दुख ला
--------------------------
चिरई कहिथे सुनरे मनखे
जिए के हमला अधिकार हे
जंगल झाड़ी के दाना पानी
इही मा हमर संसार हे
सच्चा मनखे विही हरे
समझे सबके सुख दुख ला
का तुंहर ले देखे नी जाय
हमर मन के दरद दुख ला
--------------------------
आचार्य तोषण
धनगांव डौंडीलोहारा
बालोद छत्तीसगढ़
आचार्य तोषण चुरेन्द्र की फ़ोटो.
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हे भारत के माटी तोला,

तोर महिमा अजर अमर रही दाई
हम भले दिन चार रहन न रहन...
~~~~~~~~~~~~~~~~~
हे भारत के माटी तोला,
घेरी बेरी परनाम हे
जनम देहस बलिदानी लइका,
तोर चरन मा चारो धाम हे

उत्तर हवय हिमालय परबत
छाती ताने खड़े हे सरपट
सेंकय बइरी मनला झटपट
दकछिन मा रतनाकर सिंधु
गोड़ धोवय सुखधाम हे
हे भारत के माटी तोला,
घेरी बेरी परनाम हे
जनम देहस बलिदानी लइका,
तोर चरन मा चारो धाम हे
बोहिथे जिंहा गंग के धारा
ग्यान के कोठी हवय अपारा
गुनला गावय जुरमिल सारा
शंख बजावय मंगल गावय
आरती करय सुबो साम हे
हे भारत के माटी तोला,
घेरी बेरी परनाम हे
जनम देहस बलिदानी लइका,
तोर चरन मा चारो धाम हे
तोर कोरा म खेलेन कूदेन
बन डोंहडू बगिया म फूलेन
अचरा म तोरे झुलना झुलेन
तन मन धन ला अरपन करिके
करन सेवा आठो याम हे
हे भारत के माटी तोला,
घेरी बेरी परनाम हे
जनम देहस बलिदानी लइका,
तोर चरन मा चारो धाम हे
बालकिसन ह बंसी बजावय
समर भूमि म गीता सुनावय
दया धरम के पाठ पढावय
रख मरियादा तै जिनगी म
रस्दा बतावय राम हे
हे भारत के माटी तोला,
घेरी बेरी परनाम हे
जनम देहस बलिदानी लइका,
तोर चरन मा चारो धाम हे
अइन अंगरेजन बनके आंधी
लड़िन अजाद भगत अउ गांधी
सूंत एक्य के सबझन बांधी
अजादी के लहरे तिरंगा
भारत माता के नाम ले
हे भारत के माटी तोला,
घेरी बेरी परनाम हे
जनम देहस बलिदानी लइका,
तोर चरन मा चारो धाम हे
॥जननी:जन्मभुमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी॥
॥आचार्य तोषण॥
॥धनगांव डौंडीलोहारा॥
॥बालोद.छत्तीसगढ़.भारत॥

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॥बादर॥


~~~~~~~~~~~~~~~~
धान कोठरी ले हेराय परे हे
खेत खलिहान चतराय डरे हे
कोन जनी कहा लुकागे रे बादर
संसो म बबा ह तरवा ल धरे हे
~~~~~~~~~~~~~~~~~~
जजबात तो बने हे तोर बात मा
का जादू हे ओखर करामात मा
देख हवा गरेल मन ला लागय
झूम बरसही आज बादर रात मा

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
फलक ले फलकत आवय पानी
धन्य होगे मोर तोर जिनगानी
मन लगाके अब धान बोंलय
आगे दिन अब खेती किसानी
~~~~~~~~~~~~~~~~~~
आजा झुमर के तै आसाढ़ म
भुंइया सुखावय ठाढ़े ठाढ़ म
अइसे जमदरहा बरसबे तै
झन बोहावय कोनो बाड़ म
~~~~~~~~~~~~~~~~~
एसो के सावन बने बरसाबे
झन कोनों ल तै तरसाबे
हंसी खुसी मया बांटत रहिबे
झन कोनों ल तैहा रोवाबे
~~~~~~~~~~~~~~~~~~
॥आचार्य.तोषण॥
आचार्य तोषण चुरेन्द्र की फ़ोटो.
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    गुरु पूर्णिमा - *सशिमं डौंडीलोहारा मे मनाया गया गुरु पूर्णिमा पर्व* *डौंडीलोहारा :-* स्थानीय सरस्वती शिशु मंदिर डौंडीलोहारा मे गुरु पूर्णिमा पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया...
    7 वर्ष पहले
  •  तोषण कुमार चुरेन्द्र
    #‎राम_राम‬ # - कलजुग समजुग आन नहिं जे नर कर बिसवास। गाइ राम गुन गन बिमल भव तरहिं बिनुहि प्रयास। ‪#‎राम_राम‬ # जिनगी डोंगा पार करे राम सियापति के गाथा। बालमिकी तुलसी जस संत ...
    10 वर्ष पहले

विज्ञात की कलम

  • विज्ञात की कलम
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