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रविवार, 25 जुलाई 2021

सावन

*सावन के पहिली सोमवार मा भोलेनाथ सबला आशीष दे*

*घनाक्षरी*

सावन के महिना मा,पूजा करे नर नारी,
भोले के भजन करे,जग में महान हे।
डमरु बाजे शिव के,तरे सगरो जीव हे,
शिव जी के महिमा ल,जाने ये जहान हे।
डम डम डमरू के,मन मोहे अति प्यारी,
ओम के गुजन होवे,कोयली के तान हे।
आवव भगत सबो,बम बम सब कबो,
कँस के आशीष दीही,भोले भगवान हे।


तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद छत्तीसगढ़

रविवार, 7 जून 2020

बीज (तोषण चुरेन्द्र "दिनकर")


विधा :-घनाक्षरी
दिनाँक :-7/6/20
दिन :-रविवार
विषय :-बीज
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..............भारती किसान प्यारे,
..........धरती के हैं दुलारे
....खेतों में ये बीज बोयें,
हलबा महान है।।1।।

............बरसे प्रेम प्रकृति की,
........बीज हुआ अंकुरित,
....लेकर जनम नया,
भरे परवान है।।2।।

............नव रंग जब चढ़ा,
.........सीना ताने वृक्ष खड़ा,
....राहगीर बैठ छाँव,
मिटाते थकान है।।3।।

...........पक कर बीज बनो,
........परहित काज करो,
....नाज करे सारा जहां,
करे गुणगान है।।4।।
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तोषण चुरेन्द्र 'दिनकर'
डौंडी लोहारा बालोद

रविवार, 12 अप्रैल 2020

प्रकृति की शक्ति

विधा घनाक्षरी
विषय प्रकृति की शक्ति
दिनाँक12/4/20

( सृष्टि=प्रकृति )

सृष्टि शक्ति क्षीण हुई 
धीरज विहीन हुई,
कोरोना का वायरस
घन बन छाएं हैं।

चर चाहे हो अचर
उपवन बेअधर,
डर यह कालिमा की
रोज मंडराएं हैं।

मुश्किलों की है ये घड़ी
चुनौतियां बड़ी-बड़ी,
थक हार नहीं साथी
क्षणी विपदाएं हैं।

अमीर गरीब सारे 
सब के हो एक नारे,
भागेगा अब कोरोना
चेतना जगाएं हैं।

तोषण कुमार"दिनकर"

बुधवार, 8 अप्रैल 2020

प्रार्थना

*प्रार्थना*

जनता से है प्रार्थना,मर्जी अपनी चले ना,
नियम सरकार का, भी तो अपनाइये।

सबकी ये सोच बने,सीना ताने आगे खड़ें
गाँव के मुखिया का ,साथ तो निभाइये।

लड़ना कोरोना से है,कहना सभी से है ये,
मिलकर आज सब,कदम बढ़ाइये।

कोरोना ये भाग जाए, सावधानी अपनायें।
जन जन मिलकर,चेतना जगाइये।

तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
डौं.लोहारा बालोद छ.ग.

रविवार, 5 अप्रैल 2020

राम राज्य

मंच को सादर नमन

विधा घनाक्षरी
विषय राम राज्य
दिनाँक 05/04/2020
दिन रविवार

जागे पहले मानवता मिटे सब दानवता,
चलें सच्ची राह साथी झूठ हार जाएगा।

दुखियों के सेवा होवे,भूखे कोई नहीं सोवे,
कर भला दुसरों की देव बन जाएगा।

सभी का आदर करे मीठी मीठी बातें करें,
आगे आके बैरी प्यारे गले लग जाएगा।

नवधा सा ज्ञान मिले,खुशियों के पुष्प खिले,
तभी मेरे भारत में राम राज्य आएगा।

तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
डौंडी लोहारा बालोद छ.ग.

मंगलवार, 10 मार्च 2020

प्रेम सद्भाव

*प्रेम सदभाव लिये,*
              *एकता संदेश दिये,*
*होली का त्योहार हमें,*
              *यही सिखलाती है।*
*रंग सराबोर करे,*
              *सुमता के राह गढ़े,*
*सतरंगी रंग सदा,*
              *पाठ ये पढ़ाती है।*
*आओ मिल हम साथी,*
              *मिलके मनाये होली,*
*बसंत बयार लिये,*
              *कोयलिया गाती है।*
*रंगीला परब भावे,*
              *मन मेरा नाचे गावे,*
*फाग की नगाड़ा अब,*
              *राग जो सुनाती है।।*

*तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा*
*डौंंडी लोहारा बालोद छ.ग.*

सोमवार, 13 जनवरी 2020

जाबो मतदान करे

घनाक्षरी

जाबो मतदान करे,हक ये हमर हरे,
मिले हावे मोका येला, कभु नी गंवाना हे।

चुनबो अपन नेता,सबके हावै चहेता
सुनो मोर भैय्या भौजी,विहीला जिताना हे।

गाँव के बिकास करे,दीन दुख दूर करे,
फले फूले गाँव सारी,सुग्घर बनाना हे।

सुनो सब नर नारी,मिले हावै अब पारी,
देश अउ समाज ला,सुदृढ़ सजाना हे।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
उपाध्यक्ष
मधुर साहित्य परिषद
डौंडी लोहारा

रविवार, 24 नवंबर 2019

बाल श्रम

घर मे हैं कुछ नही,पढ़ने की सुध नहीं,
भोर से है निकले जो,रोटी की जुगाड़ में।

होटल हो चाहे बासा,रोजी की है इक आशा,
इत उत डिब्बा बीने,बेचें है कबाड़ में।

मारे है गरीबी जिन्हें,बोलो भला कैसे जिये,
पाठशाला जाते नहीं, झाँके है किवाड़ में।

तोषन है गरीब मेरे,फूटे है नसीब तेरे,
बाल होके काज करे,दिल्ली क्या मेवाड़ में।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा

बुधवार, 7 अगस्त 2019

भैय्या मेरा प्यारा


पिता जैसा क्षमता है, भाई माँ की ममता है।
खुशियाँ जहान की ये,भाई से ही पाई है।
बने कभी हाथी घोड़े,भूलकर दुख सारे,
लिए मुस्कान अपने,गम को छिपाई है।
सारी सुविधाएँ दिए,बहनों पे वार भाई
खाए तूने रुखी सूखी,खीर को खिलाई है।
कृष्ण जैसा रक्षा करे,द्रौपती के चीर भरे,
आँचल को चीरकर,राखी जो बंधाई है।

भैय्या मेरी लाज रखो,जिंदगी आबाद रखो,
आपने कलाई में जो,राखी ये बंधायी है।
लाख आएँ तूफाँ कोई,या कोई बहने रोई,
मुश्किलों में आके भाई,जान जो बचायी है।
दिल को दुखाना नहीं, हमें यूँ रूलाना नहीं,
मुखड़े को देख देख, फूले न समाई है।
जग में है न्यारा भाई,सबसे है प्यारा भाई,
तारा माँ की आँखो का है,दुलारा ये भाई है।

तोषण कुमार चुरेन्द्र"धनगंइहा"
डौंडी लोहारा बालोद
छ.ग. ९६१७५८९६६७

रविवार, 18 दिसंबर 2016

लिये मुसकान होंठों पे

लिये मुसकान होंठों पे दिलबर हमसे
खुली छत पर युँही मिलने आ जाते हो।
करके चोरी दिल की चुपके―चुपके तुम
उड़ते बादल की तरह छुप जाते हो।
आँखों ही आँखों में अपनी करके इशारा
गहराइयों में दिल की उतर जाते हो।
आते नहीं कभी मुलाकात करने 'तोषण'
रातों की तन्हाई में तुम तड़पाते हो
©®
आचार्य तोषण धनगांव९६१७५८९६६७
१६/११/१६

हो जाऊँ जो रूखसत

घनाक्षरी
हो जाऊँ जो रूखसत , इस दुनियाँ से कभी ,
आँसुओं को पलकों में , अपनी भर लेना।
तन्हाई का मंजर हो , याद जो आऊँ मैं कभी ,
अफ़सानों से हमारा , दीदार कर लेना।
था कभी मैं तात यहाँ , झरनों सा रहा कभी ,
बनके नदी मैं बढूँ , ऐसी डगर देना।
हंसाया कभी रूलाया , लगाया इल्जाम कभी ,
हुई जो भूल हमसे , मुआफ़ कर देना।

© ®
आचार्य तोषण
धनगांव डौंडीलोहारा बालोद छ. ग.४९१७७१
चलितभाष ९६१७५८९६६७

शुक्रवार, 26 अगस्त 2016

राखी


जारे परेवना मोर भइय्या करा मोर संदेशा सुनाबे
खड़े हे सीना ताने सीमा में राखी बांध तैह आबे
सोन चिरइय्या भारत मां के रातदिन सेवा बजाए
बन्दुक धरके बइरी मनला ए भुइंया के धुर्रा चटाए
धरले तै मोर गांव के माटी मांथ म तिलक लगाबे
जारे परेवना मोर भइय्या करा मोर संदेशा सुनाबे
खड़े हे सीना ताने सीमा में राखी बांध तैह आबे
खेल रमल म पांडव जब दुरपती ल दांव लगाए
इही राखी के मान रखेबर कान्हा ह बचन निभाए
बन कृष्णा तै सब बहिनी बर संदेश इही पहुँचाबे
जारे परेवना मोर भइय्या करा मोर संदेशा सुनाबे
खड़े हे सीना ताने सीमा में राखी बांध तैह आबे
छत्तीसगढ़हीन के दुलरवा मोर "तोषण" भइय्या
हँसी खुसी तै सेवा बजा महतारी लेवय बलइंया
सदा खुसहाल रखे तोला मइंया के सोर बताबे
जारे परेवना मोर भइय्या करा मोर संदेशा सुनाबे
खड़े हे सीना ताने सीमा में राखी बांध तैह आबे
-आचार्य तोषण
https://arhkepagakalagi.blogspot.in/20…/…/blog-post_17.html…

राम नाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...