एक दिन अइसे गुजरै नही
हालत एखर बिन सुधरै नही
गोसंईनिन ले जादा एतबार होगे हे
तोर लिखई म दिल तार तार होगे हे
सिरतोन मा गुप्ता जी तोर ले प्यार होगे हे
लिखई के वायरल बुखार होगे हे
वावा का बात हे
गुरुवार, 19 मई 2016
दाई
दाई तोर पांव के धुर्रा मोर माथ के चंदन ।
जनम देवइय्या दाई करथंव तोला वंदन।।
नव महिना कोख म राखे घाम पियास ल सहिके।
बने गुणी मोर ललना पढे कथा कहानी कहिके।।
जनम धरेंव खेलेंव कुदेंव धरती दाई के कोरा मा।
दाई तैहा बइठे डेढोली सांझे बिहाने अगोरा मा।।
नान्हेपन ले बड़े करे कोदई बासी खवाके।
बनेबने हमला राखे सरदी बरसा ले बचाके।।
आशीष देदे तैहा दाई दुध के करजा चुकाहूं।
पूरा नी होही ए दारी त फेर नवा जनम धर आहूं।।
हीरा मोती सोना चांदी हे सब जीनिस के मोल।
जग मा जेकर थाह नीहि दाई के मया हे अनमोल।।
दाई जइसन दुनिया मा अऊ दुसर जहान नहीं।
बन जा कतको महान दाई ले कोई महान नहीं।।
दाई बर जतका लिखहूं ओतकी दाई बर कम हे।
नीहस दाई आज मोर करा जादा सबले मोला गम हे।।
मुड़ मा हांथ रखिबे दाई बने रही मोर धरम करम।
हावा आए आए गरेल आंधी म झन रूके कदम।।
सदा आशीष बरसाबे दाई नित नवागोठ सिखते राहंव।
लइका सियान जवान मितान दाई दीदी बर लिखते राहंव।।
*******************
एक घांव अउ जम्मो महतारी
मनला चरण छुके परणाम
*******************
-आचार्य तोषण गांव-धनगांव ,
समाज
॥समाज॥
भारत मां के बसे कोरा मा सुघ्घर मोर छत्तीसगढ़।
वीरनारायण जइसे बेटा त्यागिस प्राण महतारी बर ।
छत्तीसगढ़ नित याद करही गैंदसिह नायक के कुर्बानी
गाही गाथा समाज हलबा सुनही जेला नारी परानी।
सर्व समाज छत्तीसगढ़ के छत्तीसगढ़ही अपनावंव
महतारी के बोली भाखा सब जन जन मा बगरावव।
बड़े डोंगर दंतासिरी करा हलबा हलबी जुरियायेन।
दिवस शक्ति मनाबो कहिके सुघ्घर गोठ गोठियायेन।
माता शक्ति आशीष दे सबके मन हरसाईस ।
जुरमिल के हलबा समाज जोर जयकारा लगाईस।
गांव समाज देश हित बर सुम्मत के कदम उठावव।
समाज के महिमा गजब सबला तुम समझावव।
पढव लिखव गुणी बनव करव नित सब नेक काम।
दाई ददा संग ऊंचा करव देश गांव समाज के नाम।
जुरमिल रांहन हम सब हमला समाज सिखाथे।
का छोटे अउ का बड़े एकता के पाठ पढाथे।
समाज हरे तीरथ धाम माता गंगा जेला कहिथे।
ब्रह्मा बिसनु शंकर देव के जिहा सदा आशीष रहिथे।
बेटी बेटा बरोबर मानव पढावव लिखावव सबला।
बेटी ल हुशियार बनावव झन रहय कोन्हो अबला।
बेटा ल जादा बेटी हर आगू ले आगू आवत हे।
दाई ददा स गांव समाज देश म नांव कमावत हे।
में आचार्य तोषण चुरगंइय्या चुरगंइय्या बेटा जोहर लाल के
सदा टिकली बन चमकत रहूं छत्तीसगढ़ महतारी के भाल के।
-आचार्य तोषण
युवा प्रकोष्ठ सदस्य
अखिल भारतीय आदिवासी हलबा समाज
सर्किल धनगांव डौंडीलोहारा,
बालोद छत्तीसगढ़ मोबाइल:९६१७५८९६६७
भारत मां के बसे कोरा मा सुघ्घर मोर छत्तीसगढ़।
वीरनारायण जइसे बेटा त्यागिस प्राण महतारी बर ।
छत्तीसगढ़ नित याद करही गैंदसिह नायक के कुर्बानी
गाही गाथा समाज हलबा सुनही जेला नारी परानी।
सर्व समाज छत्तीसगढ़ के छत्तीसगढ़ही अपनावंव
महतारी के बोली भाखा सब जन जन मा बगरावव।
बड़े डोंगर दंतासिरी करा हलबा हलबी जुरियायेन।
दिवस शक्ति मनाबो कहिके सुघ्घर गोठ गोठियायेन।
माता शक्ति आशीष दे सबके मन हरसाईस ।
जुरमिल के हलबा समाज जोर जयकारा लगाईस।
गांव समाज देश हित बर सुम्मत के कदम उठावव।
समाज के महिमा गजब सबला तुम समझावव।
पढव लिखव गुणी बनव करव नित सब नेक काम।
दाई ददा संग ऊंचा करव देश गांव समाज के नाम।
जुरमिल रांहन हम सब हमला समाज सिखाथे।
का छोटे अउ का बड़े एकता के पाठ पढाथे।
समाज हरे तीरथ धाम माता गंगा जेला कहिथे।
ब्रह्मा बिसनु शंकर देव के जिहा सदा आशीष रहिथे।
बेटी बेटा बरोबर मानव पढावव लिखावव सबला।
बेटी ल हुशियार बनावव झन रहय कोन्हो अबला।
बेटा ल जादा बेटी हर आगू ले आगू आवत हे।
दाई ददा स गांव समाज देश म नांव कमावत हे।
में आचार्य तोषण चुरगंइय्या चुरगंइय्या बेटा जोहर लाल के
सदा टिकली बन चमकत रहूं छत्तीसगढ़ महतारी के भाल के।
-आचार्य तोषण
युवा प्रकोष्ठ सदस्य
अखिल भारतीय आदिवासी हलबा समाज
सर्किल धनगांव डौंडीलोहारा,
बालोद छत्तीसगढ़ मोबाइल:९६१७५८९६६७
शुभ बिहान
#शुभ_बिहान
सुरूज नरायेन आंखी खोले भाग मनखे के जागे
धरती दाई के कोरा म नवा अंजोर आके बगरागे।
धरव रापा अऊ गैंती कुदारी खेत खार चतराबो
चलव भइय्या चलव दीदी कमइ के दिन ह आगे।
#शुभ_बिहान
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#आचार्य_तोषण
सुरूज नरायेन आंखी खोले भाग मनखे के जागे
धरती दाई के कोरा म नवा अंजोर आके बगरागे।
धरव रापा अऊ गैंती कुदारी खेत खार चतराबो
चलव भइय्या चलव दीदी कमइ के दिन ह आगे।
#शुभ_बिहान
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#आचार्य_तोषण
रूमाल
जाना हे बड दूरिहा खियाल रखहूं मै
घाम बड करत हे ऊरूमाल रखहूं मै।
आबे ते आजा मोर संन जाबो खरखरा
खवई पियई मा मालामाल रखहू मै।
#आचार्य तोषण
घाम बड करत हे ऊरूमाल रखहूं मै।
आबे ते आजा मोर संन जाबो खरखरा
खवई पियई मा मालामाल रखहू मै।
#आचार्य तोषण
इश्क़
गहराइयों में दिल के उतरना जानता हूं
मैं बस इश्क़ हूं इश्क़ करना जानता हूं
भरलो आगोश में मुझको अपनी ऐ "तोषण"
संवारलो मुझको इश्क़ में संवरना जानता हूं।
#आचार्य तोषण
मैं बस इश्क़ हूं इश्क़ करना जानता हूं
भरलो आगोश में मुझको अपनी ऐ "तोषण"
संवारलो मुझको इश्क़ में संवरना जानता हूं।
#आचार्य तोषण
बिदाई
बिदाई
कतिक दिन ले रहूं
बाबू मैहर तोर अंगना मा
बंधा जही मोर हाथ
पिया जी के कंगना मा
चहकत रेहेंव तोर डेहरी
बंधा के मया फंदना मा
आही बिहाएबर मोर बलमा
बांध लेगही मया बंधना मा
बाबू मैहर तोर अंगना मा
बंधा जही मोर हाथ
पिया जी के कंगना मा
चहकत रेहेंव तोर डेहरी
बंधा के मया फंदना मा
आही बिहाएबर मोर बलमा
बांध लेगही मया बंधना मा
शराब
#शराब_जानलेवा_है
#फिर_भी #डोकरा_कथे
#जवान_ला #का...
#एक_पाव_पीयादे_मोला
#मन_मोर_गजब_उदास_हे
#बाई_चलदेहे_गांव_घुमेला
#पेट_दिनभर_उपास_हे।।
#फिर_भी #डोकरा_कथे
#जवान_ला #का...
#एक_पाव_पीयादे_मोला
#मन_मोर_गजब_उदास_हे
#बाई_चलदेहे_गांव_घुमेला
#पेट_दिनभर_उपास_हे।।
राम नाम
कलजुग समजुग आन नहिं जे नर कर बिसवास।
गाइ राम गुन गन बिमल भव तरहिं बिनुहि प्रयास।
#राम_राम #
जिनगी डोंगा पार करे राम सियापति के गाथा।
बालमिकी तुलसी जस संत जेला नंवाए माथा।।
मरा कहिले या राम कहिले आहे प्रभु के नाम।
सुबे भजले मंझनिया भजले भजले तैहा शाम।।
लेके का आहस तेहा का लेके तैहा जाबे।
भुलाए रहिबे माया मा ते राम नाम ल गाबे।।
राम के नाम सार जग बाकी सब बेकार हे।
मन एला बसाले हमर जिनगी के अधार हे।।
रेटहा हावे जिनगी डोंगा राम हमर पतवार।
भव सागर अगम दहरा राम लगाही ओ पार।।
राम नाम के खेती करले ए जिनगी बंजर हे।
माया नचावय हमला मन नादय बन बंदर हे।।
मोर मोर झनकर मनवा दूदिन के जिनगानी हे।
हांस के गोठियाले भजले राम नाम के बानी हे।।
राम नाम मोर मुंहले निकले धन्य हे मोर भाग।
सियाबर के परताप ले ए फुटहा करम गे जाग।।
राम नाम के महिमा गजब लीला हे अपरम्पपार।
मे आरूग अढ़हा "तोषण" कहां पहूं राम के पार।।
#राम_राम_राम_राम_राम_राम_राम_राम_राम#
#आचार्य #तोषण
#धनगांव_डौंडीलोहारा
#बालोद_छत्तीसगढ़
गाइ राम गुन गन बिमल भव तरहिं बिनुहि प्रयास।
#राम_राम #
जिनगी डोंगा पार करे राम सियापति के गाथा।
बालमिकी तुलसी जस संत जेला नंवाए माथा।।
मरा कहिले या राम कहिले आहे प्रभु के नाम।
सुबे भजले मंझनिया भजले भजले तैहा शाम।।
लेके का आहस तेहा का लेके तैहा जाबे।
भुलाए रहिबे माया मा ते राम नाम ल गाबे।।
राम के नाम सार जग बाकी सब बेकार हे।
मन एला बसाले हमर जिनगी के अधार हे।।
रेटहा हावे जिनगी डोंगा राम हमर पतवार।
भव सागर अगम दहरा राम लगाही ओ पार।।
राम नाम के खेती करले ए जिनगी बंजर हे।
माया नचावय हमला मन नादय बन बंदर हे।।
मोर मोर झनकर मनवा दूदिन के जिनगानी हे।
हांस के गोठियाले भजले राम नाम के बानी हे।।
राम नाम मोर मुंहले निकले धन्य हे मोर भाग।
सियाबर के परताप ले ए फुटहा करम गे जाग।।
राम नाम के महिमा गजब लीला हे अपरम्पपार।
मे आरूग अढ़हा "तोषण" कहां पहूं राम के पार।।
#राम_राम_राम_राम_राम_राम_राम_राम_राम#
#आचार्य #तोषण
#धनगांव_डौंडीलोहारा
#बालोद_छत्तीसगढ़
गुपचुप
सड़क होगे सुन्ना सुन्ना होगे गली खोर
घाम पियास के दिन ठंडा पानी जोर
होवत संझौती सबहा निकले घुमेबर
मुंगेडी चाट टिकिया गुपचूप के जोर।
घाम पियास के दिन ठंडा पानी जोर
होवत संझौती सबहा निकले घुमेबर
मुंगेडी चाट टिकिया गुपचूप के जोर।
मानवता
*****
॥मानवता॥
*****
काहत हे समय आज के
झन रो सबला हंसाबे तै
मानवता हे धरम करम तोर
मानवता के गीत गाबे तै
फइले दुनिया म नफरत
नदी प्रेम के बोहाब तै
***************
दीन दुखिया के सेवा में
अपन करतब नाभाबे तै
दीन दुखिया मनखे के
जतन करे लाभ उठाबे तै
खंचवा पाट भेदभाव के
सबला गला लगाबे तै
पाप कपट ले मुंह ल फेरे
पुण्य के लाभ उठाबै तै
****************
हम सब भाई भाई सफ्फे
झन कोई ल ठुकराबे तै
बगिया सबे महके सबरदिन
बन प्यार फूल मुसकाबे तै
मन सबके खिलखिला उठै
भाईचारा मेलजोल बढाबे तै
*****************
असहाय के सहारा बन जा
आशीष भगवान के पाबे तै
मानवता हे सार जगत में
मानवता ही लेके जाबे तै।
****************
#आचार्य_तोषण
धनगांव डौंडीलोहारा
बालोद, छत्तीसगढ़
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काहत हे समय आज के
झन रो सबला हंसाबे तै
मानवता हे धरम करम तोर
मानवता के गीत गाबे तै
फइले दुनिया म नफरत
नदी प्रेम के बोहाब तै
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दीन दुखिया के सेवा में
अपन करतब नाभाबे तै
दीन दुखिया मनखे के
जतन करे लाभ उठाबे तै
खंचवा पाट भेदभाव के
सबला गला लगाबे तै
पाप कपट ले मुंह ल फेरे
पुण्य के लाभ उठाबै तै
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हम सब भाई भाई सफ्फे
झन कोई ल ठुकराबे तै
बगिया सबे महके सबरदिन
बन प्यार फूल मुसकाबे तै
मन सबके खिलखिला उठै
भाईचारा मेलजोल बढाबे तै
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असहाय के सहारा बन जा
आशीष भगवान के पाबे तै
मानवता हे सार जगत में
मानवता ही लेके जाबे तै।
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#आचार्य_तोषण
धनगांव डौंडीलोहारा
बालोद, छत्तीसगढ़
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सेवा गीत
*****************
छत्तीसगढ़ी सेवा गीत
*****************-
जंवारा देखेके लागे साद मोर पंडो राजा
जंवारा देखेके लागे साद हो माय मोर पंडो राजा
जंवारा देखेके लागे साद हो माय
*****************
कामे आये बिसनु देवा कामे आये शंखर --२
कामे आये शंखर मइय्या--२
कामे आये हनुमाने मोर पंडो राजा
जंवारा देखेके लागे साद हो माय
मोर पंडो राजा जंवारा देखेके लागे साद माय
*****************
गरुड़ म आये बिसनु देवा बइला म शंखर आये--२
बइला म शंखर आये मइय्या-२
उड़त आये हनुमाने मोर पंडो राजा
जंवारा देखेके लागे साद माय
मोर पंडो राजा जंवारा देखेके लागे साद हो माय
****************
का धर आये बिसनु देवा का धर आये शंखर --२
का धर आये शंखर मइय्या--२
का धर आये हनुमाने मोर पंडो राजा
जंवारा देखेके लागे साद हो माय
मोर पंडो राजा जंवारा देखेके लागे साद हो माय
*****************
शंख धर आये बिसनु देवा डमरू धर आये शंखर--२
गदा धर आये हनुमाने हो मइय्या--२
मोर पंडो राजा जंवारा देखेके लागे साद हो माय
मोर पंडो राजा जंवारा देखेके लागे साद हो माय
******************
जंवारा देखेके लागे साद मोर पंडो राजा
जंवारा देखेके लागे साद हो माय मोर पंडो राजा
जंवारा देखेके लागे साद हो माय मोर पंडो राजा
जंवारा देखेके लागे साद माय
बोल दुरगा मइय्या की जय
********************
*रचना* आचार्य तोषण
गांव -धनगांव डौंडीलोहारा
जिला-बालोद छत्तीसगढ़
%%%%%%%%%%%%%%%%%
चरैवेति की कामना हृदय में बसा कर रखना।
प्राप्ति होगी इक दिन लक्ष्य सजा कर रखना।।
डगमगाने देना ना कभी अपना दृढसंकल्प
नई कल्पनाओं खातिर कलम रजा कर रखना।।
आचार्य तोषण
%%%%%%%%%%%%%%%%
धरम ईमान सब नंदात हे
सिधवा के मुड़ी कटात हे
बनगेहे इहाँ भाई हर बैरी
देख हिरदे मोर पिरात है।
%%%%%%%%%%%%%%%%%
हे दाई दुरगा मोर अरजिया एसो कर देबे पुरा ।
झन होय कोनो बैरी दुसमन सपना सबके होवय पूरा।
जंवारा देखेके लागे साद मोर पंडो राजा
जंवारा देखेके लागे साद हो माय मोर पंडो राजा
जंवारा देखेके लागे साद हो माय
*****************
कामे आये बिसनु देवा कामे आये शंखर --२
कामे आये शंखर मइय्या--२
कामे आये हनुमाने मोर पंडो राजा
जंवारा देखेके लागे साद हो माय
मोर पंडो राजा जंवारा देखेके लागे साद माय
*****************
गरुड़ म आये बिसनु देवा बइला म शंखर आये--२
बइला म शंखर आये मइय्या-२
उड़त आये हनुमाने मोर पंडो राजा
जंवारा देखेके लागे साद माय
मोर पंडो राजा जंवारा देखेके लागे साद हो माय
****************
का धर आये बिसनु देवा का धर आये शंखर --२
का धर आये शंखर मइय्या--२
का धर आये हनुमाने मोर पंडो राजा
जंवारा देखेके लागे साद हो माय
मोर पंडो राजा जंवारा देखेके लागे साद हो माय
*****************
शंख धर आये बिसनु देवा डमरू धर आये शंखर--२
गदा धर आये हनुमाने हो मइय्या--२
मोर पंडो राजा जंवारा देखेके लागे साद हो माय
मोर पंडो राजा जंवारा देखेके लागे साद हो माय
******************
जंवारा देखेके लागे साद मोर पंडो राजा
जंवारा देखेके लागे साद हो माय मोर पंडो राजा
जंवारा देखेके लागे साद हो माय मोर पंडो राजा
जंवारा देखेके लागे साद माय
बोल दुरगा मइय्या की जय
********************
*रचना* आचार्य तोषण
गांव -धनगांव डौंडीलोहारा
जिला-बालोद छत्तीसगढ़
%%%%%%%%%%%%%%%%%
चरैवेति की कामना हृदय में बसा कर रखना।
प्राप्ति होगी इक दिन लक्ष्य सजा कर रखना।।
डगमगाने देना ना कभी अपना दृढसंकल्प
नई कल्पनाओं खातिर कलम रजा कर रखना।।
आचार्य तोषण
%%%%%%%%%%%%%%%%
धरम ईमान सब नंदात हे
सिधवा के मुड़ी कटात हे
बनगेहे इहाँ भाई हर बैरी
देख हिरदे मोर पिरात है।
%%%%%%%%%%%%%%%%%
हे दाई दुरगा मोर अरजिया एसो कर देबे पुरा ।
झन होय कोनो बैरी दुसमन सपना सबके होवय पूरा।
सेवा गीत
[12:36pm, 09/04/2016] aacharyatoshan: *****************
छत्तीसगढ़ी सेवा गीत
*****************-
जंवारा देखेके लागे साद मोर पंडो राजा
जंवारा देखेके लागे साद हो माय
मोर पंडो राजा
जंवारा देखेके लागे साद हो माय
*****************
कामे आये बिसनु देवा कामे आये शंखर --२
कामे आये शंखर मइय्या--२
कामे आये हनुमाने मोर पंडो राजा
जंवारा देखेके लागे साद हो माय
मोर पंडो राजा
जंवारा देखेके लागे साद माय *****************
गरुड़ म आये बिसनु देवा बइला म शंखर आये--२
बइला म शंखर आये मइय्या-२
उड़त आये हनुमाने मोर पंडो राजा
जंवारा देखेके लागे साद माय
मोर पंडो राजा
जंवारा देखेके लागे साद हो माय
****************
का धर आये बिसनु देवा का धर आये शंखर --२
का धर आये शंखर मइय्या--२
का धर आये हनुमाने मोर पंडो राजा
जंवारा देखेके लागे साद हो माय
मोर पंडो राजा
जंवारा देखेके लागे साद हो माय
*****************
शंख धर आये बिसनु देवा डमरू धर आये शंखर--२
गदा धर आये हनुमाने हो मइय्या--२
मोर पंडो राजा
जंवारा देखेके लागे साद हो माय
मोर पंडो राजा
जंवारा देखेके लागे साद हो माय
******************
जंवारा देखेके लागे साद मोर पंडो राजा
जंवारा देखेके लागे साद हो माय
मोर पंडो राजा
जंवारा देखेके लागे साद हो माय
मोर पंडो राजा
जंवारा देखेके लागे साद माय
बोल दुरगा मइय्या की जय
********************
*रचना*
आचार्य तोषण
गांव -धनगांव
डौंडीलोहारा
जिला-बालोद
छत्तीसगढ़
[6:57pm, 09/04/2016] aacharyatoshan: चरैवेति की कामना हृदय में बसा कर रखना।
प्राप्ति होगी इक दिन लक्ष्य सजा कर रखना।।
डगमगाने देना ना कभी अपना दृढसंकल्प
नई कल्पनाओं खातिर कलम रजा कर रखना।।
आचार्य तोषण
[9:02am, 10/04/2016] aacharyatoshan: धरम ईमान सब नंदात हे
सिधवा के मुड़ी कटात हे
बनगेहे इहाँ भाई हर बैरी
देख हिरदे मोर पिरात है।
हे दाई दुरगा
मोर अरजिया
एसो कर देबे पुरा ।
झन होय कोनो
बैरी दुसमन
सपना सबके होवय पूरा।
मां
यह रचना मेरी दिवंगत
माताजी को सादर समर्पित
****************** ॥ मां ॥ *****************
मां तू चली गई कहाँ छोड़कर बियाबाँ जग मग में।
चल पाऊंगा कैसे मां कांटों भरे अंधेरे पग पग में।
जो तू थी साथ मेरे मुझको कोई गम न था।
जाने से तेरे पहले कभी आंखें कभी नम न था।
याद तुझे करके रोता बहते लहू मेरी रग रग में।
चल पाऊंगा कैसे मां कांटों भरे अंधेरे पग पग में।।
भुखी रहकर हमें खिलाई सुलाती हमें खुद जगती थी।
हम जो हंसते तू हंस लेती जख्मों पर मरहम भरती थी।
छिपाने धूप से हमको मां छांव बन चली मग मग में
चल पाऊंगा कैसे मां कांटों भरे अंधेरे पग पग में।।
बाधाएं कितनी भी आई बनी ढाल तू खड़ी रही।
रक्षा करने हमारी खातिर बन तलवार तू अड़ी रही।
गाथा तेरी अमर है मां याद रहेगी हर युग युग में।
चल पाऊंगा कैसे मां कांटों भरे अंधेरे पग पग में।।
जाने से तेरे थम सा गया बचपन मेरा हंसता पूरा।
मां जो रहती पास मेरे रहता न जीवन मेरा अधूरा
रहेगा आशीष साथ मां का हीरा सा चमकूंगा नग नग में।
चल पाऊंगा कैसे मां कांटों भरे अंधेरे पग पग में।।
************* I Miss you "MATAJI" *********
मां का लाडला-
आचार्य तोषण
लाडले का गांव
-धनगांव डौंडीलोहारा,
बालोद ९६१७५८९६६७
****************** ॥ मां ॥ *****************
मां तू चली गई कहाँ छोड़कर बियाबाँ जग मग में।
चल पाऊंगा कैसे मां कांटों भरे अंधेरे पग पग में।
जो तू थी साथ मेरे मुझको कोई गम न था।
जाने से तेरे पहले कभी आंखें कभी नम न था।
याद तुझे करके रोता बहते लहू मेरी रग रग में।
चल पाऊंगा कैसे मां कांटों भरे अंधेरे पग पग में।।
भुखी रहकर हमें खिलाई सुलाती हमें खुद जगती थी।
हम जो हंसते तू हंस लेती जख्मों पर मरहम भरती थी।
छिपाने धूप से हमको मां छांव बन चली मग मग में
चल पाऊंगा कैसे मां कांटों भरे अंधेरे पग पग में।।
बाधाएं कितनी भी आई बनी ढाल तू खड़ी रही।
रक्षा करने हमारी खातिर बन तलवार तू अड़ी रही।
गाथा तेरी अमर है मां याद रहेगी हर युग युग में।
चल पाऊंगा कैसे मां कांटों भरे अंधेरे पग पग में।।
जाने से तेरे थम सा गया बचपन मेरा हंसता पूरा।
मां जो रहती पास मेरे रहता न जीवन मेरा अधूरा
रहेगा आशीष साथ मां का हीरा सा चमकूंगा नग नग में।
चल पाऊंगा कैसे मां कांटों भरे अंधेरे पग पग में।।
************* I Miss you "MATAJI" *********
मां का लाडला-
आचार्य तोषण
लाडले का गांव
-धनगांव डौंडीलोहारा,
बालोद ९६१७५८९६६७
सोमवार, 16 मई 2016
नइ चलय चतुराई
#नइ_चलय_चतुराई
एकझन मुरतीकार बहुत चउतरा ।हर रोज मुरती बनाय । हर रोज आखरी में बाचे माटी के अपन मुरती बनाय ।अइसे ढंग ले ओखर जिनगी चलत रहय।
एक दिन यमराज ह अपन सइनिक मन ला बलइस अउ कथे " तूमन धरती लोक मा जाव अउ एक झन मुरतीकार के परान ल हर के लावव। यमराज के आग्या ल मानके यमराज के सइनिक मन मुरतीकार के घर मा जाथे।
मोहाटी मा सइनिक ल देख के मुरतीकार पुछथे "तुमन कोनव जी"। "हमन यमराज के
सइनिक हरन तोला लेगेल आहन " स इनिक मन किहीस ।
मुरतीकार ऊंखर बात ल सुनिस ।एक कनिक सन खाके पटवा म गिरगे। समहल के उठीस अउ कथे "में एक्कन आथो"।अइसे कहिके खोली म खुसर गे। देखत देखत अरकरहाच जान होगे ।तभो ले मुरतीकार नइ निकलिस । तब फेर सइनिक मन खोली ल जाके देखथे त अकबकागे अउ कथे याहद्दे रे इहाँ तो बड़ाकन एक्के मुंहू वाला मुरतीकार हे ।"अब काखर परान ल धर के लेगबो महराज करा" अइसे सोंच के सइनिक मन लहुट जथे अउ सफ्फा बीते बात ल बताएके बाद कथे "ओ मुरतीकार बहुंत चउतरा हे अब तिही जाबे तभे बनही यमराज महाराज"
बिहान दिन यमराज ह मुरतीकार के घर मे पहुंचथे । तब मुरतीकार पुछथे आप तुमन कोन हरशव महाराज ? "#यम_हरंव_मैं_मैं_हरंव_यम " यमराज ह कहिथे।
"कइसे आना होईस महराज ए गरीब के कुटिया मा।" मुरतीकार पुछिस। यमराज कथे "मे तोला लेगे बर आहों अऊ तोला लेके ही जहूं।"
"लेना का होही महराज जाबोच निही। फेर हमर घर बड़े दिन मे आहस भई रूखा सूखा थोरे राखहूं। ठंढा वंढा चलथे निही महराज।" मुरतीकार किहीस । ठंढा के नांव ल सूनिस यमराज के मुंहू म पानी आगे। यमराज ह कथे "ले ठीक हे त जादाच जीद करत हस ते लान डर रे भई।"
मुरतीकार रंधनी खोली म जाके फिरिज ले ठंढा के बोतल निकालथे अउ ओमा बेहोशी के दवा डालदेथे ।ठंढा लेजाके यमराज ल देदेथे ।सोसन भर यमराज ह ठंढा पीथे। जइसे पूरा ठंढा उरकिस यमराज के चेत बुध खोके बेहोश होगे। यमराज के हालत ल देखके मुरतीकार यमराज के परची ल देखथे सबले उप्पर मे मुरतीकार के नांव रथे। मुरतीकार बड चउतरा। सफेदा लान के अपन उप्पर के नांव ल कांट के सबले खाल्हे म लिख दिस।
अब एती यमराज के बेहोशी टूटीस ।मुरतीकार ल कथे "मजा आगे जी अतिक पान तो मेहा अपन लोक म नी सुते रेहेंव। मे तोर सेवा ले भारी खुस हंव।" अतिक बात ल सुने मुरतीकार खुस होगे। यमराज फेर कथे "एकठन बात बतात हंव मेहा सबले पहिली तोला लेगेल आए रेहेंव फेर अब उप्पर डाहर ल छोड़के खाल्हे डाहर ले शुरू करथंव।"
अतिक बात ल सुनिस ते मुरतीकार के परान हरागे जीव छुटगे।
सीख:
मौत के आघू मा कतरो बहाना करले आही अउ ले जाही।
सुने कहनी ल सुनाएहंव भूल चूक बर छमा चाहूं।।
झलमला के गंगा मंईया
।। गंगा मंइया ।।
भुंइया ले दाई तैहर उपजे सुघ्घर पबरित हे तोर ठांव
छत्तीसगढ़ के मान ओ दाई बालोद तीर झलमला गांव।
बइठे हस झलमला म दाई गंगा मंइय्या तै कहाय ओ ।
चइत कुंवार के महिना दाई तोर अंगना मेला भराय ओ।।
रिगबिग रिगबिग जोत बरय जग उजियारा बगराय ओ।
नर नारी तोर तीर आके मन के मनउती पाय ओ।।
कोनो लावय सरधा के फूल नरिहर भेला कोनो लाय ओ।
अगर कपूर धूप बांती दीया दाई तोर बर बिसाय ओ।।
आवय कोनो रेंगत अंगना कोनो घोंनडत आय ओ।
कोनो दाई अपन छाती म सरधा के जोत जलाय ओ।।
नवदिन नवरात ओ दाई करथन नवधा भगति ओ।
जुरमिल राहंन ए जग मा दे दे अइसन शकति ओ।।
मांगव मंइय्या हाथ जोड़ आस पुरो दे तोषण के।
मोर जिनगी अंधियार हे दीया बार मन रोशन के। ।।
गंगा मंइय्या की जय ।।
******************
रचना -आचार्य तोषण गांव-धनगांव डौंडीलोहारा बालोद(छ. ग.)
भुंइया ले दाई तैहर उपजे सुघ्घर पबरित हे तोर ठांव
छत्तीसगढ़ के मान ओ दाई बालोद तीर झलमला गांव।
बइठे हस झलमला म दाई गंगा मंइय्या तै कहाय ओ ।
चइत कुंवार के महिना दाई तोर अंगना मेला भराय ओ।।
रिगबिग रिगबिग जोत बरय जग उजियारा बगराय ओ।
नर नारी तोर तीर आके मन के मनउती पाय ओ।।
कोनो लावय सरधा के फूल नरिहर भेला कोनो लाय ओ।
अगर कपूर धूप बांती दीया दाई तोर बर बिसाय ओ।।
आवय कोनो रेंगत अंगना कोनो घोंनडत आय ओ।
कोनो दाई अपन छाती म सरधा के जोत जलाय ओ।।
नवदिन नवरात ओ दाई करथन नवधा भगति ओ।
जुरमिल राहंन ए जग मा दे दे अइसन शकति ओ।।
मांगव मंइय्या हाथ जोड़ आस पुरो दे तोषण के।
मोर जिनगी अंधियार हे दीया बार मन रोशन के। ।।
गंगा मंइय्या की जय ।।
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रचना -आचार्य तोषण गांव-धनगांव डौंडीलोहारा बालोद(छ. ग.)
मया के चिनहा
तोर मया के चिनहा ल
राखे रहूं सजाके।
मोर हिरदे के कुरिया म ठोहूं तारा लगाके।
अगोरा म तोर बइठे हावंव रद्दा म नैना गड़ाके।
कतिक दिन ले देखहूं मैंहा लहूं चूरी पहिराके।।
मोर मया के कुरिया ल कब तै अंजोर करबे।
बिन रंग मोर दुनिया ल कब सतरंगी रंग भरबे।।
मोरो सुध तै लेले पगली बइहा बरन मोर हाल हे।
बिन तोर जिनगी बिताना मोर जी के जंजाल हे।
मया के चिनहा देके तैहा जादा काबर तड़पात हस।
अंगना मोर आहूं कहिके काबर टुंहू देखात हस।।
मर जहूं तोर सुधरई मा जादा झन बेकरार कर।
कर मोर संग बिहाव पगली जिनगी के मोर उद्धार कर।।
-आचार्य तोषण
मोर हिरदे के कुरिया म ठोहूं तारा लगाके।
अगोरा म तोर बइठे हावंव रद्दा म नैना गड़ाके।
कतिक दिन ले देखहूं मैंहा लहूं चूरी पहिराके।।
मोर मया के कुरिया ल कब तै अंजोर करबे।
बिन रंग मोर दुनिया ल कब सतरंगी रंग भरबे।।
मोरो सुध तै लेले पगली बइहा बरन मोर हाल हे।
बिन तोर जिनगी बिताना मोर जी के जंजाल हे।
मया के चिनहा देके तैहा जादा काबर तड़पात हस।
अंगना मोर आहूं कहिके काबर टुंहू देखात हस।।
मर जहूं तोर सुधरई मा जादा झन बेकरार कर।
कर मोर संग बिहाव पगली जिनगी के मोर उद्धार कर।।
-आचार्य तोषण
मिंझरा
everything is possible,nothing impossible
impossible & i m possible.
what are you see..???
छेरकीन टुरी कारी किंजरै जंगल झारी।
नइ मांरंव लबारी देथे मीठ मीठ गारी।। [
छत्तीसगढ़ मंच के मंच मा मोर रचना ल सम्मान दे हवव तेकर बर आप जम्मो साहित्यकार मन ला निर्णायक मन ला पसंद करइय्या मन ला मोर डहर ले कोरी कोरी प्रणाम अउ धन्यवाद हे... -आचार्य तोषण
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छेरकीन टुरी कारी किंजरै जंगल झारी।
नइ मांरंव लबारी देथे मीठ मीठ गारी।। [
छत्तीसगढ़ मंच के मंच मा मोर रचना ल सम्मान दे हवव तेकर बर आप जम्मो साहित्यकार मन ला निर्णायक मन ला पसंद करइय्या मन ला मोर डहर ले कोरी कोरी प्रणाम अउ धन्यवाद हे... -आचार्य तोषण
दारू
॥दारू॥
का अंग्रेजी का देशी कहिले,रंग-रंग के हे दारू।
इही दारू चक्कर म,मरगे कतको मंगलू समारू।
दारू के मारे कहीं नी बांचे, थारी बटकी बेंचात हे।
दाई ददा सुवारी लइका ल,खूंन के आंसू रोवात हे।
पीए रथे दारू लटलटले,कुकूर माकुर कस सोथे।
होत बिहनिया उतारा बर,देशी दारू म मुंहू धोथे।
छठ्ठी बरही सब्बे जिनिस मा,दारू होगे हे फैशन।
बिन दारू काम नी होवय, जमाना आगे कइसन।
बर बिहाव के दिन म गाड़ी,दारू पी-पी के चलात हे।
खोधरा डिपरा देखय नीही,पेंड़ म जाके झपात हे।
एक पाव दारू पिए म,कोन जनी का मंजा आथे ।
अमरीत असन खून म,पचीस ग्राम जहर मिलाथे।
नशा म कखरो बनय नही, कहिथे नाश के जड़ ।
नशा देव तुम छोड संगी,सुघ्घर नवा जिनगी गढ़।
आचार्य तोषण
का अंग्रेजी का देशी कहिले,रंग-रंग के हे दारू।
इही दारू चक्कर म,मरगे कतको मंगलू समारू।
दारू के मारे कहीं नी बांचे, थारी बटकी बेंचात हे।
दाई ददा सुवारी लइका ल,खूंन के आंसू रोवात हे।
पीए रथे दारू लटलटले,कुकूर माकुर कस सोथे।
होत बिहनिया उतारा बर,देशी दारू म मुंहू धोथे।
छठ्ठी बरही सब्बे जिनिस मा,दारू होगे हे फैशन।
बिन दारू काम नी होवय, जमाना आगे कइसन।
बर बिहाव के दिन म गाड़ी,दारू पी-पी के चलात हे।
खोधरा डिपरा देखय नीही,पेंड़ म जाके झपात हे।
एक पाव दारू पिए म,कोन जनी का मंजा आथे ।
अमरीत असन खून म,पचीस ग्राम जहर मिलाथे।
नशा म कखरो बनय नही, कहिथे नाश के जड़ ।
नशा देव तुम छोड संगी,सुघ्घर नवा जिनगी गढ़।
आचार्य तोषण
बिहाव लहर
॥ बिहाव लहर ॥
बर बिहाव के चारो मुड़ा उडत हावय गजब शोर।
पोंगा बाजा अउ डीजे के अवाज बाजय कानफोर।
जगा जगा बिहाव लाडू बरा सोंहारी झड़कत हे।
काखरो बर पानी ठंडा कोन्हो पियत सरबत हे।
साजे मडवा पेड़ चार के गंडवा बाजा बाजत हे।
मैन नाचा हरदाही माते नंगतेहे दोहा पारत हे।
दुल्हा सनाय हरदी मा हरिहर काया पिंवराय।
दुल्हनिया घलो कम नही मुसमुस मन मा मुसकाय।
कुम्हडा बटरा आलू दार संग लपेटे पटवा भाजी।
टुरा टुरी राजी हावय काय करय मुल्ला काजी।
बरतिया जाय बर लगेहे बोलेरो वेन टाटा सफारी।
धरम टीकान म टीकय आनी बानी लोटा थारी।
आवय दुल्हिन जब अंगना घर मा पूजा पाठ करवाय।
बेटा बेटी के बिहाव रचाके सबझन खुशहाली मनाय।
आचार्य तोषण
बर बिहाव के चारो मुड़ा उडत हावय गजब शोर।
पोंगा बाजा अउ डीजे के अवाज बाजय कानफोर।
जगा जगा बिहाव लाडू बरा सोंहारी झड़कत हे।
काखरो बर पानी ठंडा कोन्हो पियत सरबत हे।
साजे मडवा पेड़ चार के गंडवा बाजा बाजत हे।
मैन नाचा हरदाही माते नंगतेहे दोहा पारत हे।
दुल्हा सनाय हरदी मा हरिहर काया पिंवराय।
दुल्हनिया घलो कम नही मुसमुस मन मा मुसकाय।
कुम्हडा बटरा आलू दार संग लपेटे पटवा भाजी।
टुरा टुरी राजी हावय काय करय मुल्ला काजी।
बरतिया जाय बर लगेहे बोलेरो वेन टाटा सफारी।
धरम टीकान म टीकय आनी बानी लोटा थारी।
आवय दुल्हिन जब अंगना घर मा पूजा पाठ करवाय।
बेटा बेटी के बिहाव रचाके सबझन खुशहाली मनाय।
आचार्य तोषण
प्यारे हिन्दुस्तान
मेरे प्यारे हिंदुस्तान की
हर बात ही निराली।
रक्षक देश की सीमा पर खेलते होली दीवाली।
हिम आवली पर तिरंगा लहर-लहर लहराया
महासागर हिन्द करता हम सबकी रखवाली।
बहती जहां गंगा यमुना गाय को मां बुलाती।
त्याग और तप की गाथा कवि की वाणी गाती।
राम कृष्ण जन्म लिया मां भारती के आंगन में।
तुझको कसम है मिट्टी की न लगाना दाग दामन में।
-आचार्य तोषण
रक्षक देश की सीमा पर खेलते होली दीवाली।
हिम आवली पर तिरंगा लहर-लहर लहराया
महासागर हिन्द करता हम सबकी रखवाली।
बहती जहां गंगा यमुना गाय को मां बुलाती।
त्याग और तप की गाथा कवि की वाणी गाती।
राम कृष्ण जन्म लिया मां भारती के आंगन में।
तुझको कसम है मिट्टी की न लगाना दाग दामन में।
-आचार्य तोषण
छत्तीसगढ़ के तिहार
॥छत्तीसगढ़ के तिहार॥
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बड़ नीक लागे संगी मोला छत्तीसगढ़ के तिहार गा ।
झुमै नाचै सब नर नारी मया के होवै बउछार गा।
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हरेली मनाबो सावन मा नांगर चढाबो रोटी चीला।
हरिहर दिखै धनहा भुंइया झुमरय माई अउ पीला।।
बरखा रानी झिमिर झिमिर पानी देवय फुहार गा।
बड़ नीक लागे संगी मोला छत्तीसगढ़ के तिहार गा ।
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बांधय राखी बहिनी हर अपन भाई के कलाई मा।
भाई देवय बचन बहिनी ल जान देहूं तोर भलाई मा।।
भाई बहिनी के मया देखे उतारे नजर संसार गा।
बड़ नीक लागे संगी मोला छत्तीसगढ़ के तिहार गा ।
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आगे भादो जांता पोरा समारू नंदिया दउडाय।
दाई बहिनी के तीज तिहार गौरा शंखर ल मनाय।।
आनी बानी के रोटी पीठा रांधे करे फरहार गा।
बड़ नीक लागे संगी मोला छत्तीसगढ़ के तिहार गा ।
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आगे नवरात कुंआर मा चल ना जोत जलाबो।
दशेरा संग कातिक मा घर-घर दीया जलाबो।
खाबो नवा जुरमिल संगी पाबो मया दुलार गा।
बड़ नीक लागे संगी मोला छत्तीसगढ़ के तिहार गा ।
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पूस पुन्नी के बेरा सुघ्घर छेरछेराय घर-घर जाबो।
बइठाबो टुकना म मिट्ठू मिल गीत सुआ के गाबो।।
घर कुरिया सबके खुले अन्नकुंवर के भंडार गा।
बड़ नीक लागे संगी मोला छत्तीसगढ़ के तिहार गा ।
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फागून मस्त महीना संगी उड़ावय रंग गुलाल जी।
लइका सियान जवान मितवा दिखय सबे लाले लाल जी।।
भर पिचकारी मारत हावय एक दुसर ला बउछार गा ।
बड़ नीक लागे संगी मोला छत्तीसगढ़ के तिहार गा ।
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///////////////////// ////जय छत्तीसगढ़//// ////////////////////
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रचना:-आचार्य तोषण गांव-धनगांव डौंडीलोहारा
जिला-बालोद, छत्तीसगढ़ पिन-४९१७७१
मोब.९६१७५८९६६७
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बड़ नीक लागे संगी मोला छत्तीसगढ़ के तिहार गा ।
झुमै नाचै सब नर नारी मया के होवै बउछार गा।
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हरेली मनाबो सावन मा नांगर चढाबो रोटी चीला।
हरिहर दिखै धनहा भुंइया झुमरय माई अउ पीला।।
बरखा रानी झिमिर झिमिर पानी देवय फुहार गा।
बड़ नीक लागे संगी मोला छत्तीसगढ़ के तिहार गा ।
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बांधय राखी बहिनी हर अपन भाई के कलाई मा।
भाई देवय बचन बहिनी ल जान देहूं तोर भलाई मा।।
भाई बहिनी के मया देखे उतारे नजर संसार गा।
बड़ नीक लागे संगी मोला छत्तीसगढ़ के तिहार गा ।
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आगे भादो जांता पोरा समारू नंदिया दउडाय।
दाई बहिनी के तीज तिहार गौरा शंखर ल मनाय।।
आनी बानी के रोटी पीठा रांधे करे फरहार गा।
बड़ नीक लागे संगी मोला छत्तीसगढ़ के तिहार गा ।
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आगे नवरात कुंआर मा चल ना जोत जलाबो।
दशेरा संग कातिक मा घर-घर दीया जलाबो।
खाबो नवा जुरमिल संगी पाबो मया दुलार गा।
बड़ नीक लागे संगी मोला छत्तीसगढ़ के तिहार गा ।
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पूस पुन्नी के बेरा सुघ्घर छेरछेराय घर-घर जाबो।
बइठाबो टुकना म मिट्ठू मिल गीत सुआ के गाबो।।
घर कुरिया सबके खुले अन्नकुंवर के भंडार गा।
बड़ नीक लागे संगी मोला छत्तीसगढ़ के तिहार गा ।
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फागून मस्त महीना संगी उड़ावय रंग गुलाल जी।
लइका सियान जवान मितवा दिखय सबे लाले लाल जी।।
भर पिचकारी मारत हावय एक दुसर ला बउछार गा ।
बड़ नीक लागे संगी मोला छत्तीसगढ़ के तिहार गा ।
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///////////////////// ////जय छत्तीसगढ़//// ////////////////////
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रचना:-आचार्य तोषण गांव-धनगांव डौंडीलोहारा
जिला-बालोद, छत्तीसगढ़ पिन-४९१७७१
मोब.९६१७५८९६६७
सुरता के गोठ
॥सुरता के गोठ॥
बेलबेलही टूरी आथे सुरता जब तोर ओ
नंगत बासी खाथे सोनू पेट भरे तब मोर ओ।
सुरता बैरी जेन दिन गउ तोर नइ आवय।
सोनू ओदी बासी छोड़ भात गजब खावय।
सुरता म तोर सोनू के गजब देंहे पनकत हे
गोंदली बंगाला चटनी संन बासी झड़कत हे।
भात जब खावय सोनू गोहरावय इही बात ।
बासी ल खाते रहूं धन कभू होही मुलाखात।
आथे तोर सुरता पगली पिच्चर देखेल जाथंन।
कब आबे मोर गांव रे संगी इही गाना ल गाथंन।
बासी भात कब तक निपटाहूं खीर घलो खवा।
तिही सोनू के मया के रोग तिही ओखर दवा।
भात बासी के रंधई मा हांथ गोड़ मोर करियागे।
तोर सुरता म सोनू भाई के मति घलो छरियागे।
सोनू के दुख देखे नइ जावय आवत हन साथ मा।
लाबो तोला भंवरा के संगी दे हाथ ले हाथ मा।
#सोनू_के_मितान_आचार्य_तोषण
टीप :- गलती बर छमा चाहूं।
बेलबेलही टूरी आथे सुरता जब तोर ओ
नंगत बासी खाथे सोनू पेट भरे तब मोर ओ।
सुरता बैरी जेन दिन गउ तोर नइ आवय।
सोनू ओदी बासी छोड़ भात गजब खावय।
सुरता म तोर सोनू के गजब देंहे पनकत हे
गोंदली बंगाला चटनी संन बासी झड़कत हे।
भात जब खावय सोनू गोहरावय इही बात ।
बासी ल खाते रहूं धन कभू होही मुलाखात।
आथे तोर सुरता पगली पिच्चर देखेल जाथंन।
कब आबे मोर गांव रे संगी इही गाना ल गाथंन।
बासी भात कब तक निपटाहूं खीर घलो खवा।
तिही सोनू के मया के रोग तिही ओखर दवा।
भात बासी के रंधई मा हांथ गोड़ मोर करियागे।
तोर सुरता म सोनू भाई के मति घलो छरियागे।
सोनू के दुख देखे नइ जावय आवत हन साथ मा।
लाबो तोला भंवरा के संगी दे हाथ ले हाथ मा।
#सोनू_के_मितान_आचार्य_तोषण
टीप :- गलती बर छमा चाहूं।
लक्ष्य
ले मन में बिसवास एकलव्य ह आघू बढिस।
गुरू मानिस पुतरा माटी निसदिन पूजा करिस।
करिस हे अभियास निरंतर धनुर्विद्या बर
मांगत दक्षिणा द्रोण के अंगूठा ल दान करिस।
#आचार्य_तोषण
गुरू मानिस पुतरा माटी निसदिन पूजा करिस।
करिस हे अभियास निरंतर धनुर्विद्या बर
मांगत दक्षिणा द्रोण के अंगूठा ल दान करिस।
#आचार्य_तोषण
TOSHAN KI JUBANI
जाहू मै छोड़ जग ला संगी, रही जही मोर कविता।
गंगा जमना कस बोहत रही,बनके अमर सरिता।
****************************
जिंदगी में कभी गुमां न करना "तोषण"
मिट्टी से बना है मिट्टी में जा मिलेगा।
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#आचार्यतोषण
गंगा जमना कस बोहत रही,बनके अमर सरिता।
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जिंदगी में कभी गुमां न करना "तोषण"
मिट्टी से बना है मिट्टी में जा मिलेगा।
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#आचार्यतोषण
जोक्कड
बनके जोक्कड मंच म
जिनगी भर तो नांचत हंव।
छिन भर मा रोवंव संगी
छिन भर मा हांसत हंव।
जिनगी के नइहे ठिकाना
आज हंव काली नही,
बने रहय मुसकान सबके
इही संदेशा बांटत हंव।
#आचार्यतोषण
जिनगी भर तो नांचत हंव।
छिन भर मा रोवंव संगी
छिन भर मा हांसत हंव।
जिनगी के नइहे ठिकाना
आज हंव काली नही,
बने रहय मुसकान सबके
इही संदेशा बांटत हंव।
#आचार्यतोषण
कविता
चार पेड़ में चार फर मित बधे मिल चार।
पथरा मारे चार गिरे बांटमिल खाईन चार।
जिअन को जिंदगी करन को दुइ काम।
देवन को दान भला लेवन को हरिनाम।
पथरा मारे चार गिरे बांटमिल खाईन चार।
जिअन को जिंदगी करन को दुइ काम।
देवन को दान भला लेवन को हरिनाम।
DHOKHA
फूल कागज कस खोखा हे
उल्लू सीधा करे के जोखा हे।
दुरिहा ले बाजा सुहाथे बने
चमकत चेहरा म धोखा हे।।
का कहिथस भैय्या एमा
उल्लू सीधा करे के जोखा हे।
दुरिहा ले बाजा सुहाथे बने
चमकत चेहरा म धोखा हे।।
का कहिथस भैय्या एमा
लक्ष्य
लक्ष्य साध कर रूकना नही बढते रहना आगे
ध्रुव प्रहलाद के लक्ष्य आगे हारे खुद भगवान भी।
लक्ष्य की बुनियाद हो साहब मजबूत हो इतनी
हिला ना पाए तुझे कभी आंधी और तूफान भी।
बाधा चीर पार कर मझधार फंसे नाव की तरह
देखता रह जाए साहस धरती और आसमान भी।
विश्वास का दीपक मन में सदा जलाकर रखना
जल जाए देखकर तुझे राह मे आते शैतान भी।
सूरज बन उजाला बांटते रहना अम्बर पे "तोषण"
फक्र करे तुझपे जहाँ मे इंसानियत और इंसान भी।
#आचार्यतोषण
ध्रुव प्रहलाद के लक्ष्य आगे हारे खुद भगवान भी।
लक्ष्य की बुनियाद हो साहब मजबूत हो इतनी
हिला ना पाए तुझे कभी आंधी और तूफान भी।
बाधा चीर पार कर मझधार फंसे नाव की तरह
देखता रह जाए साहस धरती और आसमान भी।
विश्वास का दीपक मन में सदा जलाकर रखना
जल जाए देखकर तुझे राह मे आते शैतान भी।
सूरज बन उजाला बांटते रहना अम्बर पे "तोषण"
फक्र करे तुझपे जहाँ मे इंसानियत और इंसान भी।
#आचार्यतोषण
लिख
सावन की पहली रिमझिम बरसात लिख।
होती रहे इश्क़ की बातें वो दिन-रात लिख।
ना रहे कोई इश्क़ भरे जाम से अनछुआ
समाया दिल में सबके हर वो जज्बात लिख।
पूनम की रात लिख हुई जो बात लिख।
भूला ना पाए कोई ऐसी मुलाकात लिख।
खोकर पा जाऊँ जहाँ मे मुराद अपन
दिल की कलम से अपनी वो कायनात लिख।
हर दिल मोहब्बत हो ऐसी कोई एहसास लिख।
हर पतझड़ मौसम को खूबसूरत मधुमास लिख।
बेगाना हूँ इस जहाँ में सबकी नजरों से "तोषण"
हर किसी को मेरी दुनिया में खासम खास लिख।
#आचार्यतोषण#
होती रहे इश्क़ की बातें वो दिन-रात लिख।
ना रहे कोई इश्क़ भरे जाम से अनछुआ
समाया दिल में सबके हर वो जज्बात लिख।
पूनम की रात लिख हुई जो बात लिख।
भूला ना पाए कोई ऐसी मुलाकात लिख।
खोकर पा जाऊँ जहाँ मे मुराद अपन
दिल की कलम से अपनी वो कायनात लिख।
हर दिल मोहब्बत हो ऐसी कोई एहसास लिख।
हर पतझड़ मौसम को खूबसूरत मधुमास लिख।
बेगाना हूँ इस जहाँ में सबकी नजरों से "तोषण"
हर किसी को मेरी दुनिया में खासम खास लिख।
#आचार्यतोषण#
लिख
सावन की पहली रिमझिम बरसात लिख।
होती रहे इश्क़ की बातें वो दिन-रात लिख।
ना रहे कोई इश्क़ भरे जाम से अनछुआ
समाया दिल में सबके हर वो जज्बात लिख।
पूनम की रात लिख हुई जो बात लिख।
भूला ना पाए कोई ऐसी मुलाकात लिख।
खोकर पा जाऊँ जहाँ मे मुराद अपनी
दिल की कलम से अपनी वो कायनात लिख।
हर पतझड़ मौसम को खूबसूरत मधुमास लिख।
बेगाना हूँ इस जहाँ में सबकी नजरों से "तोषण"
हर किसी को मेरी दुनिया में खासम खास लिख।
#आचार्यतोषण#
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