सोमवार, 25 जुलाई 2016

‪जनम_दिन_के_बधाई‬..

जनम दिन के बधाई सहर्ष स्वीकार करव
घर बिराजे शिव शंभु के पूजा पाठ करव
झन रहय कोनों करम अधूरा जिनगी म
बिघन बाधा ल पार करत सदा आघू बढ़व
आनी बानी के फूल ले बगिया महकत रहय
सुआ परेवना कारी कोयलिया कुहकत रहय
अगास म चंदा सूरुज बरोबर चौहान भैय्या
रिग बिग रिग बिग दीया कस नित बरत रहय
दुख के छंइहा ले पांच छे कोष दूरिहा रहव
पुरवइया कस सुरूर सुरूर चारो मुड़ा बहव
जतका कहूं ओतका कम हे आप बर भैय्या
चाहे मोर मुंह ले शुभकामना कतको कहंव
देख के आप ल हम ह सीखत रहिथन
कहे बात आपके हमन सुनके कहिथन
हाथ सदा रहय ईश्वर के मुड़ म आपके
जनम दिन म इही शुभकामना कहिथन
॥सादर परणाम॥

शनिवार, 23 जुलाई 2016

मन

तन मलीन धोया रगड़ , मन रगड़ नहीं धोय।
 बोया पेंड़ बबूल का , आम कहां से होय ।।

मंगलवार, 19 जुलाई 2016

गुरु पूर्णिमा


मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से

आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा कहते हैं। इस दिन गुरु पूजा का विधान है। गुरु पूर्णिमा वर्षा ऋतु के आरम्भ में आती है। इस दिन से चार महीने तक परिव्राजक साधु-सन्त एक ही स्थान पर रहकर ज्ञान की गंगा बहाते हैं। ये चार महीने मौसम की दृष्टि से भी सर्वश्रेष्ठ होते हैं। न अधिक गर्मी और न अधिक सर्दी। इसलिए अध्ययन के लिए उपयुक्त माने गए हैं। जैसे सूर्य के ताप से तप्त भूमि को वर्षा से शीतलता एवं फसल पैदा करने की शक्ति मिलती है, वैसे ही गुरु-चरणों में उपस्थित साधकों को ज्ञान, शान्ति, भक्ति और योग शक्ति प्राप्त करने की शक्ति मिलती है।[1]
यह दिन महाभारत के रचयिता कृष्ण द्वैपायन व्यास का जन्मदिन भी है। वे संस्कृत के प्रकांड विद्वान थे और उन्होंने चारों वेदों की भी रचना की थी। इस कारण उनका एक नाम वेद व्यास भी है। उन्हें आदिगुरु कहा जाता है और उनके सम्मान में गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा नाम से भी जाना जाता है। भक्तिकाल के संत घीसादास का भी जन्म इसी दिन हुआ था वे कबीरदास के शिष्य थे।[2]

शास्त्रों में गु का अर्थ बताया गया है- अंधकार या मूल अज्ञान और रु का का अर्थ किया गया है- उसका निरोधक। गुरु को गुरु इसलिए कहा जाता है कि वह अज्ञान तिमिर का ज्ञानांजन-शलाका से निवारण कर देता है।[3]अर्थात अंधकार को हटाकर प्रकाश की ओर ले जाने वाले को 'गुरु' कहा जाता है।
  • "अज्ञान तिमिरांधश्च ज्ञानांजन शलाकया,चक्षुन्मीलितम तस्मै श्री गुरुवै नमः "
गुरु तथा देवता में समानता के लिए एक श्लोक में कहा गया है कि जैसी भक्ति की आवश्यकता देवता के लिए है वैसी ही गुरु के लिए भी। [क] बल्कि सद्गुरु की कृपा से ईश्वर का साक्षात्कार भी संभव है। गुरु की कृपा के अभाव में कुछ भी संभव नहीं है। [ख]

भारत भर में गुरू पूर्णिमा का पर्व बड़ी श्रद्धा व धूमधाम से मनाया जाता है। प्राचीन काल में जब विद्यार्थी गुरु के आश्रम में निःशुल्क शिक्षा ग्रहण करता था तो इसी दिन श्रद्धा भाव से प्रेरित होकर अपने गुरु का पूजन करके उन्हें अपनी शक्ति सामर्थ्यानुसार दक्षिणा देकर कृतकृत्य होता था। आज भी इसका महत्व कम नहीं हुआ है। पारंपरिक रूप से शिक्षा देने वाले विद्यालयों में, संगीत और कला के विद्यार्थियों में आज भी यह दिन गुरू को सम्मानित करने का होता है। मंदिरों में पूजा होती है, पवित्र नदियों में स्नान होते हैं, जगह जगह भंडारे होते हैं और मेले लगते हैं।

खाली हांथ जाबे।

जनम मरन म का राखे,करम रहय महान॥
 संत जाने न छोटे बड़े, सबला माने समान।।
 झन भटक काबा काशी, तन में राम समाय।
जपन कर हरिनाम तै, परभू ग्यान बताय।।
 झींन रख मना बात तै ,जानंत हंव सबे ।
सब जनवइया राम हे, सफल जानंत हबे।।
 पालनहारी राम हे ,सहज शील के धाम ।
करथे बेड़ा पार गा ,लेत राम के नाम।।
 गरब गुमान न कीजै ,काया संग न जाय।
घरोंदा यह माटी का, माटी म मिल जाय।।
राजा छोडै राज ला ,रूप छोडै रानी।
सब रही जाही इहचे ,पुरवइया पानी।।
काला लेके आय हस ,का लेग तै जाबे
आए हस खाली तैहा ,खाली हांथ जाबे।
 #आचार्य तोषण

रविवार, 17 जुलाई 2016

लेत राम के नाम

झन भटक काबा काशी, तन में राम समाय।
जपन कर हरिनाम तै, परभू ग्यान बताय।।
 झींन रख मना बात तै ,जानंत हंव सबे ।
सब जनवइया राम हे, सफल जानंत हबे।।
 पालनहारी राम हे ,सहज शील के धाम ।
करथे बेड़ा पार गा ,लेत राम के नाम।।
 #आचार्य_तोषण

बरसे बरखा आसाढ़ सावन

बरसे बरखा असाढ़ सावन

 नरवा बुडगे धार मा.
होईस किसानी डोली हरियागे
 धान लहरावय खार मा.
करे किसानी मन ल लगाके
भात खावय तात तात रे.
 थके मांदे घर म लहुटे
 सोवय मन भर रात रे.
मेंचका नरियावय झिंगुर बोले
जोगनी बरत हे रात मा.
 होवत बिहनिया कुकरा बासे
सूरूज नरायन हे साथ मा.
नींदे कोड़े बर बासी धरके
 चले लगिन किसान गा.
धरती दाई के सेवा बजाए
 मोर माटी के मितान गा.
सांवा बदऊर के करे चिन्हारी
 गोड़ेली बन ल छांटत हे.
सुआ करमा गावय ददरिया
मया पीरित ल बांटत हे.
देखे हरिहर धान ल संगी
मन मन सब मुसकावत हे.
 मांथ नवाए भइय्या तोषण
 भुंइया के गुन ल गावत हे.
~~~जय छत्तीसगढ़~~~
 तोषण
धनगांव%%%डौं.लोहारा

मिट्टी ओढ़ लिये

उसूल है जिन्दगी भर सीखेंगे यारों
 सीखना छोड़ा समझो जीना छोड़ दिये 
जी रहे थे सनम बेवफा खातिर हम
छोड़ उसे जॉं वतन पे जोड़ दिये
 हिफाजत खातिर मां के दामन की
रूख आंधी के यूं हमने मोड़ दिये
 तमन्ना सुर्ख गुलाब की गुलशन में
नसीब थे कांटे हमने तोड़ लिये 
आई मइय्यत पे मिलने मुझसे 'तोषण'
अक्स देख उनका मिट्टी ओढ लिये
 #आचार्य तोषण

एक दिन मुझे

ना करना वार छुपकर एक दिन मुझे
रूसवा कर जाऊंगा मैं एक दिन तुझे
 माना कि अनजान हूं राहों में तेरी
जान जाएंगे जमाना एक दिन मुझे
 झुककर जमाना करेगा सजदा मेरी
सुन ले दिखाऊंगा एक दिन तुझे
 रह जाऊंगा पन्नों पर इतिहास के
 रूलाऊंगा देख लेना एक दिन तुझे
 उडाया यूं मजाक मेरा लोगों के सामने
 बन आंधी उड़ा जाऊंगा एक दिन तुझे 
चल रहा हूं जो आज जहां के पीछे
कर जाऊंगा पीछे जहां एक दिन तुझे
 माना दरिया सी औकात तेरी 'तोषण'
मानेंगे गहरा समंदर जहां एक दिन तुझे
 #आचार्य_तोषण

शुक्रवार, 15 जुलाई 2016

अंक से बने मुहावरे

अंक से बने मुहावरे...
 #एक न चलना
 #दो नावों पर सवार होना
#तीन तेरह होना
#चार दिन का मेहमान
#पांचों अंगुलियां घी में होना
#छक्का पंजा भूल जाना
#सात परदों मे रहना
#आठ पहर चौंसठ घड़ी
#नौ दो ग्यारह होना का.
........#आचार्य_तोषण

जुबां से चाहकर

जुबां से चाहकर कुछ कहे न कहे संगदिल
निगाहें तेरी हाल-ए-दिल बयां कर देती है.
मुरीद हूं तेरी मदभरी अदाओं का जालीम
रूह के इक कोने में मेरी घर कर देती है.
तेरे हुस्ने आफताब की क्या तारीफ करू
 रश्मियों की बारिश में खुद संवर लेती है .
हो अंधेरी रात अगर तो मुझे शिकवा नहीं
बन उजाला राह मेरी शम्मा बिखर लेती है
सिहर जाऊं अगर तन्हा रातो में "तोषण"
आगोश में तेरी यादें मुझको भर लेती है.
 #आचार्य_तोषण

काला काहंव

काला काहंव कइसे गोठियांव रो रो के मन ला मढ़ा लेथंव
कहानी नोहे न किस्सा कोन्हो तभो ले तुंहला सुना देथंव
 भुलाए बर तो भुला नीसकंव मन भीतरी ढांढस बंधा लेथंव
आहूं कहिके गेहे मोर पिरोहिल रद्दा म नयना ल बिछा लेथंव
दू दिन के चार दिन सहिके मयारूक के आस लगा लेथंव
सुरता जब आथे मोर मयारू के देखाएबर दुनिया ल मुसकुरा देथंव
दिल के उपके दुख दरद ल 'तोषण' गीत बनाके मया ल गुनगुना लेथंव
 #आचार्य_तोषण

रंगझांझर

जनम मरन म का राखे,करम रहय महान॥ संत जाने न छोटे बड़े, सबला माने समान।। झन भटक काबा काशी, तन में राम समाय। जपन कर हरिनाम तै, परभू ग्यान बताय।। झींन रख मना बात तै ,जानंत हंव सबे । सब जनवइया राम हे, सफल जानंत हबे।। पालनहारी राम हे ,सहज शील के धाम । करथे बेड़ा पार गा ,लेत राम के नाम।। सुभ परभात गरब गुमान न कीजै ,काया संग न जाय। घरोंदा यह माटी का, माटी म मिल जाय।। राजा छोडै राज ला ,रूप छोडै रानी। सब रही जाही इहचे ,पुरवइया पानी।। काला लेके आय हस ,का लेग तै जाबे आए हस खाली तैहा ,खाली हांथ जाबे। #आचार्य तोषण

बुधवार, 13 जुलाई 2016

मंहगाई

मंहगाई रूकने का नाम ले सूरसा बन खोले मुंह यहीं
 बचकर निकलें कैसे मुंह से हर कोई बजरंगी तो नहीं
प्रतिदिन समस्या भारत की अब भयावह होती जा रही है
गेंहू चावल की तो बातें छोड़ो बाज़ार मे भाजी की धाक रही है
आम जनता की अब हालत देखो बद से बदतर है
 गजब हो रहा मंहगाई की मार पड़ी जब मस्तक पकड़ कर है
रो रहा सोचने पर मजबूर है लोग यहां कैसे गुजारा हो क्या करेंगे अब
बढती हुई मंहगाई को रोकने नियम बनेगी अब के कब ???
 न होगा समस्या पर काबू अगर तो चिंगारी असंतोष की सुलग सकती है
समाधान करो जन जन का तोषण तन मन तभी पुलक सकती है
 -आचार्य तोषण

दाई के हांथ के भात

दाई के हांथ के भात... 'मातृ हस्तेन भोजनम्' जेकर सरल अरथ दाई के हांथ ले बनाय भात। नाननान जब रेहेन त दाई के हांथ ले सबझन भात खाए हन। फेर आज एहा धीरे धीरे बदलत हावय। आज हमन होटल बासा के भात साग ल बने रथे कहिके मंगा मंगा के घर म खाथन अउ अपन सरीर ल बहिरी के खाना ल खा खा के बिगाड डरथन। आजकल फेशन के दुनिया मा देखथन त मिलथे महतारी मन अपन ल इक लइका मन बर खाना बनाए के घलक टेम नी रहय इसकूल के टिफिन म होटल ले मंगा के जोर देथे। संझौती बेरा घर म नासता पानी बनाए ल झन परे कहिके लइका ल पइसा धरा देथे जा बेटा गुपचुप वुपचुप खा लेबे। आज भागम भाग के दुनिया म घर के खान पान अउ सब जीनिस ह नंदात हे। महतारी के हाथ ले बने भात साग नासता पानी म कतका मया दुलार रथे ।एखर बरनन करे नी जा सकय ।महतारी के हाथ ले खाएबर भगवान ह घलक तरसथे। एक ठन कथा कहनी बतात हंव मन लगा के पढिहव। जमदग्नि अऊ दुर्वासा रीसि मन अपन घुस्सइल सोभाव ले ही जाने जथे। एक घांव दुर्वासा रीसि ह भगवान कृष्ण ल घुंस्सा आथे के नी आय तेकर परीच्छा ले बर द्वारिका पंहुचिस। भगवान ह सब परकार ले रीसि के आवभगत करिस। रीसि महराज ह जेन काम म गे रहय ओला सुरू करिस। हर परकार ले भगवान ल घुंस्सा आय अइसन जुकति बनइस।तभो ले भगवान ल घुंस्सा नी अइस। अतिक सब ल देख रीसि महराज कथे 'भगवन, मेहा तोर परिच्छा के ले के हर संभव परयास करेंव जेमा आप सफल होगेव। तै तो जितेन्द्रिय हावस ।तोर जय होगे। का बरदान देवंव बताव। भगवन ल बरदान के का आवस्यकता तभो ले रीसि के मन ल राखे बर जोरदरहा बरदान मांगिस। भगवन कथे 'हे रीसि महराज! तै मोर ले खुस हस त मोला ये बरदान दे कि मेंहा आजन्म अपन महतारी के हांथ ले भात खांव। अतरी बिनती हे। रीसि महराज ह तथास्तु कहिके उंहा ले चले लगिस। बरदान के फलसरूप भगवान कृष्ण ल जीवन के अंत होत तक दाई के हांथ ले बने भात साग रूपी मया दुलार मिलिस। आज हम मन सोंच के देखन गुन के देखन कि आज हर घर म भगवान जइसे हर लइका ल दाई के हांथ ले खाना मिलत हे का ??? टीप:- सुनल कहनी हरे कोई गलती होय होही ते छमा चाहूं -आचार्य तोषण

आतंकी

गद्दार हर वो शख़्स है इस जमीं पे "तोषण"
जयकारा न लगाये जो भारत मां के नाम की
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 वाह रे आदम खोर आतंकी हैवानियत तेरी किस काम की
 लानत है रे तेरी जवानी पर ओढ़ी क्यूं चादर तू बदनाम की
 भूल बैठा ईमान तू इंसानियत बहायी खूंन तुने सरे आम की
 हुआ क्या हासिल तुझे कमबखत मिटा दी हस्ती बच्चे तमाम की
 खुदा ने दी तुझे इक पेहचान जी रहा क्यूं जिंदगी गुमनाम की
 चल तू राहे चैन-ओ-अमन का ले तू दुआ ये सारे आवाम की
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 -आचार्य तोषण

दोस्ती

मेरी ऐसी कौन सी अदा भा गई तुझे जालीम
बढ़ा ली जो तुने हाथ दोस्ती की.....
#आचार्य तोषण

गलती किसकी ????

सत्य घटना २०१५-१६ की एक दिन एक आचार्य की पत्नी अपने मायके से बस में आई ।स्टेशन से उतर कर घर आने को पैदल चल पड़ी कि अचानक एक बाईक वाला आके एक्सीडेंट कर देता है। कोई उसे कुछ ना कहे ऐसा सोच वह उसकी पत्नी को हास्पिटल ले जाता है। इस बात का पता जब उस औरत के पति (आचार्य) को चलता है वह अपने प्राचार्य व दो अन्य आचार्य के साथ तुरंत हास्पिटल पहुंचता है । तो एक्सीडेंट करने वाला व्यक्ति उससे कहता है कि गलती मेरी है ।आप ईलाज करवाइये जो भी खर्चा आएगा हम वहन करने को तैयार है ।प्राचार्य व अन्य दो आचार्य को पता था कि वह एक्सीडेंट करने वाला सरस्वती शिशु मंदिर का विद्यार्थी रह चुका है इसलिए अपने आचार्यों के भरोसे को नहीं तोडेगा इस भरोसे वह आचार्य जिसकी पत्नी का एक्सीडेंट हुआ था उनहोंने एफ आई आर नही करवाया क्यों कि वह समझ गया था अगर ऐसा करेगा तो वह व्यक्ति आगे कक्षा की पढाई नहीं कर पाएगा और इसका भविष्य खराब हो जाएगा। ये बात उस आचार्य को समझ में आ गई। अब इधर इलाज शुरू हुआ । खर्चे भी बहुत आई। जब सारा बिल उस व्यक्ति और उसके माता पिता के पास पहुँचा तो वहां का नजारा ही पलट गया ।जो बात भरोसे पर विश्वास पर कायम थी वह अविश्वास मे बदल गया ।भरोसा पूरी तरह से टूट गया ।जब उनका जवाब सुना कि हमने ऐसा कुछ नही कहा ।आपने एफ आई आर नहीं की आपकी गलती। वह आचार्य अपने को कोसता हुआ व़हां से चलल पड़ा कि मैने अपने विद्यालय में पढे हुए उस व्यक्ति पर विश्वास क्यों किया। अब आप ही बताएं गलती किसकी??? -आचार्य तोषण

धान के कटोरा

धान के कटोरा
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हमर भुजा म ओ ताकत हे
 कतको अनाज उपजाबो जी
हमर कोठी म हे दार कतको
अफरीका ले काबर मंगाबो जी
 चना रहेर बटरा उरीद तिली
 खेत म हमन ऊपजाथन जी
 देश बिदेस ल हम ह बांटके
 घर बर घलक बचाथन जी
गंहू चंऊर के हरन बंटइय्या
हवन छत्तीसगढ़िहा किसान जी
अपन खाए खवाए बर संगी
 हमला परही काबर जियान जी
 छत्तीसगढ़ के हे धनहा डोली
 लहरावय धान जेखर कोरा जी
 अइसन मोर महतारी के हांथ
 सदा हावय धान के कटोरा जी
 -----जय छत्तीसगढ़---------
 #आचार्य तोषण

शनिवार, 9 जुलाई 2016

मोर कलम...

मोर कलम...
 मोर कलम वो ताकत हे दिल सबके झकझोर दीही
आघू म आही जेन बइरी ह मुड़ी ल ओखर फोर दीही
नदियां जइसन एखर रवानी धरधरात जेन बोहाथे
पथरा घलक होजाथे चूर चूर जब आघू म टकराथे
बनाही शब्द के नरवा ढोरगा समुन्दर म हिलोर लीही
आघू म आही जेन बइरी हर मुड़ी ल ओखर फोर दीही
बइठे सुनावय बबा हमला शूरवीर शिवा के कहानी
तइहा जमाना के इही कलम लिख दिस अपन जुबानी
अमरीत छोड़ संखर जइसन जहर घलो सजोंर लीही
आघू म आही जेन बइरी हर मुड़ी ल ओखर फोर दीही
लिखिस गाथा सन संतावन के क्रांति के आगी लगाइस 
अंगरेजन के आंखी फोडिस सडतालीस में जेला कूदाइस
 झांसी के तलवार चमकाइस गरगस्सा पूछी बड़ोर दीही
आघू म आही जेन बइरी हर मुड़ी ल ओखर फोर दीही
 कलम के इही परताप ले ग्रंथ बेद पुरान लिखाए हे
आदि अनंत अमर कहानी भाखा म एखर समाए हे
कलम रही जब तक तोषण के दीया कस अंजोर दीही
आघू म आही जेन बइरी हर मुड़ी ल ओखर फोर दीही
 #आचार्य तोषण

मैं पेंड हूं

मैं पेड़ हूं क्यों ?
मेरा नुकसान करते हो
 जबकि मैंने किसी का नुकसान नही किया।
 मुझमें सारा संसार है और सारे संसार मे मैं हूं
सबके प्राणों की रक्षा मैं करता पर मेरी रक्षा...?
 जब तक हूं मैं तब तक तुम और जब तक तुम हो तब तक...?
एक बात समझाता हूं
 राह तुझे दिखाता हूं
सदा करो पेंडो की रखवाली
तभी रहेगी धरा हरियाली
आओ मिलकर सब पेंड लगाओ
मेरी दुनिया फिर से बसाओ
 -आचार्य तोषण

असाढ़//रिमझिम

-:शीर्षक:-
असाढ़//रिमझिम
××××××××××××××××
महीना असाढ़ सावन के
चले पुरवइया सर-सर
रिमझिम बरसै बरसा रानी
ये भुंइया म झर-झर
××××××××××××××××
बिजूरिया तड़के तड़-तड़
गरजे बदरा घड़-घड़
जोगनी बरय झींगुरा झींगे
मेंचका नरियावै टर-टर
रिमझिम बरसै बरसा रानी
ये भुंइया म झर-झर----१
××××××××××××××××
आए असाढ़ झुमै किसान
चले चलिन बोंएबर धान
छावै बदरा बदले मउसम
सावन मनाए भोला हर-हर
रिमझिम बरसै बरसा रानी
ये भुंइया म झर-झर----२
××××××××××××××××
खेती खार घलो हरियागे
मन मा मोर खुसी हमागे
पहिली तिहार हरेली मनावै
चीला चढ़ाए थारी भर-भर
रिमझिम बरसै बरसा रानी
ये भुंइया म झर-झर----३
××××××××××××××××
आचार्य तोषण, धनगांव
डौंडीलोहारा बालोद
××××××××××××××××

॥ईर्ष्या /कपट/नफरत॥

॥ईर्ष्या /कपट/नफरत॥
///////////////////●//////////////////
कमाई देख दूसरों के जिनका मन है जलता
ऐसे मनुष्य के जीवन में सुख कभी न फलता
\\\\\\\\\\\\\\\\\\\●\\\\\\\\\\\\\\\\\\
मेहनत करना जाने नही करते रहे नीत खिंचाई
ऐसे कायर लोगों के नाम आगे श्री कहा से आई
^^^^^^^^^^^^^●^^^^^^^^^^^^
बुरे लोगों से नही उनकी बुराईयों से डर लगता
पीठ पीछे छूरा घोंप आंखों के सामने से भगता
×××××××××××××●××××××××××××
इंसां कुछ ऐसे भी आसपास अभी हमने पाये
हंसते इन चेहरों के पीछे नफरत दिल में छुपाये
=============●============
कोयलिया जैसे तन के भीतर भरे कौंए की राग
ऐसे कपटी मानुस को नहीं मिलता कहीं अनुराग

कर ना कभी घमंड ऐ 'तोषण'मिट्टी में मिल जाना
याद करे ये दुनिया हमको काम ऐसा कर जाना
<<<<<<<<<<<<<●>>>>>>>>>>>>
आचार्य तोषण धनगांव डौंडीलोहारा

शुक्रवार, 8 जुलाई 2016

छत्तीसगढ़ी राम भजन


छत्तीसगढ़ी राम भजन
 (ध्रु.)चल संगी चलगा भैय्या हरि गुन गाबो जी
 रेटहा परे हे डोंगा२ एला सम्हराबो जी
 चल संगी चल गा भैय्या...
(पद) चरदिन चरदुनिया मया मया के मड़ाई मा
जिनगी ढल जाही सुख के खोजाई मा
राम नाम के हे धारा२ चलो तर जाबो जी
 चल संगी चल गा भैय्या...
 (पद) रामा-यण हे गंगा सब लहरालव गा
 मन में भरेहे मइल सब उजरालव गा
भगति के साबुन मा२ जुरमिल नहाबो जी
चल संगी चल गा भैय्या...
 (पद) राम-नांव सुमरन करे बालमिकी तरगे ना
बोईर ल खवागे गा सभरी उबरगे ना
नवधा भगति ला२ हमूमन पाबो जी
 चल संगी चल गा भैय्या...
 (पद) हनुमत लाला ह जेखर संवदिया हे
 बेड़ा पार करे राम रमइय्या हे
 पंवरी ल पाए-बर२ जगा पोगराबो जी
चल संगी चल गा भैय्या...
(पद) जेला गोहरावय सब महूं गोहरावत हंव
 हांथ जोड़े तोषन संग मांथे नंवावत हंव
भगति अउ ग्यान पाके२ बैरागी हो जाबो जी
 चल संगी चल गा भैय्या...
 रचना:-आचार्य तोषण
श्री गुरूघासीदास मानिकपुरी मानस मंडली
धनगांव डौंडीलोहारा बालोद
रचना समय ८/७/१६//६:४८अपरान्ह
टीप:-हर खुशी के शुभ अवसर पर उपलब्ध

गुरुवार, 7 जुलाई 2016

गरमी के दिन

गरमी के दिन
अडबड लागय जम्हासी
लागय गजब ऊंघासी ।
गरमी के दिन ह सिरतो
हावय आरूग उबासी।।

घांम म पसीना बोहाय
घेरी बेरी पानी पियाय।
खाथन बंगाला चटनी
अउ कोदइय्या बासी
गरमी के दिन ह सिरतो
हावय आरूग उबासी।।
पानी गघरी के बने सुहाथे
कुलर पंखा के हावा भाथे
सुसताहा ए दिन मा संगी
लगथे गजब अंटियासी।
गरमी के दिन ह सिरतो
हावय आरूग उबासी।।
बरफ गुल्फी दुएच मिनट के
गन्ना रस पिले बने हकन के
भगा जही तोर तनले सब्बो
सुस्ती जंम्हई ऊंघासी
गरमी के दिन ह सिरतो
आरूग हावय उबासी।
-आचार्य तोषण

नारी

नारी
तकदीर से खुश होता कौन
इसका अनुभव होता मौन ।
रहमत न होती इनकी गर
होती न तुम तो होता कौन।।
------------आचार्य तोषण

विश्व महिला दिवस पर हार्दिक बधाई

विश्व महिला दिवस पर हार्दिक बधाई

नारी नारी का कहिथस
नारी जग में महान।
नारी के कोख जनमे
लईका ध्रुव समान।।

नवा जुग मा आघू आघू
चले के करे तइयारी
ले अंगड़ई अब जागत हे
आज कलजुग के नारी।।

हर जुग पिछवा पिछवा
जिनगी जियत आए हे।
बांट दिस सब कुछ अपन
फेर खुद न कुछ ले पाए हे।।

नारी ह घर के नेंव हरे
सब के पहिली शाला।
नंदिया जईसन शीतल
फेर समय परे त ज्वाला।।

समय परीस बनीस चंडिका
जे रहिस आरूग सीता।
बनके काली ए अबला ह
सदा लड़ई मा जीता।।

विश्व महिला दिवस में मेंहा
जम्मो मातृ शक्ति मनला सहिरदे
नमन बंदन करथंव
अऊ बधाई संप्रेषित करथंव
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महाशिवरात्रि

महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं व बधाई
हर हर महादेव
*************************
बम भोले शंखर गिरि के बसइय्या बाबा
लेना खबरिया बाबा हमर डमरु वाले।
दयानंद तुम हो बाबा इधर भी दया की
देना लहरियां बाबा हमर डमरू वाले।

हुई जब समुंद्दर मंथन रतन चौदा पाये ।
सभी देवताओं ने बाबा खुशियां मनाये।
अमरित देवों को देकर दानी तुम कहाये।
पीया हलाहल प्याला नीलकंठ कहलाये।
किया उपकार तुमन चराचर जगत का
हम पर ऐसी किरपा करना हमर डमरू वाले
लेना खबरिया बाबा हमर डमरू वाले।।
********सत्यं शिवं सुंदरं********

-आचार्य तोषण

आज

संझौती बेरा करंव आरती दीया बाती सजाके।
तुलसी चौरा मा माथ नवावंव दुनो हाथ लमाके।।

 जब तक न हो सजा मुहब्बत में
तो मजा ही कहां मुहब्बत में
मुहब्बत में ही मिलते जखम
दिल ए मुहब्बत मे ही दवा है।

 कबले तरसत हंव तोर मया बर
काबर जीव ला जराथस।
घड़ी घडी अइसने कही कही के
मोर मया के रस अंउटाथस।।

 हम मुलाकात नहीं सवालात करते हैं।
हुई गर दोस्ती मालामाल करते है।
हो जाए जहाँ मे डबल धमाल
रोज ऐसी नई करामात करते हैं।।

 झन बना तै मोर सन मया के कुरिया ।
बिन तोर सुन्ना रही जोही मोर घरबुंदिया।।
बने हांसत रहिबे मंजा उडावत रहिबे
अब तो होगेंव बैरी तोरले कतको धूरिया।।

 मया करइय्या के मया दिखय नही
भाखा बन मुहुले कभू फूटय नही ।
कब पाहू बने मया करइय्या
धरके कंडिल खोजे मा मिलय नही।।

 आज बर अतरी संगी
भोला मनाबोन काली।
बिहनिया जयराम कहिबो
संग मा सूरूज के लाली।
शुभ रात्रि

तोर बिन...

तोर बिन...
आवत हे होरी जोही
जोहत हंव रद्दा तोर।
दिन रात के अगोरा मा
नैना ढरकत हे मोर।।

तोर बिन सुन्ना मोर
घर के अंगना कुरिया
करंव कइसे ए साल
होरी तिहार मा शोर।।

पवन पुरवईय्या गावत हे
कोयलिया कुहकुआवत हे
कहां भुलाए मोर पिरोही
गांव-गंवई हा बलावत हे 

थोरकुन सुध तय लमाले
आरो घलो लेले मोर।
कइसे करंव ए साल
होरी तिहार मा शोर।।

रंग गुलाल उड़ाहूं काकरसन
होरी तिहार मनाहूं काकरसन
जल्दी आजा मोर मयारू
हो जाही मोर मन हा परसन 

अगोरत हे तोला अडबड
गांव गली मोहल्ला खोर
कइसे करंव ए साल
होरी तिहार मा शोर।।

आवत हे होरी जोही
जोहत हंव रद्दा तोर।
दिन रात के अगोरा मा
नैना ढरकत हे मोर।।

तोर बिन सुन्ना मोर
घर के अंगना कुरिया
करंव कइसे ए साल
होरी तिहार मा शोर।।
-आचार्य तोषण

सुरता

सुरता सुरता केहे संगी, सुरता म नींद नइ आय।
सुरता करइ म न भुख लगे,न पानी घलो सुहाय।।
-आचार्य तोषण

सबले बड़े चोर...

सबले बड़े चोर...
एक घांव एक झन राजा के सभा लगे रिहिसे। राजा हूरहा एक ठन सवाल पूछ दिस-"सबले बड़े चोर कोन आए ? कोई ह धरम के चोर ल सबले बड़े चोर कहे ,त कोई ह स्त्री चोरइय्या ल ,कोई ह लईका चोरइय्या ल। सब झन अपन अपन हिसाब ले बतइस आखरी में एक झन सियनहा अउ अनभव करइय्या सियान ल पूछिस त बतइस कि एमन तो अईसने नान्हे चोर हरे, एमन ल तो परेम से अउ सजा देके सुधारे जा सकत हे, उंखर अपराध ह तो इसपस्ट होथे। कामचोर ह अइसे चोर ए जेकर अपराध ह इसपस्ट नइ होय, लेकिन एहा घुना कीरा कस समाज के बेवस्था अउ खुद वो मनखे ल पोंडा कर देथे । एखर सेती काम ले जी चोरइय्या ह सबले बड़े चोर हे।।
कई झन मन एखरो ले बड़े कमचोरहा हे । इंखर असूल रथे-
अजगर करे नी नौकरी, चिरई करै नही काम।
दासमलूका कहे गईस, सबके दाता राम।।
सअभार:जीओ तो ऐसे जीओ की "हाथ की सच्चाई" से छत्तीसगढ़ी रूपांरतन।
अनुवादक :-आचार्य तोषण

सत्कार

उको घर मत जइयो साजन जहां कोउ सत्कार न हो।
एक दुसर को देखत भी कहीं कोउ नमस्कार न हो।
नमस्कार तो बातइ दूर के नैनन नही मिलात हय।
अपने रद्दा आत हय अउ अपने रद्दा जात हय।।
दुइ भाखा प्रेम के बोली थोरको नइ बतियात हय।
प्रेम बंटइ मा प्रेम मिलै अइ" तोषण" समझ न पात हय।।
-आचार्य तोषण

माटी कहे

माटी कहे कब मै बड़ा ,
बड़ा जो मुझे बनाय ।
न था कभी मै मोल का
दिया अनमोल बनाय।।
दिया अनमोल बनाय
घर घर बगराये जोत।
मेहनत करै कुम्हार
नाम दिया के होत।।
-आचार्य तोषण

मांदर के थाप

मांदर के थाप करमा के धुन
मया करे मयारु गावै मया धुन।
मोर मया पड़की चिरइय्या
रहिबो संगे संग मया म बिधुन।।
- आचार्य तोषण

मोला मोही डारे...

मोला मोही डारे...
दुरुग के टिकली अउ रईपुर के बाली २--
होंठे दिखत हे लाली लाली
मोला मोही डारे ओ हाय रे मतवाली २--
खन खन करत हावै हाथ के चुरी
छम छम बाजत हावै पांवे के पैरी २--
कान मा झुलै बाली बाली
मोला मोही डारे ओ हाय रे मतवाली २--
आंखी मा सोहत हे कारी तोर कजरा
बेनी मा लटके हे मोंगरा के गजरा २--
माहुर लगाए लाली लाली
मोला मोही डारे ओ हाय रे मतवाली २--
फैशन मा तोर हावै टुरा दीवाना
गावत हावै सबे रंग रंग के गाना
देखय बजावै ताली ताली
मोला मोही डारे ओ हाय रे मतवाली २--
बनालेना तै मोला अपन छइंय्या
थाम लेना तै मोर मया के बंइहा
झन देे तोषण ल गाली गाली
मोला मोही डारे ओ हाय रे मतवाली २--
-आचार्य तोषण

"माटी"

खास आपके लिए कामा अंदर की "माटी"
माटी काया माटी माया ओढना जठना माटी के।
माटी-माटी के फूल खिले गजब सुगंध "माटी" के।।
सादर नमन् वंदन
सहित ह्रदय स्पंदन
हार्दिक अभिनंदन।

*सत्संगति

******सत्संगति******
संत मन के संगति करइ हा ही सत्संगति कहलाथे । ए संसार मा जइसने ढंग ले सज्जन पुरुष हे वइसने दुरजन घलो हे। वइसे संत मन कथे पहिली जनम के करम धरम ले गुन अउ दोस हा आथे। मनखे के नवा जनम मा कोई मनखे हा जनम लेत दुरजन नी राहय ।ओहा जइसने संगति करथे वो हा वइसने बन जाथे। अदि सज्जन के संग करथे त सज्जन अउ दुरजन के संग करथे त दुरजन ।
सतसंग करेले मनखे के मन मा नवा नवा सदगुन के जनम होथे। नवा नवा बात सीखे ल मिलथे। सच घलो केहे गेहे सत्संगति हा मुक्ति पाए के निसैनी आए।
संत मन बढिहा एक ठन कथा कथे । एक झन शिकारी ह दु ठन मिठ्ठू लाथे। एक ठन ला चोर ले जथे अउ एक ठन ला साधु पुरुष हा। बेरा ह निकलत जथे। चोर के मिठ्ठू चोरहा भाखा अउ साधु पुरुष के मिठ्ठू सत्संग के भाखा सिखथे। अरथात केहे के तात्पर्य हे कि हम सब ला संत मन के संग करना चहिये।
"बिनु सत्संग बिवेक न होइ।
राम कृपा बिनु सुलभ न सोइ।।"
-सअभार :कक्षा ७वी के पाठ १३ "सत्संगति" के छत्तीसगढ़ी रूपान्तर।।
अनुवादक: आचार्य तोषण
*************************
टीप: भाखा लेखनी में त्रुटि हुई होगी तो सादर क्षमा याचना।।

अशोक भैय्या बर दु लाईन

अशोक भैय्या के मुड़ मा छत्तीसगढ़ी कलगी पागा।
आवव सबो संघरा मिलके बधाई कहिबो कागा।।
अशोक भैय्या बर दु लाईन
तैऐ तो सउघे पेड़ अस हमतो गा उलुहा पान।
आए जाए हमला कहीं नही हावन गा अनजान।।
आचार्य तोषण

कवि अस गा

काम अइसन कर नांव होवय तोर जग मा।
कवि अस गा कवि कविता बसे तोर रग रग मा।।
झन करौ अइसन करम जेमा अंगरी कोनो उठाय।
करम तो करव बढिहा भइय्या सब झन गला लगाय।।
एकक पकती चढ़के भइय्या सुघर लक्ष ला पाना।
करुवा बोली बोल के कखरो जी झन जलाना।।
जे मनखे हा झुक जथे,जम्मो सुख ला पाथे ।
ओला जाएल नइ परय, सरग लहुटके आथे।।
मनुज जनम मिले भाग ले बिरथा झन गवांव।
सुआ करमा ददरिया संग मा मांदर धुन सुनांव।।
आचार्य तोषण

छत्तीसगढ़ही

छत्तीसगढ़ही
$$$$$$$$$$$$$
जीअव मुड़ी उठाके
अऊ रेंगव छाती ठोक ।
पढव लिखव बोलव
सुघर छत्तीसगढ़ी गोठ।।

छत्तीसगढ़ महतारी के
भाखा छत्तीसगढ़ी।
तहूं पढबे महू पढहूं
हमर पिढही पढही।।
नरवा डोरगा तरइय्या
अमरइय्या कसार मा।
छत्तीसगढ़ी गुंजत रही
गली खोर खेत खार मा।।
राजभाखा बनगे हावे
अब बेवहार मा लाना हे।
पुरखा मनके भाखा ल
सुघ्घर अकन सजाना हे।।
छत्तीसगढ़ के कोरा मा
छत्तीस फूल खिलाना हे।
तोषण घलो ह काहत हावे
ए फूलवारी महकाना हे।।
$$$$$$$$$$$$$$
-आचार्य तोषण
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टिप्पणी

पाठ - 14 "पाँच बातें "

"पाँच बातें "
पाठ - 14
"पाँच बातें "
कक्षा - 4
1- हर एक काम इमानदारी से करो !
2- जो भी तुम्हारा भला करे, उसका कहना मानो !
3- अधिक योग्य बने बिना, बड़ों से बराबरी का दावा मत करो !
4- कभी किसी को दिल दुखाने वाली बात मत कहो !
5- जहाँ भी ज्ञान की दो बातें मिलें, उसे ध्यान से सुनो !
याद आया ना.......
हरपाल सिंह एवं बूढ़े बाबा की कहानी

महतारी के छत्तीसगढ़ी बोली

महतारी के छत्तीसगढ़ी बोली
कंठ सरसती के वास रहाय
काफी कलम ह साथ रहाय।
अलवा जलवा लिखत रहूं
आपके आशीष के हाथ रहाय।
नइहे मोला शब्द के ज्ञान
थोरिक ना मात्रा के भान।
तुंहरे ल देख सिखत रहिथो
हावंव मै आरूग अनजान।।
करूआ करेला कस मोर बानी
सुन हिरदे होजाही चानी चानी
मन के पीरा निकालत रहिथौ
करथौ हरकत नित बचकानी।।
छत्तीसगढ़ के गुरतुर बोली
लईका मन के हंसी ठिठोली।
आवौ हम बगराबो सुघ्घर
महतारी के छत्तीसगढ़ी बोली।।
**जय छत्तीसगढ़ महतारी**
-आचार्य तोषण

धुर्रा मात्र हवंव।।

आप सब कवि बधाई के पात्र हवव।
साहित्य जगत के महामात्र हवव।।
दिया कस अंजोर सुघर बगरात रहा
मे तुंहर चरण के धुर्रा मात्र हवंव।।

*शिवजी*



**************शिवजी**************
:::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::
हमर गांव के तरिया पार मा शिव जी ह बिराजे हे।
तिरशूल नंदिया बइला संग मा गला नांग ह साजे हे।।
सुघ्घर अकन परिवार हावै संग मा पारबती मइय्या ।
संगमा हावै गणेश अशोकसुंदरी कारतिक बड़े भइय्या।।
नर नारी मन तरिया मा रोज नहाय बर आथे।
पानी ओमा चढ़ा चढ़ा के मन के मनौती पाथे।।
शिव भगवान मा चढाथे बेल पान धथरा के फूल ।
सत रज तम के परतीक धरे हाथ अपन तिरशूल।।
औघड़ दानी एला कइथे मनबांछित दान देवइय्या ।
जहर पान करिस अपन ह अमरीत हमला धरइय्या।।
आवत हंव तोर तीर मा चरण राखले प्रभु तै मोला।
ए जग के तै पार लगइय्या पार नहकादे तै मोला।
अलवा जलवा भाखा मा तोरेच गुण ल गावंव।
मै अडहा तोषण हा तोर चरण माथ लमावंव।।

* सत्यम् शिवम् सुंदरम् *
-आचार्य तोषण

आजाद

बात थी वो "आजाद" में
जिसने क्रांति का परवाज दिया।
अपने दम उन्होंने आग को एक नया साज दिया।।
आओ करे उनको नमन
जिन पर भारत ने नाज किया।
ना भुलेंगे उनकी गाथा जिनने भारत को आजाद किया।।

कोन डगर मा...

कोन डगर मा...
तोर अगोरा म बइठे बइठे
बेरा घलो पहागे।
किरिया खवाके तै मोर मैना
कोन डगर मा भुलागे।
मोंगरा के गजरा पांव के पैरी
लाए रहेंव तोर बर।
हांथ के चूरी कनिहा के करधन
बिसाए रहेंव तोर बर।
मया के गुड़ खाए के पहिली
काबर मुहु करुवागे।
किरिया खवाके तै मोर मैना
कोन डगर मा भुलागे। तोर अगोरा म...

सपना रिहिस तोर संन
मया के कुरिया बसातेंव
अमरइय्या पीपर लीम छांव मा
मया के गीत ल गातेंव।
मया भरे मोर हिरदय मा
दगा के छुरी चलागे।
किरिया खवाके तै मोर मैना
कोन डगर मा भुलागे। तोर अगोरा म...
-आचार्यतोषण

महान।।

जगडा बरी सन भात खायेंव रात कून ।
काहत हावंव तंहूमनला मोर बात सून।।
चुरगंइय्या मैं लइका नइहे थोरको गुन।
माटी के सेवा करथौ गाथौ एखर गुन।।
कोरा सुघ्घर तोर खिलै मया के फूल।
भेदभाव मति रहै उगै न अंतश शूल।।
सबके सुने सबला गुने धरे मन में ध्यान।
कहे तोषण सुन भाई संगी जग में विही महान।।
-आचार्य तोषण

छत्तीसगढ़ी रामायण

छत्तीसगढ़ी रामायण
जय श्री राम
***************
दशरथ घर मा जनम धरके
अवध के मान बढाईसे।
ताडका मार गिराए
अहिल्या ला उबारिसे।।
गिस जनक घर रघुवर हा
पिनाक धनुष ला टोरिसे ।
राजा जनक हा सुघ्घर
सीता संन रिशता जोड़ीसे।।
राज पाठ ल छोड़ के
जंगल के रद्दा बनाय।
चरण धोवै केंवट भैय्या
गंगा पार नहकाय।।
पंचवटी मा जाके बढ़िया
सीया लखन संन दिन बिताय।।
मारीच बनगे कपटी मिरगा
पाछू पाछू दौडाय।
कपटी रावन सीता माई ला
धर लेगे चोराय।।
शबरी के जूठा बोईर खाके
नवधा भगति सुनाय।
किसकिंधा मा जाके
सुगरीव ल मित बनाय।।
हनुमान सन बेंदरा भालू
सीया के शोर ल पाय।
हिन्द सागर मा पुलिया बांध
श्री रघुवर हा लंका जाये।।
मेघनाथ कुम्भकरण दानव
हरि यमपुर पहुचाय।
रावण ल फेर अपन हांथ ले
हरि हा मुक्ति देवाय।।
सीयाराम भाई लखन संन
अवध पुर लहुट आय।
इही खुशी मा अवधपुरी मा
घर घर दीया जलाय।।
******************
����जय श्री राम����

***हमर तिरंगा***

***हमर तिरंगा***
×××××××××××××
हमर आजादी के तिरंगा
लहर लहर लहरावत हे।
सोनहा भुइंया मा भारत के
सुख शांति बगरावत हे।।

ए झंडा के रक्षा खातिर
कतको झन जान गंवाईस हे।
बैरी मनसन झगरा लड़ई मा
लहू के धार बहाईस हे।।
रेगबो मुडी उठाके सबे झन
इही संदेशा सुनावत हे।।
सोनहा भुइंया.....
तीन रंग के हमर झंडा
भारत के मान बढ़ावत हे।
साहस केसरिया शांति सफेद
हरा अऊ हरियावत हे।।
ईंखर इज्जत बर मर मिट जाहू
आज "तोषण"हा चिल्लावतहे।।
सोनहा भुइंया.....
××××××××××××××××××
****आचार्य तोषण****

-छत्तीसगढ़ के कोरा

शीर्षक :-छत्तीसगढ़ के कोरा
लहर लहर मोर गांव मा
सरसों फूल लहरावै।
छत्तीसगढ़ के कोरा मा
मया के फूल मुसकावै।

सीरी पंचमी के सुआगत म
पुरवइय्या ह डोलत हे।
होरी म गुलाल खेलबो
कारी कोयली बोलत हे।।
मिठ्ठू बनावै सुआ ददरिया
परेवना ह राग लमावै।
छत्तीसगढ़ के कोरा म
मया के फूल मुसकावै।।
आमा ह मउरे बोईर झरगे
परसा ह ललियात हे।
कुलर पंखा निकलत हाबे
गरमी के सुरता करात हे।
कोनों खाही ठंडा कुलफी
बरफ हा कोनों सुहावै।
छत्तीसगढ़ के कोरा म
मया के फूल मुसकावै।।
सुमता ले रहिबो हमन
मया के गीत ल गाबोन।
आऔ सबोझन मिलके
होरी ल सुघर मनाबोन।।
बिधुन होके बाजै नंगारा
सबला नाच नचावै।
छत्तीसगढ़ के कोरा म
मया के फूल मुसकावै।।
-आचार्य तोषण

मांघी पुन्नी के मेला

मांघी पुन्नी के मेला
माघी पुन्नी के मेला म
जातेन ओ नोनी के दाई
बरा भजिया समोसा लेतेन
लेलेतेन अउ रसमलाई

साल मा एके घांव आथे
जम्मो सगा सोदर सकलाथे
डोकरा बबा अउ डोकरी दाई
बरा भजिया समोसा लेतेन
लेलेतेन अउ रसमलाई।।
नर्मदा मइय्या ल देख लेतेन
मांगे मनौती ल पुरो लेतेन
जावत हे भैय्या अउ भौजाई
बरा भजिया समोसा लेतेन
अउ लेलेतेन रसमलाई।।
लेहूं तोरबर मडई के चिनहा
चमकही तोर मुड़ी के पिनहा
मन हा घलो हमर भर आही
बरा भजिया समोसा लेतेन
अउ लेलेतेन रसमलाई।।
-आचार्य तोषण

नंदावत हे...

शीर्षक: नंदावत हे...
कहां नंदागे चिटठी पतरी संवदिया
अब तो मोबाइल के जमाना आवत हे।
एखर आए ले अंगठा बिचारा
अधरे अधर मा पछतावत हे।।

नंदावत हे फूलकंसिया थारी ह
स्टील थारी म भात सुहावत हे।
पाना के पतरी घलो नंदागे
अब कागज ह धाग जमावत हे।।
निंदई कोडई घलो नइ उसरे
निंदानाशक दवा सीतावत हे।
गोबर खातू दिखे नइ मिलै
डोली के उर्वरा सिरावत हे।।
सुर के भारा तको छुटगे
टेकटर हा भारा ढुलावत हे।
मिंजाई म दौंरी बेलन नंदागे
थ्रेशर हा भाग सौंरावत हे।।
दांत बर रिंया दतून नंदागे
टुथ ब्रशके मजा लेवावत हे।
बरश में दांत हा पोंडा होवै
चेंच भाजी ल फंसावत हे।
का कहनी अब कांहव मैहा
नवा जमाना आवत हे
तेखरी सेती मोर भैय्या
सरी जिनीस हा नंदावत हे।।
-आचार्य तोषण

जिनगी जिगे।

मुसीबत में जेहा हांसेल सिखगे
विही हा अपन सिरतोन म जिनगी जिगे।
जिनगी जिस महात्मा गांधी
कतको आईस तूफान अउ आंधी
सत अउ अहिंसा के लऊठी टिकगे
मुसीबत मे जेहा हांसेल सिखगे
विही ह अपन सिरतोन म जिनगी जिगे।

-खरखरा नहर



शीर्षक:-खरखरा नहर
धनगांव के बीच गली ले
खरखरा ह बोहावत हे
लइका जवान सियान मितान
जिंहा लगर लगर के नहावत हे।
हरिहर करै धनगांव के धनहा
बंजर मटासी ल पुरोवत हे
सरदी गरमी बरसात के दिन मा
सबो के जीव ला जुड़ोवत हे
गंगा बरोबर इंहा के पानी
धारे के धार बोहावत हे।
लइका जवान सियान मितान
जिंहा लगर लगर के नहावत हे।
घूमघाम के इहा के पानी
भिलाई शहर मा जावत हे
दल्लीराजहरा के खनिज सम्पदा सन
सुघर लोहा बनावत हे
शान जिला बालोद के
जन जन हा गोहरावत हे
लइका जवान सियान मितान
जिंहा लगर लगर के नहावत हे।
बसे हवै खरखरा के तीर मा
सुघर मोर गांव धनगांव
कभू कभार भूलत भटकत
हमरो डहर सुघर पांव उठाव
नेवता हे सबला गाड़ा भरके
ये आचार्य तोषण हा बलावत हे
लइका जवान सियान मितान
जिंहा लगर लगर के नहावत हे।।

आचार्य तोषण
सरस्वती शिशु मंदिर
डौंडीलोहारा

महतारी के भाखा


धौरा बईला दौड़े लागीस
खन खन बाजे घांटी ए।
छत्तीसगढ़ के भुइंया मा
कनहार पिंवरा माटी ए।
साग मा जईसने बफोरी अम्मटहा कढ़ही ए।
अईसने हमर महतारी के भाखा छत्तीसगढ़ही ए।
छत्तीसगढ़ी भाखा के मान करौ तभे संवरही ए।
राखौ एला बने जतन के
तभे त सम्मान एखर बढ़ही ए।


आचार्य तोषण
सरस्वती शिशु मंदिर
डौंडीलोहारा बालोद छ.ग.

:-माटी के मितान

शीर्षक :-माटी के मितान
ए भुइंया के भाग जगइय्या,हम कमइय्या किसान गा।
भुइंया के भगवान हम हा ,ए माटी के मितान गा।
जांगर तोड़ मेहनत करके ,सुघर धान उपजाथन।
मुड़ी ले गोड के जात ले ,करम के पसीना बोहाथन।
एखर ले बढिहा अऊ का होही, हमर मनके पहिचान गा।
भुइंया के भगवान हम हा ,ए माटी के मितान गा।
होत बिहनिया धरती दाई के, तन मन ले सेवा बजाथन।
नांगर-बईला कमरा खुमरी, टेडगा पागी ल सजाथन।
पटवा भाजी बंगाला चटनी, अऊ बोरे बासी ल खान गा।
भुइंया के भगवान हम हा, ए माटी के मितान गा

आचार्य तोषण
सरस्वती शिश मंदिर
डौंडीलोहारा जिला -बालोद(छ. ग. )
पिन ४९१७७१
मुहबाईल ९६१७५८९६६७

राम नाम

शीर्षक:-राम नाम
राम नाम सुमरन करलव,हो जाही मन चंगा।
कांहा जाबे काबा कांशी, तोर घर में बोहाही गंगा।।
राम नाम ला जपले संगी बेरा निचट करारी हे।।
राखबे एला बने जतन के तोर तन हा घलो उधारी हे।।

चार दिन के चटक चंदैनी
फेर निचट अंधियारी हे।।
लबरा जात हे मनखे जीव मारथे जबर लबारी हे।
बने रखबे एला जतन के तोर तन हा घलो उधारी हे।।
झन तै कर मोर मोर ए माया के मडई मा।।
तन भुंजा के राखड होही इही माया के जरई मा।।
भजले तैहा राम राम ला इही ह तोर हितकारी हे।।
बने राखबे एला जतन के तोर तन हा घलो उधारी हे।।
तोर तन हा घलो उधारी हे।।
आचार्य तोषण
सरस्वती शिशु मंदिर डौंडीलोहारा
जिला-बालोद (छ. ग.)
पिन-४९१७७१
मुहुबाईल:९६१७५८९६६७

जय जोहार हे

सुरुज नरायन क बार आज इतवार हे।।
हप्ता म एक घांव आथे संगी
ए छुट्टी के तिहार हे।।
बडे बिहनिया के बेरा म संगी
सबो कोई ला जय जोहार हे

आशीरवाद

जम्मो कोकिल कंठी कविश्रेष्ठ मनके श्री चरण ल गाड़ा गाड़ा परनाम हे ।
आप मन के आशीरवाद के सुघ्घर अकन आश हे।।
जगा मिलही कोन्टा मा कुरिया के अतिक मोला बिसवास हे।
गढ़ना अइसने गढ़बो संगी संग मा सरासती दाई के वास हे।।
आप सबो मनला सादर समरपित ...

सरग के दुवार

छत्तीसगढ़ के पागा कलगी ०४
रचना:- सरग के दुवार
दाई ददा के सेवा जतन कर,होही तोर उद्धार जी।
तभे ते पाबे जाये बर, सुघर सरग के दुवार जी॥

अढ़हा केंवट भक्ति करके, राम ल पार लगाइस हे।
अपन संगे संग जम्मो पुरखा, ल रस्दा देखाइस हे।।
करले जोरा मुक्ति पाये के ,झन तै सोच बिचार जी।।
दाई ददा के सेवा जतन कर, होही तोर उद्धार जी।।
रस्दा बनाइसे शबरी दाई ह, मतंग मुनि ल मान के।
सुख्खा बोईर सकेले रिहिस, राम ल कुटिया मा आही जानके।
डोंगा हावे रेटहा परेटहा, अब यहु ल बने संवार जी।।
दाई ददा के सेवा जतन कर, होही तोर उद्धार जी।
तभे ते पाबे जाये बर सुघर, सरग के दुवार जी।।
आचार्य तोषण
सरस्वती शिशु मंदिर
डौंडीलोहारा जिला-बालोद(छ.ग.)४९१७७१
दूरभाष ९६१७५८९६६७

sarag ke duwar ji......

dai dada ke sewa jatan kar hohi tor uddhar ji.
tabhe te pabe jaye bar sughhar sarag ke duwar ji.
adahaa kevant bhakti karke ram par lagaies he.
apan sange sang jammo purkha la rsda dekhaies he.
karle jora mukti paye ke jhan tai soch bichar ji..
dai dada ke sewa jatan kar hohi tor uddhar ji.....
rasda banaise sabri dai h matang muni la man ke.
sukkha boier sakele rihis ram la kutiya ma ahi jaanke.
donga have retaha paretaha ab yhu la bne sanwaar ji.
dai dada ke sewa jatan kar hohi tor uddhar ji.
tabhe te pabe jaye bar sughhar sarag ke duwar ji......

ACHARYATOSHAN
SARSWATI SHISHU MANDIR DONDI LOHARA DISTT BALOD C.G.491771
MOB 9617589667

आचार्य तोषण

मां - बाप

हम ही बदकिस्मत हैं इस जहां में "तोषण"
जो हमारे सर पे साया नहीं मां - बाप का...

आचार्य तोषण

मेरी भांजी

मेरी भांजी
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योगेश्वरी अजय की दुलारी
भांजी मेरी सुंदर प्यारी
बनकर सुमन उपवन छाई
पुलकित मन खुशियां लाई
जब है रोती भांजी हमारी
सब छोड़ देते दुनिया दारी
दादा दादी की गोदी में खेले
नाना नानी हंसते मजे लेले
तुलेश टुमेश है मौसी जिनके
योगेश तोषण जो मामा इनके
जोहर नाना बजाए सलामी
डुमेश भाई चित्ररेखा मामी
घर करे जब खुशियां सारी
हल्की सी मुस्कान प्यारी
सदा गुंजे इनकी किलकारी
सुनले भगवन दुआ हमारी
झोली सदा भर भरके देना
बदले मेरी खुशियां ले लेना
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-आचार्य तोषण

लोक असर

लोक असर के संपादक मंडल के
फीचर संपादक श्री पुष्कर सिंह राज
 ल कोटिशः धन्यवाद हे......

संभल जा

संभल जा जरा बारिश ए इश्क में "तोषण"
मंजिल के रास्ते अभी फिसलन बहुत है...

"जितने तेरे काम के"

"बेशक तुमने सारी जमीन बनाए अपने नाम के
मिलेगा उतना ही "तोषण"जितने तेरे काम के"

॥चिरई के दरद दुख॥

छत्तीसगढ़ी मंच द्वारा महीने के दोनो पखवाडे मे आयोजित छत्तीसगढ़ के पागा कलगी
क्र.१२ बर चित्र अधारित
मोर प्रयास से रचना
॥चिरई के दरद दुख॥
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चिरई कहिथे मनखे ला
झन काटव गा रूख ला
का तुंहर ले देखे नी जाय
हमर मन के दरद दुख ला
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सुवारथ बर अपन तैहर
जंगल ला उजारत हस
रूख राई म बसे चिरई
जिते जियत तै माराथस
देवतहस हमला दुख त
कहां ले पाबे तै सुख ला
का तुंहर ले देखे नी जाय
हमर मन के दरद दुख ला
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तहूं जीव तइसने हमूं जीव
सबला गढ़य भगवान गा
नइ बन सकस इंसान त
झन बन तै शैतान गा
पाप करेबर छोड़ दे तै
यमराज देखही तोर मुख ला
का तुंहर ले देखे नी जाय
हमर मन के दरद दुख ला
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चिरई कहिथे सुनरे मनखे
जिए के हमला अधिकार हे
जंगल झाड़ी के दाना पानी
इही मा हमर संसार हे
सच्चा मनखे विही हरे
समझे सबके सुख दुख ला
का तुंहर ले देखे नी जाय
हमर मन के दरद दुख ला
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आचार्य तोषण
धनगांव डौंडीलोहारा
बालोद छत्तीसगढ़
इही कविता म मोला तीसरा स्थान मिले हे
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मोला तो यकीन नी होत हे कि मोरो रचना ह पागा कलगी बारह म जगा बनाए हे
एखर बर छत्तीसगढ़ी मंच निर्णायक संचालक अऊ जम्मो सदस्य मन ला सादर धन्यवाद हे
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जिगर

ऊंगली उठाने के सिवा कर भी क्या सकते है "तोषण"
जिगर में धमक नहीं जिनकी नजरे मिलाने की....

नांगर के मुंठिय

नांगर के मुंठिया हाथ मा
हावय तुतारी साथ मा
अरातता के हांक लगावंव
जोड़ी बइला साथ मा
आचार्य तोषण

मेरे मुकद्दर पर हंसने

मेरे मुकद्दर  पर हंसने वाले इतना गुमां क्यूं है
क्या पता है तुझे बंन्दे खुदा मुझपे मेहरबां क्यूं है
कभी खुशी तो कभी गम है जिंदगी मे ऐ "तोषण"
परवरदिगार की उस रहमत से अनजान क्यूं ह

दर्द जो तेरा देखकर मेरे दर्द ने भी आह भरी है
तेरा प्यार गर सच्चा तो मेरी भी हद तक खरी है
बेवफाई करके कहता है आज तुझसे ऐ "तोषण"
जमाने की इस अदालत में गुनेहगार भी बरी है

दर्द अपने दिल की छुपाकर मुस्कुरा रहा हूं मैं
हिम्मत नहीं मुझमें गाने की लेकिन गा रहा हूं मैं
बांट लेता हूं सारे गम चंद कविता के शब्दों में
अपनों के दिए घावों को दिल से मिटा रहा हूं मै
-आचार्य तोषण

आचार्य तोषण

काबर होहि बेरंग जब तोर मया मोर हे संग
नी छुटय हमर मितानी होजय दुनिया म जंग
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कदम की हमारी गिनती नही चाल ऐसी चलते है
अंधकार को मिटाने हम दीपक जैसै जलते है
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आचार्य तोषण

सोमवार, 4 जुलाई 2016

माटी के मितान

छत्तीसगढ़ के पागा कलगी क्र.१३ बर
मोर डहर ले छोटकन परयास
 
 शीर्षक:-माटी के मितान
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जेन माटी के रकछा खातिर
होईन कतको बलिदान गा
  इही माटी के दुलरवा बेटा
 हरंव माटी के मितान गा
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वत सूरूज मा करंवआरती
दीया अगर कपूर जलाइके
दण्डाशरन पांव पंइंय्या लागंव
हांथ जोड़ दुनो लमाइके
सब जुरियाके हंस मुसकाके
माटी के जस ला गान गा
 इही माटी के दुलरवा बेटा
 हरंव माटी के मितान गा
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आवय दिन जब खेती किसानी
नांगर बइला हे हमर संगवारी
रातता के सुर ला लमावंव
मुडी मा खुम्हरी हांथ तुतारी
हरिहर करबोन धनहा डोली
बोंएंबर चलव सब धान गा
इही माटी के दुलरवा बेटा
हरंव माटी के मितान गा
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 मनटोरा भउजी हर बासी धरके
खेती डोली डहर गा आवय
 मंगलू भइय्या मारय हरिया
 चांच मा आंखी ल जमावय
होत मंझनिया लिमंऊ चटनी संन
 बोरे बासी ल खान गा
इही माटी के दुलरवा बेटा
 हरंव माटी के मितान गा
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 नांगर बइला ल धो मांज के
मनाबोन गा हरेली तिहार
 घुमड़े बादर चलय पुरवइया
 पानी के रिमझिम परे बउछार
 हुम धूप अगरबत्तियां धरके
 चीला के रोटी चढ़ान गा
इही माटी के दुलरवा बेटा
हरंव माटी के मितान गा
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 सरग ले सुघ्घर ए भुइंया ह
  एखर माटी माथ के चंदन हे
 सेवा बजावंव गुन ल गावंव
 गोड़ ल घेरी बेरी बंदन हे
इहां धुर्रा लागे अइसन
 संऊहत सोनहा समान गा
इही माटी के दुलरवा बेटा
 हरंव माटी के मितान गा
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 रचना:-आचार्य तोषण धनगांव
 डौंडीलोहारा बालोद छत्तीसगढ़
 पिन:-४९१७७१ मुहूबाइल:८६१७५८९६६७
 

शनिवार, 2 जुलाई 2016

रो पड़ती हूं

रो पड़ती हूं जो देखती अपने बच्चों की नादानी
बातें मेरी न मानते बस करते अपनी मनमानी
काटते घने जंगल को पयार्वरण कर रहे खराब
गम के इस दलदल में बिखरी पड़ी ये जिंदगानी
भूमि ये बंजर होती जहरीली दवाओं की मार से
क्यों छलनी मेरा सीना करते दो धारी तलवार से
हालत मेरी दयनीय है पीड़ा बड़ी असहनीय है
मन तुम्हारा द्रवित न होता करूण मेरी पुकार से
रह गई पुराणों में अब शायद मेरी महिमा बखान
कही गई कभी जननी जन्मभूमि स्वर्ग से महान
पेंड़ लगाकर कर रक्षा मेरी सदा मेरे प्यारे लाल
तोषण अब इंसानियत की कर परिभाषा पहचान
-आचार्य तोषण

राम नाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...