खींचे गांजा एक दम,
अंग में भभूति सोहे,
दूज चंदा माथ में।
वामंग बिराजे सती,
गणपति साथ में।
परहित जीने वाले,
नीलकंठ बन गये,
विष लिए हाथ में।
मेरी नाव पार करो,
खड़ा मैं हूँ बाट में।
"धनगंइहा"
मुखिया अपने गाँव में,
आन बसे है तीन।
अपनी ही बस हाँकते,
लाख बजा लो बीन।
कारज कितना भी भला,
सही मिले ना दाम।
रखते ऐसी चाहतें,
अच्छा हो परिणाम।।
खाना ही दोगे नही,
कैसे लोगे काम।
समझो ना अब तुम यहाँ,
अपने को गुलफ़ाम।।
राजा अपने दास को,
समझे कोल्हू बैल।
तन मन धन शोषण करे,
पेर निकाले तैल।।
आने का है भान सब,
जाने का ना लेख।
अपना भी परिवार है,
घर पर जाकर देख।।
मीठा मीठा बोलके,
मन को लेते फाँस।
रखलें अपनी बात तो,
टाल देत है हाँस।
अपनी टोली में सभी,
रखते मुँह को बंद।
सुनके ही रह जात हैं,
करके नाड़ी मंद।।
खून पसीने सींचते,
देते विद्या दान।
समझें इनकी भावना,
दें नव वेतन मान।।
पेट अगर होगा भरा,
मुख से निकले वाह।
लात पड़े जो पेट में,
निकले दिल से आह।।
धन तो है मिलता नहीं,
मिलता केवल मान।
भूखा रहके हम मरें,
नहीं किसी को भान।।
लक्ष्य गर मिलता नहीं,
बदलें अपनी राह।
पा जाओगे साथियों,
जो है मन में चाह।
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मोर घर के खधर छानी
टिपिर टापर चुहे पानी
चिमनी मा अंजोर नंइहे
चातर गली खोर नंइहे
नरवा ढोरगा डबडबागे
खेती खार लबलबागे
हरेली के भावय तिहार
दसमूर हे घर घर दुवार
तुलसी के अमर कहानी
गावय गुनी मुनी ग्यानी
जुगुर जुगुर जोगनी बरे
रतिहा सावन कोन धरे
पुरवइय्या सरर सरर
घरजे बादर घरर घरर
भाई बहिनी के राखी
हावय बंधना के पाखी
मिलके झंडा फहिराबो
अजादी के गीत गाबो
नाचे रे मोर मन मंजूर
सुनले तैहा कन कजूर
माँत्रिक के छू छू मंतर
धरले तै जी जी अंतर
जय युवा जय किसान
होही तोषन नवा बिहान
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तोषन धनगंइहा
डौंडी लोहारा
कज्जल छंद
बेटी हावय मोर आन।
बेटी हावय मोर शान।
पढ़ही तनुजा बढ़े मान।
सगरो दुनिया करे गान।
ये सबके बनाथे काज।
रखथे बेटी मोर लाज।
बनके तैहा शेर आज।
बैरी बर तै गिरा गाज।
चंदा जइसे तोर रूप।
सहिके तैहा छाँव धूप।
बाधा करथस ढेर लूप।
पूजय तोला सूरज भूप।
मिलही तोला दुआ ढेर।
होवय देर भले सवेर।
कोनों तोला दे नटेर।
आँखी देबे तै तरेर।
तोषन धनगंइहा
डौंडी लोहारा
चलो संगी जाबो सब
भोले के द्वार हो
चरण मा मिलथे जेखर
सारा संसार हो
सगरो चराचर के
जीव ल बचाये
पान करे घोर हलाहल
नीलकंठ कहाये
मिल जुल देवता करे
जय जयकार हो...
अंग भभूति चुपरे
पहिरे बघवा छाल तै
कालों के काल भोले
जय महाकाल तै
शरन मा तोर आएँव
दे दे दुलार हो....
रीषि मुनि देवता धामी
रात दिन तोला ध्यावे
पूरा करे कामना तै
आशीष तोर पावे
नंइया हे मझधार मोरो
करदे तही पार हो....
तोषन धनगंइहा
डौंडी लोहारा
"भइय्या बर बहिनी के राखी ह छुटगे
दाई ददा के डेहरी ले दीया ह बुझगे।
मोर भारत माता के अचरा खातिर
मंगल भगत खुदी फांसी म झुलगे।।"
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चलव संगी चलव जवान, देश के गुन ल गाबो
मोर सोन चिरइय्या भारत के, चरन म मांथ नवाबो
●
आजादी के खातिर कतको,अमर जवान बलिदान होईंन
बहिनी अपन भाई ल खोए,महतारी बेटा बर रोईन
याद करन ऊँखर कुरबानी,अश्रु के धार बोहाबो
सोन चिरइय्या भारत के चरन म मांथ नवाबो
●
भारत माता के आन खातिर, छाती म झेलिन हे गोली
सदा बढ़िन आघू मग म, नित खेलिन खून के होली
अइसन शहीद के सुरता म, दीया अखंड जलाबो
सोन चिरइय्या भारत के चरन म मांथ नवाबो
●
सबझन मिलके रहिबो संगी, एक सूँत मा बंधाके
चलबो कदम ले कदम मिलाके, मया पीरीत ल बसाके
आज खुसी ले झूमव नांचव, आजादी जसन मनाबो
सोन चिरइय्या भारत के चरन म मांथ नवाबो
●
आज पन्दरा अगस्त के दिन, देस अजादी पाईस हे
ये दिन ल हम कइसे भुलाबो, तिरंगा लहराईस हे
आवव सबझन एक जुरिया के, आजाद गीत ल गाबो
सोन चिरइय्या भारत के चरन म मांथ नवाबो
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तोषन धनगंइहा
डौंडीलोहारा बालोद छत्तीसगढ़
सोने की नही है बारी
करो कूच की तैयारी
थर्र खाये सारे बैरी
जाने ये दुनिया सारी
रण के बाकुरों जागो
मेरे दुलारों जागो.....
बैरी दुवारे आये.....
ऊबाल भरो रग-रग में
बधायें कई है मग मे
फौलाद जिगर तुम रखलो
दंभ भरो पग-पग में
माई के लालों जागों
वीरों हुंकारों जागो....
बैरी दुवारे......
भारत की आन बचानें
बन जा तू शेर दिवानें
अरियों के छक्के छूटे
भीड़ जा बनकर परवाने
तिरंगा थामे जागो
जयहिंद सब गालो जागो...
बैरी दुवारे....
तोषन धनगंइहा
डौंडी लोहारा बालोद
शिशु गीत
दीदी आई जी दीदी आई।
एक बड़ी सी पुड़िया लाई।
हमने जो देखा जब ये खोल,
एक सोने की गुढ़िया पाई।
श्याम सलोनी गुड़िया प्यारी।
लगती सबको न्यारी न्यारी।
संग घूमती है संग दौड़ती,
तितली जैसे क्यारी क्यारी।
कभी न रोती हँसती हरदम।
बिन पायल के नाचे छमछम।
जब शिव जी का डमरू बाजे,
बोले मुख से बम बम बम।
गुड़िया मेरे साथ है रहती।
मीठी मीठी बातें हैं कहती।
ऊपर देखो नीलगगन में,
खिल के चाँदनी वो है हँसती।
कभी नही तुम हमें रुलाना।
कभी नही तुम हमें सताना।
दूर मुझसे तुम जाना नहीं,
दौड़ के मेरे पास में आना।
॥हर हर महादेव॥
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(१)
भूत भामन भोला गंगाधर,माथे म चंदा ताज।
भीख मांगतहन तोरे तीर,दरस दिखादे आज।।
(२)
आवय सावन चले कंवरिया, हर हर के जयकार।
मुड़ी ले निकले गंगा धारा , सरपन पहिरे हार।।
(३)
सुरहिन गइय्या के दुध लाके,भोला तोला मनाय।
धथुरा फूल फर बेल पाना,सुघ्घर तोला चढाय।।
(४)
पावन परब तोर सावन मा, सबझन ह सकलाय।
ओमकारा नमो शिवा जपय,बमबम धुनी लगाय।।
(५)
राम नाम महादेवा जपय,शिवा जपय प्रभु राम।
राम उमापति दुनो जपय तब,बनथे बिगड़े काम।।
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तोर बिना तोर बिना
दिल नंइ लागय
मोर दिल नंइ लागय
तिही मोरे हस जिंनगी
तिही मोर हस हर खुशी
तिही मोर हस बंदगी
कइसे कहँव
कहाँ जावँव
कइसे करँव सजदा
तोरे बिन......
1.तोरे कसम तोरे कसम जाने जाना
तोरे बर तोरे बर मँय दिवाना
कइसे जीअँव कइसे जीअँव बताना
मरना घलो मोला नंइ आय
तिही मोरे हस जिंनगी
तिही मोर हस हर खुशी
तिही मोर हस बंदगी
तोरे बिन....
जोही मोरे जोही मोरे सोना सोना
रब्बा मोरे रब्बा मोरे हस सलोना
तोरे बिना अउ कोनों नंइ होना
सुरता तोरे कतना सताय
तिही मोरे हस जिंनगी
तिही मोर हस हर खुशी
तिही मोर हस बंदगी
कइसे कहँव
कहाँ जावँव
कइसे करँव सजदा
तोरे बिन......
तोला देखे ले..जान...मोर जान आगे
तोला देखे ले..जान...मोर जान आगे
मन के मंदिर में जइसे भगवान आगे
मोला लागे अइसे सगरो जहान आगे
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मन तो होथे तोला मँय निहारत रहँव
लेके बँइहा..मा तोला...झुलावत रहँव
तोर बिना...कहीं...चैन आ..वय नहीं
सुरता मा कहीं...मोला....भावय नहीं
रही-रही के तोरेच..तीर धियान लागे
मन के मंदिर में जइसे...भगवान आगे
मोला लागे अइसे..सगरो जहान आगे
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रोज सपना मा आके सताथस काबर
राति आवै न निंदिया जगाथस काबर
कलगी पागा...के तोर मन मोर मोहे ना
आज मन के मिलौना रद्दा तोर जोहे ना
उड़ँव बनके...मँय भँवरा अरमान जागे
मन के मंदिर में जइसे.....भगवान आगे
मोला लागे अइसे....सगरो जहान आगे
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पिता जैसा क्षमता है, भाई माँ की ममता है।
खुशियाँ जहान की ये,भाई से ही पाई है।
बने कभी हाथी घोड़े,भूलकर दुख सारे,
लिए मुस्कान अपने,गम को छिपाई है।
सारी सुविधाएँ दिए,बहनों पे वार भाई
खाए तूने रुखी सूखी,खीर को खिलाई है।
कृष्ण जैसा रक्षा करे,द्रौपती के चीर भरे,
आँचल को चीरकर,राखी जो बंधाई है।
भैय्या मेरी लाज रखो,जिंदगी आबाद रखो,
आपने कलाई में जो,राखी ये बंधायी है।
लाख आएँ तूफाँ कोई,या कोई बहने रोई,
मुश्किलों में आके भाई,जान जो बचायी है।
दिल को दुखाना नहीं, हमें यूँ रूलाना नहीं,
मुखड़े को देख देख, फूले न समाई है।
जग में है न्यारा भाई,सबसे है प्यारा भाई,
तारा माँ की आँखो का है,दुलारा ये भाई है।
तोषण कुमार चुरेन्द्र"धनगंइहा"
डौंडी लोहारा बालोद
छ.ग. ९६१७५८९६६७
मनुज आचरण बने रखव,मीठा रखव जुबान।
क्षमाशील गुनवान बनव,रहव दया के खान।।
मुढ़ अनपढ़ बर शास्त्र के,रथे भला का दाम।
थस अंधरा बर दरपन के,रहय नहीं कुछु काम।।
अभिमानी अपन आप में,भरत रथे हूँकार।
अइसन मनखे दुनिया में,पावे ना सत्कार।।
सब झन मिलके बने रहव,चलत रहव सब साथ।
दिन दरिद के सेवा करव,कृपा करे रघुनाथ।।
कारज मन मा राखे ले,कभु पूरा नइ होय।
मुख भीतर नइ जाय हिरन,लगे शेर जब सोय।।
तोषन धनगंइहा
धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद
सुम्मत ले गाड़ी चलय,बनथे बिगड़े काज।
अइसे भारत देश मा,अवधपुरी हे राज।।
राजा दशरथ के महल,रानी रहिथे तीन।
देवइया पानी घलो,बेटा नइहे एक झीन।।
बेटा बनके राम हा,राजमहल मा आय।
अवधपुरी नाचे लगे,भर भर मन हरसाय।।
कैकैयी रानी सुने,राम राज के बात।
सुधबुध सबला त्याग के,खाय नही ओ भात।
बनही राजा अब भरत,राम जही बनवास।
बात मोर तै मान ले,तभ्भे आही रास।
राम सिया भाई लखन,जावय गंगा पार।
अड़हा केंवट हा घलो,तार डरे परिवार।।
पंचवटी बनगे कुटी,सुख्खा डारा पान।
हर लेगे माता जानकी,रावन जे शैतान।।
खोजत सीता राम हा,जटायु दिये उबार।
जूठा बोइर बाँटके,शबरी होगे पार।।
रघुवर अउ सुगरीव जी,सुग्घर बधे मितान।
सुखदुख सब ला जान के,किरपा दे भगवान।
मातु सिया के खोज बर,चंगा हे हनुमान।
बाधा जम्मो भाग गे,लगे राम के ध्यान।।
साधु कुटिया देखके,गये विभीषण तीर।
गोठ बात मा जान गे,मातु सिया के पीर।।
वाटिका पहुँचे तभे,मिले सिया के शोर।
राम बसा के ध्यान मा,भुँजे गली सब खोर।
पाए सिया के शोर जब,पहुँचे लंका धाम।
रावन के परिवार के,करदिस काम तमाम।।
सिया राम भाई लखन,आय अवधपुर धाम।
बरगे दीया चौमुड़ा,राम सिया के नाम।।
तोषन के हे लेखनी,लिखे रमायन सार ।
माँगत हावँव दव क्षमा,गलती देहु जी टार।
तोषन धनगंइहा
झन कर गरब गुमान झन कर गरब गुमान रे
भैय्या मोर जायेला परही शमशान
पाँच रतन के बने तोर काया
जेकर नँइहे ठिकाना।
चारेच दिन हरिहर पाना
पाछू परेहे अइलाना
समय रहत पहिचान
समय रहत पहिचान रे
भैय्या मोर
झन कर गरब गुमान
कौड़ी कौड़ी जोड़े खोंधरा बनाए
एक दिन छोड़ के जाना
साथी संगी सब रही जाही
जग के हे रीत पुराना
सुनले सिरतो ईमान
सुनले सिरतो ईमान रे
भैय्या मोर
झन कर गरब गुमान
माटी माटी के काया बने हे
माटी मा मिल जाही
धरम करम के करले कमाई
पुरखा हा तर जाही
झन तै बिरथा जान
झन तै बिरथा जान रे
भैय्या मोर
झन कर गरब गुमान
तोषन धनगंइहा
धनगाँव डौ.लोहारा
बालोद छ.ग.
राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...