शनिवार, 31 अगस्त 2019

ईश वंदना

*ईश वंदना*



बम बम बोल बम,
    खींचे गांजा एक दम,
       अंग में भभूति सोहे,
           दूज चंदा माथ में।

हिमाले पे डेरा रहे,
    गल नाग फेरा रहे,
          वामंग बिराजे सती,
               गणपति साथ में।

हलाहल पीने वाले,
   परहित जीने वाले,
        नीलकंठ बन गये,
            विष लिए हाथ में।

तेरी लीला न्यारी लागे,
    जग हितकारी लागे,
         मेरी नाव पार करो,
              खड़ा मैं हूँ बाट में।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"

शुक्रवार, 30 अगस्त 2019

बहना का प्यार

लघु कथा



*बहना का प्यार*

                                            बहन को तीज लिवाने के लिए किसन घर से मोटर सायकल लेके निकला।मन ही मन मुस्कुराते हुए जा ही रहा था कि अचानक.....पीछे से एक मोटर सायकल वाले ने तेज रफ्तार से आते हुए किसन को ठोकर मार दी।

                                           इधर सुनीता भी आज मन ही मन गुनगुना रही है कि आज भैय्या मेरा तीज के लिए लिवाने आने वाला है।मुंडेर पें कौआ कांव-कांव करते संदेशा सुना रहा है।पंछी की कलरव भी मन को भा रही है।

                                          सुनीता भैय्या के आने का इंतजार कर रही थी।तभी.... फोन की घंटी बजी।संदेश आया कि तेरा भैय्या अस्पताल में भर्ती है जल्दी से आ जाओ।

                                          संदेश मिलते ही दंग रह गयी।"हे भगवान! सोचा क्या और क्या हो गया?" सुनीता सोचने लगी। जैसे तैसे बहना अस्पताल पहुंची।भैय्या को देखा ।सुकुन की साँस ली कि ज्यादा चोटें नही आईं।कहने लगी "क्या भैय्या !धीरे चलाना चाहिए न!तुम्हें कुछ हो जाता तो...?"

                                           "जब तक तेरी जैसी बहन मेरे साथ है तो मुझे  कुछ भी नही हो सकता।" किसन ने कहा।

                                         "इस साल तीज में भोलेनाथ से अपने पति अपने बच्चों की सलामती के साथ-साथ तेरे लिए भी दुआ मागूँगी कि तू सदा खुश रहे ।तुम्हें दुनिया में कोई तकलीफ न हो।" सुनीता ने कहा।
                                         किसन एक टक अपनी बहन को देखता रहा।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"

सरगम



सरगम तेरी पायल की मेरे मन की बोल
गीत मिलन की छेड़ दे हिया के पट खोल


छम छम वन में नाचती देखते ही बादल मोर
सावन की पुरवाई बाँधे तुझ संग प्रीत की डोर
आजा बसंत बहार में ले कोयल की बोल....


मेरे मन की गजगामिनी मैं हूँ तेरा चितचोर
मिल जाए एक झलक देखूँ तुझे जो भोर
मेरे हिय के प्रेम को प्रेम तुला से अब तोल....


तोषण कुमार चुरेन्द्र
'धनगंइहा'

गुरुवार, 29 अगस्त 2019

ईश वंदना

माखन खाता नन्द घर,मधुबन करता रास।
कब आओगे मोहना,बसी नयन में आस।।
हाथ पसारे द्वार तिहारो।
मेरो मन करता जयकारो।
मुरलीधर तुम नाग नँथायो।
राधे रानी के मन  भायो।
गोपाला केशव बहुते नामा।
आना माधव अपनो ग्रामा।
मीत सुदामा तोहे प्यारा।
जानत हर कोई जग सारा।
दे दीजै प्रभु यह वरदाना ।
सकल जगत हो आप समाना।
आओ नटवर धीर बँधाओ।
फिर एक बार गीता गाओ।
तेरे दरशन की आस में,रोवत हैं बृज धाम।
आजा गिरधर लौट के,फिर राधा के ग्राम।।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"

ईश वंदना



माखन खाता नन्द घर,मधुबन करता रास।
कब आओगे मोहना,बसी नयन में आस।।


हाथ पसारे द्वार तिहारो।
मेरो मन करता जयकारो।

मुरलीधर तुम नाग नँथायो।
राधे रानी के मन  भायो।

गोपाला केशव बहुते नामा।
आना माधव अपनो ग्रामा।

मीत सुदामा तोहे प्यारा।
जानत हर कोई जग सारा।

दे दीजै प्रभु यह वरदाना ।
सकल जगत हो आप समाना।

आओ नटवर धीर बँधाओ।
फिर एक बार गीता गाओ।


तेरे दरशन की आस में,रोवत हैं बृज धाम।
आजा गिरधर लौट के,फिर राधा के ग्राम।।



तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"

प्यार करता हूँ

चोरी छिपे सही दीदार करता हूँ।
जानें नहीं कभी मैं प्यार करता हूँ।

देखे कभी नमी आँखें झलक से जो,
अपनी झुकी निगाहें चार करता हूँ।

तेरे हँसी लबों की चाहत मुझे है,
खुद को कभी-कभी बीमार करता हूँ।

माना मुझे नही आता मुस्कुराना,
तेरे लिए जहाँ गुलजार करता हूँ।

समझो नहीं कभी गूँगा बधिर हमको,
इश़्की जुबाँ अभी इजहार करता हूँ।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"


बुधवार, 28 अगस्त 2019

अंत्याक्षरी



अभ्यास की दृष्टि से सादर ....मंच पर

अवहेलना,

मत करना अवहेलना,कभी बड़ों की बात।
दुआ कभी मिलता नहीं,हो दिन चाहे रात।।


विवेचना,

करिए कर्म विवेचना,रखिए सदा ये ध्यान।
धन दौलत जब पास हो,ना रख कभी गुमान।।


व्याप्त,

गुण अवगुण सब व्याप्त है,यही जगत की रीत।
मीठी वाणी बोल के,सकल विश्व लो जीत।


आकंठ,

भरा हुआ आकंठ तक,सदा पतित में दंभ।
झुकना कभी न जानते,तने रहे बन खंभ।


ममता,

माँ की ममता को भला,आँक सके न कोय।
भरकर सुत के पेट को,खुद ही भूखी सोय।।


प्रलाप,

सुख दुख के इस खेल में,करते नहीं प्रलाप।
धैर्य मन में धारिए,मिट जाए संताप।।


लालसा,

त्यागें मन की लालसा,करें ईश का ध्यान।
धन दौलत साथी नहीं,रखिए इसका ज्ञान।।


वन्दना,

मातु पिता की वन्दना,करलें आठों याम।
जिनके पुण्य प्रताप से,बनते बिगड़े काम।।


चापलूस,

चापलूस के काम का,रहता जग में शोर।
बड़े-बड़े ठग जात हैं,क्या ठाकुर क्या चोर।।


झंझावत

आते झंझावत शाम जो,हिय में उठती आह।
पिया गये परदेश को,घर से तकती राह।।


तोषण कुमार चुरेन्द्र "धनगंइहा"

भारत के प्यारे जागव



भारत के प्यारे जागव
देश के रखवारे जागव
बइरी दुवारे आवय
तुम सिर उतारव जागव


झोंकय अपन जिनगानी
शिवाजी मनु मर्दानी
आजाद भगत के टोली
सुनले तैं अमर कहानी
भुजा फड़कालव जागव
आगी भड़कालव जागव...
बइरी दुवारे आवय...

सुते के नंइहे पारी
करव लड़े के तइयारी
थर्र खावय जम्मो बइरी
जानय ये दुनिया सारी
रण के बाकुरों जागव
जग के दुलारों जागव....
बइरी दुवारे आवय.....


ऊबाल भरव रग-रग में
बाधा कतको हे पथ मे
फौलाद करेजा रखलव
दंभ भरव पग-पग में
दाई के ललना जागव
भरके हुंकार जागव....
बइरी दुवारे आवय......


जागव मोर देश के हीरा
हर लेवव सब दुख पीरा
भारत माता के दुलरवा
बहिनी के भइय्या वीरा
रक्षा के सूंत बधावव
मिलके सब फरज निभावव....
बइरी दुवारे आवय....


भारत के  आन बचावव
बन जा तैं बघवा मानव
दुसमन के छक्का छूटय
भाग जावय अबके दानव
तिरंगा थामव जावव
जयहिंद सब मिलजुल गावव...
बइरी दुवारे आवय....


तोषन धनगंइहा
डौंडी लोहारा बालोद

दोहालरी


मुखिया अपने गाँव में,
      आन बसे है तीन।
अपनी ही बस हाँकते,
       लाख बजा लो बीन।

कारज कितना भी भला,
       सही मिले ना दाम।
रखते ऐसी चाहतें,
       अच्छा हो परिणाम।।

खाना ही दोगे नही,
       कैसे लोगे काम।
समझो ना अब तुम यहाँ,
       अपने को गुलफ़ाम।।

राजा अपने दास को,
       समझे कोल्हू बैल।
तन मन धन शोषण करे,
       पेर निकाले तैल।।

आने का है भान सब,
       जाने का ना लेख।
अपना भी परिवार है,
       घर पर जाकर देख।।

मीठा मीठा बोलके,
        मन को लेते फाँस।
रखलें अपनी बात तो,
        टाल देत है हाँस।

अपनी टोली में सभी,
        रखते मुँह को बंद।
सुनके ही रह जात हैं,
        करके नाड़ी मंद।।

खून पसीने सींचते,
        देते विद्या दान।
समझें इनकी भावना,
        दें नव वेतन मान।।

पेट अगर होगा भरा,
        मुख से निकले वाह।
लात पड़े जो पेट में,
        निकले दिल से आह।।

धन तो है मिलता नहीं,
        मिलता केवल मान।
भूखा रहके हम मरें,
        नहीं किसी को भान।।

लक्ष्य गर मिलता नहीं,
        बदलें अपनी राह।
पा जाओगे साथियों,
        जो है मन में चाह।

मंगलवार, 13 अगस्त 2019

खधर छानी


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मोर घर के खधर छानी
टिपिर टापर  चुहे पानी

चिमनी मा अंजोर नंइहे
चातर  गली  खोर नंइहे

नरवा ढोरगा डबडबागे
खेती   खार  लबलबागे

हरेली के भावय तिहार
दसमूर हे घर घर दुवार

तुलसी के अमर कहानी
गावय गुनी मुनी ग्यानी

जुगुर जुगुर जोगनी बरे
रतिहा सावन कोन धरे

पुरवइय्या सरर सरर
घरजे बादर घरर घरर

भाई  बहिनी  के राखी
हावय बंधना के पाखी

मिलके  झंडा फहिराबो
अजादी  के  गीत गाबो

नाचे  रे  मोर मन मंजूर
सुनले  तैहा  कन कजूर

माँत्रिक  के  छू छू मंतर
धरले  तै  जी  जी अंतर

जय युवा  जय किसान
होही तोषन नवा बिहान

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तोषन धनगंइहा
डौंडी लोहारा

खधर छानी


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मोर घर के खधर छानी
टिपिर टापर  चुहे पानी

चिमनी मा अंजोर नंइहे
चातर  गली  खोर नंइहे

नरवा ढोरगा डबडबागे
खेती   खार  लबलबागे

हरेली के भावय तिहार
दसमूर हे घर घर दुवार

तुलसी के अमर कहानी
गावय गुनी मुनी ग्यानी

जुगुर जुगुर जोगनी बरे
रतिहा सावन कोन धरे

पुरवइय्या सरर सरर
घरजे बादर घरर घरर

भाई  बहिनी  के राखी
हावय बंधना के पाखी

मिलके  झंडा फहिराबो
अजादी  के  गीत गाबो

नाचे  रे  मोर मन मंजूर
सुनले  तैहा  कन कजूर

माँत्रिक  के  छू छू मंतर
धरले  तै  जी  जी अंतर

जय युवा  जय किसान
होही तोषन नवा बिहान

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तोषन धनगंइहा
डौंडी लोहारा

सोमवार, 12 अगस्त 2019

आ जाओ हे प्यारे


आ जाओ हे प्यारे कान्हा धरती के भार हटाने को
तरस रही है कान आजा गीता ज्ञान सुनाने को


अनगिन अत्याचार करने बढ़ रहे अत्याचारी
स्वार्थी बनकर तेरे जग में करते भ्रष्टाचारी
भरदो सबके अंतरात्मा समरसता के गाने को
तरस रही है कान आजा गीता ज्ञान सुनाने को


द्रोपदी की लाज आज भी जरा नही है बाकी
दुर्योधन दुशासन जैसे दिखते कितनों झाँकी
मुक्त कर से प्रतिपल अपने शील पर चीर लुटाने को
तरस रही है कान आजा गीता ज्ञान सुनाने को


ये मेरा ये तेरा कहके राग हैं सभी आलापे
एक दूसरे को फाँसने रोग बड़े है ब्यापे
रहे सदा एक छत के नीचे गोवर्धन उठाने को
तरस रही है कान आजा गीता ज्ञान सुनाने


तोषन धनगंइहा

बेटी हावय मोर आन


कज्जल छंद

बेटी हावय मोर आन।
बेटी हावय मोर शान।
पढ़ही तनुजा बढ़े मान।
सगरो दुनिया करे गान।

ये सबके बनाथे काज।
रखथे  बेटी मोर लाज।
बनके तैहा  शेर आज।
बैरी बर तै गिरा गाज।

चंदा जइसे  तोर रूप।
सहिके तैहा छाँव धूप।
बाधा करथस ढेर लूप।
पूजय तोला सूरज भूप।

मिलही तोला दुआ ढेर।
होवय  देर  भले सवेर।
कोनों  तोला   दे  नटेर।
आँखी   देबे   तै  तरेर।

तोषन धनगंइहा
डौंडी लोहारा

भोले के द्वार


चलो संगी जाबो सब
भोले के द्वार हो
चरण मा मिलथे जेखर
सारा संसार हो

सगरो चराचर के
जीव ल बचाये
पान करे घोर हलाहल
नीलकंठ कहाये
मिल जुल देवता करे
जय जयकार हो...

अंग भभूति चुपरे
पहिरे बघवा छाल तै
कालों के काल भोले
जय महाकाल तै
शरन मा तोर आएँव
दे दे दुलार हो....

रीषि मुनि देवता धामी
रात दिन तोला ध्यावे
पूरा करे कामना तै
आशीष तोर पावे
नंइया हे मझधार मोरो
करदे तही पार हो....

तोषन धनगंइहा
डौंडी लोहारा

चलव संगी चलव जवान

"भइय्या बर बहिनी के राखी ह छुटगे
दाई ददा के डेहरी ले दीया ह बुझगे।
मोर भारत माता के अचरा खातिर
मंगल भगत खुदी फांसी म झुलगे।।"
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चलव संगी चलव जवान, देश के गुन ल गाबो
मोर सोन चिरइय्या भारत के, चरन म मांथ नवाबो

आजादी के खातिर कतको,अमर जवान बलिदान होईंन
बहिनी अपन भाई ल खोए,महतारी बेटा बर रोईन
याद करन ऊँखर कुरबानी,अश्रु के धार बोहाबो
सोन चिरइय्या भारत के चरन म मांथ नवाबो

भारत माता के आन खातिर, छाती म झेलिन हे गोली
सदा बढ़िन आघू मग म, नित खेलिन खून के होली
अइसन शहीद के सुरता म, दीया अखंड जलाबो
सोन चिरइय्या भारत के चरन म मांथ नवाबो

सबझन मिलके रहिबो संगी, एक सूँत मा बंधाके
चलबो कदम ले कदम मिलाके, मया पीरीत ल बसाके
आज खुसी ले झूमव नांचव, आजादी  जसन मनाबो
सोन चिरइय्या भारत के चरन म मांथ नवाबो

आज पन्दरा अगस्त के दिन, देस अजादी पाईस हे
ये दिन ल हम कइसे भुलाबो, तिरंगा लहराईस हे
आवव सबझन एक जुरिया के, आजाद गीत ल गाबो
सोन चिरइय्या भारत के चरन म मांथ नवाबो

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                 तोषन धनगंइहा
डौंडीलोहारा बालोद छत्तीसगढ़

शुक्रवार, 9 अगस्त 2019

देश के रखवारे


भारत के प्यारे जागो
देश के रखवारे जागो
बैरी दुवारे आये
तुम सिर उतारो जागो

सोने की नही है बारी
करो कूच की तैयारी
थर्र खाये सारे बैरी
जाने ये दुनिया सारी
रण के बाकुरों जागो
मेरे दुलारों जागो.....
बैरी दुवारे आये.....

ऊबाल भरो रग-रग में
बधायें कई है मग मे
फौलाद जिगर तुम रखलो
दंभ भरो पग-पग में
माई के लालों जागों
वीरों हुंकारों जागो....
बैरी दुवारे......

भारत की  आन बचानें
बन जा तू शेर दिवानें
अरियों के छक्के छूटे
भीड़ जा बनकर परवाने
तिरंगा थामे जागो
जयहिंद सब गालो जागो...
बैरी दुवारे....

तोषन धनगंइहा
डौंडी लोहारा बालोद


गुरुवार, 8 अगस्त 2019

दीदी आई


शिशु गीत

दीदी आई जी दीदी आई।
एक बड़ी सी पुड़िया लाई।
हमने जो देखा जब ये खोल,
एक सोने की गुढ़िया पाई।

श्याम सलोनी गुड़िया प्यारी।
लगती सबको न्यारी न्यारी।
संग घूमती है संग दौड़ती,
तितली जैसे क्यारी क्यारी।

कभी न रोती हँसती हरदम।
बिन पायल के नाचे छमछम।
जब शिव जी का डमरू बाजे,
बोले मुख से बम बम बम।

गुड़िया मेरे साथ है रहती।
मीठी मीठी बातें हैं कहती।
ऊपर देखो नीलगगन में,
खिल के चाँदनी वो है हँसती।

कभी नही तुम हमें रुलाना।
कभी नही तुम हमें सताना।
दूर मुझसे तुम जाना नहीं,
दौड़ के मेरे पास में आना।

हर हर महादेव

॥हर हर महादेव॥
^^^^^^^^^^^^^●^^^^^^^^^^^^^
                        (१)
भूत भामन भोला गंगाधर,माथे म चंदा ताज।
भीख मांगतहन तोरे तीर,दरस दिखादे आज।।
                        (२)
आवय सावन चले कंवरिया, हर हर के जयकार।
मुड़ी ले  निकले  गंगा धारा , सरपन पहिरे हार।।
                        (३)
सुरहिन गइय्या के दुध लाके,भोला तोला मनाय।
धथुरा फूल फर बेल पाना,सुघ्घर तोला चढाय।।
                       (४)
पावन परब तोर सावन मा, सबझन ह सकलाय।
ओमकारा नमो शिवा जपय,बमबम धुनी लगाय।।
                        (५)
राम नाम महादेवा जपय,शिवा जपय प्रभु राम।
राम उमापति दुनो जपय तब,बनथे बिगड़े काम।।
^^^^^^^^^^^^^●^^^^^^^^^^^^^

तोर बिना


तोर बिना तोर बिना
दिल नंइ लागय
मोर दिल नंइ लागय
तिही मोरे हस जिंनगी
तिही मोर हस हर खुशी
तिही मोर हस बंदगी

कइसे कहँव
कहाँ जावँव
कइसे करँव सजदा
तोरे बिन......

1.तोरे कसम तोरे कसम जाने जाना
तोरे बर तोरे बर मँय दिवाना
कइसे जीअँव कइसे जीअँव बताना
मरना घलो मोला नंइ आय
तिही मोरे हस जिंनगी
तिही मोर हस हर खुशी
तिही मोर हस बंदगी
तोरे बिन....

जोही मोरे जोही मोरे सोना सोना
रब्बा मोरे रब्बा मोरे हस सलोना
तोरे बिना अउ कोनों नंइ होना
सुरता तोरे कतना सताय
तिही मोरे हस जिंनगी
तिही मोर हस हर खुशी
तिही मोर हस बंदगी

कइसे कहँव
कहाँ जावँव
कइसे करँव सजदा
तोरे बिन......

तोला देखे ले..जान


तोला देखे ले..जान...मोर जान आगे
तोला देखे ले..जान...मोर जान आगे
मन के मंदिर में जइसे भगवान आगे
मोला लागे अइसे सगरो जहान आगे
^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^
मन तो होथे तोला मँय निहारत रहँव
लेके बँइहा..मा तोला...झुलावत रहँव
तोर बिना...कहीं...चैन आ..वय नहीं
सुरता मा कहीं...मोला....भावय नहीं
रही-रही के तोरेच..तीर धियान लागे
मन के मंदिर में जइसे...भगवान आगे
मोला लागे अइसे..सगरो जहान आगे
^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^
रोज सपना मा आके सताथस काबर
राति आवै न निंदिया जगाथस काबर
कलगी पागा...के तोर मन मोर मोहे ना
आज मन के मिलौना रद्दा तोर जोहे ना
उड़ँव बनके...मँय भँवरा अरमान जागे
मन के मंदिर में जइसे.....भगवान आगे
मोला लागे अइसे....सगरो जहान आगे
^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^

बुधवार, 7 अगस्त 2019

भैय्या मेरा प्यारा


पिता जैसा क्षमता है, भाई माँ की ममता है।
खुशियाँ जहान की ये,भाई से ही पाई है।
बने कभी हाथी घोड़े,भूलकर दुख सारे,
लिए मुस्कान अपने,गम को छिपाई है।
सारी सुविधाएँ दिए,बहनों पे वार भाई
खाए तूने रुखी सूखी,खीर को खिलाई है।
कृष्ण जैसा रक्षा करे,द्रौपती के चीर भरे,
आँचल को चीरकर,राखी जो बंधाई है।

भैय्या मेरी लाज रखो,जिंदगी आबाद रखो,
आपने कलाई में जो,राखी ये बंधायी है।
लाख आएँ तूफाँ कोई,या कोई बहने रोई,
मुश्किलों में आके भाई,जान जो बचायी है।
दिल को दुखाना नहीं, हमें यूँ रूलाना नहीं,
मुखड़े को देख देख, फूले न समाई है।
जग में है न्यारा भाई,सबसे है प्यारा भाई,
तारा माँ की आँखो का है,दुलारा ये भाई है।

तोषण कुमार चुरेन्द्र"धनगंइहा"
डौंडी लोहारा बालोद
छ.ग. ९६१७५८९६६७

मनुज आचरण


मनुज आचरण बने रखव,मीठा रखव जुबान।
क्षमाशील गुनवान बनव,रहव दया के खान।।

मुढ़ अनपढ़ बर शास्त्र के,रथे भला का दाम।
थस अंधरा बर दरपन के,रहय नहीं कुछु काम।।

अभिमानी अपन आप में,भरत रथे हूँकार।
अइसन मनखे दुनिया में,पावे ना सत्कार।।

सब झन मिलके बने रहव,चलत रहव सब साथ।
दिन दरिद के सेवा करव,कृपा करे रघुनाथ।।

कारज मन मा राखे ले,कभु पूरा नइ होय।
मुख भीतर नइ जाय हिरन,लगे शेर जब सोय।।

तोषन धनगंइहा
धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद

रामायण सार


सुम्मत ले गाड़ी चलय,बनथे बिगड़े काज।
अइसे भारत देश मा,अवधपुरी हे राज।।

राजा दशरथ के महल,रानी रहिथे तीन।
देवइया पानी घलो,बेटा नइहे एक झीन।।

बेटा बनके राम हा,राजमहल मा आय।
अवधपुरी नाचे लगे,भर भर मन हरसाय।।

कैकैयी रानी सुने,राम राज के बात।
सुधबुध सबला त्याग के,खाय नही ओ भात।

बनही राजा अब भरत,राम जही बनवास।
बात मोर तै मान ले,तभ्भे आही रास।

राम सिया भाई लखन,जावय गंगा पार।
अड़हा केंवट हा घलो,तार डरे परिवार।।

पंचवटी बनगे कुटी,सुख्खा डारा पान।
हर लेगे माता जानकी,रावन जे शैतान।।

खोजत सीता राम हा,जटायु दिये उबार।
जूठा बोइर बाँटके,शबरी होगे पार।।

रघुवर अउ सुगरीव जी,सुग्घर बधे मितान।
सुखदुख सब ला जान के,किरपा दे भगवान।

मातु सिया के खोज बर,चंगा हे हनुमान।
बाधा जम्मो भाग गे,लगे राम के ध्यान।।

साधु कुटिया देखके,गये विभीषण तीर।
गोठ बात मा जान गे,मातु सिया के पीर।।

वाटिका पहुँचे तभे,मिले सिया के शोर।
राम बसा के ध्यान मा,भुँजे गली सब खोर।

पाए सिया के शोर जब,पहुँचे लंका धाम।
रावन के परिवार के,करदिस काम तमाम।।

सिया राम भाई लखन,आय अवधपुर धाम।
बरगे दीया चौमुड़ा,राम सिया के नाम।।

तोषन के हे लेखनी,लिखे रमायन सार ।
माँगत हावँव दव क्षमा,गलती देहु जी टार।

तोषन धनगंइहा

गुरुवार, 1 अगस्त 2019

झन कर गरब गुमान


झन कर गरब गुमान झन कर गरब गुमान रे
भैय्या मोर जायेला परही शमशान

पाँच रतन के बने तोर काया
जेकर नँइहे ठिकाना।
चारेच दिन हरिहर पाना
पाछू परेहे अइलाना
समय रहत पहिचान
समय रहत पहिचान रे
भैय्या मोर
झन कर गरब गुमान

कौड़ी कौड़ी जोड़े खोंधरा बनाए
एक दिन छोड़ के जाना
साथी संगी सब रही जाही
जग के हे रीत पुराना
सुनले सिरतो ईमान
सुनले सिरतो ईमान रे
भैय्या मोर
झन कर गरब गुमान

माटी माटी के काया बने हे
माटी मा मिल जाही
धरम करम के करले कमाई
पुरखा हा तर जाही
झन तै बिरथा जान
झन तै बिरथा जान रे
भैय्या मोर
झन कर गरब गुमान

तोषन धनगंइहा
धनगाँव डौ.लोहारा
बालोद छ.ग.

राम नाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...