सोमवार, 20 नवंबर 2017

दिन ढलते

आँसू कहते
कब आओगे तुम
दिन ढलते.....

निहारुँ राह
है मन आनंदित
प्रेम की चाह...

हो आगमन
चकवा निहारती
स्वाती की बूँद....

तोषण कुमार चुरेन्द्र

शभकामना

एकता शक्ति
पूरे हो अरमान
शुभकामना

ओस की बूँदे
टिमटिमाते तारे
धरा अम्बर...

कर्म है तेरा
न हो इच्छा फल की
कृपा ईश की...

खेलते बच्चे
धरना में शिक्षक
तम भविष्य

माँ की डाँट
नसीब में भी नही
रुठी किस्मत.. .

माँ की यादें
है अंतरात्मा बसी
भीगी पलकें

तोषण कुमार चुरेन्द्र

रविवार, 19 नवंबर 2017

अपना गाँव

तरु की छाँव
खेलता बचपन
अपना गाँव

मिट्टी चंदन
निखरित मस्तिष्क
कोटि वंदन

बहे सरिता
है धरा पल्लवित
मग पुनिता

कुँजती पिक
लगे मनभावन
देती सीख

कृषक झुमे
लहलहाते धान
माथा चुमे

पुष्प पलाश
देती नव चैतन्य
पूरी तलाश

तोषण कुमार चुरेन्द्र

शुक्रवार, 17 नवंबर 2017

पिया मिलन

पिया मिलन
     निहारती पलकें
             प्रेम अगन

तोषण कुमार चुरेन्द्र

दिले अरमान को...

बताएँ क्या हम अपनी दिल की दास्तान को
प्यासी धरती देखे  जैसे ऊपर आसमान को
आरजू है बस  उनसे आखिरी मुलाकात की
लगे न नजर किसी की मेरे दिले अरमान को....

तोषण कुमार चुरेन्द्र

बनें महान


संकल त्रय
   सप्तविंशति पुष्प
         मंगलमय

दर बदर
है चहल - पहल
       चार पहर

करें सम्मान
होकर आगाहित
       बनें महान

तोषण कुमार चुरेन्द्र

राम नाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...