गुरुवार, 7 सितंबर 2017

लोटा

पीतल-काँसा छोड़ के,
                        ताँबा लोटा भाय।
अमरित कस पानी लगय,
                  तन-मन सब हरियाय।।

बिना धुरी लोटा असन,
                     झन बनिहव इंसान।
येती-ओती झन घुमर,
                  नइ मिलही  पहिचान।।

मत बन रहव गिलास सब,
                        लोटा बने रहाव।
प्यास बुझावव चार के,
                 जिनगी सुफल बनाव।।

बुधवार, 6 सितंबर 2017

चल चला चल

मन में हो विश्वास अगर।
मुश्किल नहीं कोई  डगर।
चल चला चल आगे चल,
खड़ा लक्ष्य तेरे पथ पर।।

लोटा


लोटा भर पानी धरव,चलव शिवा के धाम।

माथ नवावव आज सब,लेवव शंभू नाम।।


 लोटा मा पानी धरव,सगा कभू घर आय।

कुरसी मा बइठारके,पूछव पानी चाय।।


चोर मोर लोटा धरय,भागय पल्ला छोड़।

आ जावय जब हाथ मा,देहँव मुड़ ला फोड़।।

राम नाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...