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मंगलवार, 13 जुलाई 2021

राम रमैय्या ल गाले

भजन

राम रमैय्या ल गाले 
हिरदै मा तैहा बसाले
आगा बजरंग आ
तै लाज ला हमरो बचाले

लाली चंदन लाली बंदन 
चुपरे हावस तै माथ मा
अंजनी के बेटा बजरंगबाला
रघुवर हे तोर साथ मा,,,,,,
राम रम्मैया,,,,,

चरन परे तोर भक्तन सगरो
पार ल तैहा लगादे
राम भगति मा मन हा लगे गा
अइसन जुक्ति बनादे,,,,,
राम रम्मैया,,,,,

शनिवार, 1 मई 2021

राशन पानी

हावा पानी कहाँ ले पाबो

रूख राई डोंगरी पहाड़ी रोवत हे पुरजोर...
हावा पानी कहाँ ले पाबो करलव भैय्या शोर....

पेड़ लगावव जिनगी बचावव
धरती दाई के प्यास बुझावव
नदिया नरवा सूख्खा परगे,
अब तो थोरिक चेत लगावव

गली मुहल्ला सुन्ना परगे सुन्ना होगे गा खोर....
हावा पानी कहाँ ले पाबो करलव भैय्या शोर....

कोरोना के कहर चलत हे
मनखे तभो ले नइ चेतत हे
सेंफो सेंफो जीव हर करथे,
आक्सीजन ह कम परत हे

कइसन बिपत के छाहे बादर ये घनघोर....
हावा पानी कहाँ ले पाबो करलव भैय्या शोर....

मनखे पीछू रूख ल लगावव
जल  जमीन  जंगल बचावव
जल हे तब कल हे गा भैय्या,
यहू बात ल सब ला बतावव

सावन मा बरसही पानी झूमही नाचही मोर....
हावा पानी कहाँ ले पाबो करलव भैय्या शोर....


तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगांव डौंडी लोहारा

शनिवार, 17 अप्रैल 2021

घर घर परत हे रोना

घर घर मा परत हे रोना

पूरगे साल घलो एसो दीदी
भागत नंइहे कोरोना....
का बइरी जग मा रोग हमाहे 
घर-घर मा परत हे रोना...

कोन जनी कते जग ले आहे
संग मा अपन आफत लाहे
नान्हे बड़के मनखे नंइ चिन्हे
गली मुहल्ला चँउक चौराहे
फिक्कर मा हावय सरी दुनिया
कइसन हे आहे पदोना...
का बइरी जग मा रोग हमाहे 
घर-घर मा परत हे रोना....

घर में राहव सब बढ़िहा राहव
खुद ला बचाके सबला बचावव
जिनगी ला बने राखव रे संगी
कोरोना के वेक्सीन लगावव
मुँह मा मास्क लगालव भइय्या
साबुन मा हाथ ला धोना....
का बइरी जग मा रोग हमाहे 
घर-घर मा परत हे रोना....

जिनगी बड़ा अनमोल गावव
सुरक्षा अउ सावधानी अपनावव
कोरोना ला दूर भगाये खातिर
दू गज दूरिहा दूरी बनावव
जग-जग बगरय शोर तोषण
चारो मुड़ा चारो कोना....
का बइरी जग मा रोग हमाहे 
घर-घर मा परत हे रोना....

रचनाकार
तोषण कुमार चुरेन्द्र
सरपंच, धनगाँव
डौंडी लोहारा बालोद
छ.ग 491771

रविवार, 28 मार्च 2021

मोर गाँव के शीतला

मोर गाँव के शीतला...

मोर गाँव के शीतला,शीतल हे जुड़ तोर छंइहा
शीतल हे जुड़ तोर छंइहा,शीतल हे जुड़ तोर छंइहा

दया ले तोर दाई ओ,चलत हे मोर जिनगी ह
देवत हे भर-भर ममता,सुनत हे सबके बिनती ल
करत हे तोर सेवा ल,जोरे जोरे सबो बंइहा....
मोर गाँव के शीतला,शीतल हे जुड़ तोर छंइहा....

चरन म जेन हर आथे,नंइ खाली हाथ वो जाथे
जय दाई मात शीतला के,सेवा जस गीत ल गाथे
पवनपुत सेऊक तोरे,अउ लखन राम कन्हैया...
मोर गाँव के शीतला,शीतल हे जुड़ तोर छंइहा....

महादेव ब्रह्मा बिष्णु संग,पूजय तोला ये नर-नारी
हावस तेही सहाई ओ,सबन के हस तै हितकारी
पूजा पाठ कुछु नंइ जानँव,मँय दिनकर मनबइहा...
मोर गाँव के शीतला,शीतल हे जुड़ तोर छंइहा....


तोषण कुमार चुरेन्द्र दिनकर
धनगाँव डौंडीलोहारा बालोद
छत्तीसगढ़ 491771

हाय गा मोर सरसो के फूल

हाय ओ मोर परसा के फूल,मार डारे हँसाई खुले खुल
हाय गा मोर सरसो के फूल,मोही डारे तोर रेंगना झूले झूल
#########
फागुन महिना गोरी, उड़त हे गुलाल ओ
उड़त हे गुलाल
मिरगीन कस रेंगना तोरे,चेहरा लाल लाल ओ
चेहरा लाल  लाल 
हाय ओ मोर परसा के फूल........
हाय गा मोर सरसो के फूल........
#######
मँय तोर राधा रानी,किसन कन्हैया तँय
किसन कन्हैया
बिरिज मा होली खेलबो,जोरे जोरे बंइहा 
जोरे जोरे बंइहा
हाय गा मोर सरसो के फूल....
हाय मोर परसा के फूल....
#######
पीरीत के रंग मा गोरी,जिनगी ला रंग डारे ओ
जिनगी ला रंग डारे
संग कभू छूटे नाहीं,बंधना बध डारे ओ
बंधना बध डारे
हाय ओ मोर परसा के फूल.....
हाय गा मोर सरसो के फूल.....
######
संगे मा जिबो बइहा,संगी मर जाबोन गा
संगे मर जाबोन
फूल बगिया कस राजा,कुरिया बनाबोन गा
कुरिया बनाबोन
हाय गा मोर सरसो के फूल....
हाय ओ मोर परसा के फूल....
🖋️🖋️🖋️🖋️🖋️🖋️🖋️
गीतकार
तोषण  चुरेन्द्र दिनकर
धनगांव डौंडीलोहारा
बालोद छ.ग.

शनिवार, 13 मार्च 2021

हरि नाम ल

मन म बसाके तैह भजले सिया राम ल...
राम ह बनाही संगी सबके बिगड़े काम ल...

1
तरे अवधपुरी दशरथ कौशिल्या ह
गोड़ के धुर्रा ले उबरे अहिल्या ह
मरा मरा जपय रत्नाकर हरि नाम ल...

2
शबरी दाई संग गिधवा ल तारे
बनके मितान प्रभु बाली ल मारे
पावय मुक्ति देखव पहुंचे हरिधाम ल.....

3
काकभुशुण्डि घलो गुण ल गावय
बइठे गरुड़ जी ह शोर ल लमावय
नारद चुटकी संग जपै सुबे शाम न...

4
ये कलजुग म संगी नाम ह सार हे
भजले तै राम ल तोर बेड़ा पार हे
मिलही आशीष लेवय नहीं दाम ल...


तोषण चुरेन्द्र दिनकर
धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद छ.ग.
6267538036

शनिवार, 16 जनवरी 2021

तैहा दीया देखाये गा

समीक्षा में
*मुखड़ा*
तैहा दीया देखाये गा तुलसी
रामायण सिरजाई के
तैहा गंगा नँहवाये गा तुलसी
राम भजन ल गाई के..

*अंतरा*
अवघड़ दानी शंकखर भोला
सती ल कथा सुनाये~~~
कँऊवा तरगे गिधवा तरगे
राम के ध्यान लगाये~~~
नारद बीना बजाये गा तुलसी
हरि भजन ल गाई के.......1

*अंतरा*
गोड़ ल धोके केवट तरगे
पुरखा ल पार लगाये~~~
नवधा सुनके शभरी उबरगे
हरि के धाम ल पाये~~~
हनुमत चुटकी बजाये गा तुलसी
भक्ति के धुन ल गाई के....2

*अंतरा*
राम नाम के अमरित धारा
गाँव गली म बोहाये~~~
आवय संगी दीदी भइय्या
मिल जयकारा लगाये~~~
तोषण खुशी मनाये गा तुलसी
हरि भजन ल गाई के.....3

©®
तोषण चुरेन्द्र{दिनकर}
धनगाँव डौंडी लोहारा

सोमवार, 11 जनवरी 2021

मोर छत्तीसगढ महातारी

मोर छत्तीसगढ़ महातारी 
तोर महिमा हावय भारी
धान के कटोरा भावय
भारत माँ के दुलारी....

नदिया नरवा डोंगरी पहाड़ी
कोरा म तोर इतरावय
हरियर हरियर खेती डोली
पुरवइय्या संग लहरावय
अमरइय्या म कुहकत हे
मनमोहनी कोयलिया कारी
मोर छत्तीसगढ़ महातारी 
तोर महिमा हावय भारी....

सुवा करमा पंथी ददरिया
मान ल तोर बढ़ावय
छत्तीसगढ़ मोर छंइहा भुंइया
मया के अचरा ओढ़ावय
तोर कोरा म गुँजत रहिथे
लइका के किलकारी
मोर छत्तीसगढ़ महातारी 
तोर महिमा हावय भारी

हलधर बेटा सुत उठ के
तोरे सेवा बजावय
महिनत करके दिन रतिहा
सोनहा धान उपजावय
खाँध म नाँगर हाथ तुतारी
बइला जेकर संगवारी
मोर छत्तीसगढ़ महातारी 
तोर महिमा हावय भारी

बीर नरायण गैंदसिंह नायक
जस कतरो बलिदानी हे
महातारी तोर रक्षा खातिर
लिखदिस अमर कहानी हे
दिनकर संग म गावत हे
छत्तीसगढ़िहा ओरी पारी
मोर छत्तीसगढ़ महातारी 
तोर महिमा हावय भारी...


तोषण कुमार चुरेन्द्र "दिनकर"
धनगाँव, डौंडी लोहारा
बालोद छ.ग

मंगलवार, 5 जनवरी 2021

आजा भरे दरबार

बिनती तोर करत हँव रामा आजा भरे दरबार 
दीन दुखिया के लाज रखदे गावय जग संसार

सरयु नदी मा नहाखोर के अगर कपूर जलावँव
पान फूल अऊ नरिहर धरके दंडा पाँव पखारँव
मोर मुड़ी मा हाथ रखदे करदे मोर उदधार
दीन दुखिया के लाज रखदे गावय जग संसार

केंवट भैय्या के पुरखा तरगे गोड़ धोके सुख पाय
राम लखन माता जानकी गंगा ले पार लगाय
लहरा लेवय गंगा मैय्या बीच भँवर मझधार
दीन दुखिया के लाज रखदे गावय जग संसार

पक्षी राज जटायु ल तारे शबरी के बोईर खावय
भवसागर ले पार करेबर नवधा भगति सुनावय
अमृत असन लागे रामा तोर नवधा के धार
दीन दुखिया के लाज रखदे गावय जग संसार

बैरी बर तै बनथस बैरी दुखिया के मीत मितान
अन्यायी बाली ल रामा खींच के मारे बान
तोर दया ले आज गावत हँव मैं रमायन सार
दीन दुखिया के लाज रखदे गावय जग संसार

©opy®ight
तोषण चुरेन्द्र दिनकर
धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद छत्तीसगढ़

गुरुवार, 10 दिसंबर 2020

सावन के महीना मा

सादर समीक्षार्थ

सावन के महीना मा...

सावन के महीना मा, 
मन मोर मँजूर कस नाचय।
सनन-सनन चलय पुरवइय्या, 
गीत मया के गावय। 

होत बिहनिया सुरूज नरायण,
नवा अंजोर बगराथे।
दंडाशरन पाँव पँइय्या परके, 
मिलजुल सब परघाथे।
संगी जँहुरिया सुआ करमा, 
पंथी ददरिया सुनावय।.....

डोंगरी पहाड़ी चिरई चिरगुन,
देख मोला मुसकाथे।
कारी बदरा गरजे घन-घन, 
भुँइया के तन हरियाथे।
बरसय पानी झूमे रूख राई, 
नदिया नरवा इतरावय।....

पिंयर-पिंयर परसा फूलवा, 
संग फगुआ के राग हे।
सात सुर के धुनी छेड़य, 
सतरंगी संगी फाग हे। 
रहिबो एक डोरी बंधाके, 
तोषण अतरी गोहरावय।...

©opy®ight
तोषण कुमार चुरेन्द्र 'दिनकर'
सरपंच/साहित्यकार
धनगाँव, डौंडी लोहारा
बालोद छत्तीसगढ़

सोमवार, 16 नवंबर 2020

हाय रे कोरोना काल(तोषण चुरेन्द्र दिनकर)

हाय रे कोरोना काल तै कइसन दिन देखाय
छोटे बड़े ला जाने नही अलकर नाच नचाय
हाय रे कोरोना काल......

आय कहाँ ले तैहर बइरी,दुनिया होगे हलाकान
सुतत जागत तोरेच चर्चा,करथे लइका सियान
तीर के मनखे दूरिहा भागे,मुँह मा मास्क लगाय
हाय रे कोरोना काल....

सर्दी खाँसी ह बनगे कोरोना,मन मा डर हे समागे
अस्पताल मा कोई नंइ जावै,कइसन दिन हा आगे
फिरत हावय मनखे देखव,सर्दी खाँसी लुकाय
हाय रे कोरोना काल...

विनती हावय सरकार ले,जल्दी दवा बनादे
हटे कोरोना सगरो जगत ले,नवा अंजोर बगरादे
हाँसय खेलय धरती डोली,रूख रई खुशी मनाय
हाय रे कोरोना काल....


रचनाकार
तोषण चुरेन्द्र दिनकर
धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद छत्तीसगढ़

गुरुवार, 2 जुलाई 2020

गुरु

गुरू पूर्णिमा विशेष गीत

गुरूदेव तुम्हारे चरणों में,
बसे हैं चारो धाम।
नमन मेरा स्वीकार करो,
कोटि तुम्हें प्रणाम।


मात पिता है प्रथम गुरूजी,
चलना हमें सिखाया।
सर्दी गर्मी और बरखा में,
छत्र की छाँव बिठाया।
कभी न पूरा ऋण ये होगा,
सुबह से लेकर शाम।
नमन मेरा स्वीकार करो,
कोटि तुम्हें प्रणाम।


शिक्षा दीक्षा दान करे हैं,
सत्य मार्ग दिखलाया।
पाप पुण्य भेद सारे,
गुरूवर ने है बताया।
धर्म कर्म और नीति नियम,
भरे हैं आठो याम।
नमन मेरा स्वीकार करो,
कोटि तुम्हें प्रणाम।


हमको देने नित रोशनी, 
बनकर दीपक जल रहे
कितनी भी आए बाधाएँ, 
ढाल सम है डटे रहे
चरणों में है तेरे झुके, 
राम कृष्ण सुखधाम
नमन मेरा स्वीकार करो,
कोटि तुम्हें प्रणाम।


आशीष सदा बनायें रखना, 
दिनकर की अरदास।
बनकर मेरी प्रेरणा, 
रहना सदा मेरे पास।
कारज कोई भी हो पहले,
जपूँ मैं तेरा नाम।
नमन मेरा स्वीकार करो,
कोटि तुम्हें प्रणाम।

रचनाकार:-
तोषण चुरेन्द्र दिनकर
डौंडी लोहारा बालोद
छत्तीसगढ़

रविवार, 15 दिसंबर 2019

सबले बढि़हा नगरिहा भैय्या

सबले बढ़िया नगरिहा भैया 
धरती मैय्या के सेवा बजाय 
बासी चटनी पेज ला खाके
सुग्घर अपन जिंनगी पहाय 
सबले बढ़िया नगरिहा भैय्या....

सुख-दुख के बेरा मा आके 
सब झन सन मिलके गोठियाय
 रहिथे वो रयपुरा गांव में 
सरस्वती के गुण ला गाय
सबले बढ़िया नगरिहा भैय्या...

दीया सही अंजोरिया करथे 
सुमता के रद्दा हे बताय
मधुर सहित के अगवा बनके
फुल बगिया कस हे सिर जाय
सबले बढ़िया नगरिहा भैया...

छत्तीसगढ़ के नगरिहा बेटा 
करनी कहिनी कही न जाय 
तोर दया ले तोर मया ले 
अड़हा लइका गंगा नहाय
सबले बढ़िया नगरिहा भैय्या...

जन्मदिवस हे आज तोरे
जन जन मिलके खुशी मनाय
दे संदेश भाईचारा के 
गोंदा फुल कस ममहाय 
सबले बढ़िया नगरिहा भैय्या...

जिंदगी तोर सलामत राहय 
तोषन धनगंइहा गोहराय 
बनके सूरुज तै नील गगन में 
रहिबे नवा अंजोर बगराय
सबले बढ़िया नगरिहा भैय्या....

तोषन कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
डौंडीलोहारा बालोद छत्तीसगढ़

शुक्रवार, 8 नवंबर 2019

तोर पैरी के रूनझून

गोरी रे तोर पइरी ह रूनझून बाजे ना
मया म रानी दिल झूमझूम नाचे ना
मोर दिल म समाये,मोला दिवाना बनाये
सोये निंदिया म तैह बही सपना देखाये
गोरी तोर पइरी ह...

चढ़ती जवानी तोर उमर सोला साल हे
होंठ गुलाबी तोर गोरी गोरी गाल हे
चंदा बरन हे चेहरा लागत कमाल हे
हांसी ले फूल झरथे हिरनी कस चाल हे
तोर आंखी के काजर घुमरे करिया बादर
गिरथे पानी बूंद बूंद ले बन जाथे रे सागर
गोरी तोर पइरी ह...

आजा मोर बंइहा म तोला मैंह प्यार देहूं
अपन बनाके तोला जिनगी संवार देहूं
पीरीत के छंइहा रही जइसे घर दुवार देहूं
बनके रहिबो राजा रानी अइसे संसार देहूं
गाबो मया के गीत ल बांधे मया पीरीत ल
सुख दुख ल सहिबो संगे दुनिया के रीत ल
गोरी तोर पइरी ह...

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा
9617589667

गुरुवार, 17 अक्टूबर 2019

सरस्वती बंदना


मोर मुड़ी मा आके रखदे हाथ ओ मोर शारद मैय्या
मोर शारद मैय्या.......


ज्ञान के जोति दाई सबला तै देखाये
सुर के देवैय्या दाई बीना ला बजाये
मोला बीना के तै दे दे झनकार ओ 
मोर शारद मैय्या......


भरे सभा मा मैय्या तोला गोहरावंव
चरन मा तोर देवी माथ ला नवावंव
आजा सभा मा तै रखदे लाज ओ
मोर शारद मैय्या.....


तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा


सरस्वती वंदना

हे मैय्या ज्ञान के देवैय्या मैय्या शारदे
ज्ञान दे ज्ञान दे........

सुर के देवैय्या सरसतिया.....
हे मैय्या......



ज्ञान देवैय्या सरसती मैय्या तोर चरण मा आयेंव
तोर दया ले तोर मया ले ज्ञान ला जग बगरायेंव
ज्ञान दे ज्ञान दे........



तोरेच दिये बानी पायेंव तोरेच दिये भाखा
तोरेच दिये राग ला गायेंव तोरेच दिये गाथा
ज्ञान दे ज्ञान दे..........



तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा


शुक्रवार, 30 अगस्त 2019

सरगम



सरगम तेरी पायल की मेरे मन की बोल
गीत मिलन की छेड़ दे हिया के पट खोल


छम छम वन में नाचती देखते ही बादल मोर
सावन की पुरवाई बाँधे तुझ संग प्रीत की डोर
आजा बसंत बहार में ले कोयल की बोल....


मेरे मन की गजगामिनी मैं हूँ तेरा चितचोर
मिल जाए एक झलक देखूँ तुझे जो भोर
मेरे हिय के प्रेम को प्रेम तुला से अब तोल....


तोषण कुमार चुरेन्द्र
'धनगंइहा'

बुधवार, 28 अगस्त 2019

भारत के प्यारे जागव



भारत के प्यारे जागव
देश के रखवारे जागव
बइरी दुवारे आवय
तुम सिर उतारव जागव


झोंकय अपन जिनगानी
शिवाजी मनु मर्दानी
आजाद भगत के टोली
सुनले तैं अमर कहानी
भुजा फड़कालव जागव
आगी भड़कालव जागव...
बइरी दुवारे आवय...

सुते के नंइहे पारी
करव लड़े के तइयारी
थर्र खावय जम्मो बइरी
जानय ये दुनिया सारी
रण के बाकुरों जागव
जग के दुलारों जागव....
बइरी दुवारे आवय.....


ऊबाल भरव रग-रग में
बाधा कतको हे पथ मे
फौलाद करेजा रखलव
दंभ भरव पग-पग में
दाई के ललना जागव
भरके हुंकार जागव....
बइरी दुवारे आवय......


जागव मोर देश के हीरा
हर लेवव सब दुख पीरा
भारत माता के दुलरवा
बहिनी के भइय्या वीरा
रक्षा के सूंत बधावव
मिलके सब फरज निभावव....
बइरी दुवारे आवय....


भारत के  आन बचावव
बन जा तैं बघवा मानव
दुसमन के छक्का छूटय
भाग जावय अबके दानव
तिरंगा थामव जावव
जयहिंद सब मिलजुल गावव...
बइरी दुवारे आवय....


तोषन धनगंइहा
डौंडी लोहारा बालोद

सोमवार, 12 अगस्त 2019

आ जाओ हे प्यारे


आ जाओ हे प्यारे कान्हा धरती के भार हटाने को
तरस रही है कान आजा गीता ज्ञान सुनाने को


अनगिन अत्याचार करने बढ़ रहे अत्याचारी
स्वार्थी बनकर तेरे जग में करते भ्रष्टाचारी
भरदो सबके अंतरात्मा समरसता के गाने को
तरस रही है कान आजा गीता ज्ञान सुनाने को


द्रोपदी की लाज आज भी जरा नही है बाकी
दुर्योधन दुशासन जैसे दिखते कितनों झाँकी
मुक्त कर से प्रतिपल अपने शील पर चीर लुटाने को
तरस रही है कान आजा गीता ज्ञान सुनाने को


ये मेरा ये तेरा कहके राग हैं सभी आलापे
एक दूसरे को फाँसने रोग बड़े है ब्यापे
रहे सदा एक छत के नीचे गोवर्धन उठाने को
तरस रही है कान आजा गीता ज्ञान सुनाने


तोषन धनगंइहा

राम नाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...