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शुक्रवार, 10 जनवरी 2020

विचार

*किसी के चरित्र पर कीचड़ उछालने से पहले अपने निगेहबान की निगरानी रखें कि स्वयं कहाँ है। पक्षी हो या विपक्षी मनुष्य के अंतर्निहित गुण और अवगुण होना स्वभाविक है। लेकिन गुण की अधिकता के कारण अवगुण का निशान छिप जाता है शायद यह ज्ञान कीचड़ उछालने वाले के समझ से परे लगता है। कर भी क्या सकते है।कहा गया है कि*
_*" फुलै फरै ना बेत,जलधि जो बरसहि सुधा।*_
_*मुरख जान ना चेत,मिले जो गुरु बिरंचि सम।।"*_

रविवार, 11 जून 2017

तो क्या हुआ....???

*तो क्या हुआ....???*

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*वसन तन का मलीन हो.*
*तो क्या हुआ....???*
*स्वच्छ हमारा मन हो.*
❓❓❓❓❓❓❓
*काग सम कृष्ण रुप हो.*
*तो क्या हुआ....???*
*मधुर हमारी वाणी हो.*
❓❓❓❓❓❓❓
*बुरा भला कोई कहता हो.*
*तो क्या हुआ....???*
*कर वही दिल जो करता हो.*
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*तोषण कुमार चुरेन्द्र*

रविवार, 26 मार्च 2017

अदाकार

अ----अपनी कमाई का
दा----दान करने वाला
ही सच में अदाकार है

तोषण कुमार चुरेन्द्र

चोरी

चोरी करके पेट भरना आखिर कितने दिनों तक ऐसा करेगा करने वाला
एक दिन तो पकड में आएगा ही
जो चोर होता है उसका जीवन कभी सुखमय नही हो सकता उसका समूल विनाश हो जाता है रावण की तरह....
जीवन बिताएं विभीषण की तरह जिन पर भगवान राम की कृपा हमेशा बनी रही....
जय श्री राम...
तोषण कुमार चुरेन्द्र

राम नाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...