हंसगति छंद अनजान
न जान है न पहचान
फिर भी एक प्रथम प्रयास
सादर
नमन मंच
मात्रा भार ११/९
बेटी.......
बेटी अपनी जान,जरा सुनले माँ।
कब से हूँ मैं द्वार,करेगी कब हाँ।
निर्मम यह संसार,नमो हे भोली।
नैना तरसे नेह, भरे कब झोली।
कोरोना .....
दे दो माँ वरदान,करूँ मैं वंदन।
कोरोना हो दूर,करो अब भंजन।
हरलो माता भार,जरा सुन अर्जी।
खुश हो घर संसार,चले जो मर्जी।
तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा