शनिवार, 29 जून 2019

दगा म डारे करिया रे

😢दगा म डारे करिया रे💐
-------------------------------
दगा म डारे करिया रे,
काबर हमला, दगा म डारे।
तोर अगोरा म रे करिया,
आँखी सबके तरसत हे।
का होगे रे ,ये करिया ल,
काबर वो नई बरसत हे।।

रुख राई अउ चिरई -चिरगुन,
तोला पूछे रे करिया,
नदिया -नरवा ,डबरा- डबरी,
तोला पूछे रे तरिया।।
दगा म डारे--

तोला देखत दिन पहागे,
बीतगे महीना आषाढ़ के।
अब तक दरशन होवे नई हे,
नरवा -नदियाँ म बाढ़ के।।
दगा म डारे----

सुन रे करिया,जब ते रोबे,
तभे तो दुनियाँ ह हाँसही।
तोर आँसू जब धरती म गिरही,
तभे तो दुनियाँ  ह बाँचहि।।
दगा म डारे -----

तोर भरोसा म दुनियाँ हे,
हावय तोर बर बिस्वास रे।
अब तो बरस जा ,रे मोर करिया,
सबके बुझा दे  प्यास रे।।
दगा म डारे ---

सुने हावंव तोर अछरा म,
कतको भरे हावय पानी।
तभे तो सब दुनियाँ कहिथे,
करिया तोला औघड़ दानी।।
दगा म डारे---

गरज चमक के ,अब तो  करिया,
बरसा जा तेहा पानी।
नाचे, झूमें ये धरती ह,
खुश होवे सब ,जिनगानी।।
दगा म डारे-----
✒रचना
श्रवण कुमार साहू"प्रखर"
राजिम, गरियाबंद,(छ .ग.)

दगा म डारे करिया रे

😢दगा म डारे करिया रे💐
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दगा म डारे करिया रे,
काबर हमला, दगा म डारे।
तोर अगोरा म रे करिया,
आँखी सबके तरसत हे।
का होगे रे ,ये करिया ल,
काबर वो नई बरसत हे।।

रुख राई अउ चिरई -चिरगुन,
तोला पूछे रे करिया,
नदिया -नरवा ,डबरा- डबरी,
तोला पूछे रे तरिया।।
दगा म डारे--

तोला देखत दिन पहागे,
बीतगे महीना आषाढ़ के।
अब तक दरशन होवे नई हे,
नरवा -नदियाँ म बाढ़ के।।
दगा म डारे----

सुन रे करिया,जब ते रोबे,
तभे तो दुनियाँ ह हाँसही।
तोर आँसू जब धरती म गिरही,
तभे तो दुनियाँ  ह बाँचहि।।
दगा म डारे -----

तोर भरोसा म दुनियाँ हे,
हावय तोर बर बिस्वास रे।
अब तो बरस जा ,रे मोर करिया,
सबके बुझा दे  प्यास रे।।
दगा म डारे ---

सुने हावंव तोर अछरा म,
कतको भरे हावय पानी।
तभे तो सब दुनियाँ कहिथे,
करिया तोला औघड़ दानी।।
दगा म डारे---

गरज चमक के ,अब तो  करिया,
बरसा जा तेहा पानी।
नाचे, झूमें ये धरती ह,
खुश होवे सब ,जिनगानी।।
दगा म डारे-----
✒रचना
श्रवण कुमार साहू"प्रखर"
राजिम, गरियाबंद,(छ .ग.)

आवत नंइहे जोड़ी

आवत नंइहे जोड़ी मोर होगे बतर के बेरा
कोन जनी अउ कोन मुड़ा डारे हावय डेरा

खेत किसानी के चेत नंइहे कइसे तैं बिलमाये
नांगर बइला के हाल.नंइहे कोन ऐला समझाये
दिन बादर बरसात के धराय नंइहे पेरा
कोन जनी अउ कोन मुड़ा डारे हावय डेरा

फूटे परे हे छानी परवा घर हवै बिन हाल के
होगे जइसे मोर जिंनगी बिन पाती जस डाल के
पानी बिन मछरी तड़पे खोजै अपन डेरा
कोन जनी अउ कोन मुड़ा डारे हावय डेरा

पानी बिन जस धरती तरसै देखत बादर कोती
आजा 'तोषण' घर म तैहा गांव म हीरा मोती
कबले तैहा मारत रहिबे एती तेती के फेरा
कोन जनी अउ कोन मुड़ा डारे हावय डेरा

✒✒✒✒✒
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगांव डौंडी लोहारा

शुक्रवार, 28 जून 2019

बदरा रानी

बदरा  रानी  बदरा रानी
लेते आना भर भर पानी
बड़ी  राह  निहारत  बैठे
झूम के नाचे मयुरा रानी

ऋतु सावन  तुझे प्यारी
लगे धरती न्यारी न्यारी
सौंधी खुशबू मिट्टी की
है महके  क्यारी क्यारी

अब ना तुम लगाओ देर
राह  निहारत  आंखें टेर
बरस  अब  कारे  बदरा
समय बीते हो गयी ढेर

छाएगी  मगन हरियाली
बात बोले कोयल काली
हो जगत सारा खुशहाल
जैसे सारी दुनिया पाली

तोषण कुमार चुरेन्द्र
9617589667
29_06_19

गुरुवार, 27 जून 2019

पीपर पाना म लिखंव


आज मोर जनमदिन 

पीपर पाना म लिखंव दिल के बात ना
कइसे कटे दिन मोरे कइसे कटे रात ना

निचट तोर सुरता आथे सांझे बिहान हो
हो जाथे करेजा चानी सिरतो ईमान हो
नैना निहोरत बइठे होही मुलाकात ना
कइसे कटे दिन मोरे कइसे कटे रात ना

चंदा जइसे तोर चेहरा चमके आगास म
चैन नंइहे दिल म गोरी रहिथे उदास म
निंदिया नंइ आवै बइरी होगे रात ना
कइसे कटे दिन मोरे कइसे कटे रात ना

मोहनी खवाके तैहा मनवा ल रिझा डरे
पीरीत के पानी तोरे देहिंया ल भिंझा डरे
सावन बिन अब होही कइसे बरसात ना
कइसे कटे दिन मोरे कइसे कटे रात ना

तोषण कुमार चुरेन्द्र
9617589667
28_06_2019

पीपर पाना म लिखंव

आज मोर जनमदिन म एचठन नानकून रचना सादर समीक्षार्थ

पीपर पाना म लिखंव दिल के बात ना
कइसे कटे दिन मोरे कइसे कटे रात ना

निचट तोर सुरता आथे सांझे बिहान हो
हो जाथे करेजा चानी सिरतो ईमान हो
नैना निहोरत बइठे होही मुलाकात ना
कइसे कटे दिन मोरे कइसे कटे रात ना

चंदा जइसे तोर चेहरा चमके आगास म
चैन नंइहे दिल म गोरी रहिथे उदास म
निंदिया नंइ आवै बइरी होगे रात ना
कइसे कटे दिन मोरे कइसे कटे रात ना

मोहनी खवाके तैहा मनवा ल रिझा डरे
पीरीत के पानी तोरे देहिंया ल भिंझा डरे
सावन बिन अब होही कइसे बरसात ना
कइसे कटे दिन मोरे कइसे कटे रात ना

तोषण कुमार चुरेन्द्र
9617589667
28_06_2019

रविवार, 23 जून 2019

गोरी तोर सुरता

गोरी ओ तोर सुरता मा सावन कस नैना बरसे ना
दुरिहा मा हावस चंदा बरोबर हिरदे तोर बर तरसे ना

मया के रोग लगाके तै मोला ओ बिलमाये
आनी बानी के सपना देखाके कांहा तै भुलाये
भादो महिना के बदरा कस बिन पानी के गरजे ना
दुरिहा,,,,,,,,

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगांव डौंडी लोहारा

गोरी तोर सुरता

गोरी ओ तोर सुरता मा सावन कस नैना बरसे ना
दुरिहा मा हावस चंदा बरोबर हिरदे तोर बर तरसे ना

मया के रोग लगाके तै मोला ओ बिलमाये
आनी बानी के सपना देखाके कांहा तै भुलाये
भादो महिना के बदरा कस बिन पानी के गरजे ना
दुरिहा,,,,,,,,

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगांव डौंडी लोहारा

राम नाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...