गुरुवार, 29 जून 2017

सोच

किसी को जरा हमारी अच्छाई देखी नहीं गई

लग गये यारों हमारी बुराई ढूँढने को जहाँ में

*सोच बड़ा कर लेने से मात्र से काम बड़ा नहीं होता....*

*काम बड़ा करने के लिए सोच बड़ा करना पड़ता है....*

*तोषण कुमार चुरेन्द्र*

दुनिया

*होता ना जो चार कदम आगे दुनिया से "तोषण"*
*दुनिया जो है मुझे आठ कदम पीछे धकेल देती**

*जाग उठा शैतान अब गहरी रात के अँधेरों में*
*बचना है तो ढुँढ लो मेरे दुश्मनों का दर कहीं**

तोषण कुमार चुरेन्द्र

जन्मदिवस

*जन्मदिवस पर आज जो,मिला मुझे आशीष।*
*दुआ सभी का साथ हो, जीलूँ लाख बरीस।*

बुधवार, 28 जून 2017

झुमर झुमर के

झुमर झुमर के बरसय पानी,मन मोर अड़बड़ नाचत हे।
घुमर घुमर  के आवय बदरा,संग पवन झकोरा मारत हे।

अधिया गेहे अषाढ़ महिना,पानी के अभी फुहार पड़े।
करिस अगोरा सब किसान मन,करे किसानी बर जोरा करे।
नाँगर बइला कमरा खुमरी,लउठी तुतारी सँवारत हे।
घुमर घुमर के.........१

होवत बिहनिया भुँइया के बेटा,दाई के सेवा बजावय।
हरिहर हरिहर धनहा डोली, लहर लहर लहरावय।
सावन महिना पाख अमावस,तिहार हरेली मनावत हे।
घुमर घुमर के..........२

भोले बाबा ल जाके मनावय,सोला सावन सम्मार के।
धथुरा पाना फूल फर संग,बेल पतिया ल वार के।
काँवरिया मन काँवर काँवर,गंगा जल ल चढ़ावत हे।
घुमर घुमर के..........३

तोषण कुमार चुरेन्द्र

बेटा किसान

बेटा किसान।
भाग के जगइय्या।
हावै महान।

करे तैयारी।
निहारत बदरा।
खेती हे पारी।

कुकरा बासे।
उठना गा भइय्या।
बेरा उगासे।

होत बिहान।
हे बइला नाँगर।
चले किसान।

चटनी बासी।
होवत मंझनिया।
मिटे थकासी।

कथे सियान।
तन मन बलवान।
जय किसान।

तोषण कुमार चुरेन्द्र

रविवार, 25 जून 2017

बरसात

झिमिर-झिमिर पानी गिरय,मोर गाँव के खार।
तरिया-नरवा बड़ भरय,बुड़य खेत अउ पार।।

शनिवार, 24 जून 2017

प्राकृतिक आपदाएं

*हाइकु मञ्जुषा ४९*
*विषय :-प्राकृतिक आपदाएं*

*१.आंधी*

आंधी प्रकृति।
अरियों का दमन।
मिटे विकृति।

*२.रेतीली आंधी*

क्रोधित वात।
लाई रेतीली आंधी।
बन सवालात।

*३.तूफान*

आया तूफान।
सहमें थलचर।
मन हैरान।

*४.बाढ़*

बाढ़ ग्रसित।
था उत्तराखंड।
मन द्रवित।

*५.भूकंप*

आता भूकंप
धरणी विचलित।
लो हड़कंप।

*६.अकाल*

वारि अकाल।
घनघोर बारिश।
हे!महाकाल।

*७.सुनामी*

उठी लहर।
बनकर सुनामी।
ढाया कहर।

*८.भूस्खलन*

सदियों बाद।
केदार भूस्खलन।
फिर आबाद।

*९.ज्वालामुखी*

घोर वलय।
भड़के ज्वालामुखी।
महाप्रलय।

*१०.प्रलय*

न हो प्रलय।
रक्ष पर्यावरण।
करें प्रणय।

*तोषण कुमार चुरेन्द्र*

साधना

करलव जुरमिल साधना,धरव छन्द के ध्यान।
बनके साधक छन्द के, बगरावव  सब ग्यान।।

छंद साधना साधलव,बनके साधक आज।

गढ़लव सुग्घर छंद ला,आखर खोलय राज।

शुक्रवार, 23 जून 2017

जनउला

जनउला

होवत बिहना झुमरथे,अँगना घर अउ खोर।
चिक्कन चाँदन देखले,हाथ परत गा जोर।

बाहरी(झाड़ू )

कलाकार

कलाकार ना देखना,देखो उनके काम।
रहते परदे में सदा,करे काम निष्काम ।।

परवान

ना वेद पढूँ कुरान पढूँ।
ना मैं कोई अजान गढूँ।
इंसान हूँ  मैं इंसान बनूँ,
अंबर तक परवान चढूँ।

माँस

*माँस माँस सब एक है,क्या मछली क्या गाय।*
*बनकर दानव जो इन्हें,बड़े चाव से खाय।।*
😢😢💐💐💐

राम के नाम

राम के नाम हावय सार,करथे गा सबके उद्धार
सुमरन करले तैंहर संगी,सियाराम लगाही पार

लख चौरासी भटक भटक के ,मानुस तन ला पाए
चारेच दिन के चटक चँदैनी ,माया म गजब सनाए
भजले तैहर शबरी जइसन,तरजबे तँय संसार
राम के नाम......

सावन आगे

तोर मया मोर अंतस भीतरी बदरा बरोबर छागे
आजा अब तो मोर मयारु देखना सावन आगे

पपीहा बोलय कुहके कोयली गावै गीत मल्हार
करत  निहोरा बइठ सारी रतिहा चंदा चँदैनी जागे

होवत बिहनिया तोर गोरी आथे अड़बड़ सुरता
दिख जातिस कहूँ तोर चेहरा तन के सुस्ती भागे

काबर हावस नराज मोर ले बोली मया के बोल
मरम जिया के खोल तैंहर का दुख जेमा हमागे

तारीफ मेरी

तारीफ़ मेरी।
      परवरदीगार।
           जिंदगी तेरी।

है अरदास।
     खुशियाँ ही खुशियाँ ।
           हो मधुमास।

प्रकृति प्रेम ।
     आह्लादित चमन।
           कुशलक्षेम।

भीगे यौवन।
      सावन की फुहार।
           रश्मी सौतन।

नाम तोषण।
      अध्यापन कारज।
             करे पोषण।

बेटा किसान

बेटा किसान।
भाग के जगइय्या।
हावै महान।

करे तैयारी।
निहारत बदरा।
खेती हे पारी।

कुकरा बासे।
उठना गा भइय्या।
बेरा उगासे।

होत बिहान।
हे बइला नाँगर।
चले किसान।

चटनी बासी।
होवत मंझनिया।
मिटे थकासी।

कथे सियान।
तन मन बलवान।
जय किसान।

तोषण कुमार चुरेन्द्र

सीखना

पढ़ा लिखा ज्यादा नहीं,ना कुछ मुझमें ग्यान।
कोशिश करता सीखना,गावे जो वेद पुरान।

गुरुवार, 22 जून 2017

साधना

खवइ  पियइ  रखलव बने,झन नेवतिहव रोग।
जिनगी बड़ अनमोल हे,करलव सब झन योग।।

बनके साधक साधलव,रचलव गा सब छन्द ।
सरस्वती के साधना,मिलय जुलय हर बन्द।।

योग

योग

रहें निरोग।
संयमित जीवन।
करलें योग।

योग की माया।
निखरित यौवन।
इच्छित काया।

एकाग्र मन।
हितकारिणी योग।
करें चिंतन।

अरुणोदय।
सूर्य नमस्काराय।
हो भाग्योदय।

तेजस कांति।
योग मय जीवन।
मिटती भ्रांति।

तोषण कुमार चुरेन्द्र

मंगलवार, 20 जून 2017

बेत

बेत रूख  बँसरी  बने, मधुर  सुनावय  तान।
छोड़ अपन पहिचान ला,जग मा पावय मान।।


बँसरी के धुन नाच तँय,राधा बनके आज।

बन बनवारी तोर बर,साजँव सोला साज।।

सोमवार, 19 जून 2017

पथरा

आके तँय संसार मा,सबला अपने जान।
पथरा बनके झन रहव,गुरतुर रखव जुबान।।

पथरा हा नारी बने ,लगे राम के पाँव।
कहिथे गुहा निषाद हा,गंगा नइ नहकाँव।।

खड़री  माटी  के  बने, हाँड़ा  पथरा  जान।
पाँच तत्व के तन मनखे,झनकर गरब गुमान।।

रविवार, 18 जून 2017

श्मसाँ मिल गया

किसी को जमीं किसी को आसमाँ मिल गया,
हम ही थे इक हैवाँ जो बस श्मसाँ मिल गया।
तोषण कुमार चुरेन्द्र

आरजू

थी  इक जो  आऱजू मेरी अधूरी रह गयी.
आँधियों में  बेवफाई  की  पूरी  बह गयी.
चाहत थी उसे हमनवाँ बनाने की *तोषण,*
वफा से बना इश़्क-ए-मकाँ जैसे ढह गयी

इक तेरे सिवा

सारी कायनात ढुंढकर थक गये "तोषण "
कमबख़्त मिला नही कोई इक तेरे सिवा...

चाह बुलंद

एक प्रयास

*हाइकु*

चाह बुलंद।
सीखना निरंतर।
मिलेगा लक्ष्य।

बढ़ता चल।
मंजिल देखे राह।
सुन्दर कल।

आफताब हूँ।
आलोकित संसार।
लाजवाब हूँ।

शीतल सोम।
प्रकाशित अवनि।
देखता व्योम।

इक मुस्कान।
लगे मनभावन।
दिल कुर्बान।

तोषण कुमार चुरेन्द्र

मेघ बिजली वर्षा

हाइकु मञ्जुषा
अंक -४८
विषय:-
* मेघ/बादल
* बिजली/दामिनी
* वर्षा/बारिश
********"******"***
१.
पुलके मन।
बादल छाये नभ।
धरा प्रसन्न।
२.
गिरी दामिनी।
गहन तिमिरांध।
नष्ट कारिणी।
३.
झुमती वर्षा।
अक्षय तृतीय की।
चातक हर्षा।
४.
मेघ बरसे।
खिलता उपवन।
मन हरषे।
५.
कौंधी बिजली।
हृदय आकुलित।
मौन तितली।
६.
पवन संग।
बारिश सावन की।
नई उमंग।
७.
याद पिया की ।
बारिश का मौसम।
भेद जिया की।
८.
बादल आ जा।
रूत वर्षा की जान।
नभ में छा जा।
९.
झूमता मेघ।
मचलती दामिनी।
बारिश देख।
१०.
तोषण मित्र।
मेघ बिजली वर्षा।
देख सचित्र।

*तोषण कुमार चुरेन्द्र*

पिता

*पिता*
१.
पिता जीवन।
सृष्टि की अभिव्यक्ति।
मिलती शक्ति।
२.
पिता सहारा।
अथाह समंदर।
मीठा या खारा।
३.
पिता प्रणय।
घर अनुशासन।
कटे प्रलय।
४.
पिता बागबाँ।
मकहे उपवन।
नया कारवाँ।
५.
पिता है राग।
झुमता बचपन।
माँ का सुहाग।
६.
पिता दर्पण।
कोष स्वपनों का।
करें अर्पण।
७.
पिता संसार।
स्वप्न संजाता।
भरे भंडार।
८.
पिता महान।
पहचान हमारी।
है अभिमान।
९.
पिता दीपक।
जीवन प्रकाशित।
दिशा द्योतक।
१०.
पिता से हम।
हमसे परिवार।
न हो भ्रम।

तोषण कुमार चुरेन्द्र

पाकिस्तान

पाकिस्तान है देश वो,हरपल जो नापाक।
टकराएगा  क्या भला,हो  जाएगा खाक।।
हो  जाएगा  खाक, मानले कहना सच्ची ।
होगा ना  इतिहास,बात  होगी ना कच्ची।।
कहता  तोषण  आज,हाथ मेरे निदान है।
करना ना तू भूल, नाम का पाकिस्तान है।।
तोषण कुमार चुरेन्द्र

शनिवार, 17 जून 2017

लबरा

*मोर मया समझे नहीं, देथस मोला दोस।*
*निच्चट लबरा तँय हवच,मोला बड़ अपसोस।।*
*तोषण कुमार चुरेन्द्र*

पथरा


१.
पथरा पथरा जोड़ के,बढ़िहा घर सिरजाय।
बिना प्रेम सद्भाव के,घर शमसान कहाय।।
२.
आरुग  पथरा  तँय  रहय,सहय हथौड़ी मार।
बनगे जब भगवान तँय,बिनय करय संसार।।

शुक्रवार, 16 जून 2017

पकवान

*अरसा रोटी पाग बर,रतिहा चाँउर धोय।*
*मीठा दे गुड़ पाग के,भजिया जइसे होय।।*

*दाई चीला राँध दे,अड़बड़ मन ललचाय।*
*मिरचा चटनी संग मा, मोला गजब सुहाय।।*

मतला

*दुआएँ आपकी आबाद करती हमें*
*भुला ना पायेंगे जब तक जिन्दगी हैंं....*
*तोषण कुमार चुरेन्द्र*

गुरुवार, 15 जून 2017

राह

*राह   नई   हो   चाह  की,  नई   नई   हो  सोच।*

*सम्हल-सम्हल कर हम चलें,आये कहीं न मोच।।*

*तोषण कुमार चुरेन्द्र*

अरसा

*अरसा रोटी पाग बर,रतिहा चउँर भिगोय।*
*मीठा दे गुड़ पाग के,भजिया जइसे होय।।*

पकवान


*अरसा खुरमी राँधके, सब बर दे तँय जोर।*
*ऊँच नीच ला पाट के,भेदभाव दे टोर।।*

*आथे नानी मोर जब,भजिया रोटी लाय।*
*छोटकु-बडकू देखले,जुरमिल सबहा खाय।।*

*छट्ठी मरनी बर बिहा,चुरथे जी पकवान।*
*दार भात के संग में,खावय सबो सियान।।*

लहू के दान

*मनखे-मनखे के बात हे, होत न एक समान।*
*मनखे सच मा हे उही, करे लहू के दान।।*

*तोषण कुमार चुरेन्द्र*

जाहूँ पढ़ेबर इसकूल

*जाहूँ पढ़ेबर इसकूल*
🎒🎒🎒🎒🎒🎒🎒
मोरो  झोला  सँवार दे दाई,
काली जाहूँ पढ़ेबर इसकूल.
गरमी छुट्टी मा मजा उड़ाएन,
खाएन बड़ कुल्फी कूल कूल..
📕✏📕✏📕✏📕
काफी पेन्सिल ददा लिही मोर,
लेवाहूँ नवा हीरो सँइकिल.
मारत पइडिल अब्बड़ कुदाहूँ,
संगवारी मन संग मिल मिल..
🚴‍♀🚴‍♀🚴‍♀🚴‍♀🚴‍♀🚴‍♀🚴‍♀
मंझनिया मिलथे तात दार भात,
अउ चुरथे आनी बानी के साग.
ओकला ओकला खाथन हम मन,
बड़ सँहराथन सहीं अपनेच भाग.
🥗🍚🍧🍵🍛🥗🥗
कलम खरगोस गमला घड़ी,
पढ़हू बढ़िहा मन ला लगाके.
सबला रिझाहूँ अपन कला ले,
सुग्घर सुग्घर नवा गीत सुनाके..
🎤🎤🎤🎤🎤🎤🎤
मेहनत करहूँ पऊर ले जादा,
अउव्वल दरजा मा आहूँ  मैं.
नाम तुँहर उजागर तब होही,
सबके मया दुलार पाहूँ मैं..
🏆🏆🏆🏆🏆🏆🏆
*तोषण कुमार चुरेन्द्र*
🖌🖌🖌🖌🖌🖌🖌

पकवान


*अरसा खुरमी राँधके, सबला दे तै बाँट।*

*ऊँच नीच ला कोड़ के,भेदभाव दे पाट।।*


*तोषण कुमार चुरेन्द्र*

बुधवार, 14 जून 2017

लहू के दान

*देवत  हँव  संदेश गा,करव  लहू के दान।*
*जिनगी ककरो बाँचही,पाहू बड़ तुम मान।।*
तोषण कुमार चुरेन्द्र

सोमवार, 12 जून 2017

सुख दुख

*सुख अउ दुख रहिथे जिहाँ,जीवन हे वो गाँव।*
*कभू  परत  बड़  धूप हे,कभू परय जी छाँव।।*

*सुख-दुख आवत जात हे,झन कर चिंता थोर।*
*चिंता  ले  बुध नास जी,तन  घुर  जाही तोर।।*

*नइहे सुख जी भाग में,छुटगे सुख के आस।*
*दुख कइसे मोर बितही,मनवा भए उदास।।*

*तोषण कुमार चुरेन्द्र*

अषाढ़

*पानी गिरय अषाढ़ मा,झूमय मगन किसान।*
*नाँगर जोतय खेत मा,बोवय संगी धान।।*

*बिदा करे बर जेठ के,आथे मास अषाढ़।*
*गिरथे पानी पोठ तब,आ जा थे जी बाढ़।।*

*बना अपन तँय छानही,खपरा मा जी ढाँक।*
*आवत हवय अषाढ़ कहि,पारत हाबस हाँक।।*

*तोषण कुमार चुरेन्द्र*

रविवार, 11 जून 2017

तो क्या हुआ....???

*तो क्या हुआ....???*

❓❓❓❓❓❓❓
*वसन तन का मलीन हो.*
*तो क्या हुआ....???*
*स्वच्छ हमारा मन हो.*
❓❓❓❓❓❓❓
*काग सम कृष्ण रुप हो.*
*तो क्या हुआ....???*
*मधुर हमारी वाणी हो.*
❓❓❓❓❓❓❓
*बुरा भला कोई कहता हो.*
*तो क्या हुआ....???*
*कर वही दिल जो करता हो.*
❓❓❓❓❓❓❓
🖋🖋🖋🖋🖋🖋🖋
*तोषण कुमार चुरेन्द्र*

शुक्रवार, 9 जून 2017

नई जिंदगी

*चलो फिर आज से एक नई जिंदगी जीते हैं।*
*गिले शिकवे नसीब के चलो मिलके सीते हैं।*
*मिलेंगे राहों पे फिर से वही कालकूट"तोषण",*
*लेकर उस रब का नाम घोर हलाहल पीते हैं।*

*तोषण कुमार चुरेन्द्र*

गुरुवार, 8 जून 2017

बाँध

आहू संगी हव गाँव मा,देखँव पेज ल राँध।।
बसे तीर धनगाँव के, हवय खरखरा बाँध।

बुंद-बुंद  पानी जतन, रख तै बाँध बनाय।
अलप काल मा काम दे,सबके हवै सहाय।।

पानी बड़ अनमोल हे,एकर कतरो साख।
पानी बिरथा होय झन,बाँध बना के राख।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र

बुधवार, 7 जून 2017

कारीगर

*विसकर्मा   के   रूप हे , कारीगर   हे   नाँव।*
*किसम-किसम गढ़ना गढ़े,बइठे लिमवा छाँव।।*

*कारीगर के हाथ में,जादू बिकट समाय।*
*हँसिया रापा पीट के,बछुला ठोस बनाय।।*

*आगी आँच ल तँय सहे ,करथस सबके काम।*
*सहिथस घाम पियास तँय,नइये तोल अराम।।*

*तोषण कुमार चुरेन्द्र*

सोमवार, 5 जून 2017

पर्यावरण

विश्व पर्यावरण दिवस पर

हाइकु

पर्यावरण
मुश्किल में ओजोन
अम्लीकरण।

पेड़ लगाएं
जीवन संकट में
धरा बचाएं।।

रोती धरती
सुने गुहार कोई
तरु कटती

मुश्किल प्रान
नवतपा की धूम
आतंक जान

तोषण कुमार चुरेन्द्र

पेड़

*पेड़ लगा लो आज सब,एक बात लें मान।*
*होगी हरियाली भली, तृप्ति   मिलेगी  प्रान।।*
*तृप्ति मिलेगी प्रान,समझ रख इंसान सही।*
*पर्यावरण को जान,भरे हैं  भण्डार  यहीं।।*
*हो रक्षित  यह भूमि, एक पल समय निकालो।*
*वट पीपल हो शूमि,आज सब पेड़ लगालो।।*
*तोषण कुमार चुरेन्द्र*

रविवार, 4 जून 2017

पेड़

~~~~पेड़~~~~~~~
🌾🌾🌾🌾🌾🌾
~~~~~~~~~~~~~~
पेड़ लगाओ वर्षा लाओ,
हर तरफ हरियाली हो।
मानो जस त्योहार सदा,
होली और दीवाली हो।।
🌴🌴🌴🌴🌴🌴
~~~~~~~~~~~~~~
पेड़ से है जीवन अपना,
इन्हीं से मिलती है दवा।
देती है हमें अनेकों फल,
फैलाती नित शुद्ध हवा।।
🌿🌿🌿🌿🌿🌿
~~~~~~~~~~~~~~
बचाती हमेशा धूप से,
देती हरपल ठंडी छांव।
हरा भरा खुशहाल सभी,
ऐसा है प्यारा मेरा गांव।।
🌱🌱🌱🌱🌱🌱
~~~~~~~~~~~~~~~
पेड़ों मे भगवान बसे हैं,
करलो सब इनकी पूजा।
हम सबकी है जीवनदाती,
नही कोई है इन सा दूजा।।
🍃🍃🍃🍃🍃🍃
~~~~~~~~~~~~~~~
गाथा गाई न जाए इनकी,
पेड हमें देता है वरदान।
पेड़ हमारे हितैषी सदा,
जानकर है क्यूं अनजान।।
🍁🍁🍁🍁🍁🍁
~~~~~~~~~~~~~~~
सुंदर गांव और सुंदर वन,
पेड़ से ही पर्यावरण सुंदर।
पर्यावरण बचाना  सबको,
धरलो बात मन के अंदर।।
🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾
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आचार्य तोषण
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मेरे हमसफर

साहित्यकारों को समर्पित

*माटी बालक औ अमित,धनी मनी है साथ।*
*धिरही मेरे हमसफर,मिलता सबका हाथ।।*

*पेड़ कटे जीवन मिटे, देता कौन है ध्यान।।*
*धरणी रहे हरा तभी,पेड़ लगा इंसान।।*

*तोषण कुमार चुरेन्द्र*

खातू

*खातू बिन खेती कहाँ,कइसे करय किसान।*
*खातू खेत नइ छितहीं,पाही कइसे धान।*

*खातू कचरा डारके,खेती करय किसान।*
*साँवा करघा छाँट के,पावय कँसके धान।।*

*तोषण कुमार चुरेन्द्र*

दाई

*१*

*माँ के मया अपार हे,बाँटे मया दुलार।*
*तीरथ जेकर गोड़ मा,विनय करे संसार।।*

*२*

*दाई जग मा तोर बिन, सुन्ना घर संसार।*
*कहिबो दाई कोन ला, मिलही कहाँ दुलार।।*

३.

*बन अनाथ बन बन फिरँव ,कोनों नइ आवै पास।*

*दाई  बिन  जिनगी घलो , रहिथे    गजब.  उदास।।*

*तोषण कुमार चुरेन्द्र*

अरुणोदय

अरुणोदय
है राह नई सोंच
है भाग्योदय।।

उषा सलोनी
माँग भरे धरती
मन हरनी।

सूर्य किरण
आलोकित जीवन
बहे पवन।
तोषण कुमार चुरेन्द्र

नवग्रह

हाइकु मऩ्जुषा
अंक-४६
============
१.
पृथ्वी बचाओ
हो मन संकल्पित
पेड़ लगाओ।
२.
चमका व्याेम
पुरनमास जब
खिलता सोम।
३.
मंगल आता
हनुमत की पूजा
कष्ट मिटाता
४.
बुध की सिद्धि
जपले गजानन
मिलती रिद्धि।
५.
जग कल्याण
गुरुजी वृहस्पति
बाँटता ग्यान।
६.
शुक्र की छाया
संरचना सृष्टि की
मिलती माया।
७.
शनि की मार
भटकता जीवन
दु:खी संसार।
८.
राहू की चाल
असंयमित जीव
रहे बेहाल।
९.
बढ़ता केतु
लालच की गठरी
दु:ख की सेतु
१०.
नव अरुण
मिलता नवजीवन
झुमे वरुण
११.
गृह प्रवेश
नवग्रह पूजन
मिटे कलेश।
============
तोषण कुमार चुरेन्द्र

संध्या वंदन

संध्या वंदन
तुलसी की आरती
हर्षित मन।

देव की पूजा
आशीष माँ बाप का
नहीं है दूजा।

राम का नाम
शबरी का उद्धार
भज निष्काम।

करले कुछ
शानदार शाबासी
गर्वित मन।

स्वप्न हसीन
होती प्रेम मिलन
है लाजमीन।

*तोषण कुमार चुरेन्द्र*

शनिवार, 3 जून 2017

दोहे तोषण के..

दोहे तोषण के...

रूप रंग मा का रखे,राखव मीठ जुबान।
मनखे बर उपकार हा,सबके हो पहिचान।।

बादर  करिया  हे ढँकत ,डेरा दुरिहा गाँव।
घुमरत गरजत देख के,कइसे गोड़ उठाँव।।

होवत   अड़बड   बेर हे,  होगे   हावय  रात।
शुभ रतिहा कहिले कका,काली करबो बात।।

मोर शोर तै थोर ले, काबर गै ते भूल।
अंतस भीतर पीर हे,लागे जइसे शूल।।

चिरई करथे चाँवले, होवत बड़े बिहान।
राम राम तै बोलके,करले काम महान।।

डोंगा जइसे तन बने,चलै न बिन पतवार।
राम बसे सब जीव जी,उही लगाही पार।

*तोषण कुमार चुरेन्द्र*

दाई

*माँ के मया अपार हे,बाँटे मया दुलार।*
*तीरथ जेकर गोड़ मा,विनय करे संसार।।*

*दाई जग मा तोर बिन, सुन्ना घर संसार।*
*कहिबो दाई कोन ला, मिलही कहाँ दुलार।।*

*तोषण कुमार चुरेन्द्र*

शुक्रवार, 2 जून 2017

तिथि

एक प्रयास तिथियों पर

हाइकु

करे सिंगार
चाँद पुरनमासी
   देखता रहूँ।

चैत्र महिना
  है हिन्दु नववर्ष
    एकम तिथि।

दुज का चाँद
  शंभू भाल शोभित
     मनभावन।

माता पार्वती
  पूजती महादेव
     तीज परब।

करवा चौथ
  पत्नि की आराधना
    पति दीर्घायु।

रीषि पंचमी
  देव धनवंतरि
    होती है पूजा।

खमरछठ
  अरदास माता की
     बच्चे सुखी।

आई सप्तमी
  काली की कालरात्रि
     बैरी विनाश।

कृष्ण अष्टमी
  मगन वृंदावन
     जग पावन।

राम नवमी
  आनंदित संसार
     खुशियाँ मिलें।

विजय पर्व
  दशमी दशहरा
    पाप का नाश।

अरजी पुरी
  भीम एकादशी में
      सब हैं सुखी।

विष्णु की भक्ति
  है अखण्ड द्वादशी
     पूरन काम।

यम की पूजा
  दीपक है तेरह
     धन तेरस।

हो जयकार
  अनंत चतुर्दशी
    विदा गणेश।

दीपक जले
  अमावस की रात
     लक्ष्मी पूजन।
        
तोषण कुमार चुरेन्द्र

तिथि

एक प्रयास तिथियों पर

हाइकु

करे सिंगार
चाँद पुरनमासी
   देखता रहूँ।

चैत्र महिना
  है हिन्दु नववर्ष
    एकम तिथि।

दुज का चाँद
  शंभू भाल शोभित
     मनभावन।

माता पार्वती
  पूजती महादेव
     तीज परब।

करवा चौथ
  पत्नि की आराधना
    पति दीर्घायु।

रीषि पंचमी
  देव धनवंतरि
    होती है पूजा।

खमरछठ
  अरदास माता की
     बच्चे सुखी।

आई सप्तमी
  काली की कालरात्रि
     बैरी विनाश।

कृष्ण अष्टमी
  मगन वृंदावन
     जग पावन।

राम नवमी
  आनंदित संसार
     खुशियाँ मिलें।

विजय पर्व
  दशमी दशहरा
    पाप का नाश।

अरजी पुरी
  भीम एकादशी में
      सब हैं सुखी।

विष्णु की भक्ति
  है अखण्ड द्वादशी
     पूरन काम।

यम की पूजा
  दीपक है तेरह
     धन तेरस।

हो जयकार
  अनंत चतुर्दशी
    विदा गणेश।

दीपक जले
  अमावस की रात
     लक्ष्मी पूजन।
        
तोषण कुमार चुरेन्द्र

ठेलहा राम

*ठेलहा राम*

*किहिस एक दिन मोला कोई,*
*का तोर कर कहीं नइये काम।*
*खाथस पीथस घूमत रहिथस,*
*बने बात नोहे जी ठेलहा राम।*

*केहेंव महु घलो बने गोठ जी,*
*मोरो कर हावय अब्बड़ काम।*
*काम करहु फेर रहा ले ले गा,*
*करन देना थोरिकन आराम।*

*काम  बुता  बर  संसो नइये,*
*हस कोढिहा तै कथे सियान।*
*पाछु   झन  पछताएल  पड़े,*
*काम  बुता बर  दे बने ध्यान।*

*बात सियान के मान डरेंव,*
*अब जाथँव महुँ कमाय बर।*
*खुद भविस के संसो करके,*
*सुग्घर जिनगी सिघयाय बर।*

*तोषण कुमार चुरेन्द्र*

गुरुवार, 1 जून 2017

डोंगा

*जिनगी डोंगा धार में,नंइ  हाथ पतवार।*
*राम भजन कर सार हे,राम लगाही पार।।*

*हावय डोंगा काठ के, कइसे पार लगाँव।*
*पखरा हर नारी बने, धोवन  देदव पाँव।।*

*देखे केंवट राम जी,डोंगा लगे मँगाय।*
*भइया केंवट सुन बने,गंगा दे नहकाय।।*

*तोषण कुमार चुरेन्द्र*

राम नाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...