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बुधवार, 5 अक्टूबर 2016

लोक असर के 16/09/2016 के अंक में प्रकाशित मेरी कविता

लोक असर के 16/09/2016 के अंक में प्रकाशित मेरी कविता
संपादक महोदय पुष्कर सिंह राज जी को हार्दिक आभार

उरी के शहीदों को अश्रु पुरित नमन....

धन्य है लाल

धन्य है लाल जो हमारे लिए अपने प्राणों तक की परवाह नही
पर बदले में इनके परिवार को मिलता क्या है ???
मात्र दो लाख
जिनके बलिदान का कोई मोल नहीं
जय हिंद

राम नाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...