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बुधवार, 12 जुलाई 2017

आती नहीं

आती नही नींद रातों में मोबाइल एक सहारा है.
नहीं बिना इसके यहाँ किसी का होता गुजारा है.

चिंतन करता समाज का जो वह कभी भी सोता नहीं.
हँसती  रहती है  दुनिया सभी पर कभी वह रोता नहीं.

जगने से तेरे ऐ मालिक यहाँ हर कोई चैन से सोता है.
तुझसे दिन तुझसे ही रात औ तुझसे ही सुबह होता है.

जब तक राम का साथ है मुझको कहीं आराम नहीं.
हनुमत जैसे चलते रहना रुकने का न हो नाम कहीं.

इक दिन ऐसा आएगा मेरा नील गगन पर छा जाऊँगा.
याद करेंगी दुनिया मुझको वही काम नया कर जाऊँगा.

तोषण कुमार चुरेन्द्र

शनिवार, 1 जुलाई 2017

सम्हल कर

चलना जरा सम्हल कर *तोषण*, रपट न जाना राह में,
लोग कहेंगे बारिश का मजा है ,या मयकदे का नशा है।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र

गुरुवार, 29 जून 2017

सोच

किसी को जरा हमारी अच्छाई देखी नहीं गई

लग गये यारों हमारी बुराई ढूँढने को जहाँ में

*सोच बड़ा कर लेने से मात्र से काम बड़ा नहीं होता....*

*काम बड़ा करने के लिए सोच बड़ा करना पड़ता है....*

*तोषण कुमार चुरेन्द्र*

दुनिया

*होता ना जो चार कदम आगे दुनिया से "तोषण"*
*दुनिया जो है मुझे आठ कदम पीछे धकेल देती**

*जाग उठा शैतान अब गहरी रात के अँधेरों में*
*बचना है तो ढुँढ लो मेरे दुश्मनों का दर कहीं**

तोषण कुमार चुरेन्द्र

रविवार, 18 जून 2017

श्मसाँ मिल गया

किसी को जमीं किसी को आसमाँ मिल गया,
हम ही थे इक हैवाँ जो बस श्मसाँ मिल गया।
तोषण कुमार चुरेन्द्र

इक तेरे सिवा

सारी कायनात ढुंढकर थक गये "तोषण "
कमबख़्त मिला नही कोई इक तेरे सिवा...

शुक्रवार, 16 जून 2017

मतला

*दुआएँ आपकी आबाद करती हमें*
*भुला ना पायेंगे जब तक जिन्दगी हैंं....*
*तोषण कुमार चुरेन्द्र*

रविवार, 21 मई 2017

मयखाना

सुप्रभातम्
शुरुवात
सुरा के साथ

*गर शराब मिटाता दिल के सारे गम*
*तो मेरी दुनिया इतनी गमगीन न होती*

त़ोषण कुमार चुरेन्द्र:

आबाद होता देखा नहीं हमने किसी को जमाने में
सवेरे से जाकर जो डुबे रहते हम हैं बुरे मयखाने में

रविवार, 7 मई 2017

फना

फऩा होने चला हूँ आज फिर माँ के कदमों तले
होगी रहमत खुदा की फिर आऊंगा माँ की गोद में
तोषण कुमार चुरेन्द्र

रूख़सत...

हो जाऊँ जो रूखसत तेरी दुनियाँ से "तोषण"
गुजारिश़ है समेट लेना अपनी यादों के पन्नों में
तोषण कुमार चुरेन्द्र

बुधवार, 29 मार्च 2017

तोषण कुमार चुरेन्द्र

उड़ता चलूँ नील गगन में साथ तेरे ऐ "तोषण"
फिक्र नहीं परवाज की राहें हो कितनों मील...

राम नाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...