काँटे
है सुरक्षित
महकता गुलाब
काँटों के मध्य...
कैसे बढ़ता
काँटोें भरी राह पे
अड़चन है...
जग वीरान
काँटों भरा जीवन
सुमन नहीं...
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगाँव
काँटे
है सुरक्षित
महकता गुलाब
काँटों के मध्य...
कैसे बढ़ता
काँटोें भरी राह पे
अड़चन है...
जग वीरान
काँटों भरा जीवन
सुमन नहीं...
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगाँव
मिटे दरार--
बँधे एक्य सूत्र से
नवरात्रि में.
हुए दरार--
भाई भाई के मध्य
बढ़ती दूरी.
बँटता जग
दरारों के दरम्याँ
समेटो कोई---
कैसे खिलता
गुलाब सीमा पर
बाधा दरार---
रहें मिलके--
भर दें दरार को
प्रेम रेत से.
तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगाँव
माता मुझको थाम लो,हूँ मैं तेरा लाल..
मिल जाये आशीष जो,क्या मारेगा काल...
तोषण कुमार चुरेन्द्र
*नवरात के दोहा*
*लाली चुनरी साज के,माता अड़बड़ भाय!*
*दरसन करके भाग सब,अपन अपन सहुँराय!!*
*सुनले तँय गोहार वो,माँथ नवावँव आज!*
*भरे सभा मा आज तँय,मोरो रखदे लाज!!*
*लइका अबोध जानके,किरपा करदे आज!*
*बाधा मोरो टार के,पूरन करदे काज!!*
*दुरगा दाई के चरन,सबझन माँथ नँवाव!*
*जस पचरा सेवा भजन,मिल सब गाव बजाव!!*
*झूमव नाचव आज सब,परब हवय नवरात!*
*पंडा भजन सुनात हे,सेउक ढोल बजात!!*
*दोहा तोषण के सुनव,करलव सुंदर गान!*
*मिल देवव आशीष सब,पावँव सबके मान!!*
तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगाँव
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टुटे दिल सभी को दिखाना नहीं
अपनों से कभी भी छुपाना नही
कोई ठोकर मारे कोई दे सहारा
पर कभी किसी को रुलाना नहीं
हर तरफ उसके प्यार का एहसास करता हूँ मैं
खुशनुमा वो हरपल को मधुमास करता हूँ मैं
कब आ जाये न जाने वो लौटकर मेरी बाहों में
आने वाले हर उन पलों को खासम खास करता हूँ मैं
साथ जो न मिल पाये वो किनारे हैं हम
दूर रहकर भी इक दुजे के सहारे हैं हम
करते रहेंगे यूँ ही अब दीदार दूर से हम
चाँद को बस देखता जैसे सितारे है हम
मिलके आपसे बिछड़ना हमें अच्छा नहीं लगता
यूँ छुपकर गुनाह करना हमें अच्छा नहीं लगता
आ जाएँगे हम किसी दिन दुनियाँ की निगाह में
सोच सोच कर ये पल हमें अच्छा नहीं लगता.
ये मोहब्बत मेरी मुझे बदनाम कर गई.
खुद अपने नाम को गुमनाम कर गई.
चाहते थे हम तुम्हें हर पल खुश देखना,
नसीबा गम ए जुदाई सरेआम कर गई.
तोषण कुमार चुरेन्द्र
नवरात्रि विशेष
मातृ पूजन
नवजोत जलायें
नवरात्रि में....
जय माता की
जयकारा लगायें
शेरावाली की....
तोषण कुमार चुरेन्द्र
*आओ मनायें होली*
इन्द्रधनुषी रंगों के संग मनायें आओ होली
भाईचारे का प्रेम भाव से मिलके लगाओ रोली
बरसाने में राधा के संग
होली खेले नंदलाल
रंग बिरंगी छटा बिखेरे
मिलके अबीर गुलाल
रंगने निकले आज नटवर को ललिता की टोली...
भाईचारे का प्रेम भाव से मिलके लगाओ रोली...
पीली सरसों की रंग लेकर
होती रहे रंगीली बौछार
स्नेह भरी पिचकारी से
छलकता रहे सिर्फ प्यार
सतरंगी रंगों से मिलकर बनते आज रंगोली...
भाईचारे का प्रेम भाव से मिलके लगाओ रोली...
राम लखन भरत शत्रुघन
उड़ावै रंग अबीर गुलाल
नल नील सुग्रीव जामवंत
लाल हनुमत करे कमाल
कृपा है उस ईश्वर की जो भरते सबकी झोली...
भाईचारे का प्रेम भाव से मिलके लगाओ रोली
मिटे भ्रष्टाचार देश की
मेरे जहान में शांति रहे
सूरज बने फैलाता जग में
हरपल अपनी कांति रहे
नहीं फटे कहीं गोला बारुद चले न अब कही गोली...
भाईचारे का प्रेम भाव से मिलके लगाओ रोली...
खुशनुमा हो जीवन सबका
रंगों भरा आसमान हो
लक्ष्य हो पूर्ण सभी का
सफलता का सोपान हो
मंगलमयी कामनाओं से भरी हो सबकी झोली...
भाईचारे का प्रेम भाव से मिलके लगाओ रोली...
तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगाँव डौंडी लोहारा
९८२६७००३१९,,९६१७५८९६६७
रंग दे आज बिधाता मोला तीन रंग के रंग मा
देशभक्ति रहय जीयत मरत ले अंग-अंग मा...
केसरिया के रंग मा रंग के
साहस सदा भरे रहय
बइरी मन ला मार गिरावँव
छाती मोर तने रहय
बोलँव भारत माता के जय भुजा डोलय तरंग मा
देशभक्ति रहय जीयत मरत ले अंग-अंग मा...
शांति के संदेस देवंव
सादा रंग मा रंगे रहँव
चलत रहँव सतमारग मा
हरिशचंद जस सते कहँव
झन झपावय कोनों मनखे भ्रष्टचार के सुरंग मा
देशभक्ति रहय जीयत मरत ले अंग-अंग मा....
भारत के सोनहा भुंइया
हरा-भरा खुशहाल रहय
छत्तीसगढ़ के पबरित माटी
धान के कटोरा कहय
सुख समृद्धि पावय सब नाचय गावय उमंग मा
देशभक्ति रहय जीयत मरत ले अंग-अंग मा....
ये तीन रंग के मान बर
कतको बीर बलिदानी हे
जनम जनम ले रही अमर
अइसन एखर कहानी हे
साहस सत समृद्धि खातिर जोस सेना के दबंग मा
देशभक्ति रहय जीयत मरत ले अंग-अंग मा....
तिरंगा हवय हमर संगी हो
सब्बो रंग ले बढ़िहा
मिलके तोषण के संग मा
रंग लव छत्तीसगढ़िहा
आवव नाचव गावव लगावव रंग ले रंग मा
देशभक्ति रहय जीयत मरत ले अंग-अंग मा....
कृति
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद छत्तीसगढ़
९८२६७००३१९,
९६१७५८९६६७
राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...