बुधवार, 24 जून 2020

पावस

कलम की सुगंध छंदशाला
विषय:-चित्राभिव्यक्ति
विधा:- कुण्डलियाँ
दिनाँक :-24/06/2020
दिन :-बुधवार

1.
पावस पर्वत में गिरे,मुदित हुआ संसार।
लगती धरणी श्यामला,छाई खुशी अपार।।
छाई खुशी अपार,मगन हो झूमे सारे।
हरा भरा परिवार, वृक्ष भी वारे न्यारे।
दिनकर बैठा मौन,देखकर गहन अमावस।
सकल विश्व में धूम,लौट आई है पावस।

2.
आई है पावस लौट कर,फिर धरती के पास।
हरने धरती की व्यथा,करने जीव उजास।।
करने जीव उजास,गीत है सावन गाते।
भरा भरा है ताल,राग जो झिंगु सुनाते।
भड़क उठी है मेघ ,बहे है नित पुरवाई।
दिनकर देखे मौन,झूम के बरखा आई।

तोषण चुरेन्द्र दिनकर
डौंडी लोहारा बालोद
छत्तीसगढ़

सोमवार, 22 जून 2020

जय जवान (तोषण चुरेन्द्र दिनकर)


दिनाँक:-22/06/2020
दिन:-सोमवार
विधा :-दोहा
विषय :-जय जवान

सर्द गर्म बरसात हो,चलते सीना तान।
करे निरंतर चौकसी,मेरे वीर जवान।।1।।

बनकर जो फौलाद ये,लड़ते हैं पुरजोर।
खड़े रहे हिमशिखर पर,हिम आलय की छोर।।2।।

भारत माँ के लाल हैं,करते सिंह दहाड़।
शत्रु पसीनेंं पोछते,खाते लाख पछाड़।।3।।

खड़ा रहे दिन रात जो,रखने भारत शान।
हँसते हँसते ये सभी,त्यज देते है जान।।4।।

माता ऐसी धन्य है,दिये लाल बलिदान।
भारत मेरा देश ये,है जवान की खान।।5।।

जय जवान कहते चलें,रक्षित जिनसे देश।
शिक्षक और किसान भी,थामे है परिवेश।।6।।


सुन लो हे सरकार ये,सुखी रहे परिवार।
दिनकर भी अब साथ है,माने जग संसार।।7।।

तोषण चुरेन्द्र दिनकर
डौंडी लोहारा बालोद
छत्तीसगढ़

जिद तो अपनी भी थी...

मुक्त गजल 

जिद तो अपनी भी थी इस जमाने मे।
गुजर  जाए  जिंन्दगी तुझे भुलाने में ।

ढूँढती रही नजर मंजर-ए-तन्हाई पे,
गुम हो गई कहां,कौन से कैदखाने में ।

रूखसत हो गई गुलिस्ताँ-ए-इश्क  से,
चुभाना पड़ा हाथ बागबाँ सजाने में।

अर्ज है न गुजरो राह कभी इश़्क के,
आएगा "दिनकर" जहाँ के निशाने में।

तोषण कुमार चुरेन्द्र दिनकर
डौंडी लोहारा बालोद छ.ग.

मंगलवार, 9 जून 2020

राम नाम हे सार


राम नाम हे सार रे,जपले तै हरि नाम।
जाती बेरा थोरकिन,करले बढ़िहा काम।।
करले बढ़िहा काम तै,होवय जग मा शोर।
दया मया ला बाँट ले, बात मान ले  मोर।।
बात मान ले मोर सुन,राम भजन मा झूम।
तोर मोर के फेर मा,ऐती ओत न घूम।।

तोषण चुरेन्द्र दिनकर

करम के नाँगर


रोला

बने बने तँय साध,करम के नाँगर धरले।
बोंले बीजा पोठ,धरम के कोठी भरले।
रखले मीठ जुबान,बात ते करले गुरतुर।
शक्कर मिशरी घोर,कभू नइ होवय चुरपुर।

तोषण चुरेन्द्र दिनकर

तेरा मेरा

सिंहनी

तेरा मेरा फेरा,करता मनवा प्रचंड डेरा जानो।
सारा जीवन निकला,करतब करता सब ही तुम मानो।।1।।

पलपल करता रहता,लीला प्रभु की अनंत शाखा फैली।
जपलो भजलो प्यारे,मत कर मन को दिनकर यूँ मैली।।2।।

ढूँढो मत दर मंदिर,मिलता सबको सनाथ जग सारा।
कोई फेरे माला,मन से है जो कोई भी हारा।।3।।
 
दिनकर बाँटे आभा,जगमग सारा जहान सुन लो भाई।
बाँटो भाईचारा,झूमे अवनी अंबर पुरवाई।।4।।

कृष्णा राधा जोड़ी,खेले मधुबन उमंग शंकर नाचे।
ताली बजती भारी,नित दिनकर लिखते पढ़ते साचे।।5।।

तोषण चुरेन्द्र दिनकर
डौंडी लोहारा बालोद
छत्तीसगढ़

सोमवार, 8 जून 2020

उगा भास्कर

हाइकु 575 का वार्णिक काव्य है जिसमें कट मार्क का विशेष महत्व है।उससे दो बिम्ब की झलक मिलती है। कट मार्क से कारण और फल प्रदर्शित होता है।


उगा भास्कर-
सरोवर में तैरता 
हंस का जोड़ा।1।

पराग कण-
मंडराता भँवरा
पुष्प बाग मे।2।

अमा की रात-
टिमटिमाते जुग्नू
धरती पर।3।

नदी बहती-
पावस प्रदेश में
हिरण झूंड।4।

बरखा आई-
लहराता सागर
अम्बर तले।5।


तोषण चुरेन्द्र दिनकर

हम तुम

हम तुम दोनों साथियाँ,एक बाग के फूल।
कभी नहीं होगी कहो, इक दूजे से भूल।।1

मिलकर हम तुम साथ हो,पथ हो चाहे शूल।
एक रहेंगे नेक हम,बनकर प्रेमी फूल।।2

हम तुम तुम हम एक हैं,जानें है संसार।
कभी रूक पाये नहीं, हम दोनों का प्यार।।3

बनकर हम तुम सारथी,रथ हाँके दिन रैन।
निहारती हो जग सदा, इक दूजे के नैन।।4


दिनकर बाँटे रोशनी, हम तुम पालें आभ।
भोर किरण देती हमें,लाख टका का लाभ।।

तोषण चुरेन्द्र दिनकर
डौंडी लोहारा बालोद
छत्तीसगढ़

रविवार, 7 जून 2020

बीज (तोषण चुरेन्द्र "दिनकर")


विधा :-घनाक्षरी
दिनाँक :-7/6/20
दिन :-रविवार
विषय :-बीज
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..............भारती किसान प्यारे,
..........धरती के हैं दुलारे
....खेतों में ये बीज बोयें,
हलबा महान है।।1।।

............बरसे प्रेम प्रकृति की,
........बीज हुआ अंकुरित,
....लेकर जनम नया,
भरे परवान है।।2।।

............नव रंग जब चढ़ा,
.........सीना ताने वृक्ष खड़ा,
....राहगीर बैठ छाँव,
मिटाते थकान है।।3।।

...........पक कर बीज बनो,
........परहित काज करो,
....नाज करे सारा जहां,
करे गुणगान है।।4।।
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तोषण चुरेन्द्र 'दिनकर'
डौंडी लोहारा बालोद

राम नाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...