शनिवार, 22 जुलाई 2017

किसान

पानी बादर गिरत नइहे,
मरना होगे किसान के.
कइसे मनाही बने हरेली,
चिंता होगे बिहान के.

धरती के बेटा हमला कइथे.
सबके भरे पोसइया कइथे.
पेट हमरे बड़ भूखन मरथे,
लइका हमर बड़ दुख सहिथे.
पढ़तिस लिखतिस मोरो लइका,
जरुवत हवे गियान के...१

खेत म धान छिताय परेहे.
पानी बर एकठन आस धरेहे.
सुरुज कका बिहान ले साँझे,
नटेर के आँखी ल खड़ेहे.
लोंदी खवाबोन हम कइसे
रोना हे गँहू पिसान के....२

करजा के चद्दर ओढ़त हन.
गदहा बने सब ढोवत हन.
नइ छुटावय करजा कोनों,
नरी म डोरी अँरोवत हन.
का थोरको सुध नइ लामे,
हमर देश के सियान के....३

कब तक अइसने मर-मर जीबो.
शंखर नोहन जेन जहर ल पीबो.
हलधर हम किसान हरन गा
अपन हक ल लेके ही रहिबो.
दाम अनाज के बने मिले,
रखले बात फरमान के.....४

तोषण कुमार चुरेन्द्र

सुरता

विरह गीत

सुरता हा तोर जब जब आथे मोला गजब सताथे वो
नैना ले झर झर आँसू झरथे जीव ला मोर जलाथे वो

बइहा बरन मैं किंजरत रहिथौं तरिया नरवा मेंड़ पार मा
सुध नइ राहय मोला रे पगली खोजँव डोंगरी पहाड़ मा
रहि रहि के तोर भोली सुरतिया आँखी के आगू म आथे वो
नैना ले झर झर आँसू झरथे जीव ला मोर जलाथे वो....१

कोयली मोला मारै ताना पूरवइया बिजरावत हे
चंदा रानी मुँहु लुकाथे सूरुज ह आँखी देखावत हे
आजा लहुट के तै मोर संगी मया ह मोर बलाथे वो.
नैना ले झर झर आँसू झरथे जीव ला मोर जलाथे वो....२

मर जाहूँ मैं तोर बिन रानी नइहे मोर ठिकाना
का करिहँव सुन कहाँ जाहूँ बैरी मोला बताना
तिही बताना मया के गोठ ल कइसे सब बिसराथे वो.
नैना ले झर झर आँसू झरथे जीव ला मोर जलाथे वो...३

तोषण कुमार चुरेन्द्र
२१/७/१७

गुरुवार, 20 जुलाई 2017

सुरता

विरह गीत

सुरता हा तोर जब जब आथे मोला गजब सताथे वो
नैना ले झर झर आँसू झरथे जीव ला मोर जलाथे वो

बइहा बरन मैं किंजरत रहिथौं तरिया नरवा मेंड़ पार मा
सुध नइ राहय मोला रे पगली खोजँव डोंगरी पहाड़ मा
रहि रहि के तोर भोली सुरतिया आँखी के आगू म आथे वो
नैना ले झर झर आँसू झरथे जीव ला मोर जलाथे वो....१

कोयली मोला मारै ताना पूरवइया बिजरावत हे
चंदा रानी मुँहु लुकाथे सूरुज ह आँखी देखावत हे
आजा लहुट के तै मोर संगी मया ह मोर बलाथे वो.
नैना ले झर झर आँसू झरथे जीव ला मोर जलाथे वो....२

मर जाहूँ मैं तोर बिन रानी नइहे मोर ठिकाना
का करिहँव सुन कहाँ जाहूँ बैरी मोला बताना
तिही बताना मया के गोठ ल कइसे सब बिसराथे वो.
नैना ले झर झर आँसू झरथे जीव ला मोर जलाथे वो...३

तोषण कुमार चुरेन्द्र
२१/७/१७

शनिवार, 15 जुलाई 2017

आरजू

आरजू कब से थी मेरी,

.आज वो हो गयी पूरी.

मिले जो मित्र बालक,

तोषण दर्शन मानिकपुरी.


हुई कुछ साहित्यिक चर्चाएँ, 

अपनी क्या मैं बताऊँ.

होकर प्रफुल्लित मैं तो,

मनभँवरा बन हर्षाऊँ.


साहित्य की सीढ़ी हमको, 

प्रतिपल चढ़ते जाना है.

राह में हो कोई भी मुश्किल, 

बढ़कर शिखर को  पाना है.


मिलकर अपने मित्रों से, 

अपने भाग्य जगा लिए.

जीवन का अभिन्न अवसर, 

हमने रब से पा लिए.


बालक दर्शन तोषण की,

सलामत रहे मितानी.

बसे रहें सबकी जुबाँ पे,

तीनों मित्र की कहानी.


तोषण कुमार चुरेन्द्र


https://arhkepagakalagi.blogspot.in/?_e_pi_=7%2CPAGE_ID10%2C1582631584

बुधवार, 12 जुलाई 2017

मुझे

*मुझे...*

उनसे मोहब्बत करने का...दिया सिला अज़ीब मुझे,
चाहतें रह गयी अधूरी मेरी.अधूरा मिला नसीब मुझे।

गुनाह  बस इतना हुआ कि...इश़्क कर बैठे बेपनाह,
जिंदा रहूँ बदौलत किसकी...ज़हर पिला ऱकीब मुझे।

काटने को दौड़ते है हरपल..तन्हाइयो के मंज़र यहाँ,
चाहता न आना जो पास मेरे अपने बुला करीब मुझे।

कर दो रहमत इस इश़्के दीवानों पर..मेरे परवरदीगार,
दरिया ए मोहब्बत की एक बूंद जान दिला गरीब मुझे।

तेरी करामात से वाकिफ है....सारी कायनात ऐ तोषण,
जिंदा रहकर भी जिंदा लाश हूँ कफ़न दिला हबीब़ मुझे।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
१०/०७/१७
२:३४

आती नहीं

आती नही नींद रातों में मोबाइल एक सहारा है.
नहीं बिना इसके यहाँ किसी का होता गुजारा है.

चिंतन करता समाज का जो वह कभी भी सोता नहीं.
हँसती  रहती है  दुनिया सभी पर कभी वह रोता नहीं.

जगने से तेरे ऐ मालिक यहाँ हर कोई चैन से सोता है.
तुझसे दिन तुझसे ही रात औ तुझसे ही सुबह होता है.

जब तक राम का साथ है मुझको कहीं आराम नहीं.
हनुमत जैसे चलते रहना रुकने का न हो नाम कहीं.

इक दिन ऐसा आएगा मेरा नील गगन पर छा जाऊँगा.
याद करेंगी दुनिया मुझको वही काम नया कर जाऊँगा.

तोषण कुमार चुरेन्द्र

मोर सही मयारु

मोर सही मयारु तँयहर,
दुनिया मा खोज के देख ले.
कोन तोला देवय लान के,
मोंगरा फूल रोज के देख ले.

करथँव तोला अब्बड़ मया,
बइरी थोरको देखस नहीं.
काबर पीरा देथस मोला,
जीवरा मया सरेखस नहीं.

ननपन म संग खेलेन कुदेन,
आनी बानी बाँटी भँवरा.
ओलकी कोलकी आरा पारा,
अउ घर बन तीर के चँवरा.

झन मोला तँय दगा देबे,
मरजाहूँ गोरी तोर सुरता म.
तोर मोर नत्ता अइसे हावय,
जइसे बटन कस कुरता म.

तोषण कुमार चुरेन्द्र

गुरु महिमा

गुरु की है महिमा बड़ी,
                  कथनी अपरम्पार।
करलो सेवा गुरु चरण,
                  मेवा का भण्डार।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र

सावन

*सुधार*

मन मँजूर बन नाचथे,सावन बरसय जोर।
पिया मिलन के आस में,तरसय मन बड़ मोर।।१।।

टिपिर-टिपिर पानी गिरय,सुग्घर सावन मास।
सँइया बिन सुन्ना लगय,मनवा रहय उदास।।२।।

करिया बादर देख के,पवन करत हे शोर।
आही सावन बन पिया, आरो लेवत तोर।।३।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र

रविवार, 9 जुलाई 2017

पुन्नी

पुन्नी मास अषाढ़ के,पुन्नी व्यास कहाय।
गढ़य वेद संसार बर,सबके मनला भाय।।१।।

हूम धूप  करलव हवन,दीया करलव दान।
कातिक पुन्नी खास हे,करलव गंगा स्नान।।२।।

पुन्नी  सावन  मास  के,करलव  वैदिक साज।
उपा करम कर वेद के,बनथय बिगड़त काज।।३।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र

कविता

आती नही नींद रातों में मोबाइल एक सहारा है.
नहीं बिना इसके यहाँ किसी का होता गुजारा है.

चिंतन करता समाज का जो वह कभी भी सोता नहीं.
हँसती  रहती है  दुनिया सभी पर कभी वह रोता नहीं.

जगने से तेरे ऐ मालिक यहाँ हर कोई चैन से सोता है.
तुझसे दिन तुझसे ही रात औ तुझसे ही सुबह होता है.

जब तक राम का साथ है मुझको कहीं आराम नहीं.
हनुमत जैसे चलते रहना रुकने का न हो नाम कहीं.

इक दिन ऐसा आएगा मेरा नील गगन पर छा जाऊँगा.
याद करेंगी दुनिया मुझको वही काम नया कर जाऊँगा.

तोषण कुमार चुरेन्द्र

मुझे...

समीक्षा हेतु सादर समर्पित

*मुझे...*

उनसे मोहब्बत करने का...दिया सिला अज़ीब मुझे,
चाहतें रह गयी अधूरी मेरी.अधूरा मिला नसीब मुझे।

गुनाह  बस इतना हुआ कि...इश़्क कर बैठे बेपनाह,
जिंदा रहूँ बदौलत किसकी...ज़हर पिला ऱकीब मुझे।

काटने को दौड़ते है हरपल..तन्हाइयो के मंज़र यहाँ,
चाहता न आना जो पास मेरे अपने बुला करीब मुझे।

कर दो रहमत इस इश़्के दीवानों पर..मेरे परवरदीगार,
दरिया ए मोहब्बत की एक बूंद जान दिला गरीब मुझे।

तेरी करामात से वाकिफ है....सारी कायनात ऐ तोषण,
जिंदा रहकर भी जिंदा लाश हूँ कफ़न दिला हबीब़ मुझे।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
१०/०७/१७
२:३४

शनिवार, 8 जुलाई 2017

दोहालरी

*गुरु पुन्नी बिशेष*

*दोहालरी*

जस कुम्हार  के  हाथ हे, चकिया मटका संग।
अइसन गुरु किरपा मिले,खिल जाए सब अंग।।१।।

परव  पाँव  गुरु गोड़ के, देव दरस दिखलाय।
सही गलत के पाठ ला,सब झन ला समझाय।।२।।

पावन गुरु पुन्नी परब,ध्यान करव कर जोर।
गुरु ले  रिश्ता  जोड़ ले,बाँधय  जइसे डोर।।३।।

पहिली गुरु दाई ददा, जग में होत महान।
दुसरा गुरु गुढ़ ज्ञान दे,जग मा पावय मान।।४।।

बरसय  गंगा  ज्ञान  के, गुरु  चरनन  के तीर।
आवव सब गुरु के शरण,मिटय भरम के पीर।।५।।

आवय गुरु के तीर मा,कतको दरसन पाय।
बेटा जोहर लाल के, तोषण माँथ नवाय।।६।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र

गुरुवार, 6 जुलाई 2017

मया के गोठ

मन फाँसले
जीवरा जरत हे
बने हाँसले

कोयली बोली
करेजा बेधे बान
हाँँसी ठिठोली

सुरता तोर
आँसू धार बोहाय
मया कठोर

मोला भुलागे
छोड़ दिए मोला
कहाँ लुकागे

मया के गोठ
जग अमर रही
गुड़हा सोठ

तोषण कुमार चुरेन्द्र

बजार

आवव  हमरो  गाँव मा, बजार हे बुधवार।
आके जिहाँ बेचात हे,आनी बानी तरकार।।१।।

आके तँयहर छाँट ले,बढ़िहा गोभी फूल।
मुनगा  भांँटा  खेखसा,बरबट्टी झन भूल।।२।।

लइका मनबर ले चना,मिरचा भजिया तात।
खाँही  बढ़िहा चाव ले,एक - दुसर बिजरात।।३।।

टिकली  फुंँदरी  पावडर, लेलव  रुपिया हार।
देखव जोड़ी के मया, किसम-किसम सिंगार।।४।।

देखव  आज पताल  के, मुड़ी  चढ़त हे दाम।
किलो एक चालीस के,ले बिन चलय न काम।।५।।

करके आखिर हाट तँय,खाले बीरो पान।
हवय  बजरहा के इही,एके ठन पहिचान।।६।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र

मंगलवार, 4 जुलाई 2017

जयतु जय

*सुप्रभातम्*
एक प्रयास
*हाइकु*

जयतु जय
श्री गणेशाय नम:
सदा विजय---१

रामचंद्राय
रघुकुल तिलक
नमो नमाय---२

पवनसुत
रघुवीर सेवक
जय: मारुत---३

गंगाधराय
जगत संघारक
नम:शिवाय---४

कमला पति
जग पालनकर्ता
चरण रति---५

सृष्टि लेखक
जगत पिता ब्रह्मा
दिक सूचक---६

देवकी लाल
गीता उपदेशक
जय गोपाल---७

अपराजिता
महिष संघारिणी
विश्व वंदिता---८

माँ सरस्वती
ज्ञानदायिनी जय
संँवरे मति---९

शंकर प्रिया
हिमाचल तनया
वर अभया---१०

राम की सीता
हे! जनक दुलारी
रावण जीता---११

सती सावित्री
निर्जीव सत्यवान
बचाए प्राण---१२

कृष्ण दीवानी
कालकूट प्रसाद
मीरा सयानी---१३

नवधा भक्ति
आशीर्वाद राम का
शबरी मुक्ति---१४

मुष्ठि प्रहार
हो सत्संग का ज्ञान
लंकिनी पार---१५

*तोषण कुमार चुरेन्द्र*

रविवार, 2 जुलाई 2017

तोषण के दोहा

पढ़े  लिखे  आवय नहीं,थोरिक नइहे ग्यान।
का तोला समझाँव मँय,लइका हवँव नदान।।१।।

जिनगी  मोर  उदास  हे, काला मँयह बताँव।
मनवा कहीं सुझय नही,कोन डगर मँय जाँव।।२।।

पइसा कउड़ी हे नहीं, रुके रुके हे साँस।
बहिनी के शादी बचे,पड़गे टोटा फाँस।।३।।

पानी झन बिरथा करव,पानी अमरित जान।
पानी ले जिनगी बचय,बोलय सन्त सुजान।।४।।

मुखिया बढ़िहा हे जिहाँ, राखय सबके ध्यान।
मान करय सब छोट के,पावय सबके मान।।५।।

मानँव बात सियान के,करथे सबला पोठ।
राखय सबला संघेर के,कंचन जस हे गोठ।।६।।

माटी के  काया  बने,पानी  मिल घुर जाय।
सुमरन कर हरिनाम के,जाबे नाम कमाय।।७।।

बड़  भागी  मानुस जनम, जपले तँय हरिनाम।
मोर-मोर तँय झन समझ,आवय नइ कछु काम।।८।।

सजे  राम  दरबार हे, सिया  राम  हनुमान।
लखन चँवर डोलात हे,लगे सरग सम जान।।९।।

माया  हे  ठगनी बड़े, सबला नाच नचाय।
का छोटे अउ का बड़े,कोनों बाँच न पाय।।१०।।

गुरुजी घसियादास के,चेला हम सब आँन।
जेकर चरनन तीर मा, पावँन सबहा ग्यान।।११।।

फूलबगिया के फूल कस,सबला रखे सकेल।
गुरुजी अइसन ताय जी,हमरो विजय पटेल।।१२।।

बाबा तुलसी दास के,कहनी सबला भाय।
रामचरित मानस लिखे,भव ले पार लगाय।।१३।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र

मोर परिचय

*परिचय*
लोहारा के तीर मा,बसे हवय धनगाँव।
बोहावत हे खरखरा, बर पीपर के छाँव।।१।।

बेटा जोहर लाल के,तोषण हावय नाँव।
जुरमिल सब आशीष दव,परथँव सबके पाँव।।२।।

तोषण मँय तो लेड़गा,हावँव बड़ मतिमंद।
किरपा बरसय राम के,सुग्घर गढ़िहँव छंद।।३।।

शाला जाथँव रोज मँय,करँव ग्यान के दान।
का छोटे अउ का बड़े,पाथँव सबके मान।।४।।

भाई बहिनी चार हम,सबले बड़का आँव।
नइहे दाई संग में,जोहर ददा मनाँव।।५।।

चितरेखा हे संगिनी,बेटा मोर डुमेश।
हँसी खुशी दिन हा चले,नइहे कोनों क्लेश।।६।।

भूल चूक ला दव क्षमा,माँगत हँव कर जोर।
हावँव गा मतिमंद मँय,धीरज नइहे थोर।।७।।

"तोषण कुमार चुरेन्द्र "

बेवफा प्यार का...

वार्णिक मुक्तक

*तुझको  ही  चाहा  मैनें, तुमसे  ही प्यार किया।*
*छोड़  सब   कुछ   सजनी   तुमपे   वार दिया।*
*यूँ  जाना  ही  था  जो मुझको छोडकर पगली,*
*बेवफा  प्यार  का  क्यूँ  मुझसे  इकरार किया।।*
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तोषण कुमार चुरेन्द्र

शनिवार, 1 जुलाई 2017

सम्हल कर

चलना जरा सम्हल कर *तोषण*, रपट न जाना राह में,
लोग कहेंगे बारिश का मजा है ,या मयकदे का नशा है।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र

बरसात

बरसत पानी देखके, भुँइया खुशी मनाय।
सुवा परेवा कोयली,सुग्घर गीत सुनाय।।

आगे दिन बरसात के,होगे मगन किसान।
नाँगर बइला फाँदके, बोही  अब गा धान।।
👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻

आफत

*आँधी* आवय।
घर बन उजड़े।
दु:ख छावय।

हावा भड़के।
*रेतीली आँधी* लाय।
काल बनके।

*तूफान* आवै।
बुध पतरावय।
सुध भलावै।

गिरय पानी।
लावै कँसके *बाढ़* ।
हे हलाकानी।

*भूकम्प* आथे।
भुँइया डगमगाय।
डर हमाँथे।

परे *अकाल* ।
बड़ मरे किसान।
होगे बेहाल।

तोषण कुमार चुरेन्द्र

राम नाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...