मंगलवार, 10 सितंबर 2019

हवाई जहाज बनाऊँगा मैं।

छोटी सी बालमन की कविता

हवाई जहाज बनाऊँगा मैं।
नीले अम्बर में जाऊँगा मैं।
नभ मंडल की सैर करूँगा,
फिर घर वापस आऊँगा मैं।


सूरज चाचा से बातें होंगी।
चंदा मामा संग रातें होंगी।
सभी ग्रहों से दोस्ती करके,
तारों संग मुलाकातें होंगी।


धुएँ कारखानें वहाँ न होगी।
निर्मल शुद्ध हवाएँ होगी।
पान करूँगा हरपल हरदिन, 
रहेगा हमेशा तन ये निरोगी।


मोटर गाड़ी बहुत है चलते।
कितनों राही हैं जीते मरते।
इन सबसे मुझे मुक्ति मिलेगी,
लोग रहेंगे सदा ही तकते।


होगी अब ऊपर मेरी उड़ान।
बनेगा जब ये मेरा वायुयान।
चुन्नु,मुन्नु,पोषण,तोषण,
घुमेंगे नभ में सब सीना तान।


तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"


कर भला तो हो भला


*कर भला तो हो भला*

                                         पढ़ने के शौकीन शैलेष10 साल के उम्र  में रेल्वे स्टेशन पर आने जाने वाले लोगों के जूते पालीश करता ।जो भी कमाई होती बीमार माँ की दवाई और खाने पीने के सामान जुटाता । 

                                         एक दिन ईश्वर चंद नाम का एक सज्जन व्यक्ति को ट्रेन से कहीं जाना था।जो जोकि साफ्टवेयर इंजीनियर है । "चलो जूते को चमकाया जाये" ऐसा सोचकर इधर उधर देखने लगा तो नजर शैलेष पर पड़ी। पास जाकर जूते पालीश करवाते शैलेष के बारे में पूरी जानकारी पता करने लगा। 

                                     "तुम्हारा क्या नाम है?पढ़ने क्यों नही जाते?तुम्हारे माता पिता आदि आदि?" ईश्वरचंद ने पूछा। "पढ़ाई कैसे करूँ साहब,पिता जी भगवान को प्यारे हो गये,माँ बीमार है सो उनकी परवरिश के लिए कुछ तो काम करना पड़ेगा न साहब।"शैलेष ने जवाब दिया। इन सारी बातों को सुनकर ईश्वर चंद की आखें भर आई।और अपने बीते दिनों को याद करने लगा कि "मैं भी कभी शैलेष की तरह छोटी मोटी मजदूरी करके अपना जीवन बसर करता रहा।इसकी तो माँ है मेरी तो माँ भी नही थी।लेकिन जैसे तैसे पढा़ई पूरी करके आज इस मुकाम तक  पहुंच पाया।" "लो साहब जूता पालीश हो गया" आवाज सुनकर ईश्वर चंद का ध्यान टुटा।

                                      उसने कहा"चलो शैलेष आज से तुम्हें काम करने जरूरत नहीं पड़ेगी,मैं तुम्हें एक अच्छे स्कूल में दाखिला दिलाऊँगा। और माँ को अपने साथ रखकर उसका इलाज भी करवाऊँगा।" शैलेष की आँखे भर आई ईश्वर चंद की बाते सुनकर।

                                     ईश्वर चंद अपने ट्रेन का सफर रद्द करके शैलेष और उसकी माँ लेकर घर ले आया। ईश्वर चंद एक बेटा बनकर माँ का ईलाज शुरू कर दिया ।जल्द ही माँ भी ठीक हो गई। शैलेष का अच्छे स्कूल में दाखिला हुआ।

                                    ईश्वर चंद के इस तरह के कार्य को देखकर माँ के मुख से यही आशीर्वाद निकला- "भगवान तुम्हें लंबी उम्र दे।जिस तरह तुने हमारा भला किया है,उसी तरह  भगवान भी तुम्हारा भला करे।दुधो नहाओ पूतो फलो।"

                                      ईश्वर चंद की आँखें खुशियों से भर आई।और एक टक माँ को देखने लगा।

                                                                                                                  तोषण कुमार चुरेन्द्र
                                                                                                                        "धनगंइहा"


शुक्रवार, 6 सितंबर 2019

गणपति वंदना


नन्हें नन्हें हाथ जोड़कर,
गणपति तुम्हें प्रणाम करूँ।
दे दो बुद्धि हमें विनायक,
नित निरतंर जीत करूँ।


बिल्व पत्र मैं तुम्हें चढ़ाऊँ,
निशदिन तेरा ध्यान करूँ।
रिद्धि सिद्धि बुद्धि के दाता,
सब दुखियन के दुख हरूँ।


मोदक तुमको लगते प्यारे,
पार्वती के लाल हो।
पहिली पूजा होती तेरी,
देवो में देव कमाल हो।


माता पिता को माने जगत,
करे परिक्रमा सात।
गणों के देव हो तुम देवा,
कहलाये गणराज।


नंदी भृंगी संग खेले कूदे,
लीला अजब दिखाते।
देख देख मात पिता संग
जग सारे हर्षाते।


एकदंत दयावंत हो देवा,
लीला तेरी न्यारी।
जग में होती पूजा पहले,
मूषक तेरी सवारी।


कामना मेरी हो पूरी,
रख दो मेरी लाज।
सभी सुखी रहे जग में,
कहूँ कर जोड़ आज।


तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"

बुधवार, 4 सितंबर 2019

राम

दोहा

मेरे रघुवर राम की,बड़ी निराली बात।
कृपा करे श्री राम जी,मिले अजब सौगात।।

हनुमत जिनके भक्त है,धरे हृदय में ध्यान।
बनके निशदिन दास जो,रखते प्रभु का मान।।

दशरथ नंदन हो प्रभु,करूँ सदा गुणगान।
सीता के हे प्राण पति,सदा करो कल्याण।।

कैकेयी के लाडले,कौशिल्या के लाल।
बसते शंकर के हृदय, जपे काल के काल।।

माया के संसार में,रहे हमेशा साथ।
तोषण माँगे वर सदा,चरण झुके बस माथ।।


तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"


सोमवार, 2 सितंबर 2019

गणेश वंदना



नन्हें नन्हें हाथ जोड़कर,
गणपति तुम्हें प्रणाम करूँ।
दे दो बुद्धि हमें विनायक,
नित निरतंर जीत करूँ।
                                बिल्व पत्र मैं तुम्हें चढ़ाऊँ,
                                निशदिन तेरा ध्यान करूँ।
                                रिद्धि सिद्धि बुद्धि के दाता,
                                सब दुखियन के दुख हरूँ।
मोदक तुमको लगते प्यारे,
पार्वती के लाल हो।
पहिली पूजा होती तेरी,
देवो में देव कमाल हो।
                               माता पिता को माने जगत,
                               करे परिक्रमा सात।
                               गणों के देव हो तुम देवा,
                               कहलाये गणराज।
नंदी भृंगी संग खेले कूदे,
लीला अजब दिखाते।
देख देख मात पिता संग
जग सारे हर्षाते।
                               एकदंत दयावंत हो देवा,
                               लीला तेरी न्यारी।
                               जग में होती पूजा पहले,
                               मूषक तेरी सवारी।
कामना मेरी हो पूरी,
रख दो मेरी लाज।
सभी सुखी रहे जग में,
कहूँ कर जोड़ आज।


तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"

राम नाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...