शुक्रवार, 27 मार्च 2020

भारत मेरा देश है

चंडिका में लघु प्रयत्न
मात्रा भार १३-१३
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भारत  मेरा देश है,
अलग यहाँ का वेश है।
ऋषि मुनियों की ये धरा,
ध्यान प्राण अब ला जरा ।१।

 जन्म जहाँ है राम का ,
नटवर नागर धाम का ।
रावण को  संघारता,
कंस अधम है हारता ।२।

आया था जब गजनवी,
महापात वो दानवी।
हार मान वो है गया,
मिली यहाँ भरके दया।३।

विलायती की मार से,
जगे हिंद अब ताड़ के।
दुश्मन के छक्के छुटे,
इधर उधर हैं सिर फुटे।४।

दुविधा से है जुझ रहा,
जाने कितना घुँट रहा,
रोती ये नर नारियाँ,
बड़ी अजीब बिमारियाँ।५।

विपदा ये विकराल है,
कालों के भी काल है।
कोरोना जो नाम है,
पता नहीं अंजाम है।६।

कोरोना को अब मात दें,
भारत का सब साथ दें।
घर में ही जनता रहे,
यूँ ही बस कुछ दिन सहे।७।

बादल ये छट जाएगा,
अच्छा दिन अब आएगा।
सबका जो सहयोग हो,
यही महा संयोग हो।८।

मिलकर ये सब जानले, 
जा कोरोना ठान ले।
लौट नही वो आएगा, 
मुकी लात अब खाएगा।९।

मिलकर जो सब साथ हो,
जोश-जोश की बात हो।
कोरोना पछताएगा, 
छोड देश अब जाएगा।१०।

कोयल काली जब कुँजे,
भारत माता जय गुँजे।
तोषण मत यूँ हार ना,
कोरोना को मारना।११।
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तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
डौंंडी लोहारा बालोद छ.ग.
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बेटी//कोरोना

हंसगति छंद अनजान
न जान है न पहचान 
फिर भी एक प्रथम प्रयास
सादर
नमन मंच
मात्रा भार ११/९

बेटी.......

बेटी अपनी जान,जरा सुनले माँ।
कब से हूँ मैं द्वार,करेगी कब हाँ।
निर्मम यह संसार,नमो हे भोली।
नैना तरसे नेह, भरे  कब  झोली।


कोरोना .....

दे दो माँ वरदान,करूँ मैं वंदन।
कोरोना हो दूर,करो अब भंजन।
हरलो माता भार,जरा सुन अर्जी।
खुश हो घर संसार,चले जो मर्जी।

तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा

गुरुवार, 26 मार्च 2020

विज्ञात जन्मदिन

परम आदरणीय श्री गुरूदेव संजय कौशिक "विज्ञात" जी जन्मदिन की बधाई व शुभाशया के संग एक कुण्डलियाँ समर्पित...

अपनी वाणी से कभी,करे नहीं आघात।
अतुलनीय जो है सदा,हैं कवि रवि विज्ञात।
हैं कवि रवि विज्ञात,रौशनी भरते मग में।
मिले मान सम्मान, सदा ही कलयुग जग में।
कह तोषण कर जोड़,पड़े माला नित जपनी।
मिले गुरू विज्ञात,वाह रे किस्मत अपनी।

तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
डौंंडी लोहारा बालोद छ.ग.

बुधवार, 25 मार्च 2020

माता की नवरात्रि

सादर नमन
दिनाँक:- 25/03/2020
दिन:- बुधवार
विषय:-चित्राभिव्यक्ति
छंद:- कज्जल छंद में एक प्रयास

आजा  दाती राह फूल।
चरणों  तेरी  न हो धूल।
राजे कर में जो त्रिशूल।
आती  है नव रात मूल।

लाली चुनरी आभ रूप।
है  लगती  मैया  अनूप।
मेरी  माता  है   स्वरूप।
बिखरी  देखो  नई  धूप।

आयी  पावन  चैत रात।
होगी  माता  मुलाकात।
दर्शन  तेरी  बड़ी  बात।
बैरी  की  हो खरी मात।

टेकूँ  नित  मैं  तुझे माथ।
बनकर  दास रहूँ सनाथ।
मिलता है आशीष साथ।
पूजा करते  सिया  नाथ।

कृति
तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
डौंंडी लोहारा बालोद छ.ग.

मंगलवार, 10 मार्च 2020

एसो होरी तिहार मा

होरी तिहार मा...

एसो के होरी तिहार मा
नंगतेहे उधम मचाबो
डोकरा बबा डोकरी दाई
सबला गुलाल लगाबो।।

नई छोड़न भइय्या भउजाई
बड़का बबा अउ बड़की दाई
कका काकी दाई ददा संन
सुघर फगुवा गाबो।
एसो होरी तिहार मा
नंगतेहे उधम मचाबो।

माते सरसो के फुलवारी 
सियान मितान संग संगवारी
धरे गुलाल अबीर हाथ मा
पिचका अजब चलाबो।
एसो होरी तिहार मा
नंगतेहे उधम मचाबो।

रंग पानी के होरी तिहार
बिन पानी हे सब बेकार
जल जीवन हे ए अनमोल
पानी हमन बचाबो।
एसो होरी तिहार मा
नंगतेहे उधम मचाबो।

तोषण धनगंइहा

होरी हे

रंगों का महापर्व होली की
हार्दिक बधाई व शुभाशया
होली विशेष
हाइकु पंच समीक्षार्थ

होलिका दाह~
श्रीफल चढ़ातें है
गाँव के लोग।1।

होली परब~
रंगों से है खेलती
नन्हीं बालाएँ।2।

नील बरन~
धरती को रँगती
फागून रंग।3।

होली की धूम~
नगाड़ा थाप पर
नाचते बाल।4।

फागुवा राग~
बसंत में झूमती
आम्र मंजरी।5।

तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
डौंंडी लोहारा बालोद छ.ग.

प्रेम सद्भाव

*प्रेम सदभाव लिये,*
              *एकता संदेश दिये,*
*होली का त्योहार हमें,*
              *यही सिखलाती है।*
*रंग सराबोर करे,*
              *सुमता के राह गढ़े,*
*सतरंगी रंग सदा,*
              *पाठ ये पढ़ाती है।*
*आओ मिल हम साथी,*
              *मिलके मनाये होली,*
*बसंत बयार लिये,*
              *कोयलिया गाती है।*
*रंगीला परब भावे,*
              *मन मेरा नाचे गावे,*
*फाग की नगाड़ा अब,*
              *राग जो सुनाती है।।*

*तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा*
*डौंंडी लोहारा बालोद छ.ग.*

होरी हे

छत्तीसगढ़ी कुण्डलियाँ

आनी बानी रंग हे,
           घोर-घोर के घोर।
बइरी मन हर देख के,
           नाचे मुड़ चिभोर।
नाचे मुड़ चिभोर,
           थाप सुनके नंगारा।
दुरिहा इरषा होय,
            रहे गा भाईचारा।
रंगव सातो रंग,
            बचाके संगी पानी।
भजिया गुजिया संग,
            चुरे खइ आनी बानी।

तोषण धनगंइहा

राम नाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...