मन में हो विश्वास अगर।
मुश्किल नहीं कोई डगर।
चल चला चल आगे चल,
खड़ा लक्ष्य तेरे पथ पर।।
बुधवार, 6 सितंबर 2017
शुक्रवार, 23 जून 2017
रविवार, 18 जून 2017
आरजू
थी इक जो आऱजू मेरी अधूरी रह गयी.
आँधियों में बेवफाई की पूरी बह गयी.
चाहत थी उसे हमनवाँ बनाने की *तोषण,*
वफा से बना इश़्क-ए-मकाँ जैसे ढह गयी
शुक्रवार, 9 जून 2017
नई जिंदगी
*चलो फिर आज से एक नई जिंदगी जीते हैं।*
*गिले शिकवे नसीब के चलो मिलके सीते हैं।*
*मिलेंगे राहों पे फिर से वही कालकूट"तोषण",*
*लेकर उस रब का नाम घोर हलाहल पीते हैं।*
*तोषण कुमार चुरेन्द्र*
बुधवार, 31 मई 2017
बेवफाई
विरह की आग बड़ी होती दुखदाई है.
हजारों की भीड़ हो लगती तनहाई है.
कहूँ भला क्या जमानें को तू ही बता,
मेरे कुदरत ने ही मुझसे की बेवफाई है.
तोषण कुमार चुरेन्द्र
रविवार, 21 मई 2017
ससुर
धनी मनी मोर कका ससुर
कार्तिक राम हे सही ससुर
अपन बेटी मोला बिहा के
होगे जनम भर वो बेकसुर
तोषण कुमार चुरेन्द्र
तलब
इल्तिजा थी मेरे रब से
इंतजार है मुझे तब से
ख़्वाइश थी इंसान की
चला बसा मैं तलब से
तोषण कुमार चुरेन्द्र
चाटुकार
साधे बर अपन काम लबर लबर गोठियात देखेहंव
जगा खुद बनाय बर पाछू पाछू पूछी हलात देखेहंव
कथे सियान सिरतो जी ऊपर राम तरी कसई कस
पाके मउका पीठ पाछू कटारी जोर घुंसात देखेहंव
तोषण कुमार चुरेन्द्र ९६१७५८९६६७
भारतीय
अहं है मुझे भारतीय होने का
भारत के लिये तन खोने का
तुम क्या जानो जीना क्या है
मर कर धरती पर सोने का
तोषण कुमार चुरेन्द्र
शनिवार, 20 मई 2017
लगा
खुद पर खुद का,नहीं पहरा सा लगा
अब यादों का, जख़म गहरा सा लगा
कैसे? तुम्हे भुलाऊं ओ रांझणा
मंजरे गम की , यहीं ठहरा सा लगा
तोषण कुमार चुरेन्द्र
शुक्रवार, 19 मई 2017
बोर..
सब रहते हैं मदमस्त अपने में
किसी की यहाँ कोई शोर नहीं
जा रहा हूँ...सब छोड़ के यारों
हो न जाऊँ भीड़ मे बोर कहीं
तोषण कुमार चुरेन्द्र
नवा जमाना
*नवा जमाना*
कुकरा के जगा आज देखले
चरबज्जी अलारम बाजथे
सील बाहरी अब घलो नंदागे
प्लास्टिक बाहरीम बुहारथे
पींवरी सुही मा घर चमके जी
आगे चिक्कन पंढ़री चुना देख
भाजी पहिली डबका खावन
जेला तेल संन भुंजथे बघारथे
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धरम करम
करम करत उमर पहागे करिया चुँदी होगे सफेद
धरम करत जीवन बीते बदरा गोठ ओती खेद
देखाय खाय के दांत ल एक्के बरोबर तै जतन
पुन के गघरी तभे भरही जब पेंदी नंइ रही छेद
मया
तोर मोर बंधना मया के छुटे ना संसार म
झन होय कभू कमी जोही तोर मोर प्यार म
हवय गजब अगोरा मोर हिरदे के भीतरी
बइठे गुनंव तोला नदिया नरवा कछार म
// *तोषण कुमार चुरेन्द्र* //९६१७५८९६६७//
गुरुवार, 18 मई 2017
राजा
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हूँ राजा मैं इस जंगल का कोई मुझे ना छेड़ना
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देता नहीं दिखाई कुछ भी आँखे नहीं तरेरना...
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आ जाते औकात पे जब अपनी भी नहीं सुनते..
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कच्चे नहीं खिलाड़ी हम सोच समझ के खेलना...
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तोषण कुमार चुरेन्द्र
कविता
कलम के सियाही कभू सिराय नहीं...
हमर मनवा के कविता नंदाय नहीं...
खुसी खुसी शुभकामना भेजत हवन
कतको बांधव मैंहा पार बंधाय नहीं
तोषण कुमार चुरेन्द्र
माँ
देखता जब तस्वीर आपकी
आँसू...आँख से आ जाती है
हाथ..थाम संग चलना सीखा
ओ *माँ*...बहुत याद आती है
___🖋तोषण कुमार चुरेन्द्र
सोमवार, 8 मई 2017
मानवता
मानवता के मन मन्दिर में
ज्योति जला दिव्य ग्यान की
आन पड़ी है आज जरूरत
मानवता की पहचान की
आडम्बर के पहने चोले सब
भ्रमण कर रहें हैं लोग यहाँ
गुंजन होनी चाहिए भूमि पर
श्री कृष्ण के गीता बखान की
तोषण कुमार चुरेन्द्र
राम नाम
राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...
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"पाँच बातें " पाठ - 14 "पाँच बातें " कक्षा - 4 1- हर एक काम इमानदारी से करो ! 2- जो भी तुम्हारा भला करे, उसका कह...
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हरा भरा खलिहान,संस्कृति की पहचान, परब हरियाली का,बड़ा ही निराला है!! महीना है सावन का,जय हो भोलेनाथ की, छोड़छाड़ अमृत को,पिए विष हाला है!...
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लोहारा के तीर मा,सुग्घर साँई ठाँव. किरपा करथे हाथ ले,लेवव जुरमिल नाँव. पानी ले दीया जरे,महिमा अपरम्पार. जय हो साँई नाथ के,करल...