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गुरुवार, 7 सितंबर 2017

लोटा

पीतल-काँसा छोड़ के,
                        ताँबा लोटा भाय।
अमरित कस पानी लगय,
                  तन-मन सब हरियाय।।

बिना धुरी लोटा असन,
                     झन बनिहव इंसान।
येती-ओती झन घुमर,
                  नइ मिलही  पहिचान।।

मत बन रहव गिलास सब,
                        लोटा बने रहाव।
प्यास बुझावव चार के,
                 जिनगी सुफल बनाव।।

बुधवार, 6 सितंबर 2017

लोटा


लोटा भर पानी धरव,चलव शिवा के धाम।

माथ नवावव आज सब,लेवव शंभू नाम।।


 लोटा मा पानी धरव,सगा कभू घर आय।

कुरसी मा बइठारके,पूछव पानी चाय।।


चोर मोर लोटा धरय,भागय पल्ला छोड़।

आ जावय जब हाथ मा,देहँव मुड़ ला फोड़।।

गुरुवार, 31 अगस्त 2017

अंताक्षरी

मन के करबे काम तै,होही पश्चाताप।
सोचव समझव जी बने,सबले पहिली आप।

दोहा दोहा सब कहय, दोहा लिखय न कोय।
दोहा बर दोहा लिखय,सब झन छंदी होय।।

घूमत घामत आज मँय ,जाहूँ बेटी गाँव।
गाँव बीच पिपरी जगे,बड़ दुरिहा ले छाँव।।

गुरतुर तोर जुबान हे , मनमोहागे मोर।
बही अपन बस ते करे, मन हा होगे तोर।

लाल-लाल के फूल हे,लाली पटा तुँहार।
लाली ककनी अउ चुरी,गजमोती सिंगार।।

करबो खेती जोर के,सबला लेके संग।
हरिहर होही भुंइया,लाही नवा तरंग।।

लाल लहू ला देख के, भारत माता रोय।
झगरा लड़ई छोड़ के,एक रहव सब कोय।।

ढेर करे हन आज हम,घर घर कचरा देख।
साफ करन घर बार ला,भारत स्वच्छ सरेख।।

आके डेहरी तोर मँय,पारत हँव गोहार।
बिनती हे गणराज जी,सुनले बोल हमार।।

काम करव बड़ नेक के,मिलही जग में मान।
चलही सबके नाँव जी,जइसे भगत महान।।

अपन अपन में सब मगन,भला करय अब कोन।
सच्चा मनखे हे विही,भला करय सिरतोन।।

नाम राम के सार हे,जपलव सब हरिनाम।
बिना भजन के भाग में,आवय कभू न राम।।

हार जीत के बात में,होवय रेलम पेल।
आनी बानी खेल हे,जुरमिल खेलव खेल।।

काम काज संवार ले,होवत बिहना बेर।
चल चल संगी खेत में,होवय झन गा देर।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र

मंगलवार, 22 अगस्त 2017

देश प्रेम

१.
जी लव संगी देश बर,जब तक तन में जान।
सदा रही हमरो अमर,भारत माँ के आन।

२.
इही देश के आन बर,होइन सब कुर्बान।
आजादी के गोठ हे,जानव संत सुजान।।

३.
राज भगत सुखदेव के,देखव गजब मिसाल।
लाल बाल अउ पाल के,करनी घलक कमाल।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र

दही लूट

१.
दही लूट बर हे मचे,अड़बड़ धूम धड़ाम।
ग्वाल बाल सब संग में,आगू हे घनश्याम।।

२.
दही लूट के बात सुन,मुँह में पानी आय।
चलव-चलव हम आज सब,चलन दही चोराय।।

३.
चोरावय मक्खन दही,वासु देवकी लाल।
गोप ग्वाल के संग में,लीला करय कमाल।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र

देश प्रेम

१.
जीलव संगी देश बर,जब तक तन में जान।
सदा रही हमरो अमर,भारत माँ के आन।

२.
इही देश के आन बर,होइन सब कुर्बान।
आजादी के गोठ हे,जानव संत सुजान।।

३.
राज भगत सुखदेव के,देखव गजब मिसाल।
लाल बाल अउ पाल के,करनी घलक कमाल।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र

बुधवार, 12 जुलाई 2017

सावन

*सुधार*

मन मँजूर बन नाचथे,सावन बरसय जोर।
पिया मिलन के आस में,तरसय मन बड़ मोर।।१।।

टिपिर-टिपिर पानी गिरय,सुग्घर सावन मास।
सँइया बिन सुन्ना लगय,मनवा रहय उदास।।२।।

करिया बादर देख के,पवन करत हे शोर।
आही सावन बन पिया, आरो लेवत तोर।।३।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र

रविवार, 9 जुलाई 2017

पुन्नी

पुन्नी मास अषाढ़ के,पुन्नी व्यास कहाय।
गढ़य वेद संसार बर,सबके मनला भाय।।१।।

हूम धूप  करलव हवन,दीया करलव दान।
कातिक पुन्नी खास हे,करलव गंगा स्नान।।२।।

पुन्नी  सावन  मास  के,करलव  वैदिक साज।
उपा करम कर वेद के,बनथय बिगड़त काज।।३।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र

गुरुवार, 6 जुलाई 2017

बजार

आवव  हमरो  गाँव मा, बजार हे बुधवार।
आके जिहाँ बेचात हे,आनी बानी तरकार।।१।।

आके तँयहर छाँट ले,बढ़िहा गोभी फूल।
मुनगा  भांँटा  खेखसा,बरबट्टी झन भूल।।२।।

लइका मनबर ले चना,मिरचा भजिया तात।
खाँही  बढ़िहा चाव ले,एक - दुसर बिजरात।।३।।

टिकली  फुंँदरी  पावडर, लेलव  रुपिया हार।
देखव जोड़ी के मया, किसम-किसम सिंगार।।४।।

देखव  आज पताल  के, मुड़ी  चढ़त हे दाम।
किलो एक चालीस के,ले बिन चलय न काम।।५।।

करके आखिर हाट तँय,खाले बीरो पान।
हवय  बजरहा के इही,एके ठन पहिचान।।६।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र

रविवार, 2 जुलाई 2017

तोषण के दोहा

पढ़े  लिखे  आवय नहीं,थोरिक नइहे ग्यान।
का तोला समझाँव मँय,लइका हवँव नदान।।१।।

जिनगी  मोर  उदास  हे, काला मँयह बताँव।
मनवा कहीं सुझय नही,कोन डगर मँय जाँव।।२।।

पइसा कउड़ी हे नहीं, रुके रुके हे साँस।
बहिनी के शादी बचे,पड़गे टोटा फाँस।।३।।

पानी झन बिरथा करव,पानी अमरित जान।
पानी ले जिनगी बचय,बोलय सन्त सुजान।।४।।

मुखिया बढ़िहा हे जिहाँ, राखय सबके ध्यान।
मान करय सब छोट के,पावय सबके मान।।५।।

मानँव बात सियान के,करथे सबला पोठ।
राखय सबला संघेर के,कंचन जस हे गोठ।।६।।

माटी के  काया  बने,पानी  मिल घुर जाय।
सुमरन कर हरिनाम के,जाबे नाम कमाय।।७।।

बड़  भागी  मानुस जनम, जपले तँय हरिनाम।
मोर-मोर तँय झन समझ,आवय नइ कछु काम।।८।।

सजे  राम  दरबार हे, सिया  राम  हनुमान।
लखन चँवर डोलात हे,लगे सरग सम जान।।९।।

माया  हे  ठगनी बड़े, सबला नाच नचाय।
का छोटे अउ का बड़े,कोनों बाँच न पाय।।१०।।

गुरुजी घसियादास के,चेला हम सब आँन।
जेकर चरनन तीर मा, पावँन सबहा ग्यान।।११।।

फूलबगिया के फूल कस,सबला रखे सकेल।
गुरुजी अइसन ताय जी,हमरो विजय पटेल।।१२।।

बाबा तुलसी दास के,कहनी सबला भाय।
रामचरित मानस लिखे,भव ले पार लगाय।।१३।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र

मोर परिचय

*परिचय*
लोहारा के तीर मा,बसे हवय धनगाँव।
बोहावत हे खरखरा, बर पीपर के छाँव।।१।।

बेटा जोहर लाल के,तोषण हावय नाँव।
जुरमिल सब आशीष दव,परथँव सबके पाँव।।२।।

तोषण मँय तो लेड़गा,हावँव बड़ मतिमंद।
किरपा बरसय राम के,सुग्घर गढ़िहँव छंद।।३।।

शाला जाथँव रोज मँय,करँव ग्यान के दान।
का छोटे अउ का बड़े,पाथँव सबके मान।।४।।

भाई बहिनी चार हम,सबले बड़का आँव।
नइहे दाई संग में,जोहर ददा मनाँव।।५।।

चितरेखा हे संगिनी,बेटा मोर डुमेश।
हँसी खुशी दिन हा चले,नइहे कोनों क्लेश।।६।।

भूल चूक ला दव क्षमा,माँगत हँव कर जोर।
हावँव गा मतिमंद मँय,धीरज नइहे थोर।।७।।

"तोषण कुमार चुरेन्द्र "

शनिवार, 1 जुलाई 2017

बरसात

बरसत पानी देखके, भुँइया खुशी मनाय।
सुवा परेवा कोयली,सुग्घर गीत सुनाय।।

आगे दिन बरसात के,होगे मगन किसान।
नाँगर बइला फाँदके, बोही  अब गा धान।।
👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻

रविवार, 25 जून 2017

बरसात

झिमिर-झिमिर पानी गिरय,मोर गाँव के खार।
तरिया-नरवा बड़ भरय,बुड़य खेत अउ पार।।

शनिवार, 24 जून 2017

साधना

करलव जुरमिल साधना,धरव छन्द के ध्यान।
बनके साधक छन्द के, बगरावव  सब ग्यान।।

छंद साधना साधलव,बनके साधक आज।

गढ़लव सुग्घर छंद ला,आखर खोलय राज।

गुरुवार, 22 जून 2017

साधना

खवइ  पियइ  रखलव बने,झन नेवतिहव रोग।
जिनगी बड़ अनमोल हे,करलव सब झन योग।।

बनके साधक साधलव,रचलव गा सब छन्द ।
सरस्वती के साधना,मिलय जुलय हर बन्द।।

मंगलवार, 20 जून 2017

बेत

बेत रूख  बँसरी  बने, मधुर  सुनावय  तान।
छोड़ अपन पहिचान ला,जग मा पावय मान।।


बँसरी के धुन नाच तँय,राधा बनके आज।

बन बनवारी तोर बर,साजँव सोला साज।।

सोमवार, 19 जून 2017

पथरा

आके तँय संसार मा,सबला अपने जान।
पथरा बनके झन रहव,गुरतुर रखव जुबान।।

पथरा हा नारी बने ,लगे राम के पाँव।
कहिथे गुहा निषाद हा,गंगा नइ नहकाँव।।

खड़री  माटी  के  बने, हाँड़ा  पथरा  जान।
पाँच तत्व के तन मनखे,झनकर गरब गुमान।।

शनिवार, 17 जून 2017

पथरा


१.
पथरा पथरा जोड़ के,बढ़िहा घर सिरजाय।
बिना प्रेम सद्भाव के,घर शमसान कहाय।।
२.
आरुग  पथरा  तँय  रहय,सहय हथौड़ी मार।
बनगे जब भगवान तँय,बिनय करय संसार।।

शुक्रवार, 16 जून 2017

पकवान

*अरसा रोटी पाग बर,रतिहा चाँउर धोय।*
*मीठा दे गुड़ पाग के,भजिया जइसे होय।।*

*दाई चीला राँध दे,अड़बड़ मन ललचाय।*
*मिरचा चटनी संग मा, मोला गजब सुहाय।।*

गुरुवार, 15 जून 2017

अरसा

*अरसा रोटी पाग बर,रतिहा चउँर भिगोय।*
*मीठा दे गुड़ पाग के,भजिया जइसे होय।।*

राम नाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...