सोमवार, 2 अप्रैल 2018

उड़ती फिरूँ

समीक्षार्थ

ताँका

उड़ती  फिरूँ
  उन्मुक्त  गगन  में
    बनके  पंछी
      चले  मन  पुरवाई
        करता  अगुवाई..

तोषण कुमार चुरेन्द्र

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