गरमी के दिन रहय
संगवारी घर मंझनिया बइठे बर गेंव
संगवारी ह अपन टुरा रामु ल कथे जा बेटा
*कोको* लाबे
मेह अलकरहाच खुस होगेंव आज संगवारी घर *कोको* खाय बर मिलही
रामु *कोको* धरके अइस
मेह सन्न खाके पटवा म गिर गेंव
मेह समझत रेहेंव दुसरा *कोको*
ले अइस दुसरा *कोको*
का समझे........
*कोको* मतलब
*कोका*
*कोला*
🤣🤣🤣🤣🤣😜🤓😅😆😁
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