रविवार, 21 मई 2017

हंसऊला

गरमी के दिन रहय
संगवारी घर मंझनिया बइठे बर गेंव

संगवारी ह अपन टुरा रामु ल कथे जा बेटा
*कोको* लाबे

मेह अलकरहाच खुस होगेंव आज संगवारी घर *कोको* खाय बर मिलही

रामु *कोको* धरके अइस

मेह सन्न खाके पटवा म गिर गेंव

मेह समझत रेहेंव दुसरा *कोको*
ले अइस दुसरा *कोको*



का समझे........ 


*कोको* मतलब

*कोका*
*कोला*
🤣🤣🤣🤣🤣😜🤓😅😆😁

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