रविवार, 18 दिसंबर 2016

मन का बिचार

एक सिपाही सीमा मे डटे हे ।अइसन देवारी तिहार म । त मन म का बिचारत हे। का काहत हे
आवव देखन ।कविता के चार लाइन हमर देस के जवान मन बर सादर समर्पित.......
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स्वदेश सेवा म लगे मोर तन कइसे गांव आवव
मोर जोही दिल के रानी कइसे देवारी मनावंव
दाई ददा ल समझादेबे आस के दीया जलालेबे
आज नही ते काली बैरी लहुट आहूं अपन मैं ठांव
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आथे सुरता घर-परवार के ओ गली-खोर अंगना
ओ गांव के सुखा मैदान खेलन जिंहा संगी संगना
मोला सताथे मुसकावत चेहरा आघू-आघू झूलय
पैरी के छून-छून रानी हांथ ल भावय तोर कंगना
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भेजदेबे देवारी खीचरी दीया फरा नवा पिसान के
तोर मया के चिनहारी मोर बिरह पीरा ल सान के
मोर गांव शोर संदेश बतादे बबा के गोठ सुनादे
गाय बछरू के हाल सुनादे कइसे हाल गौठान के
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रद्दा मोर देखत रहिबे आंखी ले रातदिन निहारत
आ जहूं मैं झटकू रानी कोयली कस कुकुही पारत
झन करबे तै शोक शोगारत अइसन खुसी के बेरा
कहे जवान 'तोषण' परब देवारी मनाले दीया बारत
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जम्मो मोर देश के जवान मन शत् शत् नमन करत देवारी तिहार के खाला खूझर बधाई
©®
आचार्य तोषण
धनगांव डौंडीलोहारा बालोद छत्तीसगढ़

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