चंडिका में लघु प्रयत्न
मात्रा भार १३-१३
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भारत मेरा देश है,
अलग यहाँ का वेश है।
ऋषि मुनियों की ये धरा,
ध्यान प्राण अब ला जरा ।१।
जन्म जहाँ है राम का ,
नटवर नागर धाम का ।
रावण को संघारता,
कंस अधम है हारता ।२।
आया था जब गजनवी,
महापात वो दानवी।
हार मान वो है गया,
मिली यहाँ भरके दया।३।
विलायती की मार से,
जगे हिंद अब ताड़ के।
दुश्मन के छक्के छुटे,
इधर उधर हैं सिर फुटे।४।
दुविधा से है जुझ रहा,
जाने कितना घुँट रहा,
रोती ये नर नारियाँ,
बड़ी अजीब बिमारियाँ।५।
विपदा ये विकराल है,
कालों के भी काल है।
कोरोना जो नाम है,
पता नहीं अंजाम है।६।
कोरोना को अब मात दें,
भारत का सब साथ दें।
घर में ही जनता रहे,
यूँ ही बस कुछ दिन सहे।७।
बादल ये छट जाएगा,
अच्छा दिन अब आएगा।
सबका जो सहयोग हो,
यही महा संयोग हो।८।
मिलकर ये सब जानले,
जा कोरोना ठान ले।
लौट नही वो आएगा,
मुकी लात अब खाएगा।९।
मिलकर जो सब साथ हो,
जोश-जोश की बात हो।
कोरोना पछताएगा,
छोड देश अब जाएगा।१०।
कोयल काली जब कुँजे,
भारत माता जय गुँजे।
तोषण मत यूँ हार ना,
कोरोना को मारना।११।
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तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
डौंंडी लोहारा बालोद छ.ग.
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