चंडिका छंद
१३/१३
१३/१३
मिरचा भजिया राँधके,
चटनी तगड़ा भाँजके।
खाले जी अरुणाभ तँय,
भेजत हँव गा पोठ मँय।
नरवा तीर कछार मा,
आबे सोज करार मा।
ठाड़े रहिहँव खेत मा,
देखत रहिहँव नेट मा।।
उल्लाला छंद
८'५/८'५
८'५/८'५
वंदना है प्रभु राम को,
दर्शन की है कामना।
मिल जाए आशीष जो,
चाहूँ कोई धाम ना।।
आए हैं दरबार में,
भर दो झोली आज ये।
तरसे है दीदार को,
मेरे तख्तो ताज ये।।
रखवाला है साथ जो,
गम है किस बात का।
दिल को है विश्वास तो,
डर क्यों काली रात का।।
दिनकर का दिन ढले,
छाई रजनी चाँदनी।
वंदना होती साँझ में,
मचले है गजगामिनी।
-@तोषण दिनकर
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें