शनिवार, 2 मई 2020

वंदना प्रभु राम को

चंडिका छंद
१३/१३
१३/१३

मिरचा भजिया राँधके,
चटनी तगड़ा भाँजके।
खाले जी अरुणाभ तँय,
भेजत हँव गा पोठ मँय।

नरवा तीर कछार मा,
आबे सोज करार मा।
ठाड़े रहिहँव खेत मा,
देखत रहिहँव नेट मा।।

उल्लाला छंद

८'५/८'५
८'५/८'५

वंदना है प्रभु राम को,
दर्शन की है कामना।
मिल जाए आशीष जो,
चाहूँ कोई धाम ना।।

आए हैं दरबार में,
भर दो झोली आज ये।
तरसे है दीदार को,
मेरे तख्तो ताज ये।।

रखवाला है साथ जो,
गम है किस बात का।
दिल को है विश्वास तो,
डर क्यों काली रात का।।

दिनकर का दिन ढले,
छाई रजनी चाँदनी।
वंदना होती साँझ में,
मचले  है गजगामिनी।

-@तोषण दिनकर

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

राम नाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...