रविवार, 7 जुलाई 2019

रूख़सत

रूख़सत पे दोनों की अपनी देखो जमाना खड़ा था।
डोली दर पे उसकी खड़ी थी मेरा ज़नाजा पड़ा था।

वो  गैरों की  बाँह में  हम कब्रगाह में  जानें लगे हैं।
देखो  कैसे कैसे  फर्ज़ अपने  हम..  निभाने लगे हैं।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
9617589667

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

राम नाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...