रूख़सत पे दोनों की अपनी देखो जमाना खड़ा था।
डोली दर पे उसकी खड़ी थी मेरा ज़नाजा पड़ा था।
वो गैरों की बाँह में हम कब्रगाह में जानें लगे हैं।
देखो कैसे कैसे फर्ज़ अपने हम.. निभाने लगे हैं।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
9617589667
राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...
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