जब जब तोर मया के सुरता
आथे गोरी मोला सावन मा
आँखी ले झर झर आँसू झरथे
मोर हिरदे के आँगन मा....
बइहा बनके किंजरत रहिथों
बइरी डोंगरी पहाड़ मा
सुध बुध मोर कही राहय नहीं
सजनी रे तोर प्यार मा
कोन जनी रा रोग हमाँगे
हरिहर हरिहर यौवन मा
आँखी ले झर झर............१
संगी जहुरिया मारे ताना
रोयली करे ठिठोली
झन तरसाना उढ़ाके आजा
सुन लेतेंव तोर बोली
तन हा भुंजाके राखर होगे
तोर मया के दावन मा
आँखी ले झर झर.......... २
मोर मया ल समझस नहीं
मोला गजब सताथस तँय
मुच मुच मुच मुच हाँसके मोला
सापू रतिहा रोवाथस तँय
तोषण ल बिसार के पगली
मन लगाए खिलावन मा
आँखी ले झर झर.........३
तोषण कुमार चुरेन्द्र
९६१७५८९६६७
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