पगला बइहा बना डरे तै
मया के मोहनी खवाके
तोरेच सुरता आवत रहिथे
सुख चैन ल बिसराके
सुहावय न कोनों संगी साथी
खाय पीये ल भावय नहीं
रतिहा मोला जगाथस पगली
रही रही सपना म तै आके
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