सोमवार, 15 जनवरी 2018

पगला बइहा

पगला बइहा बना डरे तै
मया के मोहनी खवाके
तोरेच सुरता आवत रहिथे
सुख चैन ल बिसराके
सुहावय न कोनों संगी साथी
खाय पीये ल भावय नहीं
रतिहा मोला जगाथस पगली
रही रही सपना म तै आके

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

राम नाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...