ताँका
ज्ञान प्रदाता
संवारता जीवन
राष्ट्र निर्माता
जगमगाता जग
सुदृढ़ पग - पग
🚶🚶🚶🚶
ताँका
मेरा जीवन
उलझाता समय
है आजीवन
मंगल की तलाश
है जगत उदास
हाइकु
बरसे आग
क्रोधित दिनकर
अजब राग
बहे सरिता
करने उपकार
धरा पुनिता....
सींचती धरा
आलोकित चमन
हो हरा भरा...
हो अग्रसर
चरैवेति कामना
झरना झर...
मिटाती प्यास
अंतरात्मा संतुष्ट
सबकी आस...
भूमि पावन
जन गण हर्षित
मनभावन
जगमगाया
दीप राजिम कुंभ
मन लुभाया...
श्रद्धालु झुमे
पुलकित हृदय
करते जय...
तोषण कुमार चुरेन्द्र
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