शनिवार, 7 जुलाई 2018

कहती मेरी कविता

बहती धरणी के वक्षस्थल से,गंगनीर की सरिता है.
ध्यान लगाकर सुन लो,कहती मेरी कविता है.

उत्तर में है कश्मीर की घाटी,भारत का है जो ताज रहा.
अरियों की गुस्ताखी देखो,आँख है खोले ताक रहा.
पाक होकर इस जहान में,सदा रही पतिता है.
ध्यान लगाकर सुन लो........

मिट गये कितनों मिटाने वाले,भारत माँ की शान को.
लाल बाल सुखदेव राजगुरू,मिल जो बचाये आन को.

आ जाते हैं जो काम देश के,मर कर भी वह जीता है.

ध्यान लगाकर सुन लो........

सब दिल में हो भाईचारा,चमन चमन में शांति हो.
बनेगा भारत विश्व गुरू जब,कहीं न कोई क्रांति हो.
हर घर लगे मंदिर मस्जिद़,रहे कुरान और गीता है.
ध्यान गाकर सुन लो........

मिली जिंदगी है हमको साथी,प्रेम सुमन को बाँटो तुम.
दिल के तार मिले हर दिल तक,बंधन को न काटो तुम.

जग में पसरे सारे हलाहल,शंकर सम तोषण पीता है.

ध्यान लगाकर सुन लो........

©®
तोषण कुमार चुरेन्द्र
८/७/१८/८/३०

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